बिहार

अशोक चौधरी अकाउंट विवाद पर साइबर जांच

बिहार के मंत्री अशोक चौधरी को धमकी, सोशल मीडिया अकाउंट विवाद पहुंचा पटना साइबर थाने

ranjan kumar tiwari अगस्त 5, 2026 0
बिहार के मंत्री अशोक चौधरी के सोशल मीडिया अकाउंट विवाद की जांच
अशोक चौधरी सोशल मीडिया विवाद

बिहार के मंत्री अशोक चौधरी को धमकी! सोशल मीडिया अकाउंट विवाद पहुंचा साइबर थाने

पटना। बिहार सरकार के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अशोक चौधरी के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट और जीमेल अकाउंट को लेकर चल रहा विवाद अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। मंत्री के आप्त सचिव रक्षित कश्यप ने पटना साइबर थाने में नया आवेदन देकर आरोप लगाया है कि अकाउंट का नियंत्रण वापस देने के बदले पैसे की मांग की जा रही है। साथ ही मंत्री के करीबी को ऑडियो संदेश भेजकर जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।

 

सोशल मीडिया अकाउंट एक्सेस को लेकर विवाद

 

 

रक्षित कश्यप ने शिकायत में कहा है कि मंत्री अशोक चौधरी के आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) और जीमेल अकाउंट का नियंत्रण पूर्व निजी सहायक के पास है। पद से हटने के बाद भी कथित तौर पर अकाउंट का एक्सेस वापस नहीं किया गया। आरोप है कि अकाउंट लौटाने के लिए पैसों की मांग की जा रही है।

 

 

साइबर थाने में दर्ज शिकायत, जांच शुरू

 

 

मामले में पहले से प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी दी गई है। अब नए तथ्यों के सामने आने के बाद पुलिस से अतिरिक्त धाराओं में कार्रवाई और पूरे मामले की गहन जांच की मांग की गई है। पटना साइबर थाना नए आवेदन के आधार पर मामले की जांच में जुट गया है।

 

 

मंत्री के करीबी को धमकी देने का आरोप

 

 

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मंत्री अशोक चौधरी के एक करीबी व्यक्ति को ऑडियो संदेश भेजकर गोली मारने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। इसके बाद मामले को केवल साइबर अपराध नहीं बल्कि आपराधिक धमकी और रंगदारी के एंगल से भी जांच करने की मांग की गई है।

 

 

पुलिस ने कहा- जांच के बाद होगी कार्रवाई

 

 

पटना साइबर पुलिस का कहना है कि शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों की जांच की जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों और सबूतों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस सोशल मीडिया अकाउंट विवाद, कथित धमकी और पैसों की मांग से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

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जहानाबाद में सड़क हादसे के बाद जला हाइवा ट्रक
जहानाबाद में कृषि सलाहकार की सड़क हादसे में मौत, आक्रोशित भीड़ ने हाइवा ट्रक में लगाई आग

बिहार: कृषि सलाहकार की सड़क हादसे में मौत, आक्रोशित भीड़ ने हाइवा ट्रक में लगाई आग जहानाबाद। बिहार के जहानाबाद जिले में मंगलवार देर शाम एक दर्दनाक सड़क हादसे में कृषि सलाहकार ज्ञानचंद शर्मा (50) की मौत हो गई। काको थाना क्षेत्र के सरस्वती मोड़ के पास तेज रफ्तार हाइवा ट्रक ने साइकिल सवार ज्ञानचंद शर्मा को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। हादसा इतना भयावह था कि उनकी मौके पर ही मौत हो गई।   ड्यूटी से लौटते समय हुआ हादसा     जानकारी के अनुसार, सफेपुर निवासी ज्ञानचंद शर्मा अमथुआ पंचायत में कृषि सलाहकार के पद पर कार्यरत थे। मंगलवार शाम वह काको बाजार से अपनी ड्यूटी पूरी कर साइकिल से घर लौट रहे थे। इसी दौरान सरस्वती मोड़ के पास पीछे से आ रहे हाइवा ट्रक ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। हादसे के बाद ट्रक उन्हें काफी दूर तक घसीटता चला गया।     ग्रामीणों ने सड़क जाम कर जताया आक्रोश     घटना के बाद मौके पर पहुंचे ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में लोगों ने जहानाबाद-बिहारशरीफ एनएच-33 को जाम कर दिया और दुर्घटनाग्रस्त हाइवा ट्रक में आग लगा दी। ट्रक में आग लगने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई और हाईवे पर वाहनों की लंबी कतार लग गई।     पुलिस ने चालक को हिरासत में लिया     सूचना मिलने के बाद काको थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। अग्निशमन विभाग की टीम ने पहुंचकर ट्रक में लगी आग पर काबू पाया। पुलिस ने हाइवा चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। वहीं, मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए जहानाबाद सदर अस्पताल भेज दिया गया है।     परिवार में पसरा मातम, जांच में जुटी पुलिस     परिजनों के अनुसार, ज्ञानचंद शर्मा हर दिन की तरह काम खत्म कर घर लौट रहे थे। अचानक हुए इस हादसे ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। काको थानाध्यक्ष राहुल कुमार ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और दोषी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।  

