मैथिली ठाकुर ने खास तौर पर घनश्यामपुर प्रखंड में सरकारी डिग्री कॉलेज की स्थापना और अलीनगर विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न अस्पतालों में डॉक्टरों तथा स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति का मुद्दा उठाया।
मैथिली ठाकुर ने मुख्यमंत्री को बताया कि घनश्यामपुर प्रखंड में फिलहाल कोई डिग्री कॉलेज नहीं है। इसके कारण क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को स्नातक स्तर की पढ़ाई के लिए दूसरे क्षेत्रों या जिलों का रुख करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए बाहर जाकर पढ़ाई करना अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन जाता है। वहीं छात्राओं के सामने आवागमन और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां भी रहती हैं। इन परिस्थितियों के कारण कई मेधावी विद्यार्थी उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।
विधायक ने मुख्यमंत्री से घनश्यामपुर में सरकारी डिग्री महाविद्यालय की स्थापना के लिए आवश्यक बजटीय प्रावधान करने की मांग की, ताकि स्थानीय विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूर नहीं जाना पड़े।
बैठक के दौरान स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी मैथिली ठाकुर ने मुख्यमंत्री का ध्यान आकृष्ट कराया। उन्होंने बताया कि अलीनगर विधानसभा क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घनश्यामपुर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तारडीह और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कैथवार, कुर्सों नादियामी तथा पुतई में चिकित्सकों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की कमी है।
इन स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टर, जीएनएम, एएनएम, स्टाफ नर्स, ड्रेसर और फार्मासिस्ट जैसे पद लंबे समय से रिक्त बताए गए हैं या उपलब्ध कर्मियों की संख्या जरूरत के मुकाबले कम है।
विधायक के अनुसार इसका सीधा असर ग्रामीण आबादी की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। खासकर गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को समय पर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा मिलने में परेशानी होती है।
मैथिली ठाकुर ने मुख्यमंत्री से अलीनगर विधानसभा क्षेत्र के तीनों प्रखंडों—अलीनगर, तारडीह और घनश्यामपुर—के अस्पतालों में आवश्यक संख्या में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास और जनहित से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सरकार के सामने रखना उनकी जिम्मेदारी है। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों में सुधार से स्थानीय लोगों को सीधे लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान मैथिली ठाकुर के चेहरे पर सामान्य दिनों की तुलना में मुस्कान कुछ कम नजर आई। सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में इसे लेकर चर्चा हो सकती थी, लेकिन विधायक ने खुद इसकी वजह स्पष्ट कर दी।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री से मुलाकात से पहले उन्होंने अपने दांतों का इलाज कराया था। दांत में दर्द के कारण वह ठीक से मुस्कुरा नहीं पा रही थीं। इसी वजह से उनके चेहरे पर मुस्कान सामान्य से कम दिखाई दे रही थी।
मैथिली ठाकुर की मुख्यमंत्री से यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब अलीनगर क्षेत्र में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर स्थानीय जरूरतों को सरकार के सामने रखने की कोशिश की जा रही है। अब इन मांगों पर सरकार की ओर से क्या कदम उठाया जाता है, इस पर क्षेत्र के लोगों की नजर रहेगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
सहरसा। बिहार के सहरसा-मानसी रेलखंड पर स्थित सिमरी बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन पर बुधवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब हटिया-कोसी एक्सप्रेस के एक कोच के ब्रेक पैड में अचानक आग लग गई। ट्रेन के रुकते ही बोगी के नीचे से आग की लपटें और घना धुआं निकलने लगा। हालांकि रेलवे कर्मचारियों और फायर ब्रिगेड की तत्परता से करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया। राहत की बात यह रही कि किसी यात्री के घायल होने की सूचना नहीं है। 