क्रिकेट प्रशंसकों की नजर युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी पर भी रहेगी। हालांकि उनकी टीम में जगह और प्लेइंग इलेवन में चयन की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन युवा खिलाड़ी के प्रदर्शन को देखते हुए इस सीरीज में उनके संभावित एक्शन को लेकर उत्सुकता बनी हुई है।
अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अनुसार भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन टी20 मैच खेले जाएंगे।
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यानी क्रिकेट फैंस के लिए सितंबर में लगातार तीन बड़े मुकाबले देखने को मिलेंगे।
इस सीरीज की सबसे खास बात इसका आयोजन है। अफगानिस्तान भारत की जमीन पर ही भारत के खिलाफ अपनी ‘होम’ सीरीज की मेजबानी करेगा।
अफगानिस्तान पहले भी भारत को अपने घरेलू मुकाबलों के लिए वैकल्पिक होम वेन्यू के रूप में इस्तेमाल करता रहा है। लखनऊ, देहरादून और ग्रेटर नोएडा में अफगानिस्तान ने अन्य टीमों के खिलाफ मुकाबले खेले हैं। लेकिन भारत के खिलाफ भारतीय जमीन पर द्विपक्षीय सीरीज की मेजबानी करना उसके लिए नया अनुभव होगा।
युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने कम उम्र में अपनी बल्लेबाजी से क्रिकेट जगत का ध्यान आकर्षित किया है। ऐसे में आगामी टी20 सीरीज में उनके संभावित चयन को लेकर फैंस के बीच खास उत्साह है।
हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें भारतीय टीम की अंतिम सूची में जगह मिलेगी या वह प्लेइंग इलेवन का हिस्सा बनेंगे। इसलिए फिलहाल उनकी भागीदारी को संभावित माना जाना चाहिए, आधिकारिक नहीं।
अफगानिस्तान के खिलाफ सितंबर में होने वाली सीरीज का असर भारत के प्रस्तावित बांग्लादेश दौरे पर भी पड़ सकता है।
बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने 1 से 13 सितंबर के बीच भारत के खिलाफ वनडे और टी20 मैचों की योजना बनाई थी। अब अफगानिस्तान सीरीज की तारीखें सामने आने के बाद दोनों कार्यक्रमों में टकराव की स्थिति बन रही है।
ऐसे में भारतीय टीम के बांग्लादेश दौरे की संभावना कमजोर मानी जा रही है।
भारत-अफगानिस्तान सीरीज टी20 क्रिकेट के लिहाज से खास रहने वाली है। एक तरफ भारतीय टीम अपनी युवा प्रतिभाओं को आजमाने की कोशिश कर सकती है, वहीं अफगानिस्तान की टीम राशिद खान समेत अपने टी20 विशेषज्ञ खिलाड़ियों के साथ कड़ी चुनौती पेश कर सकती है।
दिल्ली में होने वाले तीनों मुकाबले क्रिकेट प्रशंसकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र रहने की उम्मीद है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट टीम में लगातार बढ़ रही चोटों की समस्या के बीच पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की मेडिकल और रिहैबिलिटेशन व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। कैफ ने इस बात पर हैरानी जताई कि दुनिया के सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड को अपने Centre of Excellence (CoE) के लिए शीर्ष स्तर के मेडिकल और पुनर्वास विशेषज्ञों को जोड़ने में परेशानी क्यों हो रही है। चोटों की बढ़ती समस्या ने बढ़ाई चिंता भारतीय क्रिकेट में खिलाड़ियों की चोटें इस समय बड़ा मुद्दा बनी हुई हैं। लगातार चोटिल हो रहे खिलाड़ियों के कारण टीम संयोजन और चयन पर भी असर पड़ रहा है। इसी पृष्ठभूमि में BCCI की मेडिकल व्यवस्था और खिलाड़ियों की रिकवरी प्रक्रिया पर चर्चा तेज हुई है। कैफ ने खास तौर पर इस बात पर सवाल उठाया कि जब BCCI के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है, तो उसे दुनिया के बेहतरीन मेडिकल और रिहैबिलिटेशन विशेषज्ञों को अपने Centre of Excellence से जोड़ने में दिक्कत क्यों आ रही है। VVS लक्ष्मण ने भी बताई CoE की परेशानी कैफ की चिंता के बीच VVS लक्ष्मण की ओर से भी Centre of Excellence में योग्य स्टाफ की नियुक्ति को लेकर BCCI के सामने मौजूद चुनौतियों की बात सामने आई है। इससे यह मुद्दा और गंभीर हो गया है कि भारतीय खिलाड़ियों को चोट से बचाने और चोट लगने के बाद जल्द एवं सुरक्षित वापसी कराने के लिए मेडिकल ढांचे को और मजबूत करने की जरूरत है। श्रीलंका टेस्ट सीरीज से पहले बढ़ी अहमियत भारत इस समय श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज की तैयारी कर रहा है। पहला टेस्ट 15 अगस्त से गॉल में खेला जाना है। ऐसे में खिलाड़ियों की फिटनेस और उपलब्धता टीम प्रबंधन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। चोटों के कारण किसी प्रमुख खिलाड़ी की अनुपलब्धता का सीधा असर अंतिम एकादश और टीम के संतुलन पर पड़ सकता है। यही वजह है कि कैफ की टिप्पणी को भारतीय क्रिकेट में चोट प्रबंधन और मेडिकल सपोर्ट सिस्टम को लेकर महत्वपूर्ण सवाल के रूप में देखा जा रहा है।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या को लेकर IPL 2027 से पहले बड़ी खबर सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, हार्दिक ने अपनी पुरानी टीम गुजरात टाइटंस (GT) में वापसी की इच्छा जताई थी, लेकिन उनकी वापसी के साथ कप्तानी की शर्त जुड़ी होने के कारण फ्रेंचाइजी ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। यह मामला फिलहाल रिपोर्टों पर आधारित है, आधिकारिक ट्रेड की घोषणा नहीं हुई है। कप्तानी की मांग बनी सबसे बड़ी अड़चन रिपोर्ट के अनुसार, हार्दिक गुजरात में सिर्फ खिलाड़ी के तौर पर लौटने के इच्छुक नहीं थे। उनकी कथित शर्त थी कि वापसी होने पर उन्हें टीम की कप्तानी दी जाए। गुजरात टाइटंस ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया और संभावित वापसी की बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी। शुभमन गिल के नेतृत्व में है गुजरात गुजरात टाइटंस की कप्तानी इस समय शुभमन गिल के हाथों में है। गिल ने 2026 में भी टीम का नेतृत्व किया है। ऐसे में हार्दिक को वापस लाकर कप्तानी सौंपने का मतलब मौजूदा नेतृत्व व्यवस्था में बड़ा बदलाव करना होता। यही बात इस संभावित ट्रेड को मुश्किल बनाने वाली प्रमुख वजहों में बताई जा रही है। हार्दिक ने GT को बनाया था IPL चैंपियन हार्दिक पंड्या गुजरात टाइटंस के पहले कप्तान रहे हैं। उनकी अगुआई में टीम ने IPL 2022 में अपने पहले ही सीजन में खिताब जीता था। 2023 में भी गुजरात उनकी कप्तानी में फाइनल तक पहुंची थी। इसके बाद हार्दिक मुंबई इंडियंस में लौट गए थे। अब मुंबई इंडियंस के साथ भविष्य पर नजर गुजरात टाइटंस से जुड़ी यह खबर हार्दिक के मुंबई इंडियंस के साथ भविष्य को लेकर चल रही अटकलों के बीच आई है। फिलहाल गुजरात ने उन्हें वापस लेने से इनकार किया है और हार्दिक के IPL 2027 में किस टीम से खेलेंगे, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
नई दिल्ली: श्रीलंका के बाद भारतीय क्रिकेट टीम का अगला बड़ा मुकाबला अफगानिस्तान के खिलाफ होने जा रहा है। अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने सितंबर में भारत के खिलाफ तीन मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज की तारीखों का ऐलान किया है। खास बात यह है कि पूरी सीरीज नई दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेली जाएगी। क्रिकेट प्रशंसकों की नजर युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी पर भी रहेगी। हालांकि उनकी टीम में जगह और प्लेइंग इलेवन में चयन की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन युवा खिलाड़ी के प्रदर्शन को देखते हुए इस सीरीज में उनके संभावित एक्शन को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। 13, 15 और 17 सितंबर को होंगे मुकाबले अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अनुसार भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन टी20 मैच खेले जाएंगे। तारीख मुकाबला स्थान 13 सितंबर 2026 पहला टी20 अरुण जेटली स्टेडियम, नई दिल्ली 15 सितंबर 2026 दूसरा टी20 अरुण जेटली स्टेडियम, नई दिल्ली 17 सितंबर 2026 तीसरा टी20 अरुण जेटली स्टेडियम, नई दिल्ली यानी क्रिकेट फैंस के लिए सितंबर में लगातार तीन बड़े मुकाबले देखने को मिलेंगे। भारत में ही अफगानिस्तान करेगा ‘होम’ सीरीज की मेजबानी इस सीरीज की सबसे खास बात इसका आयोजन है। अफगानिस्तान भारत की जमीन पर ही भारत के खिलाफ अपनी ‘होम’ सीरीज की मेजबानी करेगा। अफगानिस्तान पहले भी भारत को अपने घरेलू मुकाबलों के लिए वैकल्पिक होम वेन्यू के रूप में इस्तेमाल करता रहा है। लखनऊ, देहरादून और ग्रेटर नोएडा में अफगानिस्तान ने अन्य टीमों के खिलाफ मुकाबले खेले हैं। लेकिन भारत के खिलाफ भारतीय जमीन पर द्विपक्षीय सीरीज की मेजबानी करना उसके लिए नया अनुभव होगा। वैभव सूर्यवंशी पर रहेंगी निगाहें युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने कम उम्र में अपनी बल्लेबाजी से क्रिकेट जगत का ध्यान आकर्षित किया है। ऐसे में आगामी टी20 सीरीज में उनके संभावित चयन को लेकर फैंस के बीच खास उत्साह है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें भारतीय टीम की अंतिम सूची में जगह मिलेगी या वह प्लेइंग इलेवन का हिस्सा बनेंगे। इसलिए फिलहाल उनकी भागीदारी को संभावित माना जाना चाहिए, आधिकारिक नहीं। बांग्लादेश दौरे पर भी पड़ा असर अफगानिस्तान के खिलाफ सितंबर में होने वाली सीरीज का असर भारत के प्रस्तावित बांग्लादेश दौरे पर भी पड़ सकता है। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने 1 से 13 सितंबर के बीच भारत के खिलाफ वनडे और टी20 मैचों की योजना बनाई थी। अब अफगानिस्तान सीरीज की तारीखें सामने आने के बाद दोनों कार्यक्रमों में टकराव की स्थिति बन रही है। ऐसे में भारतीय टीम के बांग्लादेश दौरे की संभावना कमजोर मानी जा रही है। क्रिकेट फैंस के लिए सितंबर होगा खास भारत-अफगानिस्तान सीरीज टी20 क्रिकेट के लिहाज से खास रहने वाली है। एक तरफ भारतीय टीम अपनी युवा प्रतिभाओं को आजमाने की कोशिश कर सकती है, वहीं अफगानिस्तान की टीम राशिद खान समेत अपने टी20 विशेषज्ञ खिलाड़ियों के साथ कड़ी चुनौती पेश कर सकती है। दिल्ली में होने वाले तीनों मुकाबले क्रिकेट प्रशंसकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र रहने की उम्मीद है।