अरुण जेटली स्टेडियम में बारिश से प्रभावित मुकाबले में पहले बल्लेबाजी करते हुए पुरानी दिल्ली 6 की शुरुआत बेहद खराब रही। तेज गेंदबाज मनी ग्रेवाल ने शुरुआती ओवरों में लगातार विकेट झटकते हुए विपक्षी टीम को 9वें ओवर तक 55 रन पर पांच विकेट के स्कोर पर पहुंचा दिया।
हालांकि, रोहन राठी और अश्विनी चिल्लर ने शानदार साझेदारी करते हुए टीम को संभाला। दोनों ने छठे विकेट के लिए 85 रन जोड़े। राठी ने 21 गेंदों पर 46 रन, जबकि चिल्लर ने 29 गेंदों में 38 रन बनाकर टीम का स्कोर 15 ओवर में 7 विकेट पर 140 रन तक पहुंचाया।
मनी ग्रेवाल ने 3 ओवर में 22 रन देकर 3 विकेट लिए, जबकि गावनिश खुराना ने 2 विकेट अपने नाम किए।
141 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी सेंट्रल दिल्ली किंग्स की शुरुआत बेहद आक्रामक रही। कप्तान यश धुल ने शुरुआत से ही विपक्षी गेंदबाजों पर दबाव बनाया और मैदान के चारों ओर आकर्षक शॉट लगाए।
उन्होंने सिर्फ 47 गेंदों में शानदार नाबाद शतक पूरा किया। उनकी पारी में चौकों से ज्यादा छक्के देखने को मिले, जिसने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। यश की विस्फोटक बल्लेबाजी के दम पर सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने केवल एक विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया और मुकाबला 9 विकेट से अपने नाम कर लिया।
यश धुल की कप्तानी पारी और मनी ग्रेवाल की शानदार गेंदबाजी की बदौलत सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने टूर्नामेंट में अपनी एक और बड़ी जीत दर्ज की। इस जीत के साथ टीम ने अंक तालिका में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली तथा खिताब की दौड़ में अपना दावा भी मजबूत किया।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
पोर्ट ऑफ स्पेन, एजेंसियां। पाकिस्तान क्रिकेट टीम ने वेस्टइंडीज को दूसरे टेस्ट मैच में 8 विकेट से हराकर दो मैचों की टेस्ट सीरीज 1-1 से बराबर कर ली। इस जीत के साथ पाकिस्तान ने विदेशी टेस्ट मैचों में लगातार 8 हार के सिलसिले को भी समाप्त कर दिया। पाकिस्तान की टीम ने इससे पहले आखिरी विदेशी टेस्ट जीत जुलाई 2023 में श्रीलंका के खिलाफ दर्ज की थी। पाकिस्तान के सामने 75 रन का लक्ष्य वेस्टइंडीज ने अपनी पहली पारी में 344 रन बनाए थे, जिसके जवाब में पाकिस्तान ने 387 रन बनाकर 43 रन की बढ़त हासिल की। पाकिस्तान की पहली पारी में अब्दुल्लाह शफीक ने 160 रन की शानदार पारी खेली। दूसरी पारी में वेस्टइंडीज की टीम पाकिस्तानी स्पिनरों के सामने ज्यादा देर नहीं टिक सकी और 117 रन पर ऑलआउट हो गई। इस तरह पाकिस्तान को जीत के लिए केवल 75 रन का लक्ष्य मिला। बाबर आजम और शफीक ने संभाला मोर्चा छोटे लक्ष्य का पीछा करते हुए पाकिस्तान ने शुरुआत में दो विकेट गंवाए, लेकिन बाबर आजम और अब्दुल्लाह शफीक ने टीम को लक्ष्य तक पहुंचा दिया। बाबर आजम ने नाबाद रहते हुए लगातार दो छक्कों के साथ मैच खत्म किया। शफीक ने इस टेस्ट में बल्ले से महत्वपूर्ण योगदान दिया। पहली पारी में उनके 160 रन वेस्टइंडीज में किसी पाकिस्तानी बल्लेबाज की 1977 के बाद पहली 150 से अधिक रन की पारी रही। उन्हें इस प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द मैच भी चुना गया। स्पिनरों ने पलटा मैच पाकिस्तान की जीत में उसके स्पिन गेंदबाजों की भूमिका बेहद अहम रही। साजिद खान और अली उस्मान ने मिलकर वेस्टइंडीज की दूसरी पारी को समेटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वेस्टइंडीज की दूसरी पारी 117 रन पर सिमटने के बाद पाकिस्तान के सामने मामूली लक्ष्य था, जिसे टीम ने 8 विकेट बाकी रहते हासिल कर लिया। तीन साल बाद मिली विदेशी टेस्ट जीत यह पाकिस्तान की तीन साल से अधिक समय बाद पहली विदेशी टेस्ट जीत है। इससे पहले टीम ने जुलाई 2023 में श्रीलंका को उसके घर में हराया था। इसके बाद पाकिस्तान को लगातार आठ विदेशी टेस्ट मैचों में हार का सामना करना पड़ा था। इस जीत से पाकिस्तान ने न सिर्फ सीरीज बराबर की, बल्कि विदेशी परिस्थितियों में लंबे समय से चली आ रही टेस्ट जीत की कमी को भी खत्म किया। अब पाकिस्तान की टीम 19 अगस्त से इंग्लैंड के खिलाफ तीन टेस्ट मैचों की सीरीज खेलेगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) टीम इंडिया के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज VVS लक्ष्मण को भारतीय क्रिकेट टीम का अगला मुख्य चयनकर्ता बनाने पर विचार कर रहा है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक मौजूदा मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर का भविष्य अब अनिश्चित नजर आ रहा है। हालांकि, लक्ष्मण की नियुक्ति को लेकर अभी BCCI की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। अजीत अगरकर का कार्यकाल बढ़ाया गया था रिपोर्ट के अनुसार अजीत अगरकर का मूल कार्यकाल जून 2026 में समाप्त हो गया था। इसके बाद BCCI ने उन्हें तीन महीने का विस्तार दिया। अब बोर्ड उनके आगे के कार्यकाल को लेकर विकल्पों पर विचार कर रहा है। अगरकर के कार्यकाल और चयन समिति की भूमिका को लेकर चर्चा ऐसे समय तेज हुई है, जब भारतीय क्रिकेट में रोहित शर्मा के वनडे भविष्य को लेकर चयनकर्ताओं और BCCI के बीच कथित मतभेद की खबरें सामने आई हैं। लक्ष्मण के नाम पर क्यों हो रहा विचार? VVS लक्ष्मण भारतीय क्रिकेट में लंबे अनुभव वाले पूर्व टेस्ट बल्लेबाज हैं और BCCI के Centre of Excellence से भी जुड़े रहे हैं। हाल के समय में वह टीम इंडिया के साथ कोचिंग और मार्गदर्शन की भूमिका में भी नजर आए हैं। उनका घरेलू और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अनुभव उन्हें चयन समिति की जिम्मेदारी के लिए संभावित उम्मीदवार बनाता है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि BCCI अंतिम रूप से उन्हें इस पद के लिए चुनेगा या किसी अन्य नाम पर फैसला करेगा। रोहित शर्मा विवाद के बीच बढ़ी हलचल मुख्य चयनकर्ता के पद को लेकर चर्चा के बीच रोहित शर्मा के वनडे भविष्य का मुद्दा भी अहम माना जा रहा है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रोहित को 2027 वनडे विश्व कप की योजनाओं से बाहर करने को लेकर चयनकर्ताओं और BCCI के शीर्ष स्तर के बीच मतभेद सामने आए थे। हालांकि, इस संबंध में BCCI की ओर से लक्ष्मण को नया मुख्य चयनकर्ता बनाए जाने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व बल्लेबाज मोहम्मद कैफ ने रोहित शर्मा के वनडे भविष्य को लेकर बड़ा बयान दिया है। कैफ के मुताबिक रोहित शर्मा ने खुद संन्यास लेने के बजाय अपने भविष्य का फैसला चयनकर्ताओं पर छोड़ दिया है। कैफ की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब रोहित के 2027 वनडे विश्व कप में खेलने को लेकर लगातार चर्चा चल रही है। रोहित के भविष्य पर बना हुआ है सस्पेंस रोहित शर्मा अब टेस्ट और टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं और वनडे में ही सक्रिय हैं। ऐसे में 2027 वनडे विश्व कप तक उनके खेलने को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं। मोहम्मद कैफ का मानना है कि रोहित ने खुद संन्यास की घोषणा करने के बजाय चयनकर्ताओं को यह फैसला लेने की स्थिति में रखा है कि उन्हें टीम में बनाए रखना है या नहीं। कैफ ने इस स्थिति को इस तरह समझाया कि रोहित का संदेश लगभग ‘आप फैसला करें, मुझे बाहर करना है तो करें’ जैसा है। 2027 विश्व कप पर भी नजर रोहित शर्मा का वनडे करियर अब सीधे तौर पर 2027 विश्व कप की योजनाओं से जुड़ा हुआ है। टीम प्रबंधन और चयनकर्ताओं की भविष्य की रणनीति में युवा खिलाड़ियों को मौका देने का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। कैफ इससे पहले भी रोहित को लेकर अपनी राय रख चुके हैं और उनका मानना रहा है कि अनुभवी बल्लेबाज को लेकर चयनकर्ताओं को स्पष्ट फैसला लेना चाहिए। BCCI की ओर से संन्यास की पुष्टि नहीं महत्वपूर्ण बात यह है कि रोहित शर्मा के ODI संन्यास की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। BCCI उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने जुलाई में भी कहा था कि रोहित टीम का हिस्सा हैं और उनके संन्यास को लेकर चल रही चर्चाओं का कोई आधार नहीं है। इसलिए फिलहाल रोहित के वनडे भविष्य को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। आने वाले समय में चयनकर्ताओं का फैसला और टीम प्रबंधन का रुख ही तय करेगा कि रोहित 2027 विश्व कप की भारतीय योजना का हिस्सा होंगे या नहीं।