दुनिया

Trump Awaits Iran’s Response Letter

ईरान के जवाब का इंतजार कर रहे ट्रंप, बोले- आज रात मिल सकता है लेटर

surbhi मई 9, 2026 0
Donald Trump speaks to reporters about awaiting Iran’s response on a possible ceasefire proposal
Trump Awaits Iran Response on Ceasefire

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह तेहरान की ओर से युद्ध रोकने के अमेरिकी प्रस्ताव पर जवाब मिलने का इंतजार कर रहे हैं. ट्रंप ने उम्मीद जताई कि ईरान की तरफ से “आज रात” कोई आधिकारिक पत्र भेजा जा सकता है.

व्हाइट हाउस से रवाना होते समय पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि हालात को लेकर जल्द तस्वीर साफ हो जाएगी. हालांकि उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि क्या ईरान जानबूझकर बातचीत की प्रक्रिया को धीमा कर रहा है.

“हमें जल्द पता चल जाएगा” : ट्रंप

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या ईरान बातचीत को लंबा खींच रहा है, तो उन्होंने कहा,
“मुझे नहीं पता, लेकिन हमें जल्द ही पता चल जाएगा.”

ट्रंप ने आगे कहा कि अमेरिका को उम्मीद है कि ईरान की ओर से जल्द आधिकारिक प्रतिक्रिया मिलेगी और संभवतः “आज रात” तक एक लेटर आ सकता है.

फिर शुरू हो सकता है ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’

ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की सुरक्षा के लिए “Project Freedom” नामक ऑपरेशन दोबारा शुरू कर सकता है.

उन्होंने कहा कि यह मिशन समुद्री जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिखाने के लिए चलाया जाता था. ट्रंप ने कहा,
“अगर हालात नहीं सुधरते हैं तो हम Project Freedom पर वापस जा सकते हैं, लेकिन इस बार यह Project Freedom Plus होगा.”

हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि “Plus” से उनका क्या मतलब है, लेकिन माना जा रहा है कि इसमें अतिरिक्त सैन्य और निगरानी उपाय शामिल हो सकते हैं.

समझौते को लेकर “बड़ी प्रगति” का दावा

ट्रंप ने दावा किया कि युद्ध समाप्त करने को लेकर बातचीत में “बड़ी प्रगति” हुई है. उन्होंने कहा कि फिलहाल कुछ कदम अस्थायी रूप से रोके गए हैं ताकि यह देखा जा सके कि क्या दोनों पक्ष किसी अंतिम समझौते तक पहुंच सकते हैं.

उनके मुताबिक, अगर सहमति बनती है तो समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर भी किए जा सकते हैं.

ईरान की ओर से सैन्य चेतावनी

इधर, ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य अली खेजरियन ने अमेरिका को चेतावनी दी है. ईरानी स्टेट टीवी से बातचीत में उन्होंने कहा कि अगर अमेरिकी नौसेना की गतिविधियां बढ़ती हैं, तो ईरान “सैन्य जवाब” दे सकता है.

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अमेरिका को अपने युद्धपोतों के साथ अतिरिक्त एस्कॉर्ट रखने चाहिए ताकि किसी हमले की स्थिति में अमेरिकी सैनिकों को बचाया जा सके.

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य की रणनीतिक अहमियत को देखते हुए पूरी दुनिया की नजर अब अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है.

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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Damaged UN humanitarian mission vehicles after alleged Russian drone attack in Ukraine’s Kherson region
यूक्रेन में UN मिशन के वाहनों पर रूसी ड्रोन हमला, जेलेंस्की बोले- ‘रूस को पता था किसे निशाना बना रहे हैं’

