रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की दूरदर्शी सोच और ग्रामीण महिलाओं की मेहनत ने झारखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है। राज्य सरकार की पहल और ‘पलाश’ ब्रांड के तहत संचालित झारखंड मैंगो मार्केटिंग इनिशिएटिव आज हजारों ग्रामीण परिवारों की आजीविका का मजबूत आधार बन चुका है। कभी स्थानीय बाजारों तक सीमित रहने वाला झारखंड का आम्रपाली आम अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान बना रहा है। दुबई और लंदन जैसे वैश्विक शहरों तक झारखंड के आम की पहुंच राज्य की इस सफलता की बड़ी मिसाल बन गई है।
कोरोना काल के दौरान शुरू की गई बिरसा हरित ग्राम योजना का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाना था। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के मार्गदर्शन में शुरू हुई इस योजना का असर अब जमीनी स्तर पर साफ दिखाई दे रहा है। राज्य के करीब 1.86 लाख एकड़ क्षेत्र में आम के बगीचे विकसित किए गए हैं, जिससे लगभग 2.15 लाख ग्रामीण परिवारों को रोजगार और स्थायी आय का स्रोत मिला है।
वर्तमान में लगभग 52 हजार एकड़ क्षेत्र के आम बागान तुड़ाई के लिए तैयार हैं। इस सीजन में करीब 50 हजार मीट्रिक टन आम उत्पादन का अनुमान लगाया गया है, जो राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने वाला साबित हो सकता है।
झारखंड की सखी मंडल की महिलाएं इस पूरी पहल की असली ताकत बनकर उभरी हैं। आम के संग्रहण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग तक की जिम्मेदारी महिलाएं खुद संभाल रही हैं। झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसायटी (JSLPS) द्वारा किसानों को फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (FPO) से जोड़कर बेहतर बाजार और उचित मूल्य सुनिश्चित किया जा रहा है।
महिलाओं की भागीदारी ने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि ग्रामीण समाज में उनकी भूमिका को भी नई पहचान दी है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 में झारखंड ने आम निर्यात के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। सिमडेगा जिले से 1,580 किलोग्राम प्रीमियम आम लंदन भेजे गए हैं। वहीं रामगढ़ क्लस्टर से 1,500 मीट्रिक टन से अधिक आम दुबई निर्यात किए जा चुके हैं।
राज्य के कृषि उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने में सिमडेगा, रामगढ़ और पूर्वी सिंहभूम जैसे जिले अहम भूमिका निभा रहे हैं। आम की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए विशेषज्ञ संस्थानों की तकनीकी सहायता भी ली जा रही है।
पलाश ब्रांड के तहत राज्य में अब तक 2,24,200 किलोग्राम आम की बिक्री हो चुकी है, जिससे ₹60.51 लाख से अधिक का कारोबार दर्ज किया गया है। राज्य के 115 से अधिक FPO इस अभियान से जुड़े हुए हैं।
बाजार विस्तार के लिए ब्लिंकिट, रिलायंस फ्रेश और कशिश मॉल जैसे बड़े कॉर्पोरेट संस्थानों के साथ बातचीत अंतिम चरण में है। यदि यह साझेदारी सफल होती है, तो झारखंड के किसानों और ग्रामीण महिलाओं को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा बाजार मिल सकता है।
