मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध अब और गंभीर होता जा रहा है। Iran और Israel के बीच चल रहे संघर्ष का 11वां दिन है, लेकिन हालात शांत होने के बजाय और ज्यादा तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। लगातार हो रहे हमलों और जवाबी कार्रवाई के कारण पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ गई है, जबकि इस युद्ध का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजारों और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी साफ दिखाई देने लगा है।
इस बीच Iran ने एक बड़ा बयान देते हुए चेतावनी दी है कि अगर तनाव इसी तरह जारी रहा तो हॉर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति पूरी तरह रोक दी जाएगी। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि “हॉर्मुज से एक लीटर तेल भी नहीं जाने दिया जाएगा।”
रिपोर्टों के मुताबिक ईरान की राजधानी तेहरान में कई जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। इसके जवाब में ईरान ने भी इजराइल की ओर मिसाइलें दागने का दावा किया है।
यह हमला उस समय हुआ जब हाल ही में देश में नेतृत्व परिवर्तन के बाद Mojtaba Khamenei को नया सुप्रीम लीडर बनाए जाने की खबर सामने आई। वह पूर्व सुप्रीम लीडर Ali Khamenei के बेटे हैं।
दूसरी ओर इजराइली सेना ने कहा कि उसने ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाते हुए जवाबी हमले किए हैं। इनमें मिसाइल लॉन्च साइट्स और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े कमांड सेंटर शामिल बताए गए हैं।
संघर्ष का असर अब पड़ोसी देशों तक भी फैलता दिख रहा है। Lebanon की राजधानी क्षेत्र में भी तनाव बढ़ गया है, जहां इजराइल ने बेरूत के दक्षिणी इलाकों पर हवाई हमले किए। इन इलाकों को Hezbollah से जुड़े ठिकानों के रूप में देखा जाता है।
वहीं Qatar की राजधानी दोहा में भी धमाकों की खबरें सामने आईं। कतर के अधिकारियों ने बताया कि सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी और तस्वीरें फैलाने के आरोप में 300 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है।
मानवाधिकार संगठन Human Rights Watch ने आरोप लगाया है कि दक्षिणी लेबनान के रिहायशी इलाकों में इजराइल द्वारा व्हाइट फॉस्फोरस का इस्तेमाल किया गया, जो अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन माना जाता है।
इस युद्ध का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ रहा है। तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। वहीं यूरोप में प्राकृतिक गैस की कीमतों में भी तेज उछाल देखा गया है।
तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका के चलते एशिया और यूरोप के कई प्रमुख शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई है।
इस संघर्ष के बीच Saudi Arabia ने बताया कि उसने शायबह तेल क्षेत्र की ओर बढ़ रहे एक ड्रोन को मार गिराया। वहीं Bahrain ने भी ईरानी हमलों के बाद अपने ऊर्जा ढांचे को नुकसान पहुंचने की जानकारी दी है।
इस बीच युद्ध को लेकर कूटनीतिक स्तर पर भी गतिविधियां तेज हो गई हैं। Donald Trump और Vladimir Putin के बीच करीब एक घंटे तक फोन पर बातचीत हुई। रूस की ओर से इस युद्ध को रोकने के लिए कुछ संभावित प्रस्तावों पर चर्चा की गई और साथ ही मिडिल ईस्ट में बढ़ते ऊर्जा संकट को लेकर भी चेतावनी दी गई।
फिलहाल हालात ऐसे हैं कि युद्ध के जल्द खत्म होने के संकेत दिखाई नहीं दे रहे हैं। लगातार बढ़ती सैन्य गतिविधियों और कूटनीतिक बयानबाजी के बीच पूरी दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या आने वाले दिनों में इस संघर्ष का कोई राजनीतिक या कूटनीतिक समाधान निकल पाएगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
