बिहार में सहायक शिक्षा विकास अधिकारी (AEDO) भर्ती परीक्षा को लेकर उठे पेपर लीक के आरोपों पर अब बड़ा अपडेट सामने आया है। Bihar Public Service Commission ने साफ तौर पर इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक होने की कोई पुष्टि नहीं हुई है। वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी Economic Offences Unit (EOU) को सौंप दी गई है, जिसने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित कर जांच तेज कर दी है।
राज्य में AEDO के कुल 935 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। परीक्षा का आयोजन 14 अप्रैल से शुरू होकर 15, 16 और 18 अप्रैल तक किया गया। परीक्षा शुरू होने से पहले ही पेपर लीक और धांधली के आरोप सामने आने लगे थे, जिससे अभ्यर्थियों में चिंता बढ़ गई।
मुंगेर से पुलिस ने परीक्षा से पहले 22 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें 20 अभ्यर्थी और एक परीक्षा केंद्र अधीक्षक भी शामिल थे। इसके अलावा नालंदा में एक महिला अभ्यर्थी को सॉल्व्ड आंसरशीट के साथ पकड़ा गया, साथ ही दो बायोमेट्रिक कर्मियों की भी गिरफ्तारी हुई।
EOU के ADG नैय्यर हसनैन के निर्देश पर एसपी राजेश कुमार के नेतृत्व में 8 सदस्यीय SIT गठित की गई है। टीम में एक DSP और पांच इंस्पेक्टर शामिल हैं, जो अब तक गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क का खुलासा करने में जुटे हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
Bihar Public Service Commission ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि सोशल मीडिया पर पेपर लीक को लेकर फैलाई जा रही खबरें पूरी तरह निराधार हैं। आयोग के अनुसार, राज्य के किसी भी परीक्षा केंद्र से पेपर लीक की कोई शिकायत या FIR दर्ज नहीं हुई है।
परीक्षा के दौरान एक अभ्यर्थी के कान में ब्लूटूथ डिवाइस मिलने की खबर सामने आई थी। इस पर आयोग ने स्पष्ट किया कि यह केवल कदाचार की कोशिश थी, जिसे समय रहते प्रशासन ने विफल कर दिया। इसे पेपर लीक से जोड़ना गलत है।
BPSC ने यह भी साफ किया है कि AEDO भर्ती परीक्षा का तीसरा चरण 20 और 21 अप्रैल 2026 को निर्धारित समय पर ही आयोजित किया जाएगा। आयोग और स्थानीय प्रशासन ने परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने का भरोसा दिलाया है।
साथ ही अभ्यर्थियों से अपील की गई है कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी समस्या के लिए आधिकारिक Grievance Portal का उपयोग करें।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका में भारतीय छात्रों के लिए स्टूडेंट वीजा हासिल करना पहले के मुकाबले काफी मुश्किल होता दिख रहा है। मई से अगस्त 2025 के दौरान भारतीय नागरिकों को जारी F-1 स्टूडेंट वीजा की संख्या 62% घटकर 22,149 रह गई, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में 58,694 वीजा जारी किए गए थे। यह गिरावट अमेरिकी प्रशासन की सख्त वीजा जांच और नए सुरक्षा उपायों के बीच सामने आई है। भारतीय छात्रों के वीजा में बड़ी गिरावट अमेरिकी विदेश विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2025 के प्रमुख एडमिशन सीजन में भारतीय छात्रों को जारी F-1 वीजा में भारी कमी आई। मई-अगस्त 2024 में जहां 58,694 वीजा जारी हुए थे, वहीं 2025 की समान अवधि में यह संख्या घटकर 22,149 रह गई। यह गिरावट ऐसे समय आई जब अमेरिकी प्रशासन ने वीजा आवेदकों की जांच और पृष्ठभूमि सत्यापन को सख्त किया था। सोशल मीडिया जांच और वीजा इंटरव्यू प्रक्रिया में बदलाव ने भी छात्रों के लिए प्रक्रिया को अधिक चुनौतीपूर्ण बनाया। अमेरिका में भारतीय छात्रों की कुल संख्या भी घटी वीजा जारी होने में गिरावट का असर अमेरिका में पढ़ रहे भारतीय छात्रों की कुल संख्या पर भी दिखाई दे रहा है। भारत सरकार द्वारा संसद में साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में भारतीय छात्रों की संख्या फरवरी 2025 के 3,78,787 से घटकर फरवरी 2026 में 3,52,644 रह गई। यह करीब 6.9% की सालाना गिरावट है। अमेरिकी विश्वविद्यालयों के एक सर्वेक्षण में भी अंतरराष्ट्रीय छात्रों को लेकर कमजोर रुझान सामने आया है। 585 संस्थानों में से 59% ने 2026 के लिए अंतरराष्ट्रीय आवेदनों में कमी की जानकारी दी, जबकि 63% संस्थानों ने अगले शैक्षणिक वर्ष में विदेशी छात्रों की संख्या घटने का अनुमान जताया। OPT के जरिए विदेशी ग्रेजुएट्स को मिल रहा काम का मौका दूसरी ओर, अमेरिका में पढ़ाई पूरी करने वाले विदेशी छात्रों के लिए Optional Practical Training (OPT) अब भी महत्वपूर्ण रास्ता बना हुआ है। उपलब्ध नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में करीब 4.19 लाख विदेशी ग्रेजुएट्स OPT के तहत अमेरिका में काम कर रहे थे। OPT आम तौर पर विदेशी छात्रों को डिग्री पूरी करने के बाद अपने अध्ययन क्षेत्र से संबंधित काम का अनुभव हासिल करने का अवसर देता है। हालांकि, OPT को लेकर भी अमेरिकी प्रशासन में बदलाव की चर्चा चल रही है। प्रशासन विदेशी ग्रेजुएट्स के OPT के जरिए काम करने पर 1 लाख डॉलर की संभावित फीस पर विचार कर रहा है। यह प्रस्ताव अभी अंतिम नीति नहीं है और इसके लागू होने को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। सख्त नीतियों से बदल रहा स्टडी-एब्रॉड ट्रेंड भारतीय छात्रों के F-1 वीजा में भारी गिरावट और OPT को लेकर प्रस्तावित बदलावों ने अमेरिका में उच्च शिक्षा के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है। वीजा प्रक्रिया में देरी, कड़ी जांच और पढ़ाई के बाद नौकरी की अनिश्चितता छात्रों के फैसलों को प्रभावित कर रही है। हालांकि अमेरिका अभी भी भारतीय छात्रों के लिए प्रमुख उच्च शिक्षा गंतव्य बना हुआ है, लेकिन मौजूदा नीतिगत बदलावों के कारण कई छात्र दूसरे देशों के विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं। आने वाले महीनों में वीजा नियमों और OPT नीति में होने वाले बदलाव इस रुझान को और प्रभावित कर सकते हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। NEET UG 2026 में सफल उम्मीदवारों के लिए मेडिकल कॉलेजों में दाखिले की काउंसलिंग प्रक्रिया आज, 5 अगस्त 2026 से शुरू हो गई है। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) ने पहले राउंड के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस काउंसलिंग के जरिए 15% All India Quota के साथ AIIMS, JIPMER, केंद्रीय विश्वविद्यालयों, डीम्ड विश्वविद्यालयों और अन्य भाग लेने वाले संस्थानों में MBBS, BDS सहित संबंधित पाठ्यक्रमों की सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा। आज से शुरू हुआ रजिस्ट्रेशन MCC ने NEET UG 2026 काउंसलिंग का पहला राउंड शुरू कर दिया है। पात्र उम्मीदवारों को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार शुल्क जमा करना होगा और अपनी पसंद के कॉलेज व पाठ्यक्रमों का विकल्प भरना होगा। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे आवेदन करने से पहले MCC की ओर से जारी आधिकारिक निर्देश, पात्रता और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी ध्यान से जांच लें। इन सीटों पर मिलेगा दाखिले का मौका MCC की केंद्रीकृत काउंसलिंग में 15% All India Quota की सीटों के अलावा AIIMS, JIPMER, केंद्रीय विश्वविद्यालयों, ESIC, AFMS और डीम्ड विश्वविद्यालयों सहित कई संस्थानों की सीटें शामिल हैं। काउंसलिंग प्रक्रिया में उम्मीदवारों द्वारा भरे गए विकल्प, NEET UG 2026 की मेरिट और उपलब्ध सीटों के आधार पर सीट आवंटन किया जाएगा। उम्मीदवार