झारखंड

झारखंडः हजारों कोयला डीलरों के लाइसेंस रद्द और सस्पेंड

Anjali Kumari मई 11, 2026 0
Jharkhand coal dealers
Jharkhand coal dealers

रांची।  झारखंड में अवैध खनन और खनिज व्यापार पर रोक लगाने के लिए बड़ी कार्रवाई की गई है। खान विभाग ने खदानों निगरानी बढ़ा दी है। विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार मेजर मिनरल (मुख्य खनिज) के कारोबार में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। 


डीलरों के लाइसेंस रद्द और सस्पेंड


पूरे कोयलांचल में रामगढ़ से धनबाद तक  सैकड़ों डीलरों के लाइसेंस या तो निलंबित कर दिए गए हैं या उन्हें हमेशा के लिए निरस्त कर दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, जहां एक ओर रामगढ़ और धनबाद जैसे जिले खनिज व्यापार के बड़े केंद्र बने हुए हैं, वहीं चतरा और लातेहार जैसे क्षेत्रों में नियमों के उल्लंघन पर विभाग का सख्त एक्शन देखने को मिला है।

 
कहां कितने डीलर


धनबाद मंडलः
• धनबाद सर्कल के अंतर्गत बोकारो, धनबाद और गिरिडीह जिले आते हैं। यहां कुल 2686 डीलर पंजीकृत हैं।
• इस मंडल में कुल 23 डीलरों को निलंबित किया गया है, जिनमें सबसे अधिक 14 धनबाद जिले के हैं।
• कुल 35 डीलरों के लाइसेंस समय सीमा समाप्त होने या नियमों के उल्लंघन के कारण रद्द कर दिए गए हैं।
• सक्रिय डीलरः वर्तमान में यहां 1547 डीलर सक्रिय रूप से कार्य कर रहे है।


हजारीबाग मंडलः
• हजारीबाग मंडल में चतरा, हजारीबाग, कोडरमा और रामगढ़ शामिल हैं।
• रामगढ़ में अकेले 3707 डीलर हैं, जिनमें से 1676 सक्रिय हैं और 38 को निलंबित किया गया है। सबसे अधिक 142 लाइसेंस लैप्स हुए हैं।
• चतरा में 244 डीलरों को निलंबित किया गया है, जो राज्य में एक जिले के हिसाब से काफी बड़ी संख्या है।
• हजारीबाग सर्किल के पूरे क्षेत्र में 277 डीलर वर्तमान में निलंबित हैं।


रांची मंडलः 
• राजधानी रांची और आसपास के जिलों (गुमला, खूंटी, लोहरदगा, सिमडेगा) में डीलरों की संख्या अन्य मंडलों की तुलना में कम है। 
• रांची जिले में 737 कुल डीलरों में से 372 डीलर वर्तमान में कार्य कर रहे हैं।
• खूंटी में 1 डीलर निलंबित है, जबकि रांची में 1 लाइसेंस लैप्स हुआ है। 


दुमका और कोल्हान मंडलः
• दुमका मंडल के तहत देवघर में 436 डीलर हैं, जिनमें से 2 निलंबित हैं और 53 के लाइसेंस लैप्स हो चुके हैं। गोड्डा में 7 लाइसेंस लैप्स हुए हैं।


कोल्हान मंडलः
• कोल्हान मंडल में चाईबासा में 35 लाइसेंस लैप्स या निरस्त किए गए हैं, जबकि सरायकेला-खरसावां में 2 डीलर निलंबित हैं. जमशेदपुर में पंजीकृत 23 में से केवल 9 डीलर ही वर्तमान में सक्रिय हैं।

 

पलामू मंडलः
• लातेहार में कुल 1500 डीलर हैं, जिनमें से 771 सक्रिय हैं। विभाग ने यहां 11 डीलरों को निलंबित किया है और 35 के लाइसेंस रद्द किए हैं।
• पलामू में 51 डीलर सक्रिय हैं, जबकि गढ़वा में 1 डीलर को निलंबित किया गया है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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रांची यूनिवर्सिटी में क्लस्टर सिस्टम के खिलाफ छात्रों का विरोध तेज

रांची। रांची विश्वविद्यालय  में प्रस्तावित क्लस्टर सिस्टम को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। राज्य सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा इस नई व्यवस्था को फिलहाल रांची विश्वविद्यालय में लागू करने की तैयारी की जा रही है। हालांकि, इस फैसले के खिलाफ शिक्षक, कर्मचारी और छात्र संगठन खुलकर विरोध में उतर आए हैं। बढ़ते विरोध के बीच स्नातक नामांकन प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है और छात्रों को दाखिले के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव Dr. Guru Charan Sahu ने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग के निर्देश के अनुसार क्लस्टर व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि फिलहाल स्नातक नामांकन शुरू नहीं होगा। पहले विषयों और कॉलेजों के बीच क्लस्टर व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जाएगा, उसके बाद ही चांसलर पोर्टल खोला जाएगा।   क्या है क्लस्टर सिस्टम क्लस्टर सिस्टम उच्च शिक्षा की ऐसी व्यवस्था है, जिसमें अलग-अलग कॉलेजों को विषय आधारित विशेषज्ञता के अनुसार विकसित किया जाता है। प्रस्तावित योजना के तहत Doranda College में विज्ञान, Marwari College में कॉमर्स और मैनेजमेंट, जबकि J.N. College में सोशल साइंस और भाषा विषयों की पढ़ाई केंद्रित करने की योजना है।   विरोध तेज, छात्रों ने जताई चिंता Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad और AJSU Chhatra Sangh समेत कई छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि छात्रों को अलग-अलग विषयों के लिए विभिन्न कॉलेजों में जाना पड़ेगा, जिससे आर्थिक और व्यावहारिक परेशानियां बढ़ेंगी। रांची विश्वविद्यालय के डीएसडब्ल्यू Dr. Sudesh Kumar Sahu ने भी इस व्यवस्था की व्यावहारिकता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति (NEP) और क्लस्टर सिस्टम की कार्यप्रणाली अलग-अलग है, जिन्हें एक साथ लागू करने से शैक्षणिक व्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