न्यूयॉर्क: भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में आतंकवाद से जुड़े प्रतिबंधों और आतंकियों की सूची में शामिल करने या हटाने की प्रक्रिया को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। भारत ने कहा कि सुरक्षा परिषद की सदस्यता का इस्तेमाल किसी देश के संकीर्ण राजनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। बुधवार को सुरक्षा परिषद की कार्यप्रणाली पर हुई खुली बहस में भारत ने आतंकियों और आतंकी संगठनों की लिस्टिंग और डीलिस्टिंग की प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग की। भारत ने कहा कि ऐसे फैसले स्पष्ट मानदंड और ठोस दस्तावेजों के आधार पर होने चाहिए, न कि राजनीतिक समीकरणों के हिसाब से। आतंकियों को बचाने या फंसाने का मंच न बने UNSC संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रभारी राजदूत योजना पटेल ने कहा कि सुरक्षा परिषद की सदस्यता अपने साथ बड़ी जिम्मेदारी लेकर आती है। इसे किसी भी देश के सीमित राजनीतिक हितों को साधने का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। भारत ने खास तौर पर चेताया कि राजनीतिक वजहों से किसी आतंकवादी को प्रतिबंध सूची से हटाने या बिना पर्याप्त आधार के किसी संगठन को आतंकी घोषित करने की कोशिश सुरक्षा परिषद की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाती है। नई दिल्ली का कहना है कि लिस्टिंग और डीलिस्टिंग की प्रक्रिया में ऑब्जेक्टिव क्राइटेरिया, पारदर्शिता और पर्याप्त दस्तावेजी आधार जरूरी हैं। भारत पहले भी उठा चुका है ‘छिपे वीटो’ का मुद्दा भारत लंबे समय से UNSC की प्रतिबंध समितियों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की मांग करता रहा है। नई दिल्ली का आरोप रहा है कि कई मामलों में आतंकियों को सूचीबद्ध करने के प्रस्तावों पर निर्णय की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होती। भारत ने विशेष रूप से 1267 अल-कायदा प्रतिबंध समिति के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। नई दिल्ली का कहना है कि किसी प्रस्ताव को तकनीकी आधार पर रोकने या खारिज करने की वजह स्पष्ट नहीं होने से पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं। भारत पहले ऐसी स्थिति को ‘डिस्गाइज्ड वीटो’ यानी छिपा हुआ वीटो बता चुका है। पाकिस्तान आधारित आतंकियों के मामलों में भी अड़चन भारत की चिंता का एक बड़ा कारण पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों को वैश्विक प्रतिबंध सूची में शामिल करने की कोशिशों से जुड़ा है। नई दिल्ली पहले भी ऐसे प्रस्तावों के दौरान अड़चन आने की बात कह चुकी है। भारत का आरोप रहा है कि सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य चीन ने पाकिस्तान स्थित कुछ आतंकियों को सूचीबद्ध करने के भारतीय प्रयासों पर रोक लगाई या उन्हें आगे बढ़ने से रोका। नई दिल्ली का कहना है कि यदि ठोस सबूतों के आधार पर पेश किए गए प्रस्तावों को राजनीतिक कारणों से रोका जाता है, तो इससे आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबद्धता कमजोर होती है। 8 महीने बाद भी कई समितियों के अध्यक्ष तय नहीं भारत ने UNSC की सहायक समितियों के अध्यक्षों की नियुक्ति में हो रही देरी पर भी चिंता जताई। 2026 के आठ महीने बीतने के बावजूद परिषद की कई सहायक समितियों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष तय नहीं हो सके हैं। भारत ने कहा कि ये समितियां सुरक्षा परिषद के फैसलों को लागू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। लेकिन अध्यक्षों की नियुक्ति में देरी के कारण उनका कामकाज प्रभावित हो रहा है। भारत ने इस प्रक्रिया के लिए एक स्पष्ट और तय समयसीमा निर्धारित करने की मांग की। डेनमार्क ने भी देरी पर जताई चिंता अगस्त में UNSC की अध्यक्षता कर रहे डेनमार्क ने भी सहायक समितियों के अध्यक्षों की नियुक्ति में हो रही देरी को असाधारण बताया। डेनमार्क के मुताबिक, यह देरी सुरक्षा परिषद की प्रभावशीलता, विश्वसनीयता और संस्थागत मजबूती को प्रभावित कर रही है। डेनमार्क ने परिषद के सदस्यों से गतिरोध खत्म करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और लचीला रुख अपनाने की अपील की। सुरक्षा