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Skanda Shashthi 2026 Puja Timings

स्कंद षष्ठी पर ये छोटा सा उपाय बदल सकता है आपकी पूजा का अनुभव, इस शुभ मुहूर्त में करें भगवान कार्तिकेय की आराधना

surbhi जून 19, 2026 0
Devotees offering prayers to Lord Kartikeya during Skanda Shashthi with lamps and flowers.
Skanda Shashthi 2026 Lord Kartikeya Puja

हिंदू धर्म में स्कंद षष्ठी का विशेष महत्व माना जाता है। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र भगवान कार्तिकेय को समर्पित होता है, जिन्हें स्कंद, मुरुगन और कुमारस्वामी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत और पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि, साहस और सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

स्कंद षष्ठी 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, स्कंद षष्ठी तिथि 19 जून 2026 को शाम 5:00 बजे से शुरू होकर 20 जून 2026 को दोपहर 3:47 बजे तक रहेगी।

इस दिन कई शुभ योग और विशेष मुहूर्त बन रहे हैं, जिनका धार्मिक दृष्टि से खास महत्व माना गया है।

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:03 बजे से 4:43 बजे तक
  • अमृत काल: सुबह 8:36 बजे से 10:06 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:54 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 2:42 बजे से 3:38 बजे तक

इस वर्ष स्कंद षष्ठी पर रवि योग और निशिता मुहूर्त जैसे शुभ संयोग भी बन रहे हैं, जिससे इस पर्व का आध्यात्मिक महत्व और बढ़ गया है।

स्कंद षष्ठी पर करें यह आसान उपाय

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्कंद षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय को लाल या पीले रंग के फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान "ॐ स्कन्दाय नमः" मंत्र का 108 बार जाप करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मन को शांति मिलती है।

इसके अलावा पूजा स्थल पर घी का दीपक जलाकर कुछ समय भगवान कार्तिकेय का ध्यान करने की भी परंपरा है। मान्यता है कि इससे मानसिक तनाव कम होता है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

भगवान कार्तिकेय और तारकासुर की कथा का संदेश

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कार्तिकेय ने अपनी दिव्य शक्ति और पराक्रम से अत्याचारी दैत्य तारकासुर का वध किया था। यह कथा केवल देव और दानव के युद्ध की कहानी नहीं है, बल्कि अच्छाई की बुराई पर विजय का प्रतीक भी मानी जाती है।

भगवान कार्तिकेय का जीवन यह संदेश देता है कि साहस, संयम और सही दिशा में किए गए प्रयास किसी भी कठिनाई पर विजय दिला सकते हैं।

स्कंद षष्ठी का आध्यात्मिक महत्व

स्कंद षष्ठी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मबल, सकारात्मक सोच और नई शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति से किए गए छोटे-छोटे उपाय भी जीवन में बड़े सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Nag Panchami 2026: नाग पूजा की विधि, मंत्र और धार्मिक महत्व जानें, कालसर्प दोष से जुड़े उपाय भी

