नई दिल्ली, एजेंसियां। ऑस्ट्रेलिया महिला ए टीम सितंबर 2026 में भारत का दौरा करेगी। इस दौरे पर दोनों टीमों के बीच 3 टी20, 3 वनडे और एक चार दिवसीय मैच खेला जाएगा। ऑस्ट्रेलिया ए टीम के लिए यह दौरा युवा खिलाड़ियों को भारतीय परिस्थितियों में खुद को परखने का अहम मौका होगा। ताजा जानकारी के मुताबिक दौरा 12 सितंबर से शुरू होकर 2 अक्टूबर तक चलेगा।
ऑस्ट्रेलिया ए टीम के भारत दौरे के मुकाबले पंजाब और हिमाचल प्रदेश में खेले जाएंगे। दौरे की शुरुआत 12 सितंबर से होगी, जबकि चार दिवसीय मुकाबला 29 सितंबर से 2 अक्टूबर तक खेला जाएगा।
तीन टी20 और तीन वनडे मुकाबलों के जरिए खिलाड़ियों को अलग-अलग प्रारूपों में अपनी क्षमता दिखाने का मौका मिलेगा। चार दिवसीय मैच से लाल गेंद के क्रिकेट में खिलाड़ियों की तकनीक और धैर्य की भी परीक्षा होगी।
ऑस्ट्रेलिया ए टीम में तेज गेंदबाज तायला व्लामिन्क को भी शामिल किया गया है। चोटों के कारण लंबे समय तक बाहर रहने के बाद उनकी वापसी इस दौरे की खास बात है।
व्लामिन्क के अलावा डार्सी ब्राउन की मौजूदगी भी ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाजी आक्रमण को मजबूत करेगी। टीम में अनुभवी और युवा खिलाड़ियों का मिश्रण रखा गया है।
ऑस्ट्रेलिया ए टीम का यह दौरा प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के करीब लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारतीय परिस्थितियों में खेलने से खिलाड़ियों को स्पिन, गर्म मौसम और अलग तरह की पिचों के अनुकूल ढलने का अनुभव मिलेगा।
दौरे के दौरान तीनों प्रारूपों में प्रदर्शन के आधार पर खिलाड़ियों के भविष्य के चयन पर भी नजर रहेगी। वहीं, भारतीय महिला ए टीम के खिलाड़ियों के लिए भी ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ खुद को साबित करने का यह बड़ा अवसर होगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
पुणे, एजेंसियां। ग्लासगो में संपन्न कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के शानदार प्रदर्शन में पुणे स्थित आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट (ASI) की भूमिका एक बार फिर सामने आई है। वैज्ञानिक प्रशिक्षण, अनुशासन और उच्च स्तरीय खेल सुविधाओं के दम पर सेना से जुड़े खिलाड़ियों ने भारत के पदक अभियान में बड़ा योगदान दिया। भारत के 39 पदकों में सेना का बड़ा योगदान भारत ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल 39 पदक—13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य जीतकर पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। इनमें भारतीय सैन्यकर्मियों ने 18 पदक जीते, जिसमें भारतीय सेना के खिलाड़ियों के खाते में 16 पदक रहे। ASI में वैज्ञानिक प्रशिक्षण पर जोर पुणे का आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट भारत के प्रमुख उच्च प्रदर्शन केंद्रों में गिना जाता है। यहां खिलाड़ियों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण, फिटनेस, खेल विज्ञान और अनुशासित प्रशिक्षण व्यवस्था का लाभ मिलता है। खास तौर पर मुक्केबाजी में ASI की भूमिका उल्लेखनीय रही है। संस्थान ने कई ऐसे खिलाड़ियों को तैयार करने में योगदान दिया है, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। बॉक्सिंग समेत कई खेलों में दिखा असर कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने मुक्केबाजी में अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और 10 पदक जीते, जिनमें 7 स्वर्ण शामिल रहे। इसके अलावा भारोत्तोलन, जूडो, एथलेटिक्स और पैरा-एथलेटिक्स में भी भारत ने शानदार प्रदर्शन किया। 