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पटना, एजेंसियां। बिहार में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए मुजफ्फरपुर और दरभंगा में औद्योगिक पार्क विकसित करने की योजना पर काम तेज हो गया है। इन पार्कों के जरिए राज्य में नए उद्योग स्थापित करने, निजी निवेश आकर्षित करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने की तैयारी है।   औद्योगिक विकास को मिलेगी नई गति   मुजफ्फरपुर और दरभंगा में औद्योगिक पार्क विकसित होने से इन क्षेत्रों में उद्योगों के लिए बेहतर आधारभूत ढांचा उपलब्ध हो सकेगा। पार्कों में औद्योगिक इकाइयों के लिए जमीन, सड़क, बिजली और अन्य जरूरी सुविधाओं को विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य बिहार में औद्योगिक गतिविधियों को कुछ प्रमुख शहरों तक सीमित रखने के बजाय अलग-अलग क्षेत्रों में विस्तार देना है।   स्थानीय उद्योग और निवेश को मिलेगा फायदा   औद्योगिक पार्क तैयार होने के बाद स्थानीय उद्यमियों के साथ-साथ बाहर से आने वाले निवेशकों को भी उद्योग स्थापित करने के लिए सुविधाजनक वातावरण मिल सकता है। इससे विनिर्माण और अन्य औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।   मुजफ्फरपुर पहले से ही लीची, खाद्य प्रसंस्करण और कई छोटे उद्योगों के लिए जाना जाता है, जबकि दरभंगा में कृषि आधारित उद्योगों और खाद्य प्रसंस्करण की संभावनाएं काफी अधिक हैं।   रोजगार के नए अवसर बनने की उम्मीद   औद्योगिक पार्कों में नई इकाइयां स्थापित होने पर स्थानीय युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। इसके अलावा परिवहन, लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग, रखरखाव और अन्य सहायक सेवाओं में भी रोजगार बढ़ने की संभावना है। इससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और युवाओं के दूसरे राज्यों में पलायन को कम करने में भी मदद मिल सकती है।   बिहार के औद्योगिक नक्शे को विस्तार देने की तैयारी   मुजफ्फरपुर और दरभंगा में औद्योगिक पार्कों की योजना बिहार में औद्योगिक आधार को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। बेहतर आधारभूत ढांचे और निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार होने पर इन दोनों शहरों के आसपास नए औद्योगिक क्लस्टर विकसित हो सकते हैं।   सरकार की कोशिश है कि औद्योगिक विकास के साथ स्थानीय संसाधनों और श्रम शक्ति का इस्तेमाल बढ़े तथा बिहार को निवेश और रोजगार के लिहाज से अधिक मजबूत बनाया जा सके।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। बिहार की बांकीपुर, मध्य प्रदेश की दतिया और गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव की मतगणना जारी है। शुरुआती रुझानों में बांकीपुर सीट पर जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर बढ़त बनाए हुए हैं, जबकि दतिया में कांग्रेस और मांजलपुर में भाजपा आगे चल रही है।   बांकीपुर में प्रशांत किशोर की बढ़त बरकरार   बिहार की बांकीपुर सीट पर मुकाबला दिलचस्प बना हुआ है। पांचवें राउंड की गिनती के बाद जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर सबसे आगे चल रहे हैं। उन्हें अब तक 8971 वोट मिले हैं। वहीं, भाजपा प्रत्याशी नीरज कुमार को 6652 वोट और राजद उम्मीदवार रेखा कुमारी को 1534 वोट मिले हैं।   इस सीट पर भाजपा, राजद और जन सुराज पार्टी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला माना जा रहा है।   दतिया में कांग्रेस ने बनाई बढ़त   मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर शुरुआती रुझानों में भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। तीसरे राउंड की मतगणना के बाद कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह को 12,432 वोट मिले हैं, जबकि भाजपा के आशुतोष तिवारी को 12,399 वोट मिले हैं। वहीं, आजाद समाज पार्टी के उम्मीदवार दामोदर यादव को 4874 वोट मिले हैं।   मांजलपुर में भाजपा को बड़ी बढ़त   गुजरात की मांजलपुर सीट पर भाजपा ने मजबूत बढ़त बना ली है। आठवें राउंड की गिनती के बाद भाजपा प्रत्याशी सतेंद्रभाई पटेल को 23,632 वोट मिले हैं। कांग्रेस उम्मीदवार भीखाभाई रबारी 10,123 वोटों के साथ पीछे चल रहे हैं। नोटा को अब तक 914 वोट मिले हैं।   तीनों सीटों पर क्यों हुआ उपचुनाव?   बांकीपुर सीट भाजपा विधायक नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। वहीं, दतिया सीट कांग्रेस विधायक की सदस्यता रद्द होने और मांजलपुर सीट भाजपा विधायक के निधन के कारण रिक्त हुई थी। तीनों सीटों पर चुनाव परिणाम राजनीतिक दलों के लिए अहम माने जा रहे हैं।

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kalpana जुलाई 30, 2026 0

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अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?