Nag Panchami 2026: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इसी दौरान नाग देवता की पूजा से जुड़ी परंपराएं भी अलग-अलग क्षेत्रों में देखने को मिलती हैं। 3 अगस्त 2026 को सावन कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि है और बिहार, बंगाल, राजस्थान तथा ओडिशा समेत कुछ क्षेत्रों में इस दिन नाग पूजा की परंपरा का उल्लेख मिलता है। पंचांग के अनुसार 3 अगस्त को कृष्ण पक्ष पंचमी है। हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि उत्तर भारत में प्रचलित सावन शुक्ल पंचमी वाली नाग पंचमी 2026 में 17 अगस्त को पड़ रही है। इसलिए नाग पंचमी की तारीख क्षेत्र और पंचांग परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है। नाग पंचमी के अवसर पर नाग देवता की पूजा, नाग-नागिन की आकृति बनाने, घर के मुख्य द्वार पर चित्र उकेरने और धान, धान का लावा, दूर्वा आदि अर्पित करने की परंपरा बताई जाती है। धार्मिक मान्यताओं में नाग पूजा को परिवार की सुख-समृद्धि और सर्प भय से मुक्ति की कामना से जोड़ा गया है। नाग पंचमी पर नाग पूजा क्यों की जाती है? हिंदू धार्मिक परंपरा में नाग देवताओं का संबंध भगवान शिव से भी माना जाता है। शिवजी के गले में नाग का विराजमान होना नागों के धार्मिक महत्व को दर्शाता है। इसी कारण सावन के दौरान नाग देवता की पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है। कई क्षेत्रों में नाग पंचमी के दिन मिट्टी या गोबर से नाग-नागिन की आकृतियां बनाई जाती हैं। घर के मुख्य द्वार पर नागों के चित्र बनाए जाते हैं और धान, धान का लावा, दूर्वा तथा अन्य पारंपरिक पूजन सामग्री से पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस पूजा से घर में सुख-समृद्धि आती है और सर्प या विषैले जीवों के भय से रक्षा होती है। नाग पंचमी की कथा: राजा जनमेजय और आस्तिक मुनि नाग पंचमी से जुड़ी एक प्रमुख धार्मिक कथा राजा परीक्षित के पुत्र जनमेजय और आस्तिक मुनि से संबंधित है। मान्यता के अनुसार, राजा परीक्षित की मृत्यु सर्पदंश से हुई थी। इसके बाद उनके पुत्र राजा जनमेजय ने नागों का अंत करने के उद्देश्य से एक विशाल नाग यज्ञ कराया। यज्ञ के दौरान बड़ी संख्या में नाग अग्नि में गिरने लगे। इसी समय आस्तिक मुनि ने यज्ञ को रोकने का प्रयास किया। धार्मिक कथा के अनुसार, उनके हस्तक्षेप के बाद नाग यज्ञ को रोक दिया गया और नागों की रक्षा हुई। कथा में आगे बताया जाता है कि नागों ने आस्तिक मुनि के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए यह वरदान दिया कि सावन की पंचमी तिथि पर जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक नाग देवता की पूजा करेगा, उसके परिवार को नागवंश के भय से सुरक्षा मिलेगी। इसी कथा को नाग पंचमी की धार्मिक परंपरा से जोड़कर देखा जाता है। नाग पंचमी पूजा की विधि नाग पंचमी के दिन श्रद्धालु सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके नाग देवता की प्रतिमा, तस्वीर या मिट्टी से बनाई गई नाग-नागिन की आकृति स्थापित की जाती है। पूजा में क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार धान, धान का लावा, दूर्वा, पुष्प और अन्य सामग्री अर्पित की जाती है। भगवान शिव की पूजा के साथ नाग देवता का स्मरण किया जाता है। पूजा के दौरान श्रद्धालु परिवार की सुख-शांति, आरोग्य और सुरक्षा की प्रार्थना करते हैं। महत्वपूर्ण सावधानी: जीवित सांपों को पकड़कर या उनके सामने सीधे दूध रखने की कोशिश न करें। सांपों को दूध पिलाना उनके लिए प्राकृतिक या आवश्यक आहार नहीं है और इससे उन्हें नुकसान हो सकता है। नाग पूजा के लिए प्रतिमा, चित्र या प्रतीकात्मक पूजा करना अधिक सुरक्षित है। नाग पंचमी का नाग गायत्री मंत्र नाग पूजा में नाग गायत्री मंत्र के जाप की परंपरा भी बताई जाती है: “ॐ नवकुलाय विद्महे विषदंताय धीमहि तन्नो सर्पः प्रचोदयात्।” धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस मंत्र का 108 बार जाप किया जा सकता है। कुछ परंपराओं में शिवलिंग पर विराजमान नाग देवता का ध्यान करते हुए इस मंत्र के साथ पूजा की जाती है। आस्तिक मुनि का मंत्र नाग पंचमी पर आस्तिक मुनि का स्मरण करने की भी परंपरा है। “ॐ आस्तिक मुनिभ्यो नमः।” मान्यता के अनुसार, इस मंत्र का जाप नाग देवता और आस्तिक मुनि के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए किया जाता है। कुछ परंपराओं में इसे घर के मुख्य द्वार से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान में भी इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, किसी मंत्र के जाप से वास्तविक रूप से सांपों का घर में प्रवेश रुकने का वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इसे धार्मिक विश्वास के रूप में ही देखा जाना चाहिए। सर्प भय से मुक्ति के लिए मंत्र नाग पंचमी से जुड़ी परंपराओं में एक अन्य मंत्र का भी उल्लेख मिलता है: “सर्पापसर्प भद्रं ते गच्छ सर्प महाविष। जनमेजयस्य यज्ञान्ते आस्तीकवचनं स्मर॥” धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस मंत्र के जाप से सर्प भय से मुक्ति की प्रार्थना की जाती है और आस्तिक मुनि की कथा का स्मरण किया जाता है। नाग पंचमी और कालसर्प दोष ज्योतिषीय मान्यताओं में नाग पंचमी को कालसर्प दोष और नाग दोष से जुड़े धार्मिक उपायों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। जिन लोगों की कुंडली में ऐसे योग बताए जाते हैं, वे इस दिन भगवान शिव के साथ नाग देवता की पूजा करते हैं। हालांकि, कालसर्प दोष और उससे जुड़े प्रभाव ज्योतिषीय मान्यताओं का विषय हैं। इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित कारण या उपचार नहीं माना जाता। इसलिए पूजा को आस्था और धार्मिक परंपरा के रूप में ही देखना उचित है। नाग पंचमी पर दूध और धान का लावा चढ़ाने की मान्यता धार्मिक परंपराओं में नाग देवता को दूध और धान का लावा अर्पित करने का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि ऐसा करने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है और नाग भय से सुरक्षा की कामना पूरी होती है। लेकिन पूजा के लिए जीवित सांप को दूध पिलाने के बजाय नाग देवता की प्रतिमा, तस्वीर या प्रतीकात्मक रूप से पूजन करना चाहिए। नाग पंचमी का धार्मिक महत्व नाग पंचमी केवल नाग देवता की पूजा का पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान की भावना से भी जुड़ा हुआ है। भारतीय धार्मिक 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राम मंदिर चढ़ावा
राम मंदिर में फिर बढ़ा सोने-चांदी का चढ़ावा, 10 दिनों में मिला करीब 1 किलो सोना

अयोध्या, एजेंसियां। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में एक बार फिर सोने-चांदी के चढ़ावे में तेजी देखने को मिल रही है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पिछले 10 दिनों में श्रद्धालुओं ने करीब एक किलोग्राम सोना और लगभग तीन किलोग्राम चांदी दान स्वरूप अर्पित की है। सावन माह में दर्शनार्थियों की संख्या बढ़ने के साथ नकद दान के अलावा आभूषण, सिक्के और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं का चढ़ावा भी लगातार बढ़ रहा है। मंदिर प्रशासन के अनुसार, प्राप्त सभी दान का रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज किया जा रहा है और सुरक्षा मानकों के तहत उन्हें स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित रखा जा रहा है। इसके बाद ट्रस्ट की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार धातुओं की शुद्धता की जांच और अन्य औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं।   चोरी की घटना के बाद लौटा श्रद्धालुओं का भरोसा, झूलनोत्सव की तैयारियां तेज   राम मंदिर में कुछ समय पहले हुई चढ़ावा चोरी की घटना के बाद सोने-चांदी के दान में कमी आई थी, लेकिन अब सावन के दौरान श्रद्धालुओं का भरोसा फिर बढ़ता नजर आ रहा है। हाल के दिनों में मंदिर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। बुधवार को करीब 75 हजार, गुरुवार को सवा लाख और शुक्रवार को लगभग 80 हजार श्रद्धालुओं ने रामलला के दर्शन किए। इसी दौरान कर्नाटक के एक श्रद्धालु ने 600 ग्राम चांदी का हार भेंट किया, जबकि अन्य श्रद्धालुओं ने सोने-चांदी के आभूषण और सिक्के दान किए।   17 अगस्त को स्वर्ण झूले पर विराजेंगे रामलला   राम मंदिर ट्रस्ट ने सावन उत्सव और झूलनोत्सव की तैयारियां भी तेज कर दी हैं। सावन शुक्ल पंचमी यानी 17 अगस्त को रामलला को स्वर्ण झूले पर विराजमान कराया जाएगा। इसके लिए धर्म समिति विस्तृत कार्यक्रम तैयार कर रही है, जिसमें प्रतिदिन झूला दर्शन, भजन, कजरी और अन्य धार्मिक आयोजन शामिल होंगे। 15 अगस्त से मणि पर्वत पर पारंपरिक झूलनोत्सव की शुरुआत होगी, जबकि मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन की भी तैयारी की जा रही है। ट्रस्ट के पदाधिकारी और संत आयोजन को भव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए लगातार समीक्षा बैठकें कर रहे हैं।    