Ukraine के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy ने आरोप लगाया है कि रूसी सेना ने संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मिशन से जुड़े वाहनों को निशाना बनाकर ड्रोन हमला किया। उन्होंने कहा कि हमला जानबूझकर किया गया और रूस को पूरी जानकारी थी कि वाहन संयुक्त राष्ट्र मिशन से जुड़े हैं। UN मिशन के वाहनों पर दो ड्रोन हमले जेलेंस्की के मुताबिक, रूस ने संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय United Nations Office for the Coordination of Humanitarian Affairs (OCHA) से जुड़े वाहनों पर दो FPV ड्रोन हमले किए। उन्होंने बताया कि हमले के समय मिशन प्रमुख समेत संयुक्त राष्ट्र के आठ कर्मचारी वाहनों में मौजूद थे। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ। सभी कर्मचारियों को सुरक्षित निकाला गया यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, ड्रोन हमले के बाद सभी कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। खेरसॉन क्षेत्र के अधिकारियों ने कहा कि हमला कोराबेल्नी जिले में हुआ, जहां मानवीय सहायता मिशन सक्रिय था। ‘अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन’ स्थानीय अधिकारी प्रोकुडिन ने आरोप लगाया कि रूस ने अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए सहायता मिशन के वाहनों को निशाना बनाया। उन्होंने कहा, “रूस उन लोगों के खिलाफ भी लड़ाई जारी रखे हुए है, जो जरूरतमंदों की मदद करने का काम कर रहे हैं।” रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच बढ़ी चिंता रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के दौरान मानवीय सहायता एजेंसियों और नागरिक क्षेत्रों पर हमलों को लेकर लगातार अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ रही है। संयुक्त राष्ट्र और कई पश्चिमी देशों ने पहले भी नागरिक और राहत मिशनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।  

surbhi मई 15, 2026 0
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बीजिंग में ट्रंप-शी जिनपिंग की अहम बैठक, चीन बोला- ‘विरोधी नहीं, सहयोगी बनें अमेरिका और चीन’

Delegates gather in Washington for Lebanon-Israel ceasefire and peace negotiations amid rising tensions

अमेरिका में फिर होगी लेबनान-इजरायल शांति वार्ता, सीजफायर खत्म होने से पहले बढ़ी उम्मीदें

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ईंधन संकट से जूझ रहा क्यूबा, डीजल और फ्यूल ऑयल पूरी तरह खत्म; राजधानी में 22 घंटे तक ब्लैकआउट

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ट्रंप-शी जिनपिंग की बड़ी बैठक शुरू, व्यापार, ईरान युद्ध और ताइवान पर दुनिया की नजर

बीजिंग में शुरू हुई हाई-प्रोफाइल शिखर वार्ता Donald Trump और Xi Jinping के बीच गुरुवार को बीजिंग में दो दिवसीय अहम बैठक शुरू हुई। इस वार्ता में व्यापार समझौते, ईरान युद्ध और ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री जैसे बड़े मुद्दों पर चर्चा हो रही है। ट्रंप ने इस बैठक को “अब तक की सबसे बड़ी समिट” बताया और शी जिनपिंग को महान नेता और अपना मित्र कहा। भव्य स्वागत के साथ हुई मुलाकात बैठक की शुरुआत बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में हुई, जहां ट्रंप का भव्य स्वागत किया गया। दोनों नेताओं ने रेड कार्पेट पर हाथ मिलाया और गर्मजोशी से बातचीत की। चीनी सैनिकों की परेड और बच्चों द्वारा अमेरिकी-चीनी झंडे लहराने के बीच यह मुलाकात दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी रही। व्यापार समझौता सबसे बड़ा मुद्दा अमेरिका और चीन के बीच पिछले कई महीनों से जारी व्यापार तनाव इस बैठक का सबसे अहम मुद्दा माना जा रहा है। पिछले साल दोनों देशों के बीच एक अस्थायी व्यापार समझौता हुआ था, जिसके तहत अमेरिका ने चीन पर भारी टैरिफ लगाने का फैसला टाल दिया था। अब अमेरिका चाहता है कि चीन अपने बाजार अमेरिकी कंपनियों के लिए ज्यादा खोले। ट्रंप के साथ इस दौरे पर कई बड़े कारोबारी भी पहुंचे हैं, जिनमें Elon Musk और Jensen Huang शामिल हैं। ईरान युद्ध पर भी चर्चा बैठक में मध्य पूर्व का तनाव भी बड़ा मुद्दा बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि चीन ईरान पर दबाव डाले ताकि युद्ध और तनाव कम किया जा सके। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि चीन ईरान के खिलाफ खुलकर कदम उठाने से बच सकता है, क्योंकि तेहरान को वह अमेरिका के खिलाफ रणनीतिक सहयोगी के रूप में देखता है। ताइवान पर बढ़ सकता है तनाव Taiwan को अमेरिकी हथियारों की बिक्री भी बैठक में संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है। चीन ने हाल ही में अमेरिका के प्रस्तावित 14 अरब डॉलर के रक्षा पैकेज का विरोध किया है। बीजिंग का कहना है कि ताइवान चीन का हिस्सा है और बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। ट्रंप पर घरेलू दबाव इस यात्रा को ट्रंप के लिए राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम माना जा रहा है। मध्य पूर्व युद्ध और बढ़ती महंगाई के कारण उनकी लोकप्रियता प्रभावित हुई है। ऐसे में चीन दौरे को उनकी बड़ी कूटनीतिक परीक्षा माना जा रहा है। बदलता वैश्विक शक्ति संतुलन विशेषज्ञों का कहना है कि 2017 की तुलना में अब अमेरिका-चीन संबंधों का समीकरण काफी बदल चुका है। पहले जहां चीन अमेरिका को प्रभावित करने की कोशिश करता था, अब अमेरिका खुद चीन की वैश्विक ताकत को खुलकर स्वीकार करता दिख रहा है। दोनों नेताओं के बीच आने वाले दिनों में कई दौर की बातचीत और औपचारिक कार्यक्रम होने हैं, जिन पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।  

