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Gambhir Defends Arshdeep After T20 Final Incident

T20 वर्ल्ड कप फाइनल विवाद: अर्शदीप के थ्रो पर बोले गौतम गंभीर-‘देश के लिए खेलते समय आक्रामकता स्वाभाविक’

surbhi मार्च 11, 2026 0
Gambhir Defends Arshdeep Throw in T20 World Cup Final Row
Gambhir Defends Arshdeep Throw in T20 World Cup Final Row

 

ICC Men's T20 World Cup 2026 के फाइनल में भारत की जीत के बीच घटी एक घटना पर अब भारतीय टीम के हेड कोच Gautam Gambhir का बड़ा बयान सामने आया है। तेज गेंदबाज Arshdeep Singh द्वारा न्यूजीलैंड के बल्लेबाज Daryl Mitchell की ओर गेंद फेंकने की घटना को लेकर उन्होंने कहा कि देश के लिए खेलते समय खिलाड़ियों में आक्रामकता दिखना स्वाभाविक है।

 

फाइनल में हुआ था विवाद

फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम एकतरफा जीत की ओर बढ़ रही थी, तभी न्यूजीलैंड की पारी के दौरान एक विवाद खड़ा हो गया। 11वें ओवर में अर्शदीप की गेंद पर डेरिल मिचेल ने सामने की ओर शॉट खेला, जो एक टप्पा खाकर सीधे गेंदबाज के हाथ में आ गया। इसके बाद अर्शदीप ने गेंद मिचेल की दिशा में जोर से फेंक दी, जो सीधे उनके हाथ में लगी।

इस घटना के बाद दोनों खिलाड़ियों के बीच कुछ देर कहासुनी भी हुई। मामला बढ़ता देख भारतीय कप्तान Suryakumar Yadav और अंपायरों को बीच-बचाव करना पड़ा। बाद में अर्शदीप और कप्तान ने मिचेल से माफी भी मांगी।

 

गंभीर का बयान

इस पूरे विवाद पर बोलते हुए Gautam Gambhir ने कहा कि खिलाड़ियों का आक्रामक होना गलत नहीं है। उन्होंने कहा,
“जब आप अपने देश का प्रतिनिधित्व कर रहे होते हैं तो आक्रामकता दिखाना स्वाभाविक है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। कोई भी गेंदबाज लगातार छक्के खाना पसंद नहीं करता और मैं अपने खिलाड़ियों से इसी तरह की प्रतिक्रिया की उम्मीद करता हूं।”

उन्होंने यह भी कहा कि यदि अर्शदीप माफी नहीं भी मांगते तो उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं होती, हालांकि उन्होंने यह भी माना कि माफी मांगना अच्छी बात है।

 

ICC ने लगाया जुर्माना

इस घटना के बाद International Cricket Council (ICC) ने अर्शदीप सिंह पर आचार संहिता का उल्लंघन करने के लिए मैच फीस का 15 प्रतिशत जुर्माना लगाया। साथ ही उनके अनुशासनात्मक रिकॉर्ड में एक डिमेरिट प्वाइंट भी जोड़ा गया है।

अर्शदीप को ICC के आचार संहिता के अनुच्छेद 2.9 का दोषी पाया गया, जो अंतरराष्ट्रीय मैच के दौरान किसी खिलाड़ी की ओर खतरनाक या अनुचित तरीके से गेंद या अन्य क्रिकेट उपकरण फेंकने से संबंधित है।

अर्शदीप सिंह ने अपनी गलती स्वीकार कर ली थी, जिसके कारण मामले की औपचारिक सुनवाई की जरूरत नहीं पड़ी। मैदान पर मौजूद अंपायर Richard Illingworth और Alex Wharf सहित मैच अधिकारियों ने इस घटना को लेकर रिपोर्ट दर्ज की थी।

ICC के नियमों के अनुसार लेवल-1 के उल्लंघन पर खिलाड़ी को आधिकारिक चेतावनी से लेकर मैच फीस का 50 प्रतिशत तक जुर्माना और एक या दो डिमेरिट प्वाइंट दिए जा सकते हैं।

 

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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फीफा वर्ल्ड कप: बेल्जियम ने अमेरिका को 4-1 से हराकर क्वार्टर फाइनल में बनाई जगह

