1661 – चीन के मिंग वंश ने ताइवान पर कब्जा किया।
1639 – दिल्ली में लाल किले की नींव रखी गयी (कन्फर्म नहीं)।
1706 - सम्राट जोज़ेफ़ आई को कोलोन और बवेरिया का राजा बनाया गया।
1781 - अमेरिकी युद्ध स्वतंत्रता के दौरान फ्रैंच बेड़े टोबैगो में रह गया।
1784 - बी फ्लैट, K454 (वियना) में मोजार्ट के सोनाटा का प्रीमियर हुआ।
1805 - रुचर जेन स्चिमेल्पेनिनक को नेपोलियन द्वारा बैटवियन गणराज्य के ग्रांड पेंशनरी के रूप में नियुक्त किया गया।
1813 – अमेरिका में जेएफ हम्मेल ने रबर का पेटेंट कराया।
1817 - रश-बैगोट संधि पर हस्ताक्षर किए गए।
1882 - दुनिया का पहला ट्रॉलीबस आपरेशन बर्लिन में शुरू किया गया।
1903 – कनाडा के उत्तर-पश्चिम प्रदेश में हुए भूस्खलन से 70 लोगों की मौत।
1930 – ब्रिटेन और आॅस्ट्रेलिया के बीच टेलीफोन की सेवा शुरू हुई।
1939 – नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने कांग्रेस से इस्तीफा दिया।
1945 – जापान की सेना ने रंगून छोड़ा।
1965 – पाकिस्तान के अंतरिक्ष और ऊपरी वायुमंडल अनुसंधान आयोग ने अपने सातवें रॉकेट का सफल प्रक्षेपण किया।
1978 – अफगानिस्तान के विद्रोही गुट ने सत्ता हासिल की। काबुल रेडियो पर घोषणा की गई कि उपराष्ट्रपति, रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वायुसेनाध्यझ लड़ाई में मारे गये।
1982 – इंटरनेशनल डांस डे की शुरुआत।
1991 – बंगलादेश के चटगांव में आए एक चक्रवाती तूफान में एक लाख 38 हजार लोग मारे गए और दस लाख लोग बेघर हो गए।
1992 – अमरीका के लॉस एंजेलेस में दंगे भड़के।
1993 – पहली बार बकिंघम पैलेस को आम जनता के लिए खोला गया और जिसे देखने के लिए आठ पाउंड का टिकट लगा।
1997 - रासायनिक हथियारों पर प्रतिबंध लागू।
1999 - बच्चों के यौन शोषण पर रोक संबंधी विधेयक जापानी संसद में मंजूर।
2005 – सीरिया ने लेबनान से अपनी सेना को वापस बुलाया।
2006 - पाकिस्तान ने हत्फ़-6 का परीक्षण किया।
2008 - ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदी नेजाद एक संक्षिप्त यात्रा पर भारत पहुँचे।
2008 - तिब्बत में मार्च 2008 में भड़की हिंसा के सिलसिले में एक स्थानीय अदालत ने 17 लोगों को 3 साल की क़ैद की सज़ा सुनाई।
2010 - भारत ने दुश्मनों के रडार की पकड़ में नहीं आने वाले मुंबई की मंझगांव गोदी में निर्मित आधुनिकतम उपकरणों से लैस युद्धपोत आईएनएस शिवालिक को नौसेना में शामिल किया।
2010 - भारतीय इंजीनियर हरपाल कुमार ने लंदन में आँत में कैंसर के शिकार लोगों का ब्लड टेस्ट कर रोग का पता लगाने के बजाय उनके पेट का निरीक्षण कर सकने वाले कैमरे का आविष्कार किया है। इससे इस बीमारी की समय से पहले ही पहचान की जा सकेगी और 43 प्रतिशत रोगियों को मृत्यु से बचाया जा सकेगा।
2011 – लंदन के एतिहासिक चर्च वेस्टमिनस्टर एबे में ब्रिटिश राजकुमार प्रिंस विलियम और केट मिडलटन का विवाह हुआ।
2019 - पाकिस्तान ने 55 भारतीय मछुआरों के साथ पांच नागरिकों को किया रिहा।
2019 - श्रीलंका में चेहरा ढकने पर प्रतिबंध लागू, मुस्लिम महिलाएं नहीं पहन पाएंगी नकाब।
2019 - इंडोनेशिया में बाढ़ से 29 लोगों की मौत, दर्जनों लापता।
2020 - कोरोना - केन्द्र सरकार ने प्रवासी मजदूरों सहित फंसे हुए लोगों के अंतर राज्यीय आवागमन की अनुमति दी।
2020 - भारत सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण की स्थापना की।
2021 - अमरीका ने काबुल दूतावास से अपने गैर-जरूरी कर्मचारियों को वापस बुलाने का आदेश दिया।
2021 - बंगलादेश ने भारत को आपातकालीन औषधियां और उपकरण देने की पेशकश की।
2022 - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बंगलूरू में सेमीकॉन इंडिया सम्मेलन और सूरत में वैश्विक पाटीदार व्यापार सम्मेलन का उद्घाटन किया।
2022 - अफगानिस्तान में काबुल की एक मस्जिद में हुए भीषण विस्फोट से लगभग 10 लोगों की मौत व 20 अन्य घायल हुए।
2023 - पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी को एमपी-एमएलए कोर्ट ने 10 साल की सजा व 5 लाख जुर्माना लगाया। अफजाल अंसारी को 4 साल की सज़ा हुई।
2023 - जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में सेना का वाहन गहरी खाई में गिरने से दो जवानों की मौत हुई।
2023 - सूडान से फंसे भारतीयों को निकालने के मिशन ‘ऑपरेशन कावेरी’ के तहत 365 लोग स्वदेश वापस आए।
2023 - दिल्ली में दो दिवसीय अ. भा. वेद विज्ञान सम्मेलन का शुभारंभ हुआ।
2023 - भारतीय सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट में पहली बार 5 महिला अधिकारियों को लड़ाकू रेजिमेंट में शामिल किया गया।
2024 - छत्तीसगढ़ के बेमेतरा में एक भयानक सड़क दुर्घटना में 9 लोगों की मौत हुई।
1547 - भामाशाह - मेवाड़ के महाराणा प्रताप के मित्र, सहयोगी और विश्वासपात्र सलाहकार।
1848 - राजा रवि वर्मा, विख्यात चित्रकार।
1867 - डॉ शंकर अबाजी भिसे - भारत के एक वैज्ञानिक एवं अग्रणि आविष्कारक थे ।
1919 - अल्ला रक्खा ख़ाँ, सुविख्यात तबला वादक, भारत के सर्वश्रेष्ठ एकल और संगीत वादकों में से एक।
1936 - ज़ुबिन मेहता - भारत सरकार द्वारा 'पद्म भूषण' से सम्मानित प्रसिद्ध भारतीय संगीत निर्देशक।
1938 - ई. अहमद -एक राजनेता के रूप में भारत के दसवीं- ग्यारहवीं - बारहवीं- तेरहवीं और पंद्रहवीं लोकसभा सांसद के सदस्य रह चुके।
1946- अजीत जोगी- छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री।
1965 - दीपिका चिखलिया भारतीय अभिनेत्री हैं जो रामानन्द सागर के सफल टेलीविजन धारावाहिक रामायण में सीता के अभिनय के कारण प्रसिद्ध हुई।
1983 - कृष्ण देवरयालु लावु - भारत की 17वीं लोकसभा के सदस्य।
1958 - गोपबन्धु चौधरी - उड़ीसा के प्रसिद्ध क्रांतिकारी तथा गाँधीवादी कार्यकर्ता।
1960 - बालकृष्ण शर्मा नवीन - हिन्दी जगत् के कवि, गद्यकार और अद्वितीय वक्ता।
1979 - राजा महेन्द्र प्रताप - भारत के सच्चे देशभक्त, क्रान्तिकारी, पत्रकार और समाज सुधारक।
1988 - बाबू ब्रिश भान एक स्वतंत्रता सेनानी व वह पेप्सु के अंतिम मुख्यमंत्री थे।
1997 - आर. एन. मल्होत्रा - भारतीय रिज़र्व बैंक के सत्रहवें गवर्नर।
1988 - बृष भान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनीतिज्ञ और स्वतंत्रता सेनानी थे। वह पेप्सु के अंतिम मुख्यमंत्री थे।
1999- केदार शर्मा - भारतीय फ़िल्म निर्देशक, निर्माता, पटकथा लेखक और हिंदी फ़िल्मों के गीतकार।
2000 - चिंतामणि पाणिग्रही मणिपुर के पूर्व राज्यपाल रहे।
2010 - कमलादेवी शुक्ला, गायत्री मण्डल की संस्थापक सदस्या एवं समाज सेविका।
2020 - इरफ़ान ख़ान -
भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन अभिनेता थे।
2020 - स्वतंत्रता सेनानी और पद्मश्री से सम्मानित हेमा भारली का निधन।
2021 - चीनी पेशेवर फुटबॉल खिलाड़ी और कोच झांग एनहुआ (48) का निधन हुआ।
2021 - ज़ुलु राष्ट्र की शासक रानी मांटफॉम्बी दलामिनी का 65 वर्ष की आयु में निधन हुआ।
2023 - अमेरिकी संगीत रचयिता डॉन सेबेस्की (85) का निधन हुआ।
2023 - अमेरिकी बेसबॉल खिलाडी माइक शैनन (83) का निधन हुआ।
2023 - सोवियत कलात्मक जिमनास्ट यूरी निकोलाइविच कोरोलीव (60) का निधन हुआ।
2024 - अफ्रीकी प्रोफ़ेशनल बॉक्सर डिंगान थोबला (57) का निधन हुआ।
भगवान श्री परशुराम जयंती (प्रदोष काल व्यापिनी तृतीया में)।
छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती (तिथ्यनुसार / प्रा.मत)।
श्री भामाशाह जयन्ती।
तबला वादक अल्ला रक्खा खाँ जयन्ती।
श्री अजीत जोगी जयन्ती।
डॉ शंकर अबाजी भिसे जयन्ती।
महान क्रान्तिकारी राजा महेन्द्र प्रताप स्मृति दिवस।
अन्तर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस।
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जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। आधार कार्ड के डिजाइन में जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार UIDAI (भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण) आधार कार्ड को और अधिक सुरक्षित और डिजिटल-फर्स्ट बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों की निजी जानकारी की सुरक्षा बढ़ाना और फर्जीवाड़े की संभावनाओं को कम करना है। वर्तमान में आधार कार्ड पर व्यक्ति का नाम, पता और 12 अंकों का आधार नंबर स्पष्ट रूप से छपा होता है। लेकिन नया डिजाइन लागू होने के बाद यह जानकारी सीधे कार्ड पर दिखाई नहीं देगी, जिससे डेटा लीक और दुरुपयोग की आशंका काफी हद तक कम हो जाएगी। नए आधार कार्ड में क्या होगा खास प्रस्तावित नए आधार कार्ड में केवल दो चीजें प्रमुख रूप से दिखाई देंगी—यूजर की फोटो और एक सुरक्षित QR कोड। इस QR कोड में व्यक्ति की सभी जरूरी जानकारियां जैसे नाम, पता, जन्मतिथि और आधार नंबर एन्क्रिप्टेड (कोडेड) रूप में सुरक्षित रहेंगी।इस QR कोड को केवल UIDAI द्वारा अधिकृत स्कैनर या आधिकारिक आधार ऐप के जरिए ही पढ़ा जा सकेगा। यानी अब किसी भी व्यक्ति की जानकारी सामान्य तरीके से कार्ड देखकर एक्सेस नहीं की जा सकेगी। क्यों जरूरी हुआ यह बदलाव सरकार के अनुसार आधार डेटा के दुरुपयोग और अनधिकृत कॉपी बनाए जाने की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। कई संस्थान आधार की फोटोकॉपी को बिना अनुमति के स्टोर कर लेते हैं, जिससे प्राइवेसी को खतरा बढ़ जाता है।नया सिस्टम इस समस्या को काफी हद तक खत्म कर सकता है, क्योंकि फिजिकल कार्ड पर संवेदनशील जानकारी दिखाई ही नहीं देगी। इससे धोखाधड़ी, पहचान की चोरी और डेटा लीक जैसे मामलों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। डिजिटल सिस्टम को बढ़ावा UIDAI पहले ही आधार के डिजिटल उपयोग को बढ़ाने के लिए नया ऐप लॉन्च कर चुका है, जिससे लोग अपनी पहचान सुरक्षित तरीके से शेयर कर सकते हैं। अब इस बदलाव के साथ फिजिकल कार्ड की बजाय डिजिटल वेरिफिकेशन को प्राथमिकता दी जाएगी।सरकार की योजना “आधार विजन 2032” के तहत एक हाई-लेवल कमेटी भी बनाई गई है, जो भविष्य की सुरक्षा जरूरतों और डेटा प्रोटेक्शन पर काम कर रही है। यूजर्स को क्या करना होगा फिलहाल आधार कार्ड का पुराना सिस्टम जारी रहेगा। जब नया डिजाइन लागू होगा, तब यूजर्स UIDAI की वेबसाइट या ऐप के जरिए नया आधार कार्ड (संभवतः PVC कार्ड फॉर्मेट में) प्राप्त कर सकेंगे।
नंदिनी लेआउट में देर रात मची अफरा-तफरी कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के नंदिनी लेआउट इलाके में रविवार देर रात भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। आग इतनी तेजी से फैली कि आसपास के लोग दहशत में आ गए। यह आग राजकुमार मेमोरियल के पास स्थित एक LED बैनर गोदाम में लगी, जो देखते ही देखते पास की इमारतों तक पहुंच गई। महिलाओं के PG तक पहुंची आग, मचा कोहराम गोदाम के बगल में स्थित चार मंजिला महिला PG भी आग की चपेट में आ गया। इमारत में रह रही करीब 50 युवतियां अचानक धुएं और लपटों से घिर गईं। बाहर निकलने का रास्ता बंद होता देख कई लड़कियों ने अपनी जान बचाने के लिए ऊपरी मंजिलों से छलांग लगा दी। मौके पर मौजूद लोगों और राहतकर्मियों ने तुरंत मदद शुरू की। कई युवतियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। दमकल विभाग ने समय रहते संभाला मोर्चा घटना की सूचना मिलते ही दमकल और आपदा राहत की कई टीमें मौके पर पहुंचीं। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी की जान नहीं गई। सभी महिलाओं को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और किसी के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है। कई वाहन और आसपास की संपत्तियां क्षतिग्रस्त आग की लपटों ने गोदाम के बाहर खड़े एक मोटरसाइकिल और एक पिकअप वाहन को भी अपनी चपेट में ले लिया। इसके अलावा आसपास के कई घरों को भी नुकसान पहुंचा। तेज गर्मी के कारण कुछ मकानों की दीवारों में दरारें आ गईं, जबकि खिड़कियों के शीशे टूट गए। शॉर्ट सर्किट की आशंका, जांच शुरू पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट को आग लगने की संभावित वजह माना जा रहा है। हालांकि, अधिकारी हर पहलू से मामले की पड़ताल कर रहे हैं। इस हादसे ने एक बार फिर व्यावसायिक इमारतों और रिहायशी परिसरों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
निष्पक्ष चुनाव पर उठे सवाल पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच पुलिस ऑब्जर्वर के रूप में तैनात आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उन पर निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने उन्हें पद से हटाने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका, चुनाव आयोग पर कार्रवाई का दबाव यह जनहित याचिका आदित्य दास नामक याचिकाकर्ता की ओर से दाखिल की गई है। इसमें चुनाव आयोग से अपील की गई है कि अजय पाल शर्मा को उनके पद से हटाया जाए। याचिका में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपनी भूमिका के अनुरूप निष्पक्षता नहीं बरती और मतदाताओं पर प्रभाव डालने या उन्हें डराने-धमकाने जैसा व्यवहार किया। वायरल वीडियो से शुरू हुआ विवाद इस पूरे मामले की शुरुआत उस वायरल वीडियो से हुई, जिसमें अजय पाल शर्मा को फाल्टा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उम्मीदवार जहांगीर खान को कथित तौर पर चेतावनी देते हुए देखा गया। वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई और उनके आचरण पर सवाल उठने लगे। निष्पक्ष चुनाव को लेकर उठी मांग याचिका में दावा किया गया है कि पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी है कि ऐसे अधिकारियों को हटाया जाए, जिन पर पक्षपात के आरोप लग रहे हैं। हालांकि, इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हुई है। कौन हैं IPS अजय पाल शर्मा? अजय पाल शर्मा 2011 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। उन्हें कड़े और सख्त पुलिसिंग के लिए जाना जाता है और उनकी छवि अक्सर ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ और ‘यूपी के सिंघम’ के रूप में देखी जाती है। वर्तमान में उन्हें पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में पुलिस ऑब्जर्वर के रूप में तैनात किया गया है। राजनीतिक बयानबाजी भी तेज इस मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आरोप लगाया है कि कुछ अधिकारियों की नियुक्ति राजनीतिक प्रभाव से जुड़ी हो सकती है। वहीं टीएमसी की ओर से भी इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाए जा रहे हैं।