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Fuel rates steady with slight changes on April 20

20 अप्रैल 2026: पेट्रोल-डीजल के दाम जारी, कहीं राहत तो कहीं हल्की बढ़ोतरी–टंकी फुल कराने से पहले जान लें ताजा रेट

surbhi अप्रैल 20, 2026 0
Vehicles refueling at petrol pump with digital board showing latest petrol and diesel prices in India
Petrol Diesel Price Update April 20 India

देश की तेल विपणन कंपनियों ने 20 अप्रैल 2026 के लिए पेट्रोल और डीजल की नई कीमतें जारी कर दी हैं। आज के रेट्स पर नजर डालें तो देश के कई बड़े शहरों में ईंधन की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, जबकि कुछ राज्यों और शहरों में हल्का उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति का असर सीधे घरेलू कीमतों पर पड़ रहा है।

पेट्रोल की कीमतों में क्या बदलाव हुआ?
पेट्रोल के दाम आज अधिकतर महानगरों में स्थिर हैं। मुंबई में पेट्रोल ₹103.50 प्रति लीटर पर बना हुआ है, जबकि नई दिल्ली में यह ₹94.77 प्रति लीटर पर स्थिर है। बेंगलुरु में भी कोई बदलाव नहीं हुआ।

हालांकि, पूर्वी भारत के कुछ शहरों में हल्की तेजी देखी गई है। पटना में पेट्रोल ₹105.60 प्रति लीटर पर पहुंच गया है, जिसमें 17 पैसे की बढ़ोतरी हुई है। गया और मुजफ्फरपुर में भी कीमतों में क्रमशः 17 पैसे और 21 पैसे की बढ़त दर्ज की गई है। दूसरी ओर भागलपुर में 19 पैसे की मामूली गिरावट दर्ज की गई है।

कोलकाता और चेन्नई जैसे शहरों में भी हल्की बढ़ोतरी देखने को मिली है, जो दर्शाता है कि क्षेत्रीय टैक्स और डिमांड का असर कीमतों पर बना हुआ है।

डीजल के दाम में कैसी रही स्थिति?
डीजल की कीमतों में आज अधिकांश बड़े शहरों में स्थिरता बनी रही। मुंबई में डीजल ₹90.03 प्रति लीटर पर स्थिर है, जबकि नई दिल्ली में यह ₹87.67 प्रति लीटर पर टिका हुआ है।

बिहार और झारखंड के कई शहरों में डीजल की कीमतों में 5 पैसे से लेकर 24 पैसे तक की बढ़ोतरी हुई है। रांची में डीजल ₹93.20 प्रति लीटर पर पहुंच गया है, वहीं पटना में यह ₹91.84 प्रति लीटर हो गया है।

इस हल्की बढ़ोतरी का असर खासतौर पर परिवहन, लॉजिस्टिक्स और खेती-किसानी के खर्चों पर पड़ सकता है, जिससे आने वाले समय में महंगाई पर भी प्रभाव देखने को मिल सकता है।

क्यों बदलती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें?
ईंधन की कीमतें कई प्रमुख कारकों पर निर्भर करती हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमत। भारत अपनी अधिकांश जरूरत का कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति भी अहम भूमिका निभाती है।

इसके अलावा केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी और राज्यों द्वारा लगाया जाने वाला वैट (VAT) भी कीमतों को प्रभावित करता है। यही वजह है कि अलग-अलग राज्यों में पेट्रोल-डीजल के दाम अलग-अलग होते हैं।

घर बैठे ऐसे करें अपने शहर का रेट चेक
अगर आप अपने शहर की ताजा कीमतें जानना चाहते हैं, तो मोबाइल के जरिए SMS भेजकर आसानी से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं:

  • Indian Oil: RSP लिखकर 9224992249 पर भेजें
  • BPCL: RSP लिखकर 9223112222 पर भेजें
  • HPCL: HP Price लिखकर 9222201122 पर भेजें

कुल मिलाकर, आज के रुझान बताते हैं कि बाजार फिलहाल स्थिरता की ओर है, लेकिन छोटे-छोटे बदलाव जारी हैं। ऐसे में गाड़ी की टंकी फुल कराने से पहले ताजा रेट जरूर चेक कर लें।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Chandipura Virus
चांदीपुरा वायरस के प्रकोप की जांच तेज, गुजरात-राजस्थान में केंद्र ने तैनात की राष्ट्रीय टीम

नई दिल्ली, एजेंसियां। चांदीपुरा वायरस (CHPV) के बढ़ते मामलों के बीच केंद्र सरकार ने जांच और रोकथाम के प्रयास तेज कर दिए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने गुजरात और राजस्थान में National Joint Outbreak Response Team (NJORT) तैनात की है। टीम का उद्देश्य संक्रमण की स्थिति का आकलन करने के साथ निगरानी, जांच और नियंत्रण उपायों को मजबूत करना है।   गुजरात और राजस्थान में भेजी गई टीम   केंद्र की ओर से तैनात NJORT में अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल हैं। टीम राज्य स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ मिलकर बीमारी की निगरानी, मामलों की जांच, संक्रमण के संभावित स्रोत और रोकथाम के उपायों पर काम करेगी।   केंद्र ने इसे ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण के तहत बहु-संस्थागत जांच का हिस्सा बताया है। इसमें मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ पशु और संक्रमण फैलाने वाले वाहकों की निगरानी पर भी ध्यान दिया जा रहा है।   गुजरात में बच्चों में सामने आए गंभीर मामले   ताजा रिपोर्टों के मुताबिक गुजरात में इस मानसून के दौरान चांदीपुरा वायरस से जुड़े मामलों को लेकर चिंता बढ़ी है। रिपोर्ट के अनुसार 184 संदिग्ध मामलों में 35 संक्रमण की पुष्टि हुई है और 22 बच्चों की मौत हुई है। राजस्थान में भी कुछ मामले सामने आए हैं।   हालांकि, स्वास्थ्य अधिकारियों की जांच केवल चांदीपुरा वायरस तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिक Acute Encephalitis Syndrome (AES) से जुड़े मामलों के अन्य संभावित कारणों की भी जांच कर रहे हैं।   संक्रमण की जांच और जीनोम सीक्वेंसिंग पर जोर   केंद्र की टीम राज्य की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के साथ संदिग्ध मामलों की जांच और प्रयोगशाला परीक्षणों में सहयोग करेगी। विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों की ओर से भी बीमारी के कारणों और वायरस के प्रसार को समझने के लिए जांच की जा रही है। सरकार का लक्ष्य बीमारी की समय पर पहचान, मामलों की निगरानी और संक्रमण की रोकथाम के लिए राज्यों के साथ समन्वय मजबूत करना है।   क्या है चांदीपुरा वायरस?   चांदीपुरा वायरस एक ऐसा संक्रमण है जो Acute Encephalitis Syndrome (AES) जैसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी से जुड़ सकता है। यह मुख्य रूप से सैंडफ्लाई और कुछ अन्य कीटों के काटने से फैलता है। बच्चों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है, इसलिए बुखार, उल्टी, दौरे या चेतना में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लेना महत्वपूर्ण है।   केंद्र सरकार की टीम की तैनाती के बाद अब गुजरात और राजस्थान में बीमारी की निगरानी, वैज्ञानिक जांच और रोकथाम के प्रयास और तेज किए जा रहे हैं।

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22 साल जेल में रहने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने किया बरी, गलत दोषसिद्धि पर जताई नाराजगी

नई दिल्ली, एजेंसियां। सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा के एक व्यक्ति को बड़ी राहत देते हुए उसे हत्या के मामले में बरी कर दिया है। अदालत के फैसले के समय वह व्यक्ति करीब 22 साल जेल में बिता चुका था। शीर्ष अदालत ने माना कि कमजोर और अविश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।   2004 के ट्रिपल मर्डर केस से जुड़ा मामला   यह मामला ओडिशा के कोरापुट में वर्ष 2004 में हुए तीन लोगों की हत्या से जुड़ा है। आरोपी को निचली अदालत ने वर्ष 2006 में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद उसे लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा। मामले की सुनवाई के दौरान सामने आए तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा के बाद सुप्रीम कोर्ट ने दोषसिद्धि को बरकरार रखने के लिए पर्याप्त विश्वसनीय आधार नहीं पाया।   कमजोर सबूतों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी   सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच और अभियोजन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि कमजोर और भरोसेमंद न माने जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता छीनना उचित नहीं है।   अदालत ने इस मामले को आपराधिक न्याय व्यवस्था की गंभीर विफलता के रूप में देखा। निचली अदालत द्वारा साक्ष्यों के उचित मूल्यांकन में कमी और बाद की न्यायिक प्रक्रिया में हुई देरी ने इस मामले को और गंभीर बना दिया।   22 साल जेल में बिताने के बाद मिली आजादी   सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद व्यक्ति को उस अपराध से बरी कर दिया गया, जिसके लिए उसे करीब दो दशक से अधिक समय तक जेल में रहना पड़ा। अदालत की टिप्पणी ने गलत दोषसिद्धि के मामलों में जांच और न्यायिक समीक्षा की जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया है।   यह फैसला इस बात को सामने लाता है कि आपराधिक मामलों में केवल आरोप या कमजोर परिस्थितिजन्य साक्ष्य किसी व्यक्ति को लंबे समय तक जेल में रखने का आधार नहीं बन सकते।

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उत्तराखंड में भारी बारिश से अलकनंदा-मंदाकिनी उफान पर, खतरे के निशान के ऊपर पहुंचा जलस्तर

रुद्रप्रयाग, एजेंसियां। उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। रुद्रप्रयाग में दोनों नदियों के उफान को देखते हुए प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। भारी बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा भी बढ़ गया है।   नदियों का बढ़ा जलस्तर   रुद्रप्रयाग क्षेत्र में लगातार बारिश के बाद अलकनंदा और मंदाकिनी के जलस्तर में तेज वृद्धि दर्ज की गई। नदी के आसपास रहने वाले लोगों और संवेदनशील इलाकों में प्रशासन की ओर से विशेष निगरानी रखी जा रही है।   नदियों का जलस्तर बढ़ने के साथ निचले इलाकों में बाढ़ की आशंका भी बढ़ गई है। प्रशासन ने लोगों से नदी किनारे जाने से बचने और स्थानीय चेतावनियों का पालन करने की अपील की है।   भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित   उत्तराखंड में भारी बारिश का असर सड़क और यातायात व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण भूस्खलन और मलबा आने की घटनाओं का खतरा बना हुआ है।   मौसम विभाग ने भी उत्तराखंड में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। ऐसी स्थिति में पहाड़ी सड़कों पर यात्रा करने वालों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।   प्रशासन अलर्ट, संवेदनशील इलाकों पर नजर   नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों को सतर्क रखा गया है। संवेदनशील इलाकों में स्थिति पर नजर रखी जा रही है ताकि जलस्तर और बढ़ने पर समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके। अलकनंदा और मंदाकिनी के जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए रुद्रप्रयाग और आसपास के नदी किनारे वाले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।   चारधाम यात्रा और आवाजाही पर भी असर   भारी बारिश के कारण उत्तराखंड के कई हिस्सों में सड़क संपर्क प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। भूस्खलन और मलबे के कारण मार्ग बाधित होने पर यातायात को अस्थायी रूप से रोका जा सकता है।   प्रशासन ने लोगों से मौसम और सड़क की स्थिति की ताजा जानकारी लेकर ही यात्रा करने की अपील की है। मानसून के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक मौसम बदलने और नदी का जलस्तर बढ़ने को देखते हुए अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।

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