1 घंटे 13 मिनट की देरी से स्टेशन पहुंची थी ट्रेन ट्रेन संख्या 18625 हटिया-कोसी एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से करीब 1 घंटे 13 मिनट की देरी से सुबह 5:30 बजे सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन पहुंची थी। ट्रेन के रुकते ही थर्ड एसी कोच के पहिए के पास ब्रेक पैड से आग और तेज धुआं निकलने लगा। घटना को देखते ही रेलवे कर्मचारियों ने तुरंत यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ आग बुझाने की कार्रवाई शुरू की। ब्रेक ब्लॉक जाम होने से गर्म हुआ ब्रेक पैड रेलवे के तकनीकी कर्मचारियों की शुरुआती जांच में सामने आया कि ब्रेक ब्लॉक जाम होने के कारण अत्यधिक घर्षण पैदा हुआ। इसके चलते ब्रेक पैड काफी गर्म होकर जलने लगा और आग की लपटें निकलने लगीं। रेलवे कर्मचारियों ने छह अग्निशामक यंत्रों और स्थानीय फायर ब्रिगेड की मदद से आग पर काबू पाया। करीब आधे घंटे बाद स्थिति पूरी तरह सामान्य हो गई। प्रभावित कोच के यात्रियों को दूसरे डिब्बे में किया गया शिफ्ट सुरक्षा के मद्देनजर प्रभावित एसी कोच के यात्रियों को मानसी स्टेशन तक दूसरे कोच में शिफ्ट कर दिया गया। तकनीकी जांच और आवश्यक कार्रवाई पूरी होने के बाद ट्रेन को सुबह 6:13 बजे आगे रवाना कर दिया गया। फायर ब्रिगेड के फायरमैन संतोष कुमार ने बताया कि जब टीम मौके पर पहुंची, तब बोगी के नीचे ब्रेक पैड अत्यधिक गर्म होकर लाल हो चुका था और उससे धुआं तथा आग निकल रही थी। कुछ दिन पहले भी स्टेशन पर ट्रेन में लगी थी आग सिमरी बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में आग लगने की यह हाल के दिनों में दूसरी बड़ी घटना बताई जा रही है। इससे पहले 3 अगस्त 2026 को प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर खड़ी समस्तीपुर-सहरसा पैसेंजर मेमू ट्रेन के इंजन में भीषण आग लग गई थी। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बाद रेलवे की सुरक्षा और तकनीकी जांच व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मामले में रेलवे अधिकारियों की ओर से विस्तृत जांच की जा रही है।
बिहार के दरभंगा जिले की अलीनगर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक मैथिली ठाकुर ने बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र से जुड़ी शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को मुख्यमंत्री के सामने रखा और जल्द समाधान की मांग की। मैथिली ठाकुर ने खास तौर पर घनश्यामपुर प्रखंड में सरकारी डिग्री कॉलेज की स्थापना और अलीनगर विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न अस्पतालों में डॉक्टरों तथा स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति का मुद्दा उठाया। घनश्यामपुर में डिग्री कॉलेज की मांग मैथिली ठाकुर ने मुख्यमंत्री को बताया कि घनश्यामपुर प्रखंड में फिलहाल कोई डिग्री कॉलेज नहीं है। इसके कारण क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को स्नातक स्तर की पढ़ाई के लिए दूसरे क्षेत्रों या जिलों का रुख करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए बाहर जाकर पढ़ाई करना अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन जाता है। वहीं छात्राओं के सामने आवागमन और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां भी रहती हैं। इन परिस्थितियों के कारण कई मेधावी विद्यार्थी उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। विधायक ने मुख्यमंत्री से घनश्यामपुर में सरकारी डिग्री महाविद्यालय की स्थापना के लिए आवश्यक बजटीय प्रावधान करने की मांग की, ताकि स्थानीय विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूर नहीं जाना पड़े। अस्पतालों में डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी का मुद्दा बैठक के दौरान स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी मैथिली ठाकुर ने मुख्यमंत्री का ध्यान आकृष्ट कराया। उन्होंने बताया कि अलीनगर विधानसभा क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घनश्यामपुर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तारडीह और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कैथवार, कुर्सों नादियामी तथा पुतई में चिकित्सकों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की कमी है। इन स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टर, जीएनएम, एएनएम, स्टाफ नर्स, ड्रेसर और फार्मासिस्ट जैसे पद लंबे समय से रिक्त बताए गए हैं या उपलब्ध कर्मियों की संख्या जरूरत के मुकाबले कम है। विधायक के अनुसार इसका सीधा असर ग्रामीण आबादी की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। खासकर गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को समय पर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा मिलने में परेशानी होती है। तीनों प्रखंडों के अस्पतालों में नियुक्ति की मांग मैथिली ठाकुर ने मुख्यमंत्री से अलीनगर विधानसभा क्षेत्र के तीनों प्रखंडों—अलीनगर, तारडीह और घनश्यामपुर—के अस्पतालों में आवश्यक संख्या में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति करने की मांग की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास और जनहित से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सरकार के सामने रखना उनकी जिम्मेदारी है। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों में सुधार से स्थानीय लोगों को सीधे लाभ मिलेगा। मुलाकात के दौरान कम दिखी मुस्कान, विधायक ने खुद बताई वजह मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान मैथिली ठाकुर के चेहरे पर सामान्य दिनों की तुलना में मुस्कान कुछ कम नजर आई। सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में इसे लेकर चर्चा हो सकती थी, लेकिन विधायक ने खुद इसकी वजह स्पष्ट कर दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री से मुलाकात से पहले उन्होंने अपने दांतों का इलाज कराया था। दांत में दर्द के कारण वह ठीक से मुस्कुरा नहीं पा रही थीं। इसी वजह से उनके चेहरे पर मुस्कान सामान्य से कम दिखाई दे रही थी। मैथिली ठाकुर की मुख्यमंत्री से यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब अलीनगर क्षेत्र में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर स्थानीय जरूरतों को सरकार के सामने रखने की कोशिश की जा रही है। अब इन मांगों पर सरकार की ओर से क्या कदम उठाया जाता है, इस पर क्षेत्र के लोगों की नजर रहेगी।
बिहार में मॉनसून की गतिविधियां फिलहाल कमजोर जरूर हुई हैं, लेकिन मौसम पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। बुधवार, 12 अगस्त को राज्य के 18 जिलों में आंधी, गरज-चमक और वज्रपात को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक इन जिलों में तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। हालांकि राहत की बात यह है कि अगले 24 घंटे के दौरान बिहार के किसी भी हिस्से में भारी बारिश का अलर्ट नहीं है। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर मौसम में अचानक बदलाव देखने को मिल सकता है। 18 जिलों में आंधी और वज्रपात का येलो अलर्ट मौसम विभाग ने बुधवार को पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण, भोजपुर, बक्सर, कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, सहरसा, मधेपुरा, सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार में येलो अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में गरजते बादलों के साथ बिजली चमकने और करीब 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश भी हो सकती है। सीमावर्ती और उत्तर-पूर्वी इलाकों में कुछ जगहों पर बारिश की गतिविधियां अपेक्षाकृत अधिक रह सकती हैं। हालांकि फिलहाल राज्य में व्यापक स्तर पर भारी बारिश की स्थिति के संकेत नहीं हैं। पटना में कैसा रहेगा मौसम? राजधानी पटना में बुधवार को आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना है। गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है, लेकिन तेज या लगातार बारिश की संभावना कम बताई गई है। पटना में अधिकतम तापमान करीब 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। ऐसे में बादल छाए रहने के बावजूद लोगों को उमस और गर्मी से पूरी तरह राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। मॉनसून कमजोर पड़ा तो बढ़ा तापमान मंगलवार को बिहार में मॉनसून की गतिविधियां कमजोर रहने का असर तापमान पर भी दिखाई दिया। कई जिलों में अधिकतम तापमान में 1 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। सुपौल मंगलवार को राज्य का सबसे गर्म जिला रहा, जहां अधिकतम तापमान 37.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा पटना, समस्तीपुर, नालंदा, वाल्मीकि नगर, छपरा, मोतिहारी, सीवान, वैशाली, अरवल, कैमूर, औरंगाबाद, गया, शेखपुरा, मुंगेर, मधेपुरा, पूर्णिया और अररिया समेत कई जिलों में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा। भारी बारिश नहीं, लेकिन बिजली का खतरा बरकरार मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटे में मॉनसूनी गतिविधियां कमजोर रह सकती हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मौसम पूरी तरह साफ रहेगा। स्थानीय स्तर पर बादल बनने के कारण अचानक आंधी, बारिश और वज्रपात की स्थिति पैदा हो सकती है। खासकर किसानों, खेतों में काम करने वाले लोगों और खुले क्षेत्रों में रहने वालों को सावधानी बरतने की जरूरत है। गरज-चमक शुरू होने पर खुले मैदान, पेड़ और बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचना चाहिए और तुरंत सुरक्षित स्थान पर चले जाना चाहिए। बिहार में आज कैसा रहेगा मौसम? कुल मिलाकर बुधवार को बिहार का मौसम मिला-जुला रहने की संभावना है। राज्य में भारी बारिश से फिलहाल राहत रहेगी, लेकिन 18 जिलों में आंधी, तेज हवाओं और वज्रपात का खतरा बना रहेगा। पटना समेत कई इलाकों में बादल छाए रहने और हल्की बारिश होने के आसार हैं। मौसम के बदलते मिजाज को देखते हुए लोगों को स्थानीय मौसम अपडेट और चेतावनियों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।