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जिम्बाब्वे के खिलाफ पहले टी20 में भारत के लिए 3 खिलाड़ियों का हो सकता है डेब्यू

abhishek singh जुलाई 23, 2026 0
Ashok Sharma, Prabhsimran Singh
Ashok Sharma, Prabhsimran Singh Debut News

हरारे, एजेंसियां। भारत और जिम्बाब्वे के बीच आज से शुरू हो रही तीन मैचों की टी20 सीरीज में भारतीय टीम की प्लेइंग इलेवन में कई नए चेहरों को मौका मिल सकता है। कप्तान श्रेयस अय्यर की अगुवाई में टीम युवा खिलाड़ियों पर भरोसा जताने के मूड में है और माना जा रहा है कि तीन खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट में पदार्पण कर सकते हैं।

 

अशोक शर्मा का डेब्यू लगभग तय माना जा रहा

 

तेज गेंदबाज अशोक शर्मा को इस सीरीज के लिए पहली बार भारतीय टी20 टीम में शामिल किया गया है। टीम प्रबंधन उन्हें नई गेंद के साथ मौका देने पर विचार कर रहा है। हाल के घरेलू और आईपीएल प्रदर्शन के बाद उन्हें भारत के लिए खेलने का अवसर मिल सकता है।

 

हर्ष दुबे को भी मिल सकता है पहला मौका

 

ऑलराउंडर हर्ष दुबे भी डेब्यू के प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं। बाएं हाथ के स्पिन और उपयोगी बल्लेबाजी की बदौलत उन्होंने घरेलू क्रिकेट में लगातार प्रभावित किया है। टीम प्रबंधन उन्हें मध्यक्रम और स्पिन विभाग दोनों में विकल्प के रूप में देख रहा है।

 

प्रभसिमरन सिंह भी कर सकते हैं टी20 अंतरराष्ट्रीय पदार्पण

 

विकेटकीपर-बल्लेबाज प्रभसिमरन सिंह को भी पहली बार भारतीय टी20 टीम में मौका मिला है। यदि टीम अतिरिक्त आक्रामक बल्लेबाज के साथ उतरती है तो उन्हें डेब्यू कैप मिल सकती है। आईपीएल और घरेलू टी20 क्रिकेट में उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी ने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा था।

 

युवा खिलाड़ियों को परखने का बेहतरीन अवसर

 

इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद भारतीय टीम इस सीरीज को नई शुरुआत के रूप में देख रही है। टीम प्रबंधन का फोकस युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव देने और भविष्य की टी20 टीम तैयार करने पर है। इसी कारण डेब्यू खिलाड़ियों को खुद को साबित करने का बड़ा मौका मिलेगा।

 

प्लेइंग इलेवन पर अंतिम फैसला टॉस के बाद

 

हालांकि भारतीय टीम प्रबंधन ने अंतिम एकादश का खुलासा नहीं किया है, लेकिन क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि इन तीन खिलाड़ियों में से एक या अधिक खिलाड़ियों को आज हरारे में भारतीय टीम की ओर से पहली बार खेलने का मौका मिल सकता है। अंतिम निर्णय टॉस से पहले टीम संयोजन के आधार पर लिया जाएगा।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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विराट कोहली और अनुष्का शर्मा पहुंचे प्रेमानंद महाराज के दरबार, वृंदावन में लिया आशीर्वाद; सादगी ने जीता लोगों का दिल

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रोहित शर्मा के संन्यास की चर्चाओं पर रविचंद्रन अश्विन का बड़ा खुलासा, बोले— 'अंदर ही अंदर बातें चल रही थीं'

नई दिल्ली,एजेंसियां। भारत के पूर्व ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने रोहित शर्मा के वनडे क्रिकेट से संन्यास की हालिया अटकलों पर बड़ा बयान दिया है। अश्विन ने कहा कि रोहित के भविष्य को लेकर जो खबरें सामने आई थीं, वे केवल अफवाहें नहीं थीं, बल्कि "अंदर ही अंदर कुछ बातें चल रही थीं। बिना आग के धुआं नहीं उठता।" उनका यह बयान क्रिकेट जगत में चर्चा का विषय बन गया है।   'यह सिर्फ बाहरी शोर नहीं था'   अपने यूट्यूब चैनल पर बातचीत के दौरान अश्विन ने कहा कि रोहित शर्मा के संन्यास को लेकर जो चर्चा हुई, उसे केवल "बाहरी शोर" कहकर खारिज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि तमिल में एक कहावत है— "बिना आग के धुआं नहीं उठता।" अश्विन के मुताबिक, जरूर कुछ न कुछ अंदरूनी स्तर पर चल रहा था, लेकिन रोहित ने शानदार शतक लगाकर सभी सवालों का जवाब मैदान पर दिया।   लॉर्ड्स में शतक से दिया करारा जवाब   अश्विन ने कहा कि इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स वनडे में रोहित शर्मा की 138 रन की पारी ने यह साबित कर दिया कि उनमें अभी भी बड़े मंच पर मैच जिताने की क्षमता है। उनके अनुसार, रोहित मानसिक और शारीरिक दोनों चुनौतियों से जूझ रहे थे, लेकिन उन्होंने दबाव के बीच बेहतरीन बल्लेबाजी की।   2027 विश्व कप खेलने की क्षमता रखते हैं रोहित   अश्विन ने भरोसा जताया कि यदि रोहित फिट रहते हैं और इसी तरह प्रदर्शन करते हैं, तो उनके पास 2027 वनडे विश्व कप खेलने की पूरी क्षमता है। उन्होंने कहा कि रोहित और विराट कोहली जैसे अनुभवी खिलाड़ियों को केवल अफवाहों के आधार पर नहीं आंका जा सकता।   BCCI पहले ही कर चुका है अटकलों का खंडन   रोहित शर्मा के भविष्य को लेकर उठी चर्चाओं के बीच बीसीसीआई पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि उनके संन्यास को लेकर चल रही खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। खुद रोहित शर्मा ने भी कहा है कि उनका पूरा ध्यान भारत के लिए खेलना और टीम की सफलता में योगदान देना है।