इन बातों का रखें ध्यान NEET UG 2026 काउंसलिंग में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को रजिस्ट्रेशन, शुल्क भुगतान, चॉइस फिलिंग और चॉइस लॉकिंग की निर्धारित समयसीमा का पालन करना होगा। सीट आवंटन के बाद उम्मीदवारों को संबंधित संस्थान में रिपोर्टिंग और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। काउंसलिंग के दौरान किसी भी बदलाव या संशोधित तारीख के लिए उम्मीदवारों को MCC की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी नोटिस को ही अंतिम और विश्वसनीय स्रोत मानना चाहिए।
नई दिल्ली: सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए इंश्योरेंस सेक्टर में नौकरी पाने का मौका है। नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (NICL) ने Assistant Recruitment 2026 के तहत 500 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू की है। योग्य उम्मीदवार 7 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तारीख नजदीक है, इसलिए इच्छुक अभ्यर्थियों को आखिरी समय का इंतजार करने के बजाय जल्द आवेदन पूरा करने की सलाह दी जाती है। आवेदन आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से किया जा सकता है। NICL की आधिकारिक वेबसाइट 500 असिस्टेंट पदों पर होगी भर्ती इस भर्ती अभियान के जरिए देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 500 Assistant पद भरे जाएंगे। उम्मीदवारों को आवेदन करते समय राज्य या केंद्र शासित प्रदेश का चयन सावधानी से करना होगा, क्योंकि अभ्यर्थी केवल एक राज्य के लिए आवेदन कर सकता है। महत्वपूर्ण तारीखें भर्ती प्रक्रिया तारीख ऑनलाइन आवेदन शुरू 18 जुलाई 2026 आवेदन की अंतिम तारीख 7 अगस्त 2026 आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तारीख 7 अगस्त 2026 फेज-1 यानी प्रारंभिक परीक्षा 27 अगस्त 2026 फेज-2 यानी मुख्य परीक्षा 30 अक्टूबर 2026 कौन कर सकता है आवेदन? NICL Assistant Recruitment 2026 के लिए उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए। इसके अलावा उम्मीदवार की ग्रेजुएशन की परीक्षा का परिणाम 1 जुलाई 2026 तक घोषित हो चुका होना जरूरी है। आयु सीमा आवेदन करने वाले उम्मीदवार की उम्र: न्यूनतम आयु: 21 वर्ष अधिकतम आयु: 30 वर्ष आरक्षित वर्गों के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी। कितनी देनी होगी आवेदन फीस? आवेदन शुल्क उम्मीदवार की श्रेणी के अनुसार अलग-अलग है। SC, ST, PwBD और Ex-Servicemen: शुल्क नहीं अन्य सभी उम्मीदवार: 850 रुपये आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तारीख भी 7 अगस्त 2026 है। कैसे करें ऑनलाइन आवेदन? उम्मीदवार नीचे दिए गए आसान चरणों के जरिए आवेदन कर सकते हैं: NICL की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। Assistant Recruitment 2026 से संबंधित लिंक खोलें। पहले रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी करें। लॉगिन करके आवेदन फॉर्म भरें। आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें। अपनी श्रेणी के अनुसार आवेदन शुल्क जमा करें। फॉर्म को अंतिम रूप से सबमिट करें। भविष्य की जरूरत के लिए आवेदन फॉर्म का प्रिंटआउट या डिजिटल कॉपी सुरक्षित रखें। 7 अगस्त के बाद नहीं मिलेगा आवेदन का मौका NICL Assistant Recruitment 2026 के लिए आवेदन की अंतिम तारीख 7 अगस्त 2026 निर्धारित है। इसके बाद आवेदन विंडो बंद हो जाएगी। उम्मीदवारों को अंतिम दिन वेबसाइट पर ज्यादा ट्रैफिक या तकनीकी समस्या से बचने के लिए समय रहते आवेदन पूरा कर लेना चाहिए। जरूरी सलाह: आवेदन करने से पहले आधिकारिक भर्ती नोटिफिकेशन में अपनी पात्रता, राज्यवार रिक्तियां, आयु सीमा, परीक्षा पैटर्न और अन्य शर्तों को ध्यान से जांच लें।