रांची। झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत बड़े पैमाने पर मतदाता सूची में बदलाव की तैयारी चल रही है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, अब तक ASDD (Absent, Shifted, Dead, Duplicate) श्रेणी में आने वाले मतदाताओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। मौजूदा रुझानों को देखते हुए अनुमान है कि अंतिम सूची से 25 से 30 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं। संशोधित ड्राफ्ट मतदाता सूची 5 अगस्त को जारी की जाएगी।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अनुसार, 22 जुलाई तक 4,15,364 मृत, 1,29,803 अनुपस्थित, 6,09,542 स्थायी रूप से स्थानांतरित और 1,61,926 पहले से निबंधित मतदाता ASDD श्रेणी में दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा 4,486 विदेशी नागरिक भी इस सूची में शामिल हैं। इन सभी को मिलाकर ASDD श्रेणी के मतदाताओं की संख्या 13 लाख से अधिक हो चुकी थी।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने बताया कि 23 जुलाई की सुबह तक ASDD श्रेणी में दर्ज मतदाताओं की संख्या बढ़कर 14.18 लाख हो गई है। उन्होंने कहा कि अंतिम स्थिति 5 अगस्त को ड्राफ्ट रोल प्रकाशित होने के बाद स्पष्ट होगी। ASDD श्रेणी में शामिल मतदाताओं के नाम प्रारंभिक ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं होंगे।
राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत गणना प्रपत्र भरने का काम अंतिम चरण में है। यह प्रक्रिया 29 जुलाई तक चलेगी। इसके बाद प्राप्त आंकड़ों का सत्यापन कर ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
चुनाव आयोग के अनुसार, पश्चिमी सिंहभूम जिले में अब तक सबसे अधिक ASDD श्रेणी के मतदाता मिले हैं। जिले में 50,775 मृत, 22,169 अनुपस्थित, 62,383 स्थानांतरित, 25,647 पहले से निबंधित और 310 विदेशी नागरिकों की पहचान की गई है। यह राज्य में सबसे अधिक संख्या है।
ASDD श्रेणी के मामलों में रांची जिला दूसरे स्थान पर है। यहां अब तक 39,684 मृत, 11,085 अनुपस्थित, 32,120 स्थानांतरित, 13,425 पहले से निबंधित और 303 विदेशी नागरिकों की पहचान की गई है। चुनाव आयोग इन सभी मामलों का सत्यापन कर अंतिम सूची तैयार कर रहा है।
चुनाव आयोग का कहना है कि ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद दावे और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। अंतिम सत्यापन और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। ऐसे में 5 अगस्त को जारी होने वाला ड्राफ्ट रोल यह स्पष्ट करेगा कि कितने मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची। राजधानी रांची की नगड़ी थाना पुलिस ने चांदी के जेवर और नकदी चोरी के मामले का सफल खुलासा करते हुए जमशेदपुर से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने बड़ी मात्रा में चोरी किए गए चांदी के आभूषण बरामद किए हैं। मामले में शामिल अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। 4 जुलाई को ज्वेलरी दुकान में हुई थी चोरी पुलिस के अनुसार, 4 जुलाई 2026 की रात नगड़ी थाना क्षेत्र के मोरा बाजार स्थित अमित ज्वेलर्स में अज्ञात चोरों ने सेंधमारी कर चांदी के जेवर और नकदी की चोरी कर ली थी। मामले में नगड़ी थाना कांड संख्या 113/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई। तकनीकी जांच के आधार पर जमशेदपुर से गिरफ्तारी जांच के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि चोरी में शामिल एक आरोपी जमशेदपुर के आजाद बस्ती क्षेत्र में छिपा हुआ है। ग्रामीण एसपी के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने जुगसलाई थाना क्षेत्र स्थित गरीब नवाज कॉलोनी में छापेमारी कर मोहम्मद जावेद को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में कबूला जुर्म गिरफ्तार आरोपी मोहम्मद जावेद ने पूछताछ के दौरान चोरी की वारदात में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने चोरी में शामिल अन्य आरोपियों अर्जुन शर्मा, बाबू पिल्ले और दीपक कुमार सिंह उर्फ कल्लू सरकार के नामों का भी खुलासा किया। पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार अभियान चला रही है। चोरी के चांदी के जेवरों का बड़ा जखीरा बरामद आरोपी के घर से पुलिस ने बड़ी मात्रा में चांदी के आभूषण बरामद किए। इनमें 36 जोड़ी पायल, 240 पीस बिछिया, 15 बाजूबंद, चांदी का सिक्का, गणेश प्रतिमा, करधनी सहित कई प्रकार के चांदी के आभूषण शामिल हैं। सभी बरामद सामान को जब्त कर लिया गया है। वैज्ञानिक और तकनीकी जांच से मिली सफलता रांची ग्रामीण एसपी गौरव गोस्वामी ने बताया कि वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी साक्ष्यों और मानवीय सूचना के आधार पर पुलिस ने मामले का सफल उद्भेदन किया। उन्होंने कहा कि एक आरोपी की गिरफ्तारी और चोरी के आभूषणों की बरामदगी बड़ी सफलता है। अन्य आरोपियों की तलाश जारी पुलिस ने बताया कि इस कार्रवाई में नगड़ी थाना प्रभारी अभिषेक राय, पुलिस पदाधिकारी संजय कुमार सिंह और रिजर्व गार्ड के जवानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मामले में शामिल फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और शेष चोरी गए सामान की बरामदगी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।
