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Duterte Faces ICC Trial Over Drug War

फिलीपींस के पूर्व राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते पर ICC में ट्रायल तय: ‘क्राइम्स अगेंस्ट ह्यूमैनिटी’ मामले में बड़ा फैसला

surbhi अप्रैल 24, 2026 0
Former Philippine President Rodrigo Duterte faces ICC trial over crimes against humanity charges
Rodrigo Duterte ICC Trial Begins

द हेग में अंतरराष्ट्रीय अदालत ने आरोपों को दी मंजूरी

अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ने गुरुवार को फिलीपींस के पूर्व राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते के खिलाफ ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ (crimes against humanity) के आरोपों को आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है। अदालत के जजों ने कहा कि उपलब्ध सबूत यह मानने के लिए पर्याप्त हैं कि उनके कार्यकाल में गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन हुए।

ड्रग्स के खिलाफ अभियान बना विवाद की जड़

रोड्रिगो दुतेर्ते पर आरोप है कि उनके कार्यकाल में चलाए गए “एंटी-ड्रग अभियान” के दौरान बड़े पैमाने पर हत्याएं हुईं। अभियोजकों के अनुसार, पुलिस और कथित हिट स्क्वॉड ने कई लोगों की हत्या की, जिन्हें सरकार ने अपराधी बताया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन कार्रवाइयों की शुरुआत उनके राष्ट्रपति बनने से पहले, डावाओ शहर के मेयर रहते हुए भी हुई थी।

अदालत का बड़ा निष्कर्ष: “नीति बनाकर हत्या को बढ़ावा दिया गया”

ICC के तीन जजों की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि ऐसे “ठोस आधार” मौजूद हैं जिनसे यह साबित होता है कि दुतेर्ते ने कथित अपराधियों को “neutralise” करने की नीति विकसित और लागू की।

अदालत के अनुसार, यह केवल कुछ घटनाएं नहीं थीं, बल्कि एक व्यवस्थित