पलाश ब्रांड की सफलता यह साबित करती है कि यदि सरकारी योजनाओं को सही दिशा और बाजार से जोड़ दिया जाए तो ग्रामीण विकास की नई कहानी लिखी जा सकती है। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन का यह मॉडल न केवल किसानों और महिलाओं की आय बढ़ा रहा है बल्कि झारखंड को कृषि निर्यात के नए केंद्र के रूप में भी स्थापित कर रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
जामताड़ा। आसनसोल मंडल के अंतर्गत देवघर लिंक केबिन और कुमड़ाबाद रोहिणी सेक्शन के बीच जसीडीह बाईपास लाइन निर्माण से जुड़े प्री-नॉन इंटरलॉकिंग और नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य के कारण 22 एवं 23 जून को कई ट्रेन सेवाएं प्रभावित रहेंगी। रेलवे प्रशासन ने इस दौरान ट्रैफिक एवं पावर ब्लॉक की घोषणा की है, जिससे विभिन्न पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनों के परिचालन में बदलाव किया जाएगा। रेलवे के अनुसार 22 जून को प्री-एनआई कार्य तथा 23 जून को एनआई कार्य के दौरान जसीडीह-देवघर, जसीडीह-दुमका और मुख्य रेलखंड पर ट्रैफिक ब्लॉक रहेगा। इसके चलते कई ट्रेनों को रद्द, कुछ को आंशिक रूप से समाप्त या प्रारंभ तथा कुछ ट्रेनों को निर्धारित समय से विलंबित कर चलाया जाएगा। रद्द रहेंगी ये ट्रेनें 22 और 23 जून को अंडाल-जसीडीह, जसीडीह-अंडाल, जसीडीह-बांका एवं बांका-जसीडीह पैसेंजर ट्रेनें रद्द रहेंगी। इसके अलावा 22 जून को जसीडीह-झाझा, झाझा-जसीडीह, आसनसोल-जसीडीह, जसीडीह-किऊल और किऊल-जसीडीह ट्रेनें भी नहीं चलेंगी। 23 जून को देवघर-झाझा ट्रेन भी रद्द रहेगी। आंशिक रूप से चलेंगी कई ट्रेनें बर्द्धमान-झाझा ट्रेन 22 जून को केवल आसनसोल तक चलेगी, जबकि झाझा-बर्द्धमान ट्रेन 23 जून को आसनसोल से खुलेगी। इसी प्रकार दुमका-जसीडीह, जसीडीह-दुमका, रामपुरहाट-जसीडीह, जसीडीह-रामपुरहाट तथा पटना-देवघर ट्रेनों का परिचालन भी आंशिक रूप से किया जाएगा। कुछ ट्रेनों को रास्ते में रोका जाएगा जसीडीह-आसनसोल पैसेंजर को जसीडीह में 20 मिनट तक रोका जाएगा। वहीं धनबाद-पटना एक्सप्रेस, आनंद विहार टर्मिनल-डानकुनी स्पेशल और हावड़ा-देहरादून एक्सप्रेस को भी 20 से 30 मिनट तक नियंत्रित किया जाएगा। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से यात्रा शुरू करने से पहले रेलवे पूछताछ माध्यमों से ट्रेन की अद्यतन स्थिति की जानकारी लेने की अपील की है। यात्रियों को होने वाली असुविधा के लिए रेलवे ने खेद व्यक्त किया है।
हजारीबाग। हजारीबाग से विभिन्न शहरों के लिए बस से सफर करने वाले यात्रियों को अब पहले से अधिक किराया चुकाना होगा। हजारीबाग जिला बस ऑनर एसोसिएशन ने बस किराए में 15 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें शुक्रवार से तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं। किराया बढ़ने से रोजाना बस से यात्रा करने वाले यात्रियों के मासिक खर्च में भी इजाफा होगा। बस संचालकों का कहना है कि डीजल, स्पेयर पार्ट्स, मेंटेनेंस और अन्य परिचालन खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। इसी वजह से किराए में संशोधन करना आवश्यक हो गया था। नई दरें हजारीबाग से संचालित लगभग सभी प्रमुख रूटों पर लागू कर दी गई हैं। नई दरें कुछ इस प्रकार हैं मार्ग (हजारीबाग से) किराया (₹) रामगढ़ 120 रांची 230 टाटा (जमशेदपुर) 480 बोकारो (भाया रामगढ़) 