सिएटल, एजेंसियां। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के राउंड ऑफ-16 में बेल्जियम ने मेजबान अमेरिका को 4-1 से हराकर शानदार अंदाज में क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया। इस हार के साथ अमेरिका का 2002 के बाद पहली बार वर्ल्ड कप के अंतिम आठ में पहुंचने का सपना टूट गया। साथ ही कनाडा और मेक्सिको के बाद अमेरिका भी टूर्नामेंट से बाहर होने वाला आखिरी सह-मेजबान देश बन गया।   डी केटेलेरे ने चमकाया बेल्जियम का खेल बेल्जियम की जीत के नायक चार्ल्स डी केटेलेरे रहे, जिन्होंने दो गोल दागे। इसके अलावा हंस वनाकेन और स्थानापन्न खिलाड़ी रोमेलु लुकाकू ने एक-एक गोल कर टीम की जीत सुनिश्चित की। बेल्जियम ने पूरे मैच में आक्रामक खेल दिखाते हुए अमेरिका को वापसी का कोई मौका नहीं दिया।   शानदार फॉर्म में बेल्जियम बेल्जियम की टीम 20 मार्च 2025 के बाद से अजेय बनी हुई है। इस दौरान उसने फीफा विश्व कप, विश्व कप क्वालिफायर, यूईएफए नेशंस लीग प्ले-ऑफ और अंतरराष्ट्रीय मैत्री मैचों सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं में 12 जीत और छह ड्रॉ दर्ज किए हैं। इस अवधि में टीम का गोल अंतर भी +40 रहा है, जो उसकी बेहतरीन फॉर्म को दर्शाता है।   अब स्पेन से होगी भिड़ंत क्वार्टर फाइनल में बेल्जियम का मुकाबला स्पेन से होगा। स्पेन ने राउंड ऑफ-16 में पुर्तगाल को 1-0 से हराकर अंतिम आठ में जगह बनाई। दोनों टीमों के बीच यह मुकाबला 11 जुलाई को लॉस एंजिलिस में खेला जाएगा। मौजूदा फॉर्म को देखते हुए यह मैच टूर्नामेंट के सबसे रोमांचक मुकाबलों में से एक माना जा रहा है।   अमेरिका का सपना टूटा, रोनाल्डो का भी हुआ विदाई मैच अमेरिका की हार के साथ उसकी क्वार्टर फाइनल में पहुंचने की उम्मीदें खत्म हो गईं। वहीं, स्पेन से हार के बाद पुर्तगाल के दिग्गज खिलाड़ी क्रिस्टियानो रोनाल्डो का भी फीफा विश्व कप सफर समाप्त हो गया। अब सभी की निगाहें बेल्जियम और स्पेन के बीच होने वाले हाई-वोल्टेज क्वार्टर फाइनल मुकाबले पर टिकी हैं।

