नई दिल्ली, एजेंसियां। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में ब्राजील के प्रशंसकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। टीम के मुख्य कोच कार्लो एंसेलोटी ने पुष्टि की है कि स्टार फुटबॉलर नेमार स्कॉटलैंड के खिलाफ होने वाले ग्रुप-सी के अंतिम मुकाबले में खेलने के लिए उपलब्ध रहेंगे। चोट के कारण अब तक टूर्नामेंट का एक भी मैच नहीं खेलने वाले नेमार की वापसी ब्राजील के लिए बड़ी मजबूती मानी जा रही है।
34 वर्षीय नेमार 17 मई को अपने क्लब सैंटोस के लिए खेलते समय दाहिने पैर की पिंडली में चोटिल हो गए थे। इसी वजह से वह विश्व कप में मोरक्को के खिलाफ ड्रॉ रहे पहले मैच और हैती पर 3-0 की जीत वाले मुकाबले में टीम का हिस्सा नहीं बन सके। हालांकि वह लगातार टीम के साथ बने रहे और पुनर्वास कार्यक्रम से गुजरते रहे।
हैती के खिलाफ जीत के बाद एंसेलोटी ने बताया कि नेमार पहले व्यक्तिगत ट्रेनिंग करेंगे और फिर पूरी टीम के साथ अभ्यास में शामिल होंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि स्कॉटलैंड के खिलाफ होने वाले मुकाबले के लिए स्टार खिलाड़ी पूरी तरह उपलब्ध रहेंगे।
ब्राजील को हैती के खिलाफ मैच में एक और झटका लगा, जब राफिन्हा हैमस्ट्रिंग की समस्या के कारण पहले हाफ में ही मैदान छोड़ने को मजबूर हो गए। कोच ने कहा कि उनकी चोट की गंभीरता का आकलन किया जा रहा है। ऐसे में आक्रमण की जिम्मेदारी नेमार पर अधिक रह सकती है।
हैती के खिलाफ ब्राजील ने 3-0 की शानदार जीत दर्ज की, जिसमें मैथियस कुन्हा ने दो और विनीसियस जूनियर ने एक गोल किया। 129 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 79 गोल कर चुके नेमार अब अपने चौथे विश्व कप में टीम की अगुआई करते हुए ब्राजील को नॉकआउट चरण की ओर ले जाने की कोशिश करेंगे।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में ब्राजील के प्रशंसकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। टीम के मुख्य कोच कार्लो एंसेलोटी ने पुष्टि की है कि स्टार फुटबॉलर नेमार स्कॉटलैंड के खिलाफ होने वाले ग्रुप-सी के अंतिम मुकाबले में खेलने के लिए उपलब्ध रहेंगे। चोट के कारण अब तक टूर्नामेंट का एक भी मैच नहीं खेलने वाले नेमार की वापसी ब्राजील के लिए बड़ी मजबूती मानी जा रही है। पिंडली की चोट के कारण थे बाहर 34 वर्षीय नेमार 17 मई को अपने क्लब सैंटोस के लिए खेलते समय दाहिने पैर की पिंडली में चोटिल हो गए थे। इसी वजह से वह विश्व कप में मोरक्को के खिलाफ ड्रॉ रहे पहले मैच और हैती पर 3-0 की जीत वाले मुकाबले में टीम का हिस्सा नहीं बन सके। हालांकि वह लगातार टीम के साथ बने रहे और पुनर्वास कार्यक्रम से गुजरते रहे। कोच ने दिया फिटनेस अपडेट हैती के खिलाफ जीत के बाद एंसेलोटी ने बताया कि नेमार पहले व्यक्तिगत ट्रेनिंग करेंगे और फिर पूरी टीम के साथ अभ्यास में शामिल होंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि स्कॉटलैंड के खिलाफ होने वाले मुकाबले के लिए स्टार खिलाड़ी पूरी तरह उपलब्ध रहेंगे। राफिन्हा की चोट बनी चिंता ब्राजील को हैती के खिलाफ मैच में एक और झटका लगा, जब राफिन्हा हैमस्ट्रिंग की समस्या के कारण पहले हाफ में ही मैदान छोड़ने को मजबूर हो गए। कोच ने कहा कि उनकी चोट की गंभीरता का आकलन किया जा रहा है। ऐसे में आक्रमण की जिम्मेदारी नेमार पर अधिक रह सकती है। ब्राजील की बढ़ी उम्मीदें हैती के खिलाफ ब्राजील ने 3-0 की शानदार जीत दर्ज की, जिसमें मैथियस कुन्हा ने दो और विनीसियस जूनियर ने एक गोल किया। 