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हॉर्मुज समझौते पर ट्रंप की ओमान को कड़ी चेतावनी

स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज को लेकर ईरान के साथ समझौते पर ट्रंप की ओमान को चेतावनी

ranjan kumar tiwari अगस्त 18, 2026 0
स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज को लेकर ट्रंप की ओमान को चेतावनी
हॉर्मुज को लेकर ईरान से बातचीत के बीच ट्रंप की ओमान को चेतावनी

वॉशिंगटन, एजेंसियां। स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज को दोबारा खोलने को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ओमान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि अगर ओमान हॉर्मुज को लेकर अमेरिकी प्रयासों के रास्ते में आता है, तो अमेरिका उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब ओमान ईरान के साथ जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही बहाल करने के लिए बातचीत कर रहा है।

 

ईरान-ओमान के बीच चल रही है बातचीत

 

 

ईरान और ओमान स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बहाल करने के लिए एक संभावित व्यवस्था पर बातचीत कर रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रगति हुई है, लेकिन समझौते की अंतिम शर्तों पर अभी सहमति नहीं बनी है।

 

अमेरिका की मुख्य आपत्ति यह है कि हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही पर ईरान को नियंत्रण या शुल्क लगाने का अधिकार नहीं मिलना चाहिए। प्रस्तावित व्यवस्था में ईरानी जलक्षेत्र से जहाजों के गुजरने और उसके बदले शुल्क लेने जैसे मुद्दे भी चर्चा में हैं।

 

ट्रंप ने ओमान को क्यों चेताया?

 

 

ट्रंप का कहना है कि अमेरिका ईरान के साथ ऐसा कोई समझौता स्वीकार नहीं करेगा जो उसकी नजर में अमेरिकी हितों और हॉर्मुज में स्वतंत्र नौवहन को नुकसान पहुंचाए। उन्होंने ओमान को चेतावनी दी कि अगर वह अमेरिकी प्रयासों में बाधा डालता है तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

 

ओमान अमेरिका का सहयोगी है, लेकिन ईरान के साथ उसके कूटनीतिक संबंध भी हैं। इसी वजह से मस्कट लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है।

 

हॉर्मुज पर पूरी दुनिया की नजर

 

 

स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और LNG का वैश्विक परिवहन होता है। मौजूदा संघर्ष के कारण जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही सामान्य स्तर से काफी नीचे आ गई है।

 

आवाजाही में कमी का असर पहले ही अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर दिखाई देने लगा है। 17 अगस्त को ब्रेंट क्रूड 90.87 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जबकि WTI करीब 84.50 डॉलर पर पहुंच गया।

 

अमेरिका-ईरान वार्ता पर भी संकट

 

 