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खूंटी की आदिवासी युवती दिल्ली 17 साल बनी रही बंधक, यौन शोषण के बाद गर्भपात भी कराया गया

खूंटी। झारखंड के खूंटी की आदिवासी युवती को 17 साल तक दिल्ली में बंधक बनाकर रखा गया। युवती से घरेलू मजदूरी कराई गयी। साथ ही उसका यौन शोषण भी किया गया। इस दौरान उसका गर्भपात कराये जाने की बात भी सामने आई है। मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है।  काम दिलाने के बहाने दिल्ली ले जाई गई थी युवती ने बताया कि साल 2009 में जेटा मुंडा नामक व्यक्ति उसे काम दिलाने के बहाने दिल्ली लाया था। उस समय वह 14 साल की थी। उसे कोहाट एन्क्लेव स्थित मधु अग्रवाल के घर पर घरेलू काम के लिए सौंप दिया गया। युवती का आरोप है कि उस दौरान उसे अपने परिवार से बात तक नहीं करने दिया गया और उसके पिता की मौत की खबर भी उससे छिपाई गई।  मालिक की बहू बेटी ने युवती का गर्भपात कराया दिल्ली पुलिस से की गई शिकायत के मुताबिक घर में काम करने वाले एक व्यक्ति ने डरा-धमकाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। जब वह गर्भवती हुई तो मकान मालिक की बहू और बेटी ने उसका गर्भपात करवा दिया। पीड़िता का यह भी आरोप है कि हाल ही में छत पर नहाते समय एक अन्य युवक ने भी उसके साथ दुष्कर्म किया। जिसे मालिक ने CCTV में देख लिया था, लेकिन कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की। नवंबर 2025 में जब पीड़िता का भाई उसे लेने आया तो उसे 10,000 रुपये देकर वापस भेज दिया गया।  खूंटी पुलिस कर रही जांच अब 9 अप्रैल 2026 को जब परिजन दोबारा आए तो मालिक ने 17 साल की मजदूरी के बदले मात्र 1.40 लाख रुपये का डीडी और 15,000 रुपये नकद देकर मामला खत्म करने का दबाव बनाया। फिलहाल पुलिस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच में जुट गई है। दिल्ली के सुभाष प्लेस थाना में मामला दर्ज होने की सूचना मिलते ही खूंटी पुलिस सक्रिय हो गई है। महिला थाना सह एएचटीयू थाना प्रभारी फुलमनी टोप्पो ने बताया कि दिल्ली में दर्ज शिकायत के आधार पर खूंटी पुलिस भी इस मामले की जांच कर रही है। उन्होंने बताया कि यह पुराना मामला है और खूंटी जिले में कभी शिकायत दर्ज नही कराया गया था।

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रांची। टेंडर घोटाला के जरिए करोड़ों रुपए की मनी लाउंड्रिंग करने के आरोपी पूर्व मंत्री आलमगीर आलम की जमानत याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सोमवार की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने आलमगीर आलम को बड़ी राहत देते हुए उनकी जमानत याचिका स्वीकार कर लीय़ जामनत याचिका स्वीकार होने के बाद अब आलमगीर आलम करीब दो वर्ष के बाद जेल की सलाखों से बाहर आ जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस एम एम सुंदरेश्वर और जस्टिस एन कोटीश्वर सिंह की बेंच में आलमगीर आलम की याचिका पर सुनवाई हुई। 11 जुलाई 2025 को झारखंड हाईकोर्ट ने आलमगीर आलम की जमानत याचिका को खारिज करते हुए उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में बेल के लिए गुहार लगाई। आलमगीर आलम की जमानत याचिका झारखण्ड हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की कोर्ट ने खारिज की थी। पिछली सरकार में मंत्री रहे आलमगीर आलम को ईडी ने 15 मई 2024 को गिरफ्तार किया था। तब से वह जेल में हैं। आरोपों के मुताबिक उनके आप्त सचिव संजीव कुमार लाल एवं उनके नौकर जहांगीर आलम के यहां से मिले 32.30 करोड़ रुपये नकद की बरामदी हुई थी। पैसे बरामद होने के बाद आलमगीर आलम से पूछताछ हुई थी फिर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। 

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