ranjan kumar tiwari अगस्त 1, 2026 0
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श्रावणी मेले में बाबाधाम देवघर जाने वाले कांवड़ियों के लिए स्पेशल ट्रेन की प्रतीकात्मक तस्वीर
श्रावणी मेले में श्रद्धालुओं को बड़ी राहत, रांची और धनबाद मंडल से बाबाधाम के लिए 4 नई स्पेशल ट्रेनें

कांवड़ियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए रेलवे का फैसला, देवघर और जसीडीह पहुंचना होगा आसान   रांची। विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले में बाबा बैद्यनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए भारतीय रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है। रांची और धनबाद रेल मंडल से बाबाधाम देवघर जाने वाले कांवड़ियों के लिए 4 नई स्पेशल ट्रेनों के संचालन का ऐलान किया गया है। इन ट्रेनों के शुरू होने से झारखंड के विभिन्न हिस्सों से देवघर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को काफी राहत मिलेगी।   भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष व्यवस्था   रेलवे अधिकारियों के अनुसार, श्रावणी मेले के दौरान हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचते हैं। इसी को देखते हुए अतिरिक्त स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं ताकि नियमित ट्रेनों पर दबाव कम हो और यात्रियों को सुरक्षित एवं सुगम यात्रा मिल सके। जसीडीह और बैद्यनाथधाम स्टेशनों पर भी विशेष यात्री सुविधाएं बढ़ाई गई हैं।   स्टेशनों पर बढ़ाई गई सुविधाएं   रेलवे ने जसीडीह, बैद्यनाथधाम और देवघर स्टेशनों पर अतिरिक्त टिकट काउंटर, हेल्प डेस्क, पेयजल, चिकित्सा सहायता, सुरक्षा बलों की तैनाती और भीड़ प्रबंधन की विशेष व्यवस्था की है। यात्रियों की सुविधा के लिए स्टेशन परिसरों में सूचना केंद्र भी बनाए गए हैं।   श्रद्धालुओं से नियमों का पालन करने की अपील   रेलवे प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे केवल अधिकृत टिकट लेकर यात्रा करें और भीड़भाड़ के दौरान रेलवे कर्मचारियों के निर्देशों का पालन करें। साथ ही, स्पेशल ट्रेनों के समय और संचालन संबंधी जानकारी रेलवे के आधिकारिक प्लेटफॉर्म से प्राप्त करने की सलाह दी गई है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 31, 2026 0
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