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नई दिल्ली,एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने जिम्बाब्वे दौरे के लिए तीन मैचों की टी20 सीरीज हेतु 15 सदस्यीय भारतीय टीम की घोषणा कर दी है। चयनकर्ताओं ने युवा बल्लेबाज़ वैभव सूर्यवंशी को टीम में बरकरार रखा है, जबकि विकेटकीपर बल्लेबाज़ संजू सैमसन को टीम से बाहर कर दिया गया है। वहीं, रिंकू सिंह की टीम में वापसी हुई है और प्रभसिमरन सिंह, अशोक शर्मा और यश ठाकुर को पहली बार राष्ट्रीय टीम में मौका मिला है।   श्रेयस अय्यर की कप्तानी में उतरेगी टीम इंडिया   इंग्लैंड दौरे के बाद अब जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 सीरीज में भी टीम इंडिया की कमान श्रेयस अय्यर के हाथों में रहेगी। चयनकर्ताओं ने एक बार फिर युवा खिलाड़ियों पर भरोसा जताते हुए वैभव सूर्यवंशी, प्रभसिमरन सिंह और रिंकू सिंह जैसे खिलाड़ियों को टीम में शामिल किया है।   23 जुलाई से शुरू होगी टी20 सीरीज   भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज 23 जुलाई से हरारे स्पोर्ट्स क्लब में शुरू होगी। तीनों मुकाबले हरारे में ही खेले जाएंगे। यह सीरीज आगामी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों की तैयारियों के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है।   युवा खिलाड़ियों पर रहेगी नजर   इस दौरे में वैभव सूर्यवंशी, प्रभसिमरन सिंह और अन्य युवा खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर विशेष नजर रहेगी। चयन समिति का मानना है कि यह सीरीज भविष्य की भारतीय टी20 टीम तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।   जिम्बाब्वे दौरे के लिए भारत की टी20 टीम   श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा (उपकप्तान), वैभव सूर्यवंशी, अभिषेक शर्मा, ईशान किशन (विकेटकीपर), प्रभसिमरन सिंह (विकेटकीपर), शिवम दुबे, सूर्यांश शेडगे, रिंकू सिंह, हर्ष दुबे, वरुण चक्रवर्ती, प्रिंस यादव, यश ठाकुर, अशोक शर्मा और मयंक यादव।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की मेजबानी में खेले जा रहे फीफा वर्ल्ड कप 2026 में जहां मैदान पर रोमांचक मुकाबले देखने को मिल रहे हैं, वहीं भीषण गर्मी भी खिलाड़ियों के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। कई मैचों के दौरान तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया, जबकि कुछ स्थानों पर यह 43 डिग्री सेल्सियस के पार भी दर्ज किया गया। ऐसे हालात में खिलाड़ियों को हीट स्ट्रेस और थकान से बचाने के लिए टीमों ने अत्याधुनिक 'क्लाइमाकूल सिस्टम' अपनाया है, जिसमें कूलिंग वेस्ट, इंसुलेटेड जैकेट और कूलिंग ओवरबूट जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।   मैदान पर गर्मी से बचाने में मददगार 'कूलिंग वेस्ट' रविवार को फिलाडेल्फिया के लिंकन फाइनेंशियल फील्ड में फ्रांस और पराग्वे के बीच खेले गए प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले के दौरान तापमान 43.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। ऐसे हालात को देखते हुए फीफा ने खिलाड़ियों के लिए हाइड्रेशन ब्रेक की व्यवस्था की है। वहीं कई टीमों ने मैच से पहले और हाफ टाइम के दौरान खिलाड़ियों को ठंडा रखने के लिए कूलिंग वेस्ट का इस्तेमाल किया।   इस वेस्ट के अंदर विशेष प्रकार का जेल भरा होता है, जिसे उपयोग से पहले फ्रीज किया जाता है। खिलाड़ी जब इसे पहनते हैं तो यह धीरे-धीरे शरीर की अतिरिक्त गर्मी को सोखता है और शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक शरीर के आंतरिक तापमान को लगभग 0.5 डिग्री सेल्सियस और त्वचा के तापमान को करीब 13 डिग्री सेल्सियस तक कम कर सकती है।   जर्सी और जूतों में भी हाई-टेक बदलाव सिर्फ कूलिंग वेस्ट ही नहीं, खिलाड़ियों की जर्सियों में भी माइक्रो-वेंटिलेशन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यह तकनीक पसीने को तेजी से बाहर निकालती है और शरीर में हवा का बेहतर प्रवाह बनाए रखती है, जिससे खिलाड़ी लंबे समय तक सहज महसूस करते हैं।   इसके अलावा खिलाड़ियों के जूतों पर विशेष कूलिंग ओवरबूट लगाए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य पैरों की गर्मी और सूजन को कम करना है। दावा किया जा रहा है कि इन ओवरबूट्स की मदद से केवल सात मिनट में पैरों का तापमान करीब दो डिग्री सेल्सियस तक घटाया जा सकता है, जिससे रिकवरी भी तेज होती है।   फॉर्मूला-1 से फुटबॉल तक पहुंची तकनीक दिलचस्प बात यह है कि कूलिंग वेस्ट और अन्य उपकरणों को शुरुआत में फॉर्मूला-1 ड्राइवरों के लिए विकसित किया गया था। अब इन्हें फुटबॉल में भी सफलतापूर्वक अपनाया जा रहा है। टीमें इनका उपयोग मैच से पहले, हाफ टाइम और ट्रेनिंग सत्रों के दौरान खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता बनाए रखने के लिए कर रही हैं।   जलवायु परिवर्तन ने बढ़ाई चुनौती विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया भर में खेल आयोजनों के दौरान अत्यधिक गर्मी अब बड़ी चुनौती बनती जा रही है। ऐसे में फीफा वर्ल्ड कप 2026 में खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मेडिकल प्रोटोकॉल, हाइड्रेशन ब्रेक और आधुनिक कूलिंग तकनीकों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। इन उपायों की बदौलत खिलाड़ी भीषण गर्मी के बावजूद अपनी फिटनेस और प्रदर्शन को बेहतर बनाए रखने में सफल हो रहे हैं।

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