Donald Trump अब सिर्फ Iran के साथ युद्धविराम या शांति समझौते तक सीमित नहीं रहना चाहते। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप अब पूरे पश्चिम एशिया की राजनीतिक व्यवस्था को नए सिरे से आकार देने की कोशिश में जुटे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने कई अरब और मुस्लिम देशों के नेताओं से कहा है कि ईरान युद्ध खत्म होने के बाद वे Israel के साथ अपने संबंध सामान्य करें और Abraham Accords में शामिल हों।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि शनिवार को हुई एक उच्चस्तरीय कॉन्फ्रेंस कॉल में ट्रंप ने यह मुद्दा उठाया। इस बातचीत में Saudi Arabia, United Arab Emirates, Qatar, Pakistan, Turkey, Egypt, Jordan और Bahrain के नेता शामिल थे।
बताया गया कि ट्रंप ने कहा कि जो देश अब तक इजरायल को मान्यता नहीं देते हैं, उन्हें अब रिश्ते सामान्य करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ट्रंप के इस बयान के बाद कॉल पर कुछ देर के लिए खामोशी छा गई। माहौल हल्का करने के लिए ट्रंप ने मजाक में पूछा, “क्या आप लोग अभी भी लाइन पर हैं?”
रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब, कतर और पाकिस्तान की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई। इन देशों के इजरायल के साथ अब तक औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी कहा कि अगर पश्चिम एशिया के देश अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होते हैं तो क्षेत्र में स्थिरता बढ़ेगी। उन्होंने यह भी कहा, “कौन जानता है, शायद ईरान भी इसमें शामिल होना चाहे। इसे फिलहाल बेहद मुश्किल संभावना माना जा रहा है। ईरान लंबे समय से इजरायल को मान्यता देने से इनकार करता रहा है।
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi पहले ही कह चुके हैं कि ईरान ऐसे शासन को कभी मान्यता नहीं देगा, जिस पर बच्चों की हत्या और नरसंहार के आरोप हों।
अब्राहम अकॉर्ड्स की शुरुआत साल 2020 में अमेरिका की मध्यस्थता में हुई थी। इसका उद्देश्य अरब देशों और इजरायल के बीच संबंध सामान्य करना था।
सबसे पहले United Arab Emirates और Bahrain ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। बाद में Sudan और Morocco भी इसमें शामिल हुए।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह पहल पश्चिम एशिया में ईरान के प्रभाव को सीमित करने और इजरायल व अरब देशों के बीच व्यापार, तकनीक और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है।
ट्रंप की इस योजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती Mohammed bin Salman के नेतृत्व वाला सऊदी अरब माना जा रहा है।
सऊदी अरब ने साफ कहा है कि इजरायल के साथ किसी भी औपचारिक रिश्ते की शुरुआत तभी होगी, जब फिलिस्तीनी राष्ट्र के गठन की दिशा में ठोस और स्थायी कदम उठाए जाएंगे।
दूसरी ओर, इजरायल फिलहाल इस मांग को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं दिख रहा।
ट्रंप पश्चिम एशिया में नए समीकरण बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ईरान के साथ समझौता अभी आसान नहीं दिख रहा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते में 60 दिन का युद्धविराम, होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर आगे की बातचीत शामिल हो सकती है।
लेकिन प्रतिबंध हटाने, यूरेनियम भंडार और फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों जैसे मुद्दों पर अब भी सहमति नहीं बन पाई है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी बातचीत अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है और दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण समझौते पर जल्द हस्ताक्षर हो सकते हैं। ईरान ने स्पष्ट किया है कि अभी अंतिम सहमति नहीं बनी है और कई मुद्दों पर बातचीत जारी है। ट्रंप बोले- औपचारिक प्रक्रिया बाकी व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि समझौते के अधिकांश बिंदुओं पर सहमति बन चुकी है और अब केवल कुछ औपचारिक दस्तावेजी प्रक्रियाएं पूरी की जानी हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले कुछ दिनों में इन प्रक्रियाओं को अंतिम रूप देकर समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। ट्रंप के अनुसार, समझौते पर हस्ताक्षर का कार्यक्रम इसी सप्ताहांत यूरोप में आयोजित किया जा सकता है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर सकते हैं अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ट्रंप ने बताया कि यदि हस्ताक्षर समारोह आयोजित होता है तो वह स्वयं इसमें शामिल नहीं होंगे। उनकी जगह अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। इस बयान को अमेरिका और ईरान के बीच कई महीनों से चल रही कूटनीतिक बातचीत में महत्वपूर्ण प्रगति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी जताई उम्मीद ट्रंप ने कहा कि संभावित समझौते से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव कम करने का रास्ता खुल सकता है। उनका मानना है कि समझौते के बाद इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर सामान्य गतिविधियां बहाल होने में मदद मिलेगी। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है और क्षेत्रीय तनाव के कारण यह लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय रहा है। ईरान ने कहा- अभी अंतिम समझौता नहीं दूसरी ओर, ईरान ने ट्रंप के दावों पर सावधानीपूर्ण प्रतिक्रिया दी है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सरकारी टेलीविजन से बातचीत में कहा कि वार्ता के कई पहलुओं पर प्रगति हुई है, लेकिन अभी अंतिम समझौता नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान अमेरिका की ओर से नई मांगें सामने रखी जा रही हैं, जिससे कुछ मुद्दों पर सहमति बनने में कठिनाई आ रही है। बघाई ने दोहराया कि ईरान अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और निर्धारित "रेड लाइन" से पीछे नहीं हटेगा। आगे की कूटनीतिक गतिविधियों पर नजर ट्रंप के आशावादी बयान और ईरान की सतर्क प्रतिक्रिया के बीच अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर आगामी कूटनीतिक गतिविधियों पर टिकी हुई है। यदि दोनों पक्ष शेष मतभेदों को दूर करने में सफल रहते हैं, तो यह समझौता पश्चिम एशिया की राजनीति और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।
