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Gold, silver prices ease after festive rush

अक्षय तृतीया के बाद ठंडा पड़ा सर्राफा बाजार, 20 अप्रैल 2026 को सोना-चांदी में हल्की गिरावट

surbhi अप्रैल 20, 2026 0
Gold and silver jewelry displayed in market after Akshaya Tritiya as prices see slight dip
Gold Silver Price Drop After Akshaya Tritiya

अक्षय तृतीया के दौरान जबरदस्त खरीदारी के बाद सर्राफा बाजार में अब सुस्ती के संकेत दिखाई देने लगे हैं। 20 अप्रैल 2026 को सोने और चांदी की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि त्योहार के बाद मांग में कमी और अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुझानों का असर घरेलू कीमतों पर साफ नजर आ रहा है।

सोने की कीमतों में आज मामूली गिरावट देखने को मिली है। 24 कैरेट सोना, जो पिछले कारोबारी सत्र में ₹1,55,780 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था, आज ₹10 घटकर ₹1,55,770 पर आ गया है। इसी तरह 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने के दाम में भी ₹10 की हल्की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि यह गिरावट बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन संकेत देती है कि फिलहाल बाजार स्थिरता की ओर बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जो निवेशक लंबे समय के लिए सोना खरीदना चाहते हैं, उनके लिए यह समय अनुकूल हो सकता है। कीमतों में स्थिरता अक्सर निवेश के लिए अच्छा अवसर मानी जाती है, खासकर तब जब बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव न हो।

आज के सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम):

  • 24 कैरेट: ₹1,55,770 (₹10 की गिरावट)
  • 22 कैरेट: ₹1,42,790 (₹10 की गिरावट)
  • 18 कैरेट: ₹1,16,830 (₹10 की गिरावट)

शहरों की बात करें तो पटना और रांची में 24 कैरेट सोना ₹15,741 प्रति ग्राम पर बिक रहा है, जबकि मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु में यह ₹15,577 प्रति ग्राम है। दिल्ली में 24 कैरेट सोने का भाव ₹15,592 प्रति ग्राम दर्ज किया गया है।

वहीं चांदी की कीमतों में भी हल्की नरमी देखने को मिली है। आज चांदी ₹100 प्रति किलो सस्ती होकर ₹2,74,900 प्रति किलोग्राम पर आ गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी की कीमतों पर औद्योगिक मांग और वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव का सीधा प्रभाव पड़ता है।

आज के चांदी के दाम:

  • 1 ग्राम: ₹274.90
  • 100 ग्राम: ₹27,490
  • 1 किलोग्राम: ₹2,74,900 (₹100 की गिरावट)

शहरों के हिसाब से पटना और रांची में चांदी ₹2,80,000 प्रति किलो के स्तर पर है, जबकि दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु में यह ₹2,74,900 प्रति किलो पर बनी हुई है।

कुल मिलाकर, अक्षय तृतीया के बाद बाजार में आई यह हल्की गिरावट खरीदारों के लिए राहत भरी खबर है। आने वाले दिनों में कीमतें वैश्विक संकेतों और घरेलू मांग के आधार पर तय होंगी।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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भारती एयरटेल के मजबूत तिमाही नतीजों का प्रतीकात्मक दृश्य
भारती एयरटेल का शुद्ध लाभ 37.3% बढ़कर ₹8,167 करोड़ पहुंचा, ARPU में सुधार का मिला फायदा

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारती एयरटेल ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है। कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 37.3 प्रतिशत बढ़कर ₹8,167 करोड़ पहुंच गया। कंपनी के बेहतर प्रदर्शन में मजबूत ग्राहक आधार, औसत राजस्व प्रति उपयोगकर्ता (ARPU) में सुधार और कारोबार की स्थिर वृद्धि का अहम योगदान रहा।   ARPU में सुधार से कंपनी को मिला फायदा   भारती एयरटेल के प्रदर्शन में ARPU में लगातार सुधार महत्वपूर्ण रहा है। ARPU यानी प्रति ग्राहक औसत राजस्व बढ़ने से कंपनी की कमाई को मजबूती मिली है। मोबाइल सेवाओं के साथ डिजिटल और अन्य दूरसंचार सेवाओं में भी कंपनी की स्थिति मजबूत बनी हुई है。 कंपनी लगातार बेहतर ग्राहक गुणवत्ता और अधिक मूल्य वाले प्लान पर फोकस कर रही है। इससे प्रति ग्राहक होने वाली कमाई में सुधार देखने को मिल रहा है।   ग्राहक आधार बना मजबूत   एयरटेल का बड़ा और मजबूत ग्राहक आधार कंपनी की आय का प्रमुख आधार बना हुआ है। कंपनी ने मोबाइल, ब्रॉडबैंड और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने पर जोर दिया है。 मोबाइल डेटा की बढ़ती खपत और तेज इंटरनेट सेवाओं की मांग से भी दूरसंचार कारोबार को समर्थन मिल रहा है। 5G सेवाओं के विस्तार ने कंपनी के लिए नए अवसर पैदा किए हैं।   टेलीकॉम कारोबार पर निवेशकों की नजर   भारती एयरटेल का प्रदर्शन ऐसे समय आया है जब भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में कंपनियां ग्राहकों को बेहतर सेवाएं देने के साथ-साथ प्रति ग्राहक राजस्व बढ़ाने पर जोर दे रही हैं। टैरिफ में संभावित बदलाव, 5G नेटवर्क का विस्तार और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग आने वाले समय में एयरटेल के वित्तीय प्रदर्शन के लिए महत्वपूर्ण कारक रहेंगे।   कंपनी के शेयरों पर भी नजर   मुनाफे में 37.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी और मजबूत परिचालन प्रदर्शन से निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है। हालांकि, शेयर बाजार में कंपनी के प्रदर्शन पर वैश्विक संकेतों, बाजार की धारणा और भविष्य की कमाई के अनुमान का भी असर पड़ेगा। कुल मिलाकर, ₹8,167 करोड़ का शुद्ध लाभ भारती एयरटेल की मजबूत वित्तीय स्थिति को दर्शाता है। ARPU में सुधार और ग्राहक आधार में मजबूती कंपनी के आगे के विकास के लिए महत्वपूर्ण आधार बने हुए हैं।

ranjan kumar tiwari अगस्त 6, 2026 0
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PGIM इंडिया म्यूचुअल फंड के अंतरराष्ट्रीय फंड्स में SIP और STP पर अस्थायी रोक
PGIM इंडिया ने 3 इंटरनेशनल फंड्स में SIP और STP रजिस्ट्रेशन पर अस्थायी रोक लगाई

मुंबई, एजेंसियां। PGIM इंडिया म्यूचुअल फंड ने अपने तीन अंतरराष्ट्रीय फंड ऑफ फंड्स में सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) और सिस्टमेटिक ट्रांसफर प्लान (STP) के मौजूदा रजिस्ट्रेशन को अस्थायी रूप से निलंबित करने का फैसला किया है। यह बदलाव 7 अगस्त 2026 से लागू होगा।   इन तीन फंड्स पर पड़ेगा असर     PGIM इंडिया की ओर से जिन योजनाओं में SIP और STP रजिस्ट्रेशन को अस्थायी रूप से रोका गया है, उनमें शामिल हैं:   PGIM India Global Equity Opportunities Fund of Fund PGIM India Emerging Markets Equity Fund of Fund PGIM India Global Select Real Estate Securities Fund of Fund इन योजनाओं में पहले से चल रहे SIP और STP रजिस्ट्रेशन पर नए निर्देशों का असर पड़ेगा।   7 अगस्त से लागू होगा फैसला     म्यूचुअल फंड हाउस का यह निर्णय 7 अगस्त 2026 से प्रभावी होगा। यानी निवेशकों को इन तीन अंतरराष्ट्रीय योजनाओं में SIP और STP के जरिए निवेश जारी रखने को लेकर नए नियमों का सामना करना पड़ेगा।   PGIM इंडिया ने इससे पहले भी अपने अंतरराष्ट्रीय फंड्स में निवेश सीमा और SIP से जुड़े नियमों में बदलाव किए हैं। इन योजनाओं पर विदेशी निवेश से जुड़ी नियामकीय सीमाओं का प्रभाव रहा है।   अंतरराष्ट्रीय निवेश पर बढ़ा नियामकीय दबाव     भारतीय म्यूचुअल फंड कंपनियों के अंतरराष्ट्रीय फंड्स में निवेश पर SEBI और विदेशी निवेश की निर्धारित सीमाओं से जुड़े नियमों का असर पड़ता है। इसी वजह से कई फंड हाउस समय-समय पर लंपसम निवेश, SIP और STP की सीमा या उपलब्धता में बदलाव करते रहे हैं।   PGIM इंडिया का ताजा कदम भी उसके अंतरराष्ट्रीय फंड ऑफ फंड्स में निवेश प्रवाह को नियंत्रित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे अपने SIP या STP पर लागू नए नियमों की जानकारी फंड हाउस से जरूर जांच लें।   निवेशकों को क्या करना चाहिए     जिन निवेशकों का इन तीन योजनाओं में SIP या STP चल रहा है, उन्हें 7 अगस्त 2026 से लागू होने वाले बदलावों को ध्यान से देखना चाहिए। नई SIP/STP व्यवस्था शुरू करने या मौजूदा निवेश में बदलाव करने से पहले संबंधित योजना के आधिकारिक नोटिस और फंड हाउस की जानकारी देखना बेहतर होगा。   यह फैसला निवेश को खत्म करने या फंड से पैसा निकालने का निर्देश नहीं है, बल्कि SIP और STP रजिस्ट्रेशन से जुड़ा अस्थायी बदलाव है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 6, 2026 0
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LIC headquarters and stock market visuals highlighting India's largest government stake sale through OFS.
LIC OFS: सरकार ने चुपचाप जुटाए ₹31,522 करोड़, देश के सबसे बड़े OFS से बाजार भी रह गया हैरान

