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हार्दिक पंड्या की गुजरात टाइटंस में वापसी की कोशिश नाकाम, कप्तानी की शर्त बनी सबसे बड़ा रोड़ा

abhishek singh अगस्त 12, 2026 0
Hardik Pandya
Hardik Pandya's attempt to return to Gujarat Titans Fails

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या को लेकर IPL 2027 से पहले बड़ी खबर सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, हार्दिक ने अपनी पुरानी टीम गुजरात टाइटंस (GT) में वापसी की इच्छा जताई थी, लेकिन उनकी वापसी के साथ कप्तानी की शर्त जुड़ी होने के कारण फ्रेंचाइजी ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। यह मामला फिलहाल रिपोर्टों पर आधारित है, आधिकारिक ट्रेड की घोषणा नहीं हुई है।

 

कप्तानी की मांग बनी सबसे बड़ी अड़चन

 

रिपोर्ट के अनुसार, हार्दिक गुजरात में सिर्फ खिलाड़ी के तौर पर लौटने के इच्छुक नहीं थे। उनकी कथित शर्त थी कि वापसी होने पर उन्हें टीम की कप्तानी दी जाए। गुजरात टाइटंस ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया और संभावित वापसी की बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी।

 

शुभमन गिल के नेतृत्व में है गुजरात

 

गुजरात टाइटंस की कप्तानी इस समय शुभमन गिल के हाथों में है। गिल ने 2026 में भी टीम का नेतृत्व किया है। ऐसे में हार्दिक को वापस लाकर कप्तानी सौंपने का मतलब मौजूदा नेतृत्व व्यवस्था में बड़ा बदलाव करना होता। यही बात इस संभावित ट्रेड को मुश्किल बनाने वाली प्रमुख वजहों में बताई जा रही है।

 

हार्दिक ने GT को बनाया था IPL चैंपियन

 

हार्दिक पंड्या गुजरात टाइटंस के पहले कप्तान रहे हैं। उनकी अगुआई में टीम ने IPL 2022 में अपने पहले ही सीजन में खिताब जीता था। 2023 में भी गुजरात उनकी कप्तानी में फाइनल तक पहुंची थी। इसके बाद हार्दिक मुंबई इंडियंस में लौट गए थे।

 

अब मुंबई इंडियंस के साथ भविष्य पर नजर

 

गुजरात टाइटंस से जुड़ी यह खबर हार्दिक के मुंबई इंडियंस के साथ भविष्य को लेकर चल रही अटकलों के बीच आई है। फिलहाल गुजरात ने उन्हें वापस लेने से इनकार किया है और हार्दिक के IPL 2027 में किस टीम से खेलेंगे, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Abhishek Porel
अभिषेक पोरेल गिरफ्तार, शादी का वादा कर यौन शोषण के आरोप में पुलिस ने की कार्रवाई

कोलकाता, एजेंसियां। बंगाल और दिल्ली कैपिटल्स के विकेटकीपर-बल्लेबाज अभिषेक पोरेल को पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में पुलिस ने गिरफ्तार किया है। एक महिला की शिकायत के आधार पर उनके खिलाफ शादी का वादा करके यौन संबंध बनाने और धमकी देने समेत गंभीर आरोपों में मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच जारी है और आरोप अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं।   महिला ने क्या आरोप लगाए?   रिपोर्टों के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि वह और पोरेल करीब साढ़े तीन साल से एक-दूसरे को जानते थे। महिला का दावा है कि पोरेल ने शादी का वादा किया और इसी आधार पर उनके बीच शारीरिक संबंध बने। बाद में रिश्ते में विवाद होने पर महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।   महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उनके निजी पलों की तस्वीरों और वीडियो को सार्वजनिक करने की धमकी दी गई। इसी वजह से मामले में आपराधिक धमकी और अन्य धाराएं भी जोड़ी गई हैं।   कलकत्ता हाई कोर्ट ने गिरफ्तारी का दिया था निर्देश   मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर शिकायतकर्ता ने कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया था। कोर्ट ने जुलाई में पुलिस को पोरेल को गिरफ्तार करने और उनके इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जब्त करने का निर्देश दिया था, ताकि कथित निजी सामग्री को आगे प्रसारित होने से रोका जा सके। अब पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पोरेल को गिरफ्तार कर लिया है और उन्हें चुंचुड़ा अदालत में पेश किया गया, जहां से पुलिस हिरासत में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।   अभिषेक पोरेल कौन हैं?   23 वर्षीय अभिषेक पोरेल बंगाल के विकेटकीपर-बल्लेबाज हैं और IPL में दिल्ली कैपिटल्स के लिए खेलते हैं। वह 2023 से दिल्ली कैपिटल्स से जुड़े हैं और IPL में अपनी बल्लेबाजी तथा विकेटकीपिंग के कारण पहचान बना चुके हैं।