Muscat: ओमान के तट पर जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं के बीच गुरुवार को एक और समुद्री सुरक्षा घटना सामने आई है। शिनास बंदरगाह के पास एक जहाज से जुड़ी घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। मामले की निगरानी लगातार की जा रही है और स्थिति पर करीबी नजर रखी जा रही है। भारतीय दूतावास ने दी जानकारी मस्कट स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि 11 जून को शिनास बंदरगाह के निकट एक जहाज से जुड़ी घटना की सूचना प्राप्त हुई है। दूतावास ने कहा कि वह स्थानीय अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। दूतावास के अनुसार, स्थिति का आकलन किया जा रहा है और आवश्यक जानकारी जुटाने के लिए संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय जारी है। 24 घंटे के भीतर दूसरी समुद्री घटना यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब ओमान के तट के पास एक वाणिज्यिक जहाज पर हुए हमले को 24 घंटे भी नहीं हुए हैं। हाल के दिनों में क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं और समुद्री मार्गों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर समुद्री यातायात पर भी दिखाई दे रहा है, जिसके कारण क्षेत्रीय देशों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने सतर्कता बढ़ा दी है। स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में भारतीय मिशन भारतीय दूतावास ने स्पष्ट किया है कि वह मामले से जुड़े सभी घटनाक्रमों पर नजर रख रहा है और स्थानीय प्रशासन से लगातार जानकारी प्राप्त कर रहा है। फिलहाल घटना की प्रकृति और उससे हुए संभावित नुकसान को लेकर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता लगातार सामने आ रही घटनाओं ने ओमान और खाड़ी क्षेत्र के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां और समुद्री सुरक्षा एजेंसियां हालात पर बारीकी से नजर रख रही हैं, जबकि क्षेत्र में जहाजों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
बेलफास्ट/लंदन: उत्तरी आयरलैंड की राजधानी बेलफास्ट में एक स्थानीय व्यक्ति पर कथित जानलेवा चाकू हमले के बाद शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब बड़े पैमाने पर प्रवासी विरोधी दंगों में बदल गया है। हिंसा की लपटें बेलफास्ट से निकलकर ब्रिटेन और आयरलैंड के कई अन्य शहरों तक पहुंच गई हैं, जहां आगजनी, लूटपाट और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं। चाकूबाजी की घटना के बाद सड़कों पर उतरी भीड़ जानकारी के अनुसार, बेलफास्ट में एक आयरिश नागरिक पर चाकू से हमला किए जाने की घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों में आक्रोश फैल गया। बताया जा रहा है कि हमले में घायल 40 वर्षीय व्यक्ति की हालत गंभीर है। घटना के बाद विभिन्न समूहों ने विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया, जो जल्द ही हिंसक रूप ले बैठा। बेलफास्ट में घर, दुकानें और वाहन बने निशाना बेलफास्ट और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए। कई स्थानों पर भीड़ ने वाहनों को आग के हवाले कर दिया, दुकानों में तोड़फोड़ की और कुछ प्रतिष्ठानों को लूट लिया। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, एक अफ्रीकी मूल के व्यापारी की दुकान में भी आग लगा दी गई। सुरक्षा बलों ने हालात पर नियंत्रण पाने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है। लंदन और ग्लासगो तक फैला विरोध बेलफास्ट की घटनाओं के बाद लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर और स्कॉटलैंड के ग्लासगो सहित कई शहरों में भी प्रवासन नीति के खिलाफ प्रदर्शन हुए। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पों की भी खबर है। आरोपी शरणार्थी की पृष्ठभूमि पर छिड़ी बहस पुलिस के अनुसार, हमले का आरोपी सूडान मूल का शरणार्थी है, जो पहले फ्रांस और आयरलैंड होते हुए बेलफास्ट पहुंचा था। उसे ब्रिटेन में अस्थायी रूप से रहने की अनुमति मिली हुई थी। घटना के बाद देश में शरणार्थी और प्रवासन नीतियों को लेकर नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्टों की जांच अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर घटना से जुड़े वीडियो और संदेशों के तेजी से प्रसार ने तनाव बढ़ाने में भूमिका निभाई। पुलिस कई ऑनलाइन पोस्ट और खातों की जांच कर रही है, जिन पर हिंसा भड़काने के आरोप लगाए जा रहे हैं। कई प्रवासी परिवारों ने छोड़े घर हिंसा और बढ़ते तनाव के बीच कई प्रवासी परिवारों ने सुरक्षा कारणों से अपने घर छोड़ दिए हैं। कुछ इलाकों में धार्मिक और सामुदायिक गतिविधियों को भी अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। स्थानीय संगठनों ने प्रशासन से प्रभावित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। राजनीतिक बयानबाजी से बढ़ा विवाद घटना के बाद कई राजनीतिक नेताओं और सार्वजनिक हस्तियों के बयानों ने विवाद को और बढ़ा दिया है। जहां कुछ नेताओं ने इसे प्रवासन नीति की विफलता बताया, वहीं अन्य ने हिंसा और घृणा फैलाने वाली राजनीति की आलोचना की है। प्रशासन की अपील- शांति बनाए रखें ब्रिटेन और उत्तरी आयरलैंड के अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि हिंसा, आगजनी या नफरत फैलाने वाली गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।