रांची। झारखंड में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मौसम केंद्र, रांची ने 23 से 25 जुलाई तक राज्य के कई जिलों में भारी बारिश, वज्रपात और तेज हवाओं की संभावना जताते हुए अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और खुले स्थानों, पेड़ों तथा बिजली के खंभों से दूर रहने की अपील की है। 23 जुलाई को लातेहार और आसपास के क्षेत्रों में कहीं-कहीं भारी बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा रांची, बोकारो, गुमला, हजारीबाग, खूंटी, रामगढ़, लोहरदगा, धनबाद, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा, सरायकेला-खरसावां और कोडरमा समेत कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ मेघ गर्जन और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका है। मौसम विभाग के अनुसार, 24 जुलाई को भी राज्य के अधिकांश हिस्सों में मानसून का असर बना रहेगा। उत्तर-पूर्वी जिलों देवघर, दुमका, गिरिडीह, जामताड़ा, गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज को छोड़कर अधिकांश क्षेत्रों में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। वहीं 25 जुलाई को लातेहार, चतरा और मध्य झारखंड से सटे उत्तर-पश्चिमी इलाकों में भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। बारिश के आंकड़ों की बात करें तो 1 जून से 22 जुलाई 2026 के बीच झारखंड में 299.1 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षापात 414.9 मिलीमीटर होना चाहिए था। यानी राज्य में अब तक 28 प्रतिशत कम बारिश हुई है। सबसे कम वर्षा गढ़वा, चतरा, पाकुड़, देवघर, कोडरमा और गोड्डा जैसे जिलों में दर्ज की गई है। मौसम विभाग का कहना है कि मानसून की आगामी सक्रियता से वर्षा की कमी कुछ हद तक पूरी होने की उम्मीद है, हालांकि किसानों और आम लोगों को मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है।
रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की फील्ड वर्कर प्रतियोगी परीक्षा-2024 एक नए विवाद में घिर गई है। कई अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया है कि उन्हें एडमिट कार्ड डाउनलोड करने का ईमेल परीक्षा समाप्त होने के बाद प्राप्त हुआ, जिसके कारण वे परीक्षा में शामिल नहीं हो सके। अभ्यर्थियों का दावा है कि समय पर सूचना नहीं मिलने से उनका एक महत्वपूर्ण अवसर छिन गया, जबकि आयोग का कहना है कि सभी जरूरी सूचनाएं और एडमिट कार्ड निर्धारित समय पर आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिए गए थे। JSSC ने 510 फील्ड वर्कर पदों पर भर्ती के लिए वर्ष 2024 में आवेदन आमंत्रित किए थे, जिसमें तीन लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। करीब दो वर्ष बाद 19 जुलाई 2026 को परीक्षा आयोजित की गई। इस बीच कई उम्मीदवारों ने आरोप लगाया कि परीक्षा से पहले उन्हें एडमिट कार्ड डाउनलोड करने संबंधी ईमेल नहीं मिला। कुछ अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा समाप्त होने के अगले दिन, 20 जुलाई की सुबह उनके ईमेल पर एडमिट कार्ड डाउनलोड करने का संदेश पहुंचा। अभ्यर्थी तुषार दुबे और मयंक कुमार ने दावा किया कि उन्होंने परीक्षा की पूरी तैयारी की थी, लेकिन समय पर एडमिट कार्ड की सूचना नहीं मिलने के कारण वे परीक्षा केंद्र तक नहीं पहुंच सके। मयंक कुमार ने इस मामले की लिखित शिकायत आयोग से करते हुए तकनीकी खामी की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। रांची विश्वविद्यालय के सिंडिकेट सदस्य और छात्र नेता अटल पांडे ने भी दावा किया कि यह समस्या केवल कुछ अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, दर्जनों छात्रों ने उनसे संपर्क कर बताया कि उन्हें भी परीक्षा समाप्त होने के बाद एडमिट कार्ड डाउनलोड करने का ईमेल मिला। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। हालांकि, इन आरोपों पर JSSC ने सफाई देते हुए कहा है कि सिटी इंटिमेशन स्लिप, एडमिट कार्ड और अन्य आवश्यक लिंक निर्धारित समय पर आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दिए गए थे। आयोग के सचिव सुधीर गुप्ता ने कहा कि अभ्यर्थी वेबसाइट से समय पर अपने दस्तावेज डाउनलोड कर सकते थे। अब इस मामले में आयोग की आगे की कार्रवाई और जांच पर अभ्यर्थियों की नजर बनी हुई है।