ट्रंप की ओमान को चेतावनी ऐसे समय आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों की बातचीत की समयसीमा बिना व्यापक समझौते के समाप्त हो गई है। ट्रंप ने ईरान से ‘सरेंडर’ करने की मांग भी दोहराई है और कहा है कि तेहरान अभी उस तरह का समझौता करने के लिए तैयार नहीं है जिसे अमेरिका जरूरी मानता है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के तहत उत्कृष्ट सेवा के लिए 210 भारतीय शांति सैनिकों को संयुक्त राष्ट्र पदक से सम्मानित किया गया है। इनमें छह महिला शांति सैनिक और सात स्टाफ अधिकारी भी शामिल हैं। यह सम्मान मुश्किल परिस्थितियों में साहस, समर्पण और मानवीय सेवा के लिए दिया गया है। संयुक्त राष्ट्र मिशन के मुताबिक, जुबा में आयोजित सम्मान समारोह में भारतीय ब्लू हेलमेट्स की सेवाओं को विशेष रूप से सराहा गया। भारतीय सैनिकों ने संकट की परिस्थितियों, मेडिकल इमरजेंसी और लोगों की जान बचाने वाले अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मुश्किल हालात में निभाई जिम्मेदारी दक्षिण सूडान लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता और संघर्ष जैसी चुनौतियों से जूझता रहा है। ऐसे माहौल में संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों की जिम्मेदारी केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रहती, बल्कि स्थानीय नागरिकों की मदद और आपात परिस्थितियों में राहत पहुंचाना भी इसका अहम हिस्सा है। UNMISS ने भारतीय सैनिकों के साहस और करुणा की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से लोगों की जान बचाने और शांति को बढ़ावा देने में मदद मिली है। UN शांति अभियानों में भारत का लंबा रिकॉर्ड भारत का संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में योगदान दशकों पुराना है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 1948 से शुरू हुए 71 संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में 2 लाख से अधिक भारतीयों ने सेवा दी है। इस दौरान 160 भारतीय शांति सैनिकों ने अपनी जान भी गंवाई। भारत वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में करीब 4,200 सैन्य और पुलिसकर्मियों का योगदान देता है, जिनमें लगभग 155 महिलाएं शामिल हैं। योगदान देने वाले देशों में भारत दूसरे स्थान पर है। महिलाओं की भागीदारी भी महत्वपूर्ण संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में भारतीय महिलाओं की भूमिका भी उल्लेखनीय रही है। वर्ष 2007 में भारत ने लाइबेरिया में संयुक्त राष्ट्र मिशन के लिए पूरी तरह महिला कर्मियों वाली फॉर्म्ड पुलिस यूनिट तैनात की थी। इस टुकड़ी ने सुरक्षा ड्यूटी, रात्रि गश्त और स्थानीय पुलिस की क्षमता बढ़ाने में योगदान दिया था। दक्षिण सूडान में 210 भारतीय शांति सैनिकों को मिला यह सम्मान भारत की अंतरराष्ट्रीय शांति अभियानों में लंबे समय से जारी भूमिका को रेखांकित करता है।  

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बीजिंग, एजेंसियां। जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय आज, 18 अगस्त 2026, चीन की सप्ताहभर की राजकीय यात्रा पर पहुंचेंगे। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर हो रही यह यात्रा 24 अगस्त तक चलेगी। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ मध्य पूर्व की स्थिति और अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होगी।   शी जिनपिंग के साथ होगी अहम बैठक     चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, शी जिनपिंग किंग अब्दुल्ला के साथ बातचीत करेंगे। दोनों नेता चीन-जॉर्डन संबंधों, क्षेत्रीय परिस्थितियों और साझा हितों वाले अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। चीन ने कहा है कि वह इस यात्रा के जरिए दोनों देशों के बीच राजनीतिक विश्वास और पारस्परिक सहयोग को और मजबूत करना चाहता है।   किंग अब्दुल्ला की मुलाकात चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग और नेशनल पीपुल्स कांग्रेस की स्थायी समिति के अध्यक्ष झाओ लेजी से भी होगी।   शंघाई और शेनझेन भी जाएंगे किंग     राजकीय वार्ता के अलावा किंग अब्दुल्ला शंघाई और शेनझेन का भी दौरा करेंगे। यात्रा में आर्थिक और कारोबारी सहयोग पर विशेष ध्यान रहने की उम्मीद है। जॉर्डन के निवेश मंत्री ने कहा है कि उनका देश चीन के साथ आर्थिक साझेदारी को और व्यापक तथा विविध बनाना चाहता है।     मध्य पूर्व संकट पर भी नजर     यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब मध्य पूर्व में तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर क्षेत्रीय सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति पर बना हुआ है। चीन ने खुद को क्षेत्रीय संकट में कूटनीतिक समाधान का समर्थक बताया है और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिरता की जरूरत पर जोर दिया है। ऐसे में किंग अब्दुल्ला और शी जिनपिंग के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा पर बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।     चीन-जॉर्डन आर्थिक संबंधों में तेजी     चीन और जॉर्डन के बीच व्यापारिक संबंध हाल के वर्षों में तेजी से बढ़े हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 6.7 अरब डॉलर से अधिक रहा और चीन जॉर्डन का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया। दोनों देश अगले वर्ष राजनयिक संबंधों की 50वीं वर्षगांठ भी मनाने वाले हैं।  