129 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 79 गोल कर चुके नेमार अब अपने चौथे विश्व कप में टीम की अगुआई करते हुए ब्राजील को नॉकआउट चरण की ओर ले जाने की कोशिश करेंगे।
चेन्नई: भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का तीसरा और अंतिम मुकाबला आज चेन्नई के प्रतिष्ठित एमए चिदंबरम स्टेडियम (चेपॉक) में खेला जाएगा। भारतीय टीम पहले ही शुरुआती दोनों मुकाबले जीतकर सीरीज पर कब्जा जमा चुकी है और अब उसकी नजर 3-0 से क्लीन स्वीप करने पर है। मैच भारतीय समयानुसार दोपहर 1:30 बजे शुरू होगा। भारतीय टीम इस सीरीज में अब तक हर विभाग में शानदार प्रदर्शन करती नजर आई है। बल्लेबाजी से लेकर गेंदबाजी तक, टीम इंडिया ने अफगानिस्तान को लगातार दबाव में रखा है। ऐसे में चेपॉक में होने वाला यह मुकाबला भारतीय टीम के लिए सीरीज का शानदार समापन करने का मौका लेकर आया है। अफगानिस्तान के सामने मुश्किल चुनौती वनडे क्रिकेट में भारत के खिलाफ अफगानिस्तान का रिकॉर्ड बेहद कमजोर रहा है। दोनों टीमों के बीच अब तक छह वनडे मुकाबले खेले गए हैं, जिनमें से पांच मैच भारत ने जीते हैं, जबकि एक मुकाबला 2018 एशिया कप में टाई रहा था। अफगानिस्तान अब तक भारत के खिलाफ अपनी पहली वनडे जीत की तलाश में है। यह सीरीज इसलिए भी खास है क्योंकि दोनों देशों के बीच यह पहली द्विपक्षीय वनडे सीरीज है। चेपॉक की पिच और मौसम का हाल चेन्नई की चेपॉक पिच पारंपरिक रूप से स्पिन गेंदबाजों के लिए मददगार मानी जाती है, लेकिन इस बार लाल मिट्टी वाली पिच पर तेज गेंदबाजों को भी अतिरिक्त उछाल और सहायता मिलने की उम्मीद है। मौसम की बात करें तो पिछले कुछ दिनों की बारिश के बाद अब आसमान साफ है। मैच से पहले मौसम सामान्य रहा, जिससे पूरे मुकाबले के बिना किसी रुकावट के संपन्न होने की संभावना बढ़ गई है। टॉस निभा सकता है अहम भूमिका एमए चिदंबरम स्टेडियम में अब तक 28 वनडे मुकाबले खेले गए हैं। इनमें से 15 मैच पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम ने जीते हैं, जबकि लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम को 12 बार सफलता मिली है। एक मुकाबला बेनतीजा रहा। इन आंकड़ों को देखते हुए टॉस जीतने वाली टीम पहले बल्लेबाजी कर बड़ा स्कोर खड़ा करने की रणनीति अपना सकती है। नीतीश रेड्डी की वापसी तय, हर्षित राणा को इंतजार जांघ की चोट से उबर चुके ऑलराउंडर नीतीश रेड्डी ने नेट्स में पूरी फिटनेस के साथ गेंदबाजी की है और उनकी वापसी लगभग तय मानी जा रही है। वहीं, घुटने की सर्जरी के बाद टीम में लौटे तेज गेंदबाज हर्षित राणा फिलहाल बैकअप विकल्प के रूप में मौजूद हैं। लंबे