आईपीएल 2026 में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से क्रिकेट जगत को चौंकाने वाले युवा बल्लेबाज Vaibhav Suryavanshi को लेकर टीम इंडिया में चयन की चर्चाएं तेज हैं। महज 15 साल की उम्र में ऑरेंज कैप जीतने वाले इस युवा खिलाड़ी ने पूरे सीजन में रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन किया, लेकिन पूर्व भारतीय क्रिकेटर Aakash Chopra का मानना है कि फिलहाल भारतीय टी20 टीम में उनके लिए जगह बनाना आसान नहीं होगा।
आकाश चोपड़ा ने अपने विश्लेषण में कहा कि भारतीय टी20 टीम में ओपनिंग और टॉप ऑर्डर की जगह पहले से ही मजबूत खिलाड़ियों के पास है। उनके अनुसार Sanju Samson और Abhishek Sharma शानदार फॉर्म में हैं।
उन्होंने कहा कि संजू सैमसन ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 में बेहतरीन प्रदर्शन किया था और प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे थे। वहीं अभिषेक शर्मा लगातार शानदार बल्लेबाजी कर रहे हैं और लंबे समय से टी20 क्रिकेट के शीर्ष बल्लेबाजों में शामिल हैं।
ऐसे में केवल आईपीएल के प्रदर्शन के आधार पर इन खिलाड़ियों को बाहर कर वैभव को तुरंत मौका देना चयनकर्ताओं के लिए आसान फैसला नहीं होगा।
वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल 2026 में जिस तरह बल्लेबाजी की, उसने सभी को प्रभावित किया।
उन्होंने इस दौरान दिग्गज बल्लेबाज Chris Gayle का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया और आईपीएल इतिहास में एक सीजन में सर्वाधिक छक्के लगाने वाले बल्लेबाज बन गए।
एलिमिनेटर और दूसरे क्वालीफायर जैसे बड़े मुकाबलों में भी उन्होंने दबाव में शानदार बल्लेबाजी कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
आकाश चोपड़ा का मानना है कि वैभव बेहद प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं और भविष्य में टीम इंडिया का अहम हिस्सा बन सकते हैं। हालांकि मौजूदा प्रतिस्पर्धा को देखते हुए उन्हें राष्ट्रीय टीम में नियमित जगह बनाने के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है।
वैभव को आगामी त्रिकोणीय सीरीज के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया है। यह टूर्नामेंट 9 जून से श्रीलंका में शुरू होगा और फाइनल 21 जून को खेला जाएगा।
इस सीरीज में उनका प्रदर्शन चयनकर्ताओं की नजर में काफी अहम रहेगा। यदि वह यहां भी आईपीएल जैसी बल्लेबाजी दोहराते हैं, तो टीम इंडिया का दरवाजा उनके लिए और तेजी से खुल सकता है।
15 साल की उम्र में जिस तरह वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल में बल्लेबाजी की है, उसने उन्हें भारतीय क्रिकेट के सबसे चर्चित युवा खिलाड़ियों में शामिल कर दिया है। फिलहाल टीम इंडिया में जगह भले मुश्किल दिख रही हो, लेकिन क्रिकेट विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर उनका प्रदर्शन इसी तरह जारी रहा तो राष्ट्रीय टीम में चयन केवल समय की बात होगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली: महिला टी20 विश्व कप 2026 में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने अपने अभियान की शानदार शुरुआत करते हुए पाकिस्तान को 64 रन से हराया। इस मुकाबले में भारत ने बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में दमदार प्रदर्शन किया। हालांकि मैच के बाद एक और वजह चर्चा का विषय बन गई। सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि पाकिस्तान की हार तय होते ही वहां के सरकारी प्रसारक पीटीवी ने लाइव क्रिकेट मैच की जगह फीफा मुकाबले का प्रसारण शुरू कर दिया। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और वायरल वीडियो तथा सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर ही यह चर्चा सामने आई है। भारत ने दर्ज की बड़ी जीत पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम ने 20 ओवर में 6 विकेट खोकर 170 रन बनाए। टीम के लिए Smriti Mandhana ने 44 गेंदों पर 68 रन की शानदार पारी खेली। कप्तान Harmanpreet Kaur ने 36 रन का योगदान दिया, जबकि विकेटकीपर बल्लेबाज Richa Ghosh ने डेथ ओवरों में आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 17 गेंदों में 34 रन बनाए। आखिरी दो ओवर में भारतीय टीम ने 38 रन जोड़कर स्कोर को 170 तक पहुंचाया। दीप्ति शर्मा ने गेंद से मचाया कहर 171 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तान की पूरी टीम 17 ओवर में 106 रन पर सिमट गई। भारतीय स्पिनर Deepti Sharma ने शानदार गेंदबाजी करते हुए चार ओवर में सिर्फ 10 रन देकर पांच विकेट हासिल किए। यह महिला टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में किसी भी भारतीय गेंदबाज का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन बन गया। वहीं विश्व कप में पदार्पण कर रहीं Shree Charani ने भी दो विकेट अपने नाम किए। रनों के लिहाज से यह महिला टी20 विश्व कप में भारत की पांचवीं सबसे बड़ी जीत रही। पीटीवी को लेकर वायरल हुआ दावा सोशल मीडिया पर वायरल कुछ पोस्ट और वीडियो में दावा किया गया कि पाकिस्तान में महिला टी20 विश्व कप के प्रसारण अधिकार रखने वाले पीटीवी ने मैच के अंतिम चरण में क्रिकेट प्रसारण हटाकर फीफा मुकाबला दिखाना शुरू कर दिया। वायरल वीडियो में जर्मनी और कुराकाओ के बीच फुटबॉल मैच दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। हालांकि इस दावे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे सोशल मीडिया पर वायरल जानकारी के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
विश्व कप अभियान से पहले तकनीक का सहारा ले रही है ब्राजील टीम पांच बार की विश्व चैंपियन टीम Brazil national football team शनिवार को न्यू जर्सी के मेटलाइफ स्टेडियम में अपने पहले मुकाबले में Morocco national football team का सामना करेगी। लंबे समय से विश्व कप खिताब का इंतजार कर रही ब्राजील टीम इस बार मैदान के साथ-साथ आधुनिक तकनीक पर भी बड़ा भरोसा जता रही है। टीम के मुख्य कोच Carlo Ancelotti और उनका सपोर्ट स्टाफ खिलाड़ियों की फिटनेस, प्रदर्शन और रिकवरी पर नजर रखने के लिए अत्याधुनिक प्लेयर ट्रैकिंग तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। क्लबों से भी लगातार जुटाया जाता है खिलाड़ियों का डेटा ब्राजील टीम के स्पोर्ट्स साइंस प्रमुख Guilherme Passos के अनुसार, जब खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम के साथ नहीं होते, तब भी उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों के क्लब नियमित रूप से ट्रैकिंग सिस्टम से जुड़ी जानकारी साझा करते हैं। इस डेटा को राष्ट्रीय टीम के डेटाबेस में जोड़ा जाता है, जिससे कोचिंग स्टाफ खिलाड़ियों की फिटनेस और मैच तैयारी का लगातार आकलन कर सकता है। इससे यह समझना आसान हो जाता है कि खिलाड़ी किस स्थिति में हैं और उनकी शारीरिक तैयारी का स्तर क्या है। स्मार्ट वेस्ट से मिलती है खिलाड़ियों की हर गतिविधि की जानकारी ब्राजील के खिलाड़ी विशेष "स्मार्ट वेस्ट" पहनते हैं, जिनमें कई सेंसर लगे होते हैं। ये सेंसर खिलाड़ियों की स्प्रिंट गति, हृदय गति, थकान के स्तर, रिकवरी प्रक्रिया और मैदान पर उनकी गतिविधियों से जुड़ा डेटा रिकॉर्ड करते हैं। इस जानकारी का विश्लेषण स्पोर्ट्स साइंस टीम करती है और फिर कोचिंग स्टाफ को खिलाड़ियों की मौजूदा स्थिति से अवगत कराया जाता है। इससे खिलाड़ियों की ट्रेनिंग और मैच रणनीति तैयार करने में मदद मिलती है। तेज खिलाड़ियों के लिए अलग रणनीति बनाते हैं कोच पासोस के मुताबिक, यदि कोई खिलाड़ी बेहद तेज गति से दौड़ने वाला है, तो उसकी मांसपेशियों की रिकवरी पर विशेष ध्यान देना जरूरी हो जाता है। ऐसे खिलाड़ियों के लिए ट्रेनिंग और आराम की योजना अलग बनाई