परिषद में बड़े सुधार की मांग भारत ने बहस के दौरान सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार की जरूरत को भी जोरदार तरीके से उठाया। भारत का कहना है कि 1945 में बनी व्यवस्था आज की वैश्विक वास्तविकताओं को पूरी तरह नहीं दर्शाती। भारत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता पिछले आठ दशकों में कई गुना बढ़ चुकी है, लेकिन सुरक्षा परिषद की संरचना और काम करने का तरीका पुराने दौर की परिस्थितियों पर आधारित है। नई दिल्ली ने यह भी मांग की कि सुरक्षा परिषद के निर्वाचित गैर-स्थायी सदस्यों और व्यापक संयुक्त राष्ट्र महासभा की महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में भूमिका बढ़ाई जाए। भारत के मुताबिक, महासचिव के चुनाव जैसी अहम प्रक्रियाओं में भी निर्वाचित सदस्यों की अधिक भागीदारी होनी चाहिए। भारत ने साफ किया कि UNSC को आज और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए अधिक पारदर्शी, प्रतिनिधित्वपूर्ण और प्रभावी बनाना समय की जरूरत है।
Israel Gaza Investigation: गाजा युद्ध के दौरान हुई दो चर्चित घटनाओं को लेकर इजरायली सेना ने आपराधिक जांच शुरू करने का फैसला किया है। सेना अब 5 वर्षीय फिलिस्तीनी बच्ची हिंद रजब, उसके परिवार के सदस्यों और गाजा में मारे गए 15 पैरामेडिक्स की मौत की जांच करेगी। यह फैसला युद्ध के दौरान सैनिकों के आचरण से जुड़े करीब 150 मामलों की समीक्षा के बाद लिया गया है। इजरायली सेना के इस कदम से गाजा में सैन्य कार्रवाई को लेकर जवाबदेही और अंतरराष्ट्रीय दबाव की चर्चा फिर तेज हो गई है। इसी बीच ऑस्ट्रेलिया ने वर्ल्ड सेंट्रल किचन के सात राहतकर्मियों की मौत के मामले में इजरायल द्वारा आपराधिक आरोप नहीं लगाए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है। हिंद रजब की मौत मामले की होगी जांच इजरायली सेना के अनुसार, फरवरी 2024 में हिंद रजब और उसके परिवार की मौत की घटना की अब आपराधिक जांच की जाएगी। रिपोर्ट के मुताबिक, हिंद उस वाहन में मौजूद थी जिसमें उसके रिश्तेदार और चार अन्य बच्चे भी थे। गाजा सिटी से सैन्य अभियान के दौरान निकलने की कोशिश कर रहे इस वाहन पर गोलीबारी हुई थी। हिंद रजब की मौत का मामला लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा है। अब इजरायली सैन्य जांच के आपराधिक चरण में जाने से इस घटना में शामिल सैनिकों की भूमिका पर नए सिरे से सवाल उठेंगे। 15 पैरामेडिक्स की मौत की भी जांच इजरायली सेना मार्च 2025 में गाजा के रफाह इलाके में मारे गए 15 फिलिस्तीनी चिकित्सा कर्मियों के मामले की भी आपराधिक जांच करेगी। रिपोर्ट के अनुसार, ये पैरामेडिक्स घायल लोगों की मदद के लिए घटनास्थल पर पहुंचे थे। आरोप है कि उनके वाहनों पर गोलीबारी की गई और बाद में उनके शवों को बुलडोजर की मदद से हटाकर सामूहिक कब्र में दफन किया गया। इस घटना से जुड़े फोन वीडियो और एकमात्र जीवित बचे व्यक्ति के बयान भी सामने आए थे। इन्हीं घटनाक्रमों के आधार पर मामले की जांच को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठते रहे हैं। 150 घटनाओं की समीक्षा के बाद फैसला इजरायली सेना ने युद्ध के दौरान सैनिकों के आचरण से जुड़ी करीब 150 घटनाओं की समीक्षा की है। इनमें से हिंद रजब और 15 पैरामेडिक्स की मौत से जुड़े मामलों में आपराधिक जांच शुरू करने का निर्णय लिया गया। हालांकि, सेना ने वर्ल्ड सेंट्रल किचन और डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के राहतकर्मियों की मौत से जुड़ी तीन अन्य घटनाओं में आपराधिक जांच शुरू नहीं करने का फैसला किया है। ऑस्ट्रेलिया ने इजरायल पर जताई नाराजगी इसी बीच ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने वर्ल्ड सेंट्रल किचन के सात राहतकर्मियों की मौत के मामले में इजरायल के फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। मृतकों में ऑस्ट्रेलियाई नागरिक जोमी फ्रैंककॉम भी शामिल थीं। वोंग ने कहा कि इजरायल के फैसले की जानकारी ऑस्ट्रेलियाई सरकार को सार्वजनिक