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श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में एमएस धोनी का रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं रवींद्र जडेजा, खास उपलब्धि से सिर्फ 4 कदम दूर

गॉल, एजेंसियां। भारत और श्रीलंका के बीच आगामी टेस्ट सीरीज में रवींद्र जडेजा के पास पूर्व भारतीय कप्तान एमएस धोनी का एक खास टेस्ट रिकॉर्ड पीछे छोड़ने का मौका है। जडेजा भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले खिलाड़ियों की सूची में धोनी के बेहद करीब पहुंच गए हैं।   धोनी के रिकॉर्ड के करीब जडेजा   टेस्ट क्रिकेट में एमएस धोनी ने भारत की ओर से खेलते हुए 78 छक्के लगाए हैं। रवींद्र जडेजा के नाम फिलहाल 75 टेस्ट छक्के दर्ज हैं। यानी श्रीलंका के खिलाफ आगामी मुकाबलों में जडेजा को धोनी से आगे निकलने के लिए सिर्फ 4 छक्कों की जरूरत है। अगर जडेजा सीरीज के दौरान चार छक्के लगा देते हैं, तो वह भारत की ओर से टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक छक्के लगाने वाले बल्लेबाजों की सूची में धोनी को पीछे छोड़ देंगे।   जडेजा के पास सीरीज में बड़ा मौका   भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट सीरीज का पहला मुकाबला 15 अगस्त से गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाना है। जडेजा भारतीय टीम के प्रमुख ऑलराउंडरों में शामिल हैं और उनके बल्ले से निचले क्रम में तेज रन बनाने की क्षमता टीम के लिए अहम रहती है।   टेस्ट क्रिकेट में जडेजा का आक्रामक अंदाज उन्हें यह रिकॉर्ड हासिल करने का मजबूत दावेदार बनाता है। हालांकि, वह कितने मुकाबलों में खेलेंगे और बल्लेबाजी क्रम में उन्हें कितने मौके मिलेंगे, यह टीम संयोजन पर निर्भर करेगा।   भारत के लिए जडेजा का शानदार टेस्ट करियर   रवींद्र जडेजा भारत के सबसे सफल टेस्ट ऑलराउंडरों में शामिल हैं। गेंदबाजी के साथ-साथ उन्होंने बल्ले से भी कई महत्वपूर्ण पारियां खेली हैं। मुश्किल परिस्थितियों में निचले क्रम पर तेजी से रन बनाने की उनकी क्षमता भारतीय टीम के लिए लंबे समय से उपयोगी रही है।   एमएस धोनी ने 2014 में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया था और उनके नाम भारतीय क्रिकेट के कई यादगार रिकॉर्ड हैं। अब जडेजा के पास श्रीलंका के खिलाफ सीरीज में उनके एक रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने का मौका है।

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श्रेयंका पाटिल का ‘बबली बदमाश’ पर डांस वीडियो वायरल, ट्रेंडिंग स्टेप्स ने खींचा फैंस का ध्यान

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय महिला क्रिकेटर श्रेयंका पाटिल इन दिनों क्रिकेट के साथ-साथ अपने डांस वीडियो को लेकर भी सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। 11 अगस्त 2026 को सामने आए उनके नए डांस रील में वह ‘बबली बदमाश’ गाने पर ट्रेंडिंग डांस स्टेप्स करती नजर आ रही हैं। वीडियो सामने आने के बाद क्रिकेट फैंस के बीच इसकी चर्चा तेज हो गई है।   ‘बाबली बदमाश’ गाने पर दिखाए डांस मूव्स   श्रेयंका ने इस रील में ‘बबली बदमाश’ गाने पर डांस किया है। रिपोर्ट के अनुसार, वीडियो में इस्तेमाल किए गए स्टेप्स Sandy ने कोरियोग्राफ किए हैं। श्रेयंका ने इन स्टेप्स को अपने अंदाज में परफॉर्म किया, जिसमें उनके एक्सप्रेशन और एनर्जी ने सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान खींचा।   क्रिकेट पिच से अलग अंदाज में नजर आईं श्रेयंका   भारतीय महिला टीम की ऑलराउंडर श्रेयंका पाटिल क्रिकेट मैदान पर अपने प्रदर्शन के लिए जानी जाती हैं। लेकिन इस वायरल रील में उनका मस्ती भरा और डांसिंग अंदाज देखने को मिला। वीडियो वायरल होने के बाद फैंस उनके इस ऑफ-फील्ड अंदाज पर प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।   सोशल मीडिया पर पहले भी डांस वीडियो हो चुके हैं वायरल   यह पहली बार नहीं है जब श्रेयंका का डांस वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में आया हो। इससे पहले भी उनके डांस रील्स को फैंस का अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। मार्च 2026 में भी उनके एक डांस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया और क्रिकेट प्लेटफॉर्म्स पर चर्चा हुई थी।

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