2030 अहमदाबाद कॉमनवेल्थ गेम्स से बढ़ी उम्मीदें ग्लासगो में भारत के प्रदर्शन ने 2030 में अहमदाबाद में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स को लेकर उम्मीदें बढ़ा दी हैं। सेना और ASI जैसे संस्थानों के उच्च प्रदर्शन वाले प्रशिक्षण मॉडल को आगे मजबूत किया गया तो भारत को घरेलू मैदान पर और बेहतर पदक प्रदर्शन करने में मदद मिल सकती है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। दलीप ट्रॉफी 2026-27 के लिए नॉर्थ जोन ने अपनी टीम का ऐलान कर दिया है। जम्मू-कश्मीर के विकेटकीपर-बल्लेबाज कन्हैया वाधवान को टीम का कप्तान बनाया गया है, जबकि दिल्ली के बल्लेबाज आयुष बदोनी उपकप्तान होंगे। टीम में भारतीय तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह को भी जगह मिली है। कन्हैया वाधवान को मिली बड़ी जिम्मेदारी 23 वर्षीय कन्हैया वाधवान के लिए नॉर्थ जोन की कप्तानी घरेलू क्रिकेट में एक बड़ी उपलब्धि है। जम्मू-कश्मीर के इस विकेटकीपर-बल्लेबाज ने घरेलू क्रिकेट में लगातार प्रदर्शन के जरिए अपनी पहचान बनाई है। अब उनके सामने दलीप ट्रॉफी जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में टीम का नेतृत्व करने की चुनौती होगी। अर्शदीप सिंह की भी टीम में वापसी नॉर्थ जोन की 15 सदस्यीय टीम में अर्शदीप सिंह सबसे प्रमुख नामों में शामिल हैं। वह करीब एक साल बाद लाल गेंद के क्रिकेट में वापसी करेंगे। टीम में जम्मू-कश्मीर के छह खिलाड़ियों को शामिल किया गया है, जिससे राज्य के घरेलू क्रिकेट में बढ़ते प्रभाव का भी पता चलता है। 23 अगस्त से शुरू होगी दलीप ट्रॉफी दलीप ट्रॉफी 2026-27 का आयोजन 23 अगस्त से शुरू होगा। नॉर्थ जोन की टीम में कन्हैया वाधवान और अर्शदीप के अलावा आयुष बदोनी, यश ढुल, निशांत सिंधु, अंशुल कंबोज और युधवीर सिंह जैसे खिलाड़ी भी शामिल हैं। युवा खिलाड़ियों के लिए बड़ा मंच दलीप ट्रॉफी घरेलू क्रिकेट के खिलाड़ियों के लिए भारतीय टीम में जगह बनाने का महत्वपूर्ण मंच है। नॉर्थ जोन की टीम में अनुभवी और युवा खिलाड़ियों का संतुलन है। कन्हैया वाधवान के नेतृत्व में टीम का लक्ष्य मजबूत प्रदर्शन के साथ टूर्नामेंट में आगे बढ़ना होगा।
दुबई, एजेंसियां। महिला एशिया कप 2026 को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार महिला एशिया कप का आयोजन UAE में 28 अगस्त से 13 सितंबर 2026 के बीच कराया जा सकता है। हालांकि, एशियाई क्रिकेट परिषद (ACC) ने अभी तक टूर्नामेंट के पूरे कार्यक्रम और आयोजन स्थल की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। आठ टीमें लेंगी हिस्सा रिपोर्ट के मुताबिक इस बार महिला एशिया कप में कुल आठ टीमें हिस्सा लेंगी। टूर्नामेंट के लिए टीमों और मैचों का आधिकारिक कार्यक्रम ACC की घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा। भारत की महिला टीम भी इस प्रतियोगिता में प्रमुख दावेदारों में शामिल रहेगी। UAE में आयोजन की संभावना महिला एशिया कप के लिए UAE को संभावित मेजबान के तौर पर चुने जाने की जानकारी सामने आई है। मौसम और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैलेंडर को देखते हुए UAE में आयोजन की संभावना जताई जा रही है। भारत-पाकिस्तान मुकाबले पर भी नजर टूर्नामेंट के आधिकारिक कार्यक्रम का इंतजार इसलिए भी है क्योंकि क्रिकेट प्रशंसकों की नजर भारत और पाकिस्तान की महिला टीमों के संभावित मुकाबले पर रहेगी। ACC की ओर से आधिकारिक कार्यक्रम जारी होने के बाद ही भारत के मैचों की तारीख, समय और स्थान की पुष्टि होगी।