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC में 6.5% हिस्सेदारी बेचकर ₹31,522 करोड़ जुटा लिए हैं। यह भारत के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा ऑफर फॉर सेल (OFS) रहा। खास बात यह रही कि पूरी प्रक्रिया को बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दिया गया, जिससे बाजार में पहले से कोई हलचल नहीं हुई और शेयर की कीमत पर भी बड़ा दबाव नहीं पड़ा। सरकार को पहले से ही LIC में अपनी हिस्सेदारी घटाकर सार्वजनिक शेयरधारिता (Public Shareholding) बढ़ानी थी। सेबी के नियमों के अनुसार मई 2027 तक LIC में कम से कम 10% पब्लिक शेयरहोल्डिंग सुनिश्चित करनी है। इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार ने यह बड़ा कदम उठाया। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने अंतिम समय तक OFS की लॉन्च तारीख को पूरी तरह गोपनीय रखा। इसका उद्देश्य यह था कि बड़े ट्रेडर्स और निवेशक पहले से पोजीशन लेकर शेयर की कीमत में गिरावट न ला सकें। यही रणनीति सरकार के लिए फायदेमंद साबित हुई और शुरुआती योजना से कहीं अधिक शेयर बेचने में सफलता मिली। बाजार को नहीं लगी भनक सूत्रों के मुताबिक, इस डील से जुड़े निवेश बैंकों को भी अलग-अलग समय पर जानकारी दी गई। एक बैंक को तो स्टॉक एक्सचेंज में सूचना जारी होने से कुछ समय पहले ही बुलाकर बताया गया कि उसी शाम OFS लॉन्च किया जाएगा। केवल एक छोटी कोर टीम को पूरी योजना की जानकारी थी, जबकि बाकी सलाहकारों को बाजार बंद होने के बाद प्रक्रिया में शामिल किया गया। बिना फीस के काम करने को तैयार हुए बैंक इस डील की एक और खास बात यह रही कि सलाह देने वाले चारों निवेश बैंकों ने कोई एडवाइजरी फीस नहीं ली। बताया गया कि एक बैंक ने शुरुआत में मुफ्त में काम करने की पेशकश की, जिसके बाद बाकी बैंकों ने भी फीस छोड़ने का फैसला किया। सरकारी विनिवेश से जुड़ी डील में अक्सर बैंक बेहद कम या नाममात्र की फीस लेते हैं। सही समय का भी मिला फायदा बाजार को उम्मीद थी कि सरकार LIC के तिमाही नतीजों के बाद OFS लाएगी। लेकिन सरकार ने इससे पहले ही शेयर बिक्री शुरू कर दी। अधिकारियों का मानना था कि निवेशकों को असमंजस में रखने से शेयर की कीमत स्थिर रहेगी और बेहतर प्रतिक्रिया मिलेगी। छोटे ऑफर से शुरू हुई बड़ी डील सरकार ने शुरुआत में केवल 2.5% हिस्सेदारी बेचने की योजना बनाई थी, जबकि अच्छी मांग मिलने पर अतिरिक्त 4% हिस्सेदारी बेचने का विकल्प रखा गया। यह रणनीति सफल रही। संस्थागत निवेशकों के लिए खुला हिस्सा 3.32 गुना सब्सक्राइब हुआ। इसके बाद सरकार ने अतिरिक्त शेयर भी जारी कर दिए। रिटेल निवेशकों की ओर से भी अच्छी भागीदारी देखने को मिली और कुल OFS करीब 1.2 गुना सब्सक्राइब हुआ। इस बिक्री के बाद LIC में पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़कर 10% हो जाएगी, जिससे सेबी की निर्धारित शर्त पूरी हो जाएगी।  

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