स्पोर्ट्स

FIFA World Cup 2026: ब्राजील को मिली बड़ी राहत, चोट से उबरकर इस मैच में खेलेंगे नेमार

anjali kumari जून 20, 2026 0
FIFA World Cup 2026
FIFA World Cup 2026

नई दिल्ली, एजेंसियां। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में ब्राजील के प्रशंसकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। टीम के मुख्य कोच कार्लो एंसेलोटी ने पुष्टि की है कि स्टार फुटबॉलर नेमार स्कॉटलैंड के खिलाफ होने वाले ग्रुप-सी के अंतिम मुकाबले में खेलने के लिए उपलब्ध रहेंगे। चोट के कारण अब तक टूर्नामेंट का एक भी मैच नहीं खेलने वाले नेमार की वापसी ब्राजील के लिए बड़ी मजबूती मानी जा रही है।

 

पिंडली की चोट के कारण थे बाहर


34 वर्षीय नेमार 17 मई को अपने क्लब सैंटोस के लिए खेलते समय दाहिने पैर की पिंडली में चोटिल हो गए थे। इसी वजह से वह विश्व कप में मोरक्को के खिलाफ ड्रॉ रहे पहले मैच और हैती पर 3-0 की जीत वाले मुकाबले में टीम का हिस्सा नहीं बन सके। हालांकि वह लगातार टीम के साथ बने रहे और पुनर्वास कार्यक्रम से गुजरते रहे।

 

कोच ने दिया फिटनेस अपडेट


हैती के खिलाफ जीत के बाद एंसेलोटी ने बताया कि नेमार पहले व्यक्तिगत ट्रेनिंग करेंगे और फिर पूरी टीम के साथ अभ्यास में शामिल होंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि स्कॉटलैंड के खिलाफ होने वाले मुकाबले के लिए स्टार खिलाड़ी पूरी तरह उपलब्ध रहेंगे।

 

राफिन्हा की चोट बनी चिंता


ब्राजील को हैती के खिलाफ मैच में एक और झटका लगा, जब राफिन्हा हैमस्ट्रिंग की समस्या के कारण पहले हाफ में ही मैदान छोड़ने को मजबूर हो गए। कोच ने कहा कि उनकी चोट की गंभीरता का आकलन किया जा रहा है। ऐसे में आक्रमण की जिम्मेदारी नेमार पर अधिक रह सकती है।

 

ब्राजील की बढ़ी उम्मीदें


हैती के खिलाफ ब्राजील ने 3-0 की शानदार जीत दर्ज की, जिसमें मैथियस कुन्हा ने दो और विनीसियस जूनियर ने एक गोल किया। 129 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 79 गोल कर चुके नेमार अब अपने चौथे विश्व कप में टीम की अगुआई करते हुए ब्राजील को नॉकआउट चरण की ओर ले जाने की कोशिश करेंगे।

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Anjali Kumari Anjali123

स्पोर्ट्स

View more
MD Shami
‘वंदे मातरम्’ पर मोहम्मद शमी का बेबाक बयान, बोले- इसे कहने में मुझे कोई परेशानी नहीं, मैं किसी से डरता नहीं

