वॉशिंगटन, एजेंसियां। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार शुल्क को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने भारत पर अमेरिकी टैरिफ को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच शुल्क विवाद में भारत को अमेरिकी चिंताओं को गंभीरता से लेना होगा। उन्होंने भारत के रूसी तेल आयात को भी अमेरिका की व्यापार नीति से जोड़कर सवाल उठाए हैं।
पीटर नवारो लंबे समय से भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद की आलोचना करते रहे हैं। उनका तर्क है कि रूस से तेल खरीदकर भारत अप्रत्यक्ष रूप से मॉस्को की अर्थव्यवस्था और यूक्रेन युद्ध को समर्थन दे रहा है।
नवारो ने भारत पर रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीदने के साथ-साथ अमेरिकी उत्पादों पर अपेक्षाकृत ऊंचे शुल्क लगाने का आरोप लगाया है। अमेरिका इसी आधार पर भारत के साथ व्यापार संतुलन और टैरिफ को लेकर दबाव बढ़ा रहा है।
ट्रंप प्रशासन भारत पर पहले ही अतिरिक्त शुल्क लगाने की दिशा में कदम उठा चुका है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि भारत की व्यापार नीतियों और रूसी तेल खरीद को लेकर वॉशिंगटन की चिंताएं दूर नहीं हुईं तो अमेरिकी टैरिफ का दबाव और बढ़ सकता है।
भारत की ओर से हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि उसकी ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए तेल खरीद के फैसले लिए जाते हैं। भारत रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिकी दबाव के बावजूद अपने हितों के अनुसार ऊर्जा नीति जारी रखने की बात कहता रहा है।
टैरिफ विवाद के बीच दोनों देशों के बीच संभावित व्यापार समझौते को लेकर भी बातचीत महत्वपूर्ण हो गई है। भारत चाहता है कि अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों के लिए बेहतर पहुंच मिले, जबकि अमेरिका भारत से अपने उत्पादों के लिए अधिक बाजार पहुंच और शुल्क में कमी की मांग कर रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर दोनों देशों के बीच टैरिफ विवाद जल्द नहीं सुलझता है तो इसका असर भारतीय निर्यातकों, टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल, फार्मा और अन्य उद्योगों पर पड़ सकता है।
अमेरिका-भारत व्यापार संबंधों में यह विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों देश रणनीतिक साझेदार हैं और व्यापार बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। अब नजर इस बात पर है कि नई टैरिफ नीति और रूसी तेल के मुद्दे पर दोनों देश किस तरह समझौते तक पहुंचते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। पान मसाला की पैकेजिंग को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने नियम सख्त कर दिए हैं। नए प्रावधानों के तहत पान मसाला की पैकिंग में प्लास्टिक, प्लास्टिक-लैमिनेटेड सामग्री, एल्युमिनियम फॉयल या मेटलाइज्ड लेयर के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। इसका सीधा असर उन छोटे चमकदार पाउच पर पड़ेगा, जिनमें आमतौर पर पान मसाला बेचा जाता है। किस तरह की पैकेजिंग की अनुमति होगी? FSSAI के निर्धारित पैकेजिंग मानकों के अनुसार पान मसाला के लिए पेपर, पेपर बोर्ड, सेलुलोज या अन्य प्राकृतिक स्रोतों से बने मटेरियल का इस्तेमाल किया जा सकता है, बशर्ते उनमें प्लास्टिक, सिंथेटिक पॉलिमर या एल्युमिनियम फॉयल की परत न हो। इसके अलावा टिन और कांच के कंटेनर भी अनुमत पैकेजिंग विकल्पों में शामिल हैं। प्लास्टिक पाउच पर क्यों बढ़ी सख्ती? पान मसाला की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले छोटे प्लास्टिक पाउच लंबे समय से प्लास्टिक कचरे को लेकर चिंता का विषय रहे हैं। नए नियमों का उद्देश्य प्लास्टिक आधारित पैकेजिंग को हटाकर अधिक टिकाऊ विकल्पों को बढ़ावा देना है। FSSAI की यह पहल पर्यावरणीय प्रभाव कम करने और पैकेजिंग मानकों को स्पष्ट करने की दिशा में बताई जा रही है। Plastic Waste Management Rules का भी पालन जरूरी नए प्रावधानों में पहले से लागू प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट नियमों का भी संदर्भ दिया गया है। इनमें पान मसाला, तंबाकू और गुटखा की बिक्री या पैकिंग के लिए प्लास्टिक सैशे के इस्तेमाल पर रोक का प्रावधान शामिल है। कंपनियों पर क्या होगा असर? पान मसाला बनाने वाली कंपनियों को अब अपनी पैकेजिंग व्यवस्था में बदलाव करना होगा। प्लास्टिक आधारित या प्लास्टिक-लैमिनेटेड पाउच की जगह उन्हें निर्धारित वैकल्पिक सामग्री का इस्तेमाल करना पड़ेगा। FSSAI की ओर से अप्रैल 2026 में इस संबंध में संशोधन का ड्राफ्ट भी जारी किया गया था, जिसमें पान मसाला के लिए अनुमत पैकेजिंग सामग्री सूचीबद्ध की गई थी। यानी अब पान मसाला के छोटे प्लास्टिक पाउच का दौर खत्म होने की दिशा में है और कंपनियों को पेपर, टिन या कांच जैसे विकल्पों की ओर बढ़ना होगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। गुजरात में चांदीपुरा वायरस (CHPV) के संक्रमण को लेकर चिंता बढ़ गई है। स्थिति पर नजर रखने और बीमारी के फैलाव को समझने के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने विशेषज्ञों की राष्ट्रीय टीम गुजरात भेजी है। टीम राज्य के अधिकारियों और अन्य विशेषज्ञों के साथ मिलकर संक्रमण के कारणों, रोकथाम और इलाज की संभावनाओं पर काम करेगी। दो साल बाद फिर सामने आया प्रकोप ICMR के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल के मुताबिक, चांदीपुरा वायरस का प्रकोप पहले भी कई बार सामने आ चुका है। पिछली बड़ी सक्रियता करीब दो साल पहले देखी गई थी और अब एक बार फिर इसके मामले सामने आने से निगरानी बढ़ाई गई है। उन्होंने बताया कि ICMR की टीमें पिछले दो वर्षों से गुजरात में इस बीमारी पर अध्ययन कर रही हैं। विशेषज्ञ यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि वायरस किन परिस्थितियों में फैलता है और इसके संक्रमण को प्रभावी तरीके से कैसे नियंत्रित किया जा सकता है। केंद्र ने भी बढ़ाई निगरानी चांदीपुरा वायरस से निपटने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने गुजरात और राजस्थान में नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम (NJORT) तैनात की है। बीमारी की निगरानी राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) के समन्वय में एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) के तहत की जा रही है। राज्य निगरानी इकाइयों को भी इस अभियान में शामिल किया गया है। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, संक्रमण की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। क्या है चांदीपुरा वायरस और कैसे फैलता है? WHO के अनुसार, चांदीपुरा वायरस Rhabdoviridae परिवार से संबंधित वायरस है और इसका संबंध खासतौर पर बच्चों में होने वाले Acute Encephalitis Syndrome (AES) से है। यह वायरस मुख्य रूप से संक्रमित सैंडफ्लाई के काटने से फैल सकता है। कुछ अन्य मच्छर और किलनी भी इसके संभावित वाहक माने जाते हैं। गुजरात में Phlebotomus papatasi सैंडफ्लाई को एक प्रमुख वाहक के तौर पर बताया गया है। बुखार से शुरू होकर गंभीर हो सकता है संक्रमण चांदीपुरा वायरस का संक्रमण शुरुआत में बुखार जैसे लक्षणों के साथ सामने आ सकता है। इसके बाद स्थिति गंभीर होने पर मरीज को दौरे पड़ना, चेतना में कमी और कोमा जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विशेष रूप से बच्चों में बीमारी तेजी से गंभीर रूप ले सकती है। WHO के मुताबिक, भारत में चांदीपुरा वायरस के पिछले प्रकोपों के दौरान रिपोर्ट की गई मृत्यु दर काफी अधिक रही है। बच्चों को लेकर ज्यादा सतर्कता जरूरी चूंकि चांदीपुरा वायरस का संबंध बच्चों में होने वाले एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम से है, इसलिए प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों में तेज बुखार, दौरे, अत्यधिक सुस्ती या व्यवहार में अचानक बदलाव जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है। फिलहाल ICMR और स्वास्थ्य विभाग की टीमें संक्रमण के फैलाव और इसके नियंत्रण के उपायों का आकलन कर रही हैं।
मुंबई, एजेंसियां। मुंबई के विले पार्ले पश्चिम इलाके में मंगलवार रात एक 12 मंजिला रिहायशी इमारत की 11वीं मंजिल पर भीषण आग लगने से बड़ा हादसा हो गया। इस घटना में ढाई साल के बच्चे और 23 वर्षीय युवती की मौत हो गई, जबकि चार अन्य लोग घायल हुए हैं। घायलों का अस्पताल में इलाज चल रहा है और उनकी हालत स्थिर बताई गई है। दो फ्लैटों में लगी आग घटना विले पार्ले पश्चिम के बैप्टिस्टा रोड स्थित शांता भवन इमारत की है। मंगलवार रात करीब 10:02 बजे मुंबई फायर ब्रिगेड को आग लगने की सूचना मिली। बताया गया कि 11वीं मंजिल पर स्थित दो फ्लैट आग की चपेट में आ गए थे। सूचना मिलते ही मुंबई फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। ऊंची मंजिल पर आग होने के कारण राहत और बचाव अभियान में काफी मशक्कत करनी पड़ी। तीन घंटे बाद आग पर पाया काबू फायर ब्रिगेड के जवानों ने करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद रात लगभग 1 बजे तक आग पर काबू पा लिया। इसके बाद कूलिंग ऑपरेशन भी पूरा किया गया। आग की चपेट में 11वीं मंजिल की बिजली की वायरिंग, एसी यूनिट और घर का सामान आ गया। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट को आग लगने की संभावित वजह माना जा रहा है। हालांकि, आग के सही कारणों की जांच अभी जारी है। अस्पताल पहुंचने से पहले दो की मौत आग की घटना में कुल छह लोगों को इलाज के लिए नानावटी अस्पताल ले जाया गया। इनमें 2.5 वर्षीय अबीर और 23 वर्षीय अंकिता को डॉक्टरों ने अस्पताल पहुंचने पर मृत घोषित कर दिया। वहीं, चार अन्य घायलों की पहचान पार्थ (32), हिरेन (64), यशस्वी और अभिषेक के रूप में हुई है। सभी का अस्पताल में इलाज चल रहा है और उनकी स्थिति स्थिर बताई गई है। दो फायरकर्मी भी घायल आग बुझाने के दौरान मुंबई फायर ब्रिगेड के दो कर्मचारी भी घायल हो गए। उन्हें इलाज के लिए कूपर अस्पताल ले जाया गया। अधिकारियों के मुताबिक, प्राथमिक उपचार के बाद दोनों फायरकर्मियों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। फिलहाल पुलिस आग लगने के कारणों की जांच कर रही है।