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अमेरिका-ईरान युद्धविराम वार्ता में गतिरोध के बीच डोनाल्ड ट्रंप
अमेरिका-ईरान युद्धविराम वार्ता में गतिरोध, ट्रंप ने ईरान से ‘सरेंडर’ करने को कहा

वॉशिंगटन/तेहरान, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने और व्यापक शांति समझौते की दिशा में चल रही कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। दोनों देशों के बीच 60 दिनों की बातचीत की समयसीमा पूरी हो गई, लेकिन कोई व्यापक समझौता नहीं हो सका। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से ‘सरेंडर’ करने की अपील की है और स्पष्ट किया कि अमेरिका मौजूदा समझौते को आगे बढ़ाने के लिए तैयार नहीं है।   60 दिन की बातचीत बेनतीजा   अमेरिका और ईरान ने जून में एक समझौते के तहत 60 दिनों के भीतर व्यापक शांति समझौते पर पहुंचने की कोशिश करने पर सहमति जताई थी। इस अवधि में हॉर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और ईरान की परमाणु गतिविधियों से जुड़े मुद्दों पर भी समाधान तलाशना था। लेकिन दोनों पक्षों के बीच अविश्वास और शर्तों को लेकर मतभेद बने रहे। ट्रंप ने कहा है कि ईरान वह समझौता करने को तैयार नहीं है जिसे अमेरिका जरूरी मानता है। उन्होंने अमेरिका के युद्ध में शामिल होने का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना बताया।   ट्रंप ने ईरान से कहा- सफेद झंडा दिखाए   ट्रंप ने ईरान के लिए अपनी भाषा और सख्त करते हुए उसे ‘सफेद झंडा दिखाने’ यानी आत्मसमर्पण करने को कहा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका ईरान पर दबाव बनाए रखेगा। ट्रंप के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में अमेरिका युद्धविराम या समझौते की अवधि बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। वहीं ईरान ने अमेरिकी दबाव को स्वीकार करने के संकेत नहीं दिए हैं। ईरानी पक्ष का कहना है कि मौजूदा स्थिति के लिए अमेरिका जिम्मेदार है और तेहरान अपनी प्रमुख मांगों से पीछे नहीं हटेगा।   हॉर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा मुद्दा   अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का एक बड़ा केंद्र हॉर्मुज जलडमरूमध्य है। यह दुनिया के प्रमुख तेल और LNG परिवहन मार्गों में से एक है। युद्ध और तनाव के कारण यहां से जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट आई है। Reuters के अनुसार, 16 अगस्त को कोई भी टैंकर हॉर्मुज से नहीं गुजरा, जबकि इससे पहले सामान्य परिस्थितियों में यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में जहाज गुजरते थे। इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। मंगलवार को ब्रेंट क्रूड करीब 91 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, क्योंकि बाजार को आपूर्ति बाधित होने की आशंका है।   आगे बढ़ सकता है सैन्य तनाव   वार्ता में गतिरोध के बीच ईरान ने संकेत दिया है कि यदि कूटनीतिक प्रयास विफल रहते हैं तो वह हॉर्मुज क्षेत्र में और अधिक आक्रामक सैन्य रुख अपना सकता है। दूसरी ओर, अमेरिका ने ईरान पर नौसैनिक नाकाबंदी और आर्थिक दबाव जारी रखने की बात कही है। ऐसे में फिलहाल युद्धविराम की जगह सैन्य और आर्थिक दबाव बढ़ने का खतरा दिखाई दे रहा है। हालांकि, पर्दे के पीछे बातचीत की कुछ संभावनाएं अभी भी बनी हुई हैं।

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