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने ‘वंदे मातरम्’ और ‘भारत माता की जय’ को लेकर चल रही बहस पर अपनी बात रखी है। शमी ने साफ कहा कि उन्हें ‘वंदे मातरम्’ कहने में कोई परेशानी नहीं है और वह ऐसी बातों को लेकर किसी से डरते नहीं हैं। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज हो गई है।   ‘वंदे मातरम्’ कहने में कोई दिक्कत नहीं   मोहम्मद शमी ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ कहना उनके लिए कोई मुद्दा नहीं है। उन्होंने इस तरह की बहस को लेकर अपनी बेबाक राय रखी और संकेत दिया कि वह अपनी बात कहने से पीछे नहीं हटते। शमी ने यह भी स्पष्ट किया कि देश से जुड़े नारों या भावनाओं को लेकर उन्हें किसी तरह का डर नहीं है। उनके बयान को उनके आत्मविश्वास और स्पष्ट रुख के तौर पर देखा जा रहा है।   बयान के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा   शमी के इस बयान के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। क्रिकेट प्रशंसकों के साथ-साथ अन्य यूजर्स भी शमी के बयान पर अपनी राय साझा कर रहे हैं। हालांकि, शमी का बयान क्रिकेट के मैदान से बाहर का है, लेकिन उनके प्रशंसकों के बीच उनकी लोकप्रियता को देखते हुए यह बयान तेजी से चर्चा में आ गया है।   शमी का क्रिकेट करियर भी चर्चा में   मोहम्मद शमी भारतीय टीम के प्रमुख तेज गेंदबाजों में शामिल रहे हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लंबे समय तक शानदार प्रदर्शन किया है और कई बड़े टूर्नामेंट में भारत के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। फिलहाल शमी के क्रिकेट भविष्य और टीम में वापसी को लेकर भी चर्चा चलती रहती है। ऐसे में उनके मैदान के बाहर दिए गए इस बयान ने उनके नाम को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।

abhishek singh अगस्त 5, 2026 0
VVS Laxman & Ajit Agarkar

VVS लक्ष्मण को मुख्य चयनकर्ता बनाने पर विचार, अजीत अगरकर की कुर्सी पर संकट के संकेत

Jay Shah

ICC चेयरमैन जय शाह ने तंजानिया के पहले ICC-स्वीकृत क्रिकेट एरिना का किया उद्घाटन

Indian Test Team

शुभमन गिल की कप्तानी में भारतीय टेस्ट टीम श्रीलंका पहुंची, सीरीज की तैयारियां शुरू

Ben Stokes
बेन स्टोक्स ने 2027 एशेज में वापसी से किया इनकार, बोले- भविष्य में इंग्लैंड को कोच करना चाहता हूं

लंदन, एजेंसियां। इंग्लैंड के पूर्व कप्तान और स्टार ऑलराउंडर बेन स्टोक्स ने 2027 एशेज सीरीज में खिलाड़ी के तौर पर वापसी की अटकलों को खारिज कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद स्टोक्स ने कहा कि उनका अब खिलाड़ी के रूप में वापसी का कोई इरादा नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने भविष्य में इंग्लैंड क्रिकेट टीम का कोच बनने की इच्छा भी जाहिर की है।   2027 एशेज में वापसी नहीं करेंगे स्टोक्स   35 वर्षीय स्टोक्स ने जून 2026 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया था। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के कोच एंड्रयू मैकडोनाल्ड समेत कई लोगों ने उनके 2027 एशेज में वापसी की संभावना से इनकार नहीं किया था। हालांकि, स्टोक्स ने अब साफ कर दिया है कि वह अपने संन्यास के फैसले पर कायम हैं और एशेज में दोबारा इंग्लैंड की जर्सी में उतरने की योजना नहीं है।   कोच बनने की तैयारी में जुटे   स्टोक्स ने बताया कि वह क्रिकेट से पूरी तरह दूर नहीं होना चाहते। वह Level Three कोचिंग योग्यता हासिल करने की दिशा में काम कर रहे हैं और भविष्य में इंग्लैंड टीम को कोच करना उनका लक्ष्य है। स्टोक्स का मानना है कि इंग्लैंड की कप्तानी और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लंबे अनुभव के कारण कोचिंग की भूमिका में उन्हें अपने अनुभव का फायदा उठाने का अवसर मिलेगा।   इंग्लैंड क्रिकेट में बड़ा बदलाव   स्टोक्स के संन्यास के बाद इंग्लैंड की टेस्ट टीम में नेतृत्व का दौर भी बदल गया है। जो रूट को दोबारा टेस्ट कप्तान बनाया गया है, जबकि स्टीफन फ्लेमिंग को नया मुख्य कोच नियुक्त किया गया है। ऐसे में स्टोक्स का भविष्य में कोचिंग की ओर बढ़ना इंग्लैंड क्रिकेट के लिए एक दिलचस्प संभावित वापसी होगी।   फिलहाल स्टोक्स घरेलू और फ्रेंचाइजी क्रिकेट से जुड़े रहकर अपने खेल करियर के अगले चरण पर ध्यान दे रहे हैं, लेकिन उन्होंने साफ संकेत दिया है कि लंबे समय में वह इंग्लैंड की कोचिंग भूमिका में नजर आना चाहते हैं।