घोषणा से कुछ ही समय पहले दी गई। उनका कहना था कि इससे फ्रैंककॉम के परिवार को पहले से जानकारी देने का मौका भी नहीं मिला। ऑस्ट्रेलिया ने यह भी सवाल उठाया कि मानवीय सहायता के लिए निर्धारित क्षेत्र में राहतकर्मियों के काफिले को तीन बार निशाना क्यों बनाया गया और हमले से जुड़े ड्रोन फुटेज अब तक ऑस्ट्रेलिया को क्यों उपलब्ध नहीं कराए गए। गाजा में फिर एयरस्ट्राइक, 10 लोगों की मौत इन घटनाओं के बीच गाजा में हिंसा जारी है। स्थानीय अस्पतालों और फिलिस्तीनी रेड क्रिसेंट के अनुसार, बुधवार को दो इजरायली हवाई हमलों में कम से कम 10 लोगों की मौत हुई। गाजा में जारी हमलों के बीच प्रस्तावित संघर्षविराम को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की ओर से इजरायल से गाजा में हमलों की तीव्रता कम करने का आग्रह किए जाने के बाद भी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां जारी रहीं। ईरान और इराक के बीच भी बढ़ी हलचल क्षेत्रीय तनाव का असर ईरान और इराक के संबंधों पर भी दिखाई दिया। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ तीन दिवसीय यात्रा पर इराक पहुंचे। इस दौरान उनकी इराकी अधिकारियों और ईरान समर्थित राजनीतिक समूहों के नेताओं से मुलाकात की उम्मीद है। ईरान समर्थित इराकी मिलिशिया की गतिविधियां भी बगदाद के लिए चुनौती बनी हुई हैं। इराक एक तरफ अमेरिका के साथ संबंध बनाए रखना चाहता है, वहीं दूसरी ओर ईरान के साथ अपने रिश्तों को भी संतुलित करने की कोशिश कर रहा है। फ्रांस और ईरान के बीच राजनयिक तनाव फ्रांस ने भी ईरान के खिलाफ राजनयिक कार्रवाई का ऐलान किया है। फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय के अनुसार, ईरानी सुरक्षा बलों द्वारा दो फ्रांसीसी राजनयिक कर्मचारियों के साथ कथित व्यवहार के जवाब में पेरिस ईरानी दूतावास के दो कर्मचारियों को देश से बाहर करेगा। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ने फ्रांसीसी राजनयिकों पर विदेशी हस्तक्षेप से जुड़े एक मामले में संदिग्ध लोगों के साथ गुप्त बैठक में शामिल होने का आरोप लगाया है। फ्रांस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कार्रवाई को अनुचित बताया है। गाजा में सैन्य कार्रवाई, राहतकर्मियों की मौत और इजरायली सेना की जवाबदेही को लेकर बढ़ती जांच के बीच पश्चिम एशिया में कूटनीतिक तनाव भी लगातार गहरा रहा है।
इस्लामाबाद, एजेंसियां। पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल पर लागू प्रतिबंध को एक महीने के लिए और बढ़ा दिया है। पाकिस्तान एयरपोर्ट्स अथॉरिटी (PAA) की ओर से जारी नए NOTAM के अनुसार भारतीय पंजीकृत विमानों के साथ-साथ भारतीय एयरलाइंस द्वारा संचालित, स्वामित्व वाले या लीज पर लिए गए विमानों को पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। यह प्रतिबंध 24 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। सैन्य उड़ानों पर भी लागू नए NOTAM में स्पष्ट किया गया है कि प्रतिबंध केवल वाणिज्यिक उड़ानों तक सीमित नहीं है। भारतीय सैन्य विमानों पर भी पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की रोक जारी रहेगी। यह प्रतिबंध कराची और लाहौर दोनों फ्लाइट इन्फॉर्मेशन रीजन (FIR) पर लागू है। 2025 से जारी है हवाई क्षेत्र विवाद भारत और पाकिस्तान के बीच हवाई क्षेत्र संबंधी प्रतिबंध अप्रैल 2025 में पहलगाम हमले के बाद बढ़े तनाव के बीच लगाए गए थे। इसके बाद पाकिस्तान ने इस प्रतिबंध को कई बार आगे बढ़ाया है। भारत की ओर से भी पाकिस्तानी पंजीकृत और पाकिस्तानी एयरलाइंस के विमानों पर इसी तरह के हवाई क्षेत्र प्रतिबंध लागू हैं। भारतीय एयरलाइंस के बढ़े खर्च पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र इस्तेमाल नहीं कर पाने के कारण भारत से यूरोप और उत्तरी अमेरिका की ओर जाने वाली कई उड़ानों को लंबे वैकल्पिक मार्गों से उड़ान भरनी पड़ती है। इससे उड़ान का समय और ईंधन खर्च बढ़ता है, जिसका असर एयरलाइंस की परिचालन लागत पर पड़ रहा है।