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Indian runner Huidrom Bhumeshwory Devi celebrates after winning a medal, symbolizing resilience and her Olympic 2028 dream.
पिता का साया छूटा, नंगे पैर दौड़ीं, दर्द में भी जीता देश के लिए मेडल... अब ओलंपिक 2028 है लक्ष्य

Huidrom Bhumeshwory Devi Story: संघर्ष, हिम्मत और जुनून की मिसाल बन चुकीं मणिपुर की 22 वर्षीय धाविका हुइड्रोम भूमेश्वरी देवी आज देशभर के युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। पिता के निधन के बाद आर्थिक तंगी से जूझते हुए उन्होंने परिवार का सहारा बनने के लिए दौड़ना शुरू किया। कभी जूते खरीदने तक के पैसे नहीं थे, इसलिए नंगे पैर दौड़ लगाई। आज वही बेटी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के लिए पदक जीतकर ओलंपिक 2028 का सपना देख रही है। पिता के निधन के बाद बदली जिंदगी साल 2012 में पिता के निधन के बाद भूमेश्वरी के परिवार पर आर्थिक संकट आ गया। घर में मां और दो भाइयों की जिम्मेदारी थी। ऐसे कठिन समय में उन्होंने खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू किया ताकि पुरस्कार राशि से परिवार की मदद कर सकें। पहली दौड़ और मिला परिवार को सहारा सातवीं कक्षा में उन्होंने पहली बार 19 किलोमीटर इंटर-स्कूल दौड़ में हिस्सा लिया और दूसरा स्थान हासिल किया। इसके लिए उन्हें 5,000 रुपये का पुरस्कार मिला। यह सिर्फ एक इनाम नहीं था, बल्कि परिवार के लिए बड़ी राहत साबित हुआ। इसके बाद उन्होंने 21 किलोमीटर हाफ मैराथन में नंगे पैर दौड़ लगाई और 12वें स्थान पर रहीं। संसाधनों की कमी ने उनके हौसले को कभी कमजोर नहीं किया। मां थीं चिंतित, लेकिन बेटी ने बदल दी सोच शुरुआत में उनकी मां चाहती थीं कि वे दौड़ना छोड़ दें। उन्हें डर था कि कहीं पिता की तरह उन्हें भी दिल की बीमारी न हो जाए। लेकिन लगातार अच्छे प्रदर्शन और सफलता ने मां का भरोसा बढ़ाया और उन्होंने बेटी का पूरा साथ दिया। एशियन अंडर-23 चैंपियनशिप में जीता कांस्य पदक हाल ही में चीन में आयोजित एशियन अंडर-23 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भूमेश्वरी ने 800 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया। हालांकि उन्होंने कहा कि मणिपुर की मौजूदा परिस्थितियों के कारण राज्य के खिलाड़ियों को वह पहचान नहीं मिल रही, जिसके वे हकदार हैं। मणिपुर हिंसा से प्रभावित हुआ करियर साल 2023 में मणिपुर में जातीय हिंसा शुरू होने के बाद उन्हें अपना घर और प्रशिक्षण केंद्र छोड़ना पड़ा। वे भोपाल स्थित NCOE पहुंचीं और बाद में SAI बेंगलुरु में प्रशिक्षण लेने लगीं, जहां इटली के कोच क्लाउडियो पैनोजो ने उनकी तैयारी को नई दिशा दी। पेट में तेज दर्द के बावजूद देश के लिए जीता मेडल एशियन चैंपियनशिप के दौरान भूमेश्वरी ओवेरियन सिस्ट की वजह से तेज पेट दर्द से जूझ रही थीं। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और भारत के लिए कांस्य पदक जीत लिया। उन्होंने 1500 मीटर स्पर्धा में भी हिस्सा लिया, हालांकि वहां पदक से चूक गईं। अब ओलंपिक 2028 पर नजर भूमेश्वरी का अगला लक्ष्य 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक है। इसके साथ ही वह भारत की पूर्व धाविका टिंटू लुका के 800 मीटर राष्ट्रीय रिकॉर्ड और आगे चलकर हिमा दास के 400 मीटर राष्ट्रीय रिकॉर्ड को चुनौती देना चाहती हैं। पिछले दो वर्षों में उन्होंने 800 मीटर में अपना सर्वश्रेष्ठ समय 2:07.17 मिनट से सुधारकर 2:04.44 मिनट कर लिया है, जो उनकी लगातार मेहनत और प्रगति का प्रमाण है।  

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