जाती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी खिलाड़ी की स्पीड उसकी सबसे बड़ी ताकत है, तो कोच उसे ऐसी रणनीति में इस्तेमाल कर सकते हैं जहां जवाबी हमले (काउंटर अटैक) अधिक प्रभावी हों। इस तरह डेटा केवल फिटनेस नहीं बल्कि खेल की रणनीति तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। केवल आंकड़े नहीं, खिलाड़ियों की भूमिका भी होती है अहम पासोस ने एक दिलचस्प उदाहरण साझा किया। उन्होंने बताया कि एक खिलाड़ी मैच में केवल छह किलोमीटर दौड़ रहा था, जबकि बाकी खिलाड़ी लगभग दोगुनी दूरी तय कर रहे थे। शुरुआती नजर में ऐसा लग सकता था कि वह खिलाड़ी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर रहा है। हालांकि, जब कोचिंग स्टाफ ने वीडियो फुटेज और सामरिक स्थिति का विश्लेषण किया तो पता चला कि वह खिलाड़ी हमेशा सही स्थान पर मौजूद रहता था और टीम की रणनीति के अनुसार बेहद प्रभावी भूमिका निभा रहा था। इससे स्पष्ट हुआ कि केवल दौड़ने की दूरी ही किसी खिलाड़ी के प्रदर्शन का सही पैमाना नहीं होती। अंतिम फैसला डेटा नहीं, कोच की सोच तय करती है स्पोर्ट्स साइंस प्रमुख ने यह भी कहा कि कई बार किसी खिलाड़ी का शारीरिक डेटा बेहद शानदार होता है, लेकिन इसके बावजूद कोच उसे टीम में शामिल नहीं करते। इसका कारण यह होता है कि तकनीकी क्षमता, मानसिक मजबूती और टीम की खेल शैली में फिट बैठना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, आधुनिक तकनीक खिलाड़ियों से जुड़ी अहम जानकारी उपलब्ध कराती है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण काम उस डेटा को समझना और उसे मैदान पर उपयोगी फैसलों में बदलना होता है। यही वजह है कि विश्लेषकों और कोचों की भूमिका आज पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय निशानेबाजी के दिग्गज खिलाड़ी और प्रतिष्ठित कोच जसपाल राणा का 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके अचानक निधन से पूरे देश में शोक की लहर है। एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता राणा ने खिलाड़ी के रूप में भारत का नाम विश्व स्तर पर रोशन किया, वहीं कोच के रूप में उन्होंने कई युवा निशानेबाजों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलता दिलाई। पेरिस ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली मनु भाकर की सफलता के पीछे भी उनका महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। पीएम मोदी ने जताया दुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि जसपाल राणा का निधन भारतीय खेल जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि राणा ने अपनी शानदार उपलब्धियों से देश का गौरव बढ़ाया और एक समर्पित गुरु के रूप में युवा खिलाड़ियों को अनुशासन, उत्कृष्टता और समर्पण का पाठ पढ़ाया। प्रधानमंत्री ने शोक संतप्त परिवार और खेल समुदाय के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी दुःख व्यक्त किया रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जसपाल राणा केवल एक महान खिलाड़ी और कोच ही नहीं, बल्कि बेहद सरल, विनम्र और नेकदिल इंसान थे। उन्होंने कहा कि भारत में शूटिंग को लोकप्रिय बनाने और नई प्रतिभाओं को आगे लाने में राणा की भूमिका हमेशा याद रखी जाएगी। बताया गया कि हाल ही में जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप से लौटते समय उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। दिल्ली पहुंचने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उनका निधन हो गया। जसपाल राणा ने अपने करियर में एशियाई और राष्ट्रमंडल खेलों में कई स्वर्ण पदक जीतकर भारत को गौरवान्वित किया। बाद के वर्षों में उन्होंने कोच के रूप में भारतीय निशानेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनका निधन भारतीय खेल जगत के लिए एक ऐसी क्षति है, जिसकी भरपाई लंबे समय तक संभव नहीं होगी।