abhishek singh अगस्त 5, 2026 0
Rohit Sharma, Mohammad Kaif

रोहित शर्मा के ODI भविष्य पर मोहम्मद कैफ का बड़ा बयान, बोले- फैसला चयनकर्ताओं को करना है

Jomel Warrican celebrates after taking three wickets in four balls against Pakistan during the Test match

4 गेंदों में 3 विकेट, 34 साल के स्पिनर ने पाकिस्तान को दिया झटका; 5 मिनट में 387 पर सिमटी पारी

Ajit Agarkar and VVS Laxman amid speculation over India’s chief selector role and 2027 World Cup plans

रोहित-विराट के भविष्य पर फैसले के बीच अजीत अगरकर की कुर्सी पर भी संकट? वीवीएस लक्ष्मण बन सकते हैं अगले चीफ सिलेक्टर

Ravindra Jadeja bowling for India as Cheteshwar Pujara praises his aggressive Test bowling approach
'जडेजा पहले से ज्यादा खतरनाक हो गए हैं', श्रीलंका सीरीज से पहले चेतेश्वर पुजारा ने बताया बदली गेंदबाजी का राज

नई दिल्ली: श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज शुरू होने से पहले भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा को लेकर पूर्व भारतीय बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा ने बड़ा बयान दिया है। पुजारा का मानना है कि जडेजा की गेंदबाजी में सिर्फ तकनीकी बदलाव नहीं आया है, बल्कि उनकी सोच भी पहले से ज्यादा आक्रामक हो गई है। पुजारा के मुताबिक, जडेजा अब टेस्ट क्रिकेट में केवल रन रोकने या पिच से मदद मिलने का इंतजार करने वाले गेंदबाज नहीं रहे। उनकी कोशिश अब हर गेंद पर बल्लेबाज को आउट करने की होती है। यही बदलाव उन्हें रेड-बॉल क्रिकेट में पहले से ज्यादा खतरनाक बनाता है। जडेजा के टेस्ट रिकॉर्ड की बात करें तो उन्होंने 89 टेस्ट मैचों में 25.12 की औसत से 348 विकेट अपने नाम किए हैं। गेंद के साथ उनकी उपयोगिता के अलावा बल्लेबाजी और फील्डिंग में योगदान भी उन्हें भारतीय टेस्ट टीम के सबसे प्रभावशाली ऑलराउंडरों में शामिल करता है। डिफेंसिव से अटैकिंग माइंडसेट तक पहुंची सोच चेतेश्वर पुजारा के अनुसार, जडेजा के करियर के शुरुआती दौर में उनकी गेंदबाजी का मुख्य उद्देश्य रन रोकना हुआ करता था। खासतौर पर टेस्ट क्रिकेट में वह परिस्थितियों के हिसाब से गेंदबाजी करते थे और पिच से मदद मिलने पर विकेट लेने की कोशिश करते थे। लेकिन अब उनकी सोच में बड़ा बदलाव आया है। पुजारा के मुताबिक जडेजा हर गेंद को विकेट लेने के अवसर के रूप में देखते हैं और बल्लेबाज को स्टंप्स की लाइन में फंसाने की कोशिश करते हैं। यह मानसिक बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि टेस्ट क्रिकेट में लगातार आक्रमण बनाए रखना गेंदबाज के लिए आसान नहीं होता। जडेजा अब सिर्फ दबाव बनाने के बजाय उस दबाव को विकेट में बदलने की कोशिश करते नजर आते हैं। क्रीज और लेंथ का बेहतर इस्तेमाल बना हथियार पुजारा ने जडेजा की बदली गेंदबाजी के तकनीकी पहलू पर भी बात की। उनके अनुसार, आक्रामक सोच का असर गेंदबाजी की पूरी प्रक्रिया पर दिखाई देता है। जब गेंदबाज का उद्देश्य विकेट लेना होता है, तो वह बल्लेबाज की कमजोरियों के हिसाब से अपनी गेंदबाजी में बदलाव करने की कोशिश करता है। जडेजा भी अब क्रीज का बेहतर इस्तेमाल कर रहे हैं। वह अलग-अलग कोणों से गेंद डालने और बल्लेबाज के अनुसार लेंथ में बदलाव करने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। यही विविधता टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाज के लिए परेशानी बढ़ा सकती है। एक ही तरह की गेंदबाजी करने के बजाय कोण, लेंथ और गेंद की दिशा में बदलाव से जडेजा लगातार बल्लेबाज पर दबाव बना सकते हैं। लंबे समय बाद श्रीलंका के खिलाफ एक्शन में जडेजा अब जडेजा की इस बदली हुई गेंदबाजी सोच की परीक्षा श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में होगी। लंबे समय के बाद टेस्ट क्रिकेट में वापसी करने जा रहे जडेजा से भारतीय टीम को गेंद और बल्ले दोनों से महत्वपूर्ण योगदान की उम्मीद रहेगी। श्रीलंकाई परिस्थितियों में स्पिन गेंदबाजों की भूमिका अहम हो सकती है। ऐसे में जडेजा की सटीक लाइन-लेंथ, क्रीज के इस्तेमाल की क्षमता और आक्रामक मानसिकता भारतीय टीम के लिए बड़ा हथियार साबित हो सकती है। पुजारा की बात से बढ़ी जडेजा से उम्मीदें चेतेश्वर पुजारा का आकलन इस बात की ओर इशारा करता है कि जडेजा के खेल में अनुभव के साथ उनकी रणनीति भी विकसित हुई है। अब वह केवल बल्लेबाज को रोकने के बजाय उसे गलती करने के लिए मजबूर करने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। टेस्ट क्रिकेट में गेंदबाज के लिए यही मानसिकता निर्णायक साबित हो सकती है। अगर जडेजा श्रीलंका के खिलाफ इसी आक्रामक दृष्टिकोण को प्रभावी ढंग से लागू करते हैं, तो भारतीय टीम को बीच के ओवरों में विकेट हासिल करने का मजबूत विकल्प मिल सकता है। अब देखना होगा कि श्रीलंका के खिलाफ मैदान पर जडेजा की यह बदली हुई गेंदबाजी सोच कितनी प्रभावी साबित होती है।  

surbhi अगस्त 5, 2026 0
तिरुमला मंदिर में हार्दिक पांड्या का नया लुक

हार्दिक पांड्या का नया लुक देख फैंस रह गए हैरान, तिरुमला मंदिर में पूरी तरह मुंडवाया सिर

Brij Bhushan acquittal

बृजभूषण के बरी होने पर विनेश फोगाट का रुख सख्त, बोलीं- लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई

Army Sports Institute

कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की सफलता में आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट की अहम भूमिका

0 Comments

Top week

Smoke rises after reported airstrikes in Iraq as regional tensions escalate in West Asia
दुनिया

US-Saudi Strike: इराक में अमेरिका-सऊदी की संयुक्त कार्रवाई, 4 IRGC जवानों की मौत का दावा; पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव

kalpana जुलाई 30, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?