मुंबई, एजेंसियां। अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 91 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने का असर मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत पर साफ दिखाई दिया। कारोबार खुलते ही सेंसेक्स करीब 250 अंक नीचे चला गया, जबकि निफ्टी 24,300 के स्तर से नीचे आ गया
सुबह 9:15 बजे निफ्टी 50 करीब 0.26% गिरकर 24,223.85 पर था। वहीं बीएसई सेंसेक्स 0.40% टूटकर 77,418.97 पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में 16 प्रमुख सेक्टरों में से 11 में गिरावट देखी गई। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक भी करीब 0.1% नीचे रहे।
शुरुआती कारोबार में IT शेयरों में बिकवाली ज्यादा देखने को मिली। Infosys और HCL Technologies समेत प्रमुख IT शेयरों पर दबाव रहा। बाजार में निवेशकों का रुख सतर्क है और ऊंचे कच्चे तेल के साथ वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव बाजार की धारणा को प्रभावित कर रहा है।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम की अवधि समाप्त होने और नए समझौते की संभावना कमजोर पड़ने से ब्रेंट क्रूड 91 डॉलर के पार पहुंच गया है। भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है, इसलिए तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई, चालू खाते और रुपये पर दबाव बढ़ने की चिंता है।
तकनीकी तौर पर 24,200 के आसपास निफ्टी का अहम सपोर्ट माना जा रहा है। इसके नीचे लगातार कारोबार होने पर 24,050 के आसपास अगला सपोर्ट देखा जा सकता है, जबकि ऊपर की तरफ 24,360-24,400 क्षेत्र तत्काल प्रतिरोध बन सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
दोहा, एजेंसियां। कतर में रहने वाले भारतीयों के लिए भारत पैसे भेजना अब और आसान हो गया है। Qatar Post ने India Post, Universal Postal Union (UPU) और NPCI International Payments Limited (NIPL) के सहयोग से UPI आधारित PosTransfer सेवा शुरू की है। इसके जरिए कतर से भारत में UPI-सक्षम बैंक खाते में सीधे पैसे भेजे जा सकेंगे। यह सेवा 15 अगस्त 2026 से उपलब्ध हुई है। Qatar Post के जरिए भेज सकेंगे पैसे नई व्यवस्था के तहत कतर में ग्राहक भाग लेने वाले Qatar Post आउटलेट पर जाकर भारत में पैसा भेज सकते हैं। इसके लिए लाभार्थी का UPI ID और जरूरी पहचान संबंधी जानकारी देनी होगी। भारत में प्राप्तकर्ता को अपने UPI ऐप के जरिए विदेशी रकम प्राप्त करने की सुविधा सक्रिय करनी होगी। इसके बाद राशि सीधे संबंधित UPI-सक्षम बैंक खाते में जमा हो जाएगी। कितनी रकम भेज सकेंगे? उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस सेवा में एक लेनदेन के लिए 10 से 4,000 कतर रियाल तक भेजे जा सकते हैं। भारतीय मुद्रा में अधिकतम सीमा ₹1 लाख प्रति लेनदेन है। प्रति लेनदेन 15 कतर रियाल का फ्लैट सेवा शुल्क निर्धारित किया गया है। कतर में रहने वाले भारतीयों को होगा फायदा कतर में बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं और नियमित रूप से अपने परिवारों को भारत पैसे भेजते हैं। नई सेवा से उन्हें पारंपरिक बैंकिंग या अन्य माध्यमों के अलावा डाक नेटवर्क और UPI का एक अतिरिक्त विकल्प मिलेगा। सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य सीमा-पार धन हस्तांतरण को अधिक सुविधाजनक, सुरक्षित और सुलभ बनाना है। भारत के UPI नेटवर्क का अंतरराष्ट्रीय विस्तार यह सेवा UPU के इंटरकनेक्शन प्लेटफॉर्म को भारत के UPI इकोसिस्टम से जोड़ती है। इससे अंतरराष्ट्रीय डाक नेटवर्क के जरिए UPI-सक्षम खातों में धन भेजना संभव हुआ है। भारत सरकार के मुताबिक India Post अन्य देशों के डाक ऑपरेटरों के साथ भी ऐसे PosTransfer-UPI कॉरिडोर शुरू करने पर काम कर रहा है।