surbhi मई 14, 2026 0
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मिडिल ईस्ट संकट का असर: पाकिस्तान से अमेरिका तक तेल के दाम में भारी उछाल, कई देशों में 50% से ज्यादा बढ़ोतरी

Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव और Iran, United States तथा Israel के बीच जारी टकराव का असर अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। दुनिया के करीब 20 फीसदी कच्चे तेल की सप्लाई इसी समुद्री मार्ग से गुजरती है। जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल के दामों पर पड़ रहा है। कई देशों में तेल की कीमतें आसमान पर हालिया आंकड़ों के अनुसार कई देशों में ईंधन की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी Malaysia – 56% Pakistan – 55% United Arab Emirates – 52% United States – 45% Canada – 32% China – 22% United Kingdom – 19% रिपोर्ट्स के मुताबिक दुनिया के लगभग 85 देशों में ईंधन की कीमतें बढ़ी हैं। कई देशों में अभी और संशोधन बाकी हैं, इसलिए आने वाले हफ्तों में कीमतें और बढ़ सकती हैं। पाकिस्तान और मलेशिया में सबसे ज्यादा असर विशेषज्ञों के मुताबिक पाकिस्तान और मलेशिया जैसे देशों की अर्थव्यवस्था आयातित ईंधन पर काफी निर्भर है। ऐसे में वैश्विक सप्लाई चेन बाधित होने का असर वहां सबसे ज्यादा दिखाई दे रहा है। इन देशों में ट्रांसपोर्ट, बिजली और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी दबाव बढ़ने लगा है। अमेरिका और यूरोप में भी महंगाई का खतरा अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों में करीब 45% तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव जारी रहा तो ऊर्जा संकट और महंगाई दोनों बढ़ सकते हैं। United Kingdom और यूरोप के अन्य देशों में भी तेल की बढ़ती कीमतें आर्थिक चिंता का बड़ा कारण बन रही हैं। भारत में फिलहाल कीमतें स्थिर दूसरी ओर India में फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई है। Delhi समेत कई शहरों में पिछले करीब डेढ़ साल से ईंधन की कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं। आखिरी बड़ा बदलाव अक्टूबर 2024 में देखा गया था। रिपोर्ट्स के अनुसार इस दौरान भारत में पेट्रोल की कीमत में केवल मामूली बढ़ोतरी दर्ज हुई है। आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है चिंता ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ता है या होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक प्रभावित रहता है, तो वैश्विक तेल बाजार में और अस्थिरता आ सकती है। इसका असर सिर्फ पेट्रोल-डीजल ही नहीं, बल्कि परिवहन, खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।  

surbhi मई 13, 2026 0
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Pentagon building and military operations imagery amid rising US-Iran conflict spending concerns

ईरान युद्ध पर अमेरिका का बढ़ता खर्च चिंता का कारण, पेंटागन के आंकड़ों ने बढ़ाई बहस

US Vice President J D Vance with wife Usha Vance during a public appearance

नई किताब में पत्नी ऊषा को लेकर भावुक हुए अमेरिकी उपराष्ट्रपति

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