280 बरही 85 चौपारण 120 इटखोरी (भाया बरही) 150 इटखोरी (भाया करमा) 120 कान्हाचट्टी 180 दारू 40 टाटीझरिया 60 विष्णुगढ़ 85 नवादा/बनासो 100 गोमिया 155 तेनुघाट 180 फुसरो 215 पेटरवार 215 चंद्रपुरा 240 दुघदा 250 बोकारो 285 शीला 60 सिमरिया 120 बगरा 140 चतरा 170 बारियातु 180 बालूमाथ 215 चंदवा 240 लातेहार 300 डाल्टेनगंज 420 कटकमसांडी 60 गिद्धौर 120 टंडवा 120 बड़कागांव 60 विश्रामपुर 85 बादम 95 नापो 100 टंडवा (भाया बड़कागांव) 120 बचरा/खेलारी 180 बगोदर 120 डुमरी/इसरी 180 गिरिडीह 280 तोपचांची 240 राजगंज 240 धनबाद 280 कतरास 280 झरिया 280 आसनसोल 360 दुर्गापुर 400 वर्द्धमान 480 कलकत्ता सीट (नॉन एसी) 600 कलकत्ता स्लीपर (नॉन एसी) 700 कलकत्ता सीट (एसी) 960 कलकत्ता स्लीपर (एसी) 1200 कलकत्ता (वोल्वो) 1400 देवघर 420 सरिया 150 बरमसिया 180 राजधनवार 240 खोरिमहुआ 240 मंडरो 300 तीसरी 300 जमुआ 300 बरकट्ठा 240 चतरो 310 गांवा 360 चकाई 360 भागलपुर 600 जमुई/खैरा 480 सोना, डुमरी, गिद्धौर 420 द्रुतगामी वातानुकूलित डिलक्स बस सेवा (एसी बस) मार्ग किराया (₹) हजारीबाग – रांची 250 हजारीबाग – धनबाद 300 हजारीबाग – गिरिडीह 300 हजारीबाग – देवघर 450 हजारीबाग – कोडरमा 200 देवघर – रांची 600 गिरिडीह – रांची 480 कोडरमा – रांची 350
रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने रेगुलर सिविल सेवा परीक्षा-2025 की प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) का तीसरी बार संशोधित मॉडल उत्तर जारी कर दिया है। आयोग ने विषय विशेषज्ञों की समीक्षा के बाद कुल चार प्रश्नों को रद्द (ड्रॉप) कर दिया है। इनमें सामान्य अध्ययन (पेपर-1) के दो और सामान्य अध्ययन (पेपर-2) के दो प्रश्न शामिल हैं। संशोधित उत्तर कुंजी जारी होने के साथ ही आयोग ने मुख्य परीक्षा की तिथि भी घोषित कर दी है। JPSC की मुख्य परीक्षा 18 से 20 जुलाई 2026 तक रांची के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर आयोजित होगी। तीन चरणों में जारी हुई उत्तर कुंजी प्रारंभिक परीक्षा 19 अप्रैल को आयोजित की गई थी। इसके बाद आयोग ने 21 अप्रैल को पहली बार मॉडल उत्तर जारी कर अभ्यर्थियों से 24 अप्रैल तक आपत्तियां और सुझाव मांगे थे। प्राप्त आपत्तियों की विषय विशेषज्ञों से समीक्षा कराने के बाद 26 मई को दूसरी और अंतिम मॉडल उत्तर कुंजी जारी की गई। हालांकि, अभ्यर्थियों की ओर से दोबारा उठाई गई आपत्तियों के मद्देनजर आयोग ने एक बार फिर विशेषज्ञों से समीक्षा कराई और 19 जून को तीसरी बार संशोधित मॉडल उत्तर जारी किया। इस संशोधन में सामान्य अध्ययन के चार प्रश्नों को रद्द कर दिया गया है। 103 पदों पर होगी नियुक्ति इस भर्ती अभियान के माध्यम से कुल 103 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इनमें उपसमाहर्ता के 28, पुलिस उपाधीक्षक के 42, जिला समादेष्टा (गृह) के 2, प्रोबेशन पदाधिकारी (गृह) के 4, सहायक निदेशक (महिला एवं बाल विकास) के 3, सहायक निबंधक (कृषि) के 2, सहायक नगर आयुक्त के 10, काराधीक्षक के 2 तथा सहायक निदेशक सह जिला जनसंपर्क पदाधिकारी के 10 पद शामिल हैं। मुख्य परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को अगले चरण यानी साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा।