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Hasina Return Adds Diplomatic Challenge

भारत-बांग्लादेश रिश्तों की अग्निपरीक्षा: शेख हसीना की वापसी के ऐलान से बढ़ीं कूटनीतिक चुनौतियां, चीन का बढ़ता प्रभाव भी चिंता का विषय

surbhi अगस्त 7, 2026 0
India and Bangladesh face fresh diplomatic challenges following Sheikh Hasina’s return announcement amid growing regional tensions.
India-Bangladesh Diplomatic Relations Under Pressure

नई दिल्ली: भारत और बांग्लादेश के रिश्ते एक बार फिर संवेदनशील दौर से गुजर रहे हैं। निर्वासित पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पहली वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस और इसी साल दिसंबर में बांग्लादेश लौटने के उनके ऐलान ने दोनों देशों के बीच नई कूटनीतिक हलचल पैदा कर दी है। ऐसे समय में जब भारत और बांग्लादेश संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशें जारी हैं, हसीना के बयान ने राजनीतिक और राजनयिक समीकरणों को और जटिल बना दिया है।

करीब दो वर्ष पहले बांग्लादेश में राजनीतिक संकट के दौरान शेख हसीना का ढाका से दिल्ली आना दोनों देशों के संबंधों का बड़ा घटनाक्रम था। अब दो साल बाद एक बार फिर उनका नाम भारत-बांग्लादेश संबंधों के केंद्र में है। उनकी वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर पहले ही बांग्लादेश सरकार ने चिंता जताई थी और आशंका व्यक्त की थी कि इससे दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत प्रभावित हो सकती है। हालांकि भारत सरकार ने इस कार्यक्रम से स्पष्ट दूरी बनाए रखी।

दिसंबर में वापसी के ऐलान से बढ़ी राजनीतिक हलचल

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शेख हसीना ने दिसंबर में बांग्लादेश लौटने की घोषणा की। यह बयान ऐसे समय आया है जब बांग्लादेश सरकार लगातार उनके प्रत्यर्पण की मांग उठा रही है। ऐसे में यह घोषणा केवल राजनीतिक संदेश नहीं बल्कि दोनों देशों के बीच चल रहे संवेदनशील कूटनीतिक संवाद को भी प्रभावित कर सकती है।

बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति भी बनी चुनौती

पिछले वर्ष दिसंबर में बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने एकतरफा सुनवाई के बाद शेख हसीना को मौत की सजा सुनाई थी। अब देश में निर्वाचित सरकार होने के बावजूद राजनीतिक तनाव कम होता नजर नहीं आ रहा। हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए पूर्व क्रिकेट कप्तान शाकिब अल हसन के घर पर हमले और प्रधानमंत्री तारिक रहमान के करीबी सहयोगियों द्वारा हसीना को तत्काल लौटने की चुनौती ने वहां के राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।

भारत के लिए क्यों बढ़ी कूटनीतिक चुनौती?

विशेषज्ञों के अनुसार यह पूरा घटनाक्रम भारत की विदेश नीति की बड़ी परीक्षा बन सकता है। अंतरिम सरकार के दौरान दोनों देशों के रिश्तों में आई दूरी को कम करने के प्रयास जारी हैं, लेकिन हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं।

भारत और बांग्लादेश के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दे लंबित हैं, जिनमें—

  • गंगा जल संधि का नवीनीकरण
  • सीमा पर बाड़ लगाने का विवाद
  • अवैध घुसपैठ की समस्या
  • सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दे

इन सभी विषयों पर आने वाले महीनों में अहम बातचीत होनी है। इसी बीच बांग्लादेश में चीन के बढ़ते प्रभाव और पूर्व अंतरिम सरकार के दौरान अपनाई गई प्रो-चीन नीतियों को लेकर भारत की चिंता भी लगातार बनी हुई है।

BRICS सम्मेलन बन सकता है बड़ा अवसर

अगले महीने नई दिल्ली में होने वाला 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन दोनों देशों के रिश्तों के लिए महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। बिम्सटेक (BIMSTEC) के मौजूदा अध्यक्ष होने के नाते बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को भी आउटरीच सत्र के लिए आमंत्रित किया गया है।

यदि इस सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच सकारात्मक बातचीत होती है, तो मौजूदा तनाव कम करने और द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने की संभावना बन सकती है। हालांकि इसके लिए दोनों देशों को फिलहाल उत्पन्न संवेदनशील परिस्थितियों को सावधानी से संभालना होगा।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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अमित शाह और मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा की मुलाकात
मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने अमित शाह से मुलाकात की, FCRA विधेयक को लेकर हुई चर्चा

नई दिल्ली, एजेंसियां। मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर प्रस्तावित विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) संशोधन विधेयक को लेकर चर्चा की। बैठक के बाद लालदुहोमा ने बताया कि विधेयक पर संसद में 12 अगस्त को चर्चा होने की संभावना है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित बदलाव पिछली तारीख से लागू नहीं होंगे。   अमित शाह से मुलाकात के बाद लालदुहोमा का बयान     मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने अमित शाह से मुलाकात के बाद FCRA संशोधन विधेयक से जुड़े प्रावधानों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से प्रस्तावित बदलावों को लेकर चर्चा हुई और विधेयक को लेकर आगे की प्रक्रिया संसद में होगी।   लालदुहोमा ने संकेत दिया कि मिजोरम से जुड़े हितों और राज्य में विदेशी सहायता प्राप्त करने वाले संगठनों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर भी बातचीत हुई।   12 अगस्त को संसद में चर्चा की संभावना     रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित FCRA संशोधन विधेयक पर 12 अगस्त को संसद में चर्चा होने की संभावना है। हालांकि, संसद की कार्यवाही और विधायी कार्यक्रम के अनुसार इसमें बदलाव भी हो सकता है।   FCRA का उद्देश्य भारत में विदेशी स्रोतों से मिलने वाले धन और उसके इस्तेमाल को नियंत्रित करना है। इस कानून के तहत गैर-सरकारी संगठनों और अन्य संस्थाओं को विदेश से मिलने वाले अंशदान के संबंध में नियमों का पालन करना होता है।   विधेयक को पिछली तारीख से लागू नहीं करने की बात     लालदुहोमा ने बैठक के बाद महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए कहा कि प्रस्तावित संशोधन पूर्व प्रभाव से लागू नहीं होगा। इसका मतलब है कि नए प्रावधान लागू होने से पहले की गतिविधियों या लेनदेन पर नए नियमों को पिछली तारीख से लागू करने की व्यवस्था नहीं होगी।   यह पहलू मिजोरम के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि राज्य में कई सामाजिक और धार्मिक संस्थाएं विदेशी अंशदान से जुड़े नियमों के दायरे में आती हैं।   FCRA संशोधन को लेकर आगे बढ़ी राजनीतिक गतिविधि     अमित शाह और लालदुहोमा की मुलाकात ऐसे समय हुई है जब संसद में FCRA संशोधन को लेकर चर्चा की तैयारी चल रही है। केंद्र सरकार की ओर से विधेयक में बदलावों के जरिए विदेशी अंशदान से जुड़े नियमों को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।   अब सभी की नजरें संसद की आगामी कार्यवाही पर हैं, जहां प्रस्तावित विधेयक पर चर्चा के दौरान सरकार और विपक्ष के रुख से इसकी आगे की दिशा स्पष्ट होगी।

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संसद के गलियारों की दिलचस्प कहानी: कहीं 'QR कोड' वाला तंज, कहीं नेताओं की मुस्कुराहट बनी चर्चा

नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र सिर्फ तीखी राजनीतिक बहसों और आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा। सदन के भीतर और गलियारों में कई ऐसे हल्के-फुल्के पल भी देखने को मिले, जिन्होंने राजनीतिक माहौल को अलग रंग दे दिया। कभी नेताओं के बीच तंज और हाजिरजवाबी चर्चा का विषय बनी तो कभी सत्ता और विपक्ष के नेताओं की मुस्कुराहट भरी मुलाकात ने सबका ध्यान खींचा। संसदीय परिसर में घटी ऐसी कई घटनाएं पूरे दिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी रहीं। महाराष्ट्र पर केंद्रीय मंत्री का तंज संसद परिसर में एक केंद्रीय मंत्री की मुलाकात महाराष्ट्र से आने वाले एनडीए के एक सहयोगी दल के सांसद से हुई। बातचीत के दौरान मंत्री ने हल्के अंदाज में कहा कि महाराष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति बाकी राज्यों से अलग है। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों में जब कोई केंद्रीय मंत्री दौरे पर जाता है तो वहां के सभी सांसद एक साथ मिलते हैं, बैठते हैं और रात्रिभोज भी करते हैं, लेकिन महाराष्ट्र में ऐसा कम देखने को मिलता है। इतना सुनते ही सांसद ने मुस्कुराते हुए मंत्री का हाथ पकड़ लिया और कहा कि उन्हें ऐसी किसी बैठक की जानकारी ही नहीं थी। मौके पर मौजूद पत्रकारों के सामने हुई यह बातचीत राजनीतिक तंज के रूप में पूरे दिन चर्चा में रही। 'QR कोड दे दीजिए' वाला जवाब बना चर्चा संसद परिसर में समाजवादी पार्टी के सांसद इन दिनों चंदा चोरी मामले को लेकर अनोखे अंदाज में विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। वे दानपात्र रखकर सांसदों से सहयोग राशि जुटा रहे हैं। सोमवार को दानपात्र खोलने पर 47,100 रुपये और मंगलवार को 33,050 रुपये के साथ दो चांदी के सिक्के मिले। इसी दौरान सपा सांसद अक्षय यादव ने दावा किया कि किसी भी भाजपा सांसद ने इसमें सहयोग नहीं किया। तभी वहां से गुजर रहे एक भाजपा सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री से उन्होंने श्रीराम के नाम पर चंदा देने का आग्रह किया। इस पर मंत्री ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "QR कोड दे दीजिए", और आगे बढ़ गए। उनका यह जवाब संसद परिसर में मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। मेटा अधिकारियों से फेक वीडियो पर तीखे सवाल संसद की सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) संबंधी स्थायी समिति की बैठक में मेटा के अधिकारियों को भी सांसदों के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। अधिकारियों ने बताया कि तकनीकी त्रुटि के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो गलती से हट गया था, क्योंकि फेक वीडियो हटाने वाली ऑटोमेटेड प्रणाली सक्रिय थी। इस पर समिति की एक महिला सांसद ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर मौजूद एक कथित फर्जी वीडियो दिखाते हुए सवाल किया कि जब उनका फेक वीडियो अब तक नहीं हटाया गया, तो फिर प्रधानमंत्री का वास्तविक वीडियो कैसे हट गया। इस सवाल के बाद बैठक में मेटा अधिकारियों को अपनी तकनीकी प्रक्रिया पर विस्तार से सफाई देनी पड़ी। सत्ता और विपक्ष के नेताओं की सौहार्दपूर्ण मुलाकात संसद भवन के मकर द्वार पर सत्ता और विपक्ष के नेताओं के बीच एक दिलचस्प मुलाकात भी देखने को मिली। कांग्रेस के एक राज्यसभा सांसद और भाजपा के एक लोकसभा सांसद, जो अक्सर टीवी डिबेट में एक-दूसरे के राजनीतिक विरोधी नजर आते हैं, संसद परिसर में मुस्कुराते हुए मिले। दोनों ने हाथ मिलाया, हालचाल पूछा और कुछ मिनट तक बातचीत की। इसी दौरान मौजूद एक पत्रकार ने दोनों नेताओं के सफेद परिधान पर टिप्पणी की। इस पर भाजपा सांसद ने मजाकिया अंदाज में कांग्रेस सांसद की ओर इशारा करते हुए कहा, "इनका जीवन भी बिल्कुल वाइट ही है।" इस टिप्पणी पर आसपास मौजूद लोग मुस्कुरा उठे। बातचीत के दौरान पंजाब कांग्रेस में चल रही अंदरूनी खींचतान का भी जिक्र हुआ। इस पर भाजपा सांसद ने हल्का राजनीतिक तंज किया, जबकि कांग्रेस सांसद ने शांत अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि उनकी पार्टी में हालात जल्द सामान्य हो जाएंगे। संसद की राजनीति का दूसरा चेहरा संसद की कार्यवाही के दौरान जहां एक ओर गंभीर मुद्दों पर तीखी बहस होती है, वहीं दूसरी ओर ऐसे हल्के-फुल्के पल यह भी दिखाते हैं कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद व्यक्तिगत स्तर पर नेताओं के बीच संवाद, हास्य और सौहार्द भी बना रहता है। यही संसदीय लोकतंत्र की एक अलग और कम दिखाई देने वाली तस्वीर भी पेश करता है।  

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Chhattisgarh High Court rejects bail plea of former IAS officer in the CGPSC paper leak case, calling the offence extremely serious.

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Suvendu Adhikari
पश्चिम बंगाल में ‘बांग्लार बाड़ी’ का नाम बदला, अब ‘पश्चिम बंग आवास’; 10.20 लाख परिवारों को मिली दूसरी किस्त

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य की ग्रामीण आवास योजना ‘बांग्लार बाड़ी’ का नाम बदलकर ‘पश्चिम बंग आवास’ कर दिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने गुरुवार को इस बदलाव की घोषणा की। इसी अवसर पर राज्य सरकार ने योजना के तहत 10,20,379 लाभार्थी परिवारों को दूसरी और अंतिम किस्त भी जारी की।   ‘बांग्लार बाड़ी’ अब ‘पश्चिम बंग आवास’   राज्य सरकार की ओर से संचालित ग्रामीण आवास योजना को अब ‘पश्चिम बंग आवास’ (Paschim Banga Awas) के नाम से जाना जाएगा। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि मंत्रिमंडल ने योजना का नाम बदलने का फैसला किया है। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में पात्र और जरूरतमंद परिवारों को पक्का घर बनाने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चलाई जा रही है।   10.20 लाख परिवारों को ₹60 हजार की दूसरी किस्त   सरकार ने योजना के तहत 10,20,379 लाभार्थियों को दूसरी किस्त के रूप में ₹60,000 प्रति परिवार की राशि जारी की। इसके साथ ही इन लाभार्थियों के लिए योजना की दूसरी और अंतिम किस्त का भुगतान पूरा हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, इस चरण में सरकार ने कुल ₹6,000 करोड़ से अधिक की राशि जारी की है। लाभार्थियों को राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी गई।   जांच के बाद पात्र परिवारों को मिली सहायता   योजना के लाभार्थियों के चयन में सत्यापन प्रक्रिया पर विशेष जोर दिया गया। सरकार के अनुसार पात्र परिवारों की जांच के बाद सहायता राशि जारी की गई है। जो पात्र आवेदक अभी इस चरण में शामिल नहीं हो सके हैं, उन्हें सत्यापन पूरा होने के बाद योजना के दायरे में लाने की बात कही गई है। राज्य सरकार की इस आवास योजना का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को अपना पक्का घर बनाने में सहायता देना है।   नाम बदलने के पीछे सरकार ने बताया कारण   मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने योजना का नाम बदलने के साथ ‘पश्चिम बंग’ नाम के ऐतिहासिक महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य के नाम से ‘पश्चिम’ शब्द हटाया नहीं जाएगा और आने वाली पीढ़ियों को इससे जुड़े इतिहास की जानकारी होनी चाहिए।   इस तरह ‘बांग्लार बाड़ी’ से ‘पश्चिम बंग आवास’ नाम परिवर्तन के साथ राज्य सरकार ने योजना की दूसरी किस्त का वितरण भी पूरा किया है। आने वाले चरण में सत्यापन के बाद शेष पात्र परिवारों को भी योजना का लाभ दिए जाने की उम्मीद  है।

abhishek singh अगस्त 7, 2026 0
Suvendu Adhikari

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