नई दिल्ली। घरेलू LPG उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। अनिवार्य आधार बायोमेट्रिक e-KYC कराने की अंतिम तारीख 16 अगस्त से बढ़ाकर 23 अगस्त 2026 कर दी गई है। तेल विपणन कंपनियों ने यह फैसला गैस एजेंसियों पर बढ़ती भीड़ और उपभोक्ताओं की परेशानी को देखते हुए लिया है। सर्वर और ऐप की तकनीकी दिक्कत बनी आफत डेडलाइन बढ़ने के बावजूद उपभोक्ताओं की परेशानी कम नहीं हुई है। कई जगह गैस एजेंसियों पर लंबी कतारें लग रही हैं। आधिकारिक ऐप में तकनीकी समस्या और सर्वर डाउन रहने के कारण लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। कई उपभोक्ताओं को एजेंसी पहुंचने के बाद भी e-KYC पूरी नहीं हो पा रही है। 23 अगस्त तक e-KYC नहीं कराई तो क्या होगा? उपलब्ध जानकारी के मुताबिक e-KYC नहीं कराने पर LPG कनेक्शन तुरंत ब्लॉक या रद्द नहीं होगा, लेकिन सरकारी सब्सिडी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में उपभोक्ताओं को सब्सिडी का लाभ नहीं मिल पाएगा। गैस एजेंसी जाने की जरूरत नहीं उपभोक्ता सिलेंडर की डिलीवरी के समय डिलीवरी कर्मचारी के पास उपलब्ध डिवाइस से बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन कराने की सुविधा का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे एजेंसी पर लगने वाली लंबी कतार से बचा जा सकता है। मोबाइल से ऐसे करें e-KYC गैस कंपनी के आधिकारिक ऐप के जरिए भी प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश की जा सकती है। आधार आधारित फेस ऑथेंटिकेशन के लिए UIDAI का Aadhaar FaceRD ऐप इस्तेमाल किया जा सकता है। सर्वर पर ज्यादा लोड होने की स्थिति में सुबह जल्दी या देर रात प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश की जा सकती है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने विदेश में मौजूद ऐसी संपत्तियों और आय को घोषित करने के लिए Foreign Assets of Small Taxpayers–Disclosure Scheme (FAST-DS), 2026 शुरू की है, जिन्हें पात्र करदाताओं ने पहले आयकर रिटर्न में घोषित नहीं किया था। यह एकमुश्त स्वैच्छिक घोषणा योजना 16 अगस्त 2026 से लागू हो गई है और इसके तहत 31 दिसंबर 2026 तक आवेदन किया जा सकता है। किन संपत्तियों की हो सकेगी घोषणा योजना के तहत विदेश में मौजूद बैंक खाते, शेयर और अन्य वित्तीय निवेश, विदेशी कंपनियों में हिस्सेदारी, संपत्ति तथा अन्य विदेशी परिसंपत्तियों से संबंधित अघोषित जानकारी घोषित की जा सकती है। कुछ मामलों में विदेश में अर्जित लेकिन भारत में घोषित नहीं की गई आय भी इसके दायरे में आती है। दो अलग श्रेणियों में मिलेगा लाभ पहली श्रेणी में अघोषित विदेशी संपत्ति या आय का कुल मूल्य ₹1 करोड़ तक होने पर 30% कर के साथ कर के बराबर अतिरिक्त राशि देनी होगी, यानी कुल भुगतान 60% तक हो सकता है। दूसरी श्रेणी में कुछ ऐसी विदेशी संपत्तियां शामिल हैं जो पहले से कर चुकाई गई आय से खरीदी गई थीं या गैर-निवासी अवधि में हासिल हुई थीं, लेकिन रिटर्न में रिपोर्ट नहीं की गईं। इस श्रेणी में ₹5 करोड़ तक की संपत्ति के लिए ₹1 लाख का शुल्क निर्धारित है। घोषणा के बाद क्या फायदा मिलेगा सरकार के अनुसार, पात्र करदाता निर्धारित प्रक्रिया के तहत घोषणा और भुगतान पूरा करने पर संबंधित मामलों में अतिरिक्त कर, जुर्माने और अभियोजन से निर्धारित सुरक्षा प्राप्त कर सकते हैं। योजना का उद्देश्य छोटे करदाताओं को अपनी अघोषित विदेशी संपत्तियों को नियमित करने का एक सीमित अवसर देना है। हालांकि, पात्रता और छूट की शर्तें पूरी करना जरूरी होगा।