समय बाद वापसी करने के कारण वर्कलोड मैनेजमेंट को ध्यान में रखते हुए उन्हें प्लेइंग इलेवन में शामिल किए जाने की संभावना कम मानी जा रही है। संभावित प्लेइंग इलेवन भारत रोहित शर्मा यशस्वी जायसवाल शुभमन गिल (कप्तान) ईशान किशन (विकेटकीपर) श्रेयस अय्यर वॉशिंगटन सुंदर नीतीश रेड्डी हर्ष दुबे गुरनूर बरार प्रिंस यादव हर्षित राणा अफगानिस्तान रहमानुल्लाह गुरबाज (विकेटकीपर) इब्राहिम जादरान सेदिकुल्लाह अटल रहमत शाह हश्मतुल्लाह शाहिदी (कप्तान) दरविश रसूली राशिद खान नांगेलिया खरोटे मोहम्मद सलीम अल्लाह गजनफर बिलाल सामी भारत की नजर अब सिर्फ जीत पर नहीं, बल्कि अफगानिस्तान का पूरी तरह सफाया कर सीरीज को यादगार बनाने पर होगी। वहीं, अफगानिस्तान सम्मान बचाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंकने की कोशिश करेगा।
मुंबई, एजेंसियां। प्रेमा रावत को पहली बार भारतीय सीनियर महिला टीम में जगह मिली है। ICC Women's T20 World Cup के बीच ऑफ स्पिन ऑलराउंडर श्रेयंका पटिल के चोटिल होकर बाहर होने के बाद चयनकर्ताओं ने 24 वर्षीय लेग स्पिनर प्रेमा रावत को टीम में शामिल किया है। घरेलू क्रिकेट और इंडिया-ए के लिए उनके लगातार शानदार प्रदर्शन ने उन्हें विश्व कप जैसे बड़े मंच तक पहुंचाया है। शानदार फॉर्म के दम पर मिली जगह प्रेमा रावत हाल के महीनों में इंडिया-ए टीम का अहम हिस्सा रही हैं। इंग्लैंड दौरे के लिए चुनी गई इंडिया-ए टीम में भी उनका चयन हुआ था। चयनकर्ताओं ने उनकी बेहतरीन फॉर्म, विकेट लेने की क्षमता और किफायती गेंदबाजी को देखते हुए उन्हें सीधे विश्व कप टीम में शामिल करने का फैसला लिया। एशिया कप में किया था प्रभावित हाल ही में खेले गए राइजिंग स्टार्स महिला एशिया कप में प्रेमा ने भारत-ए के लिए शानदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में आठ विकेट हासिल किए और मात्र 4.27 की इकॉनमी रेट से गेंदबाजी की। उनके दमदार प्रदर्शन की बदौलत भारत-ए ने खिताब अपने नाम किया। इसी प्रदर्शन के बाद उन्हें भविष्य की राष्ट्रीय खिलाड़ी के रूप में देखा जाने लगा। WPL का भी मिला अनुभव प्रेमा रावत पिछले दो सीजन से Royal Challengers Bengaluru का हिस्सा रही हैं। हालांकि उन्हें सीमित मौके मिले, लेकिन टीम प्रबंधन उनकी लेग स्पिन और विविधताओं से प्रभावित रहा। अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करने से उन्हें बड़े टूर्नामेंटों का अनुभव भी मिला। चोट के कारण बाहर हुईं श्रेयंका श्रेयंका पाटिल नीदरलैंड के खिलाफ मैच के दौरान फील्डिंग करते समय टखने में गंभीर चोट का शिकार हो गई थीं। स्कैन में लिगामेंट चोट की पुष्टि होने के बाद उन्हें पूरे टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा। इसके बाद भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने प्रेमा रावत को टीम में शामिल किया। अब सभी की नजरें प्रेमा रावत पर होंगी, जिनके पास विश्व कप जैसे बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा साबित करने और भारतीय महिला टीम की स्पिन आक्रमण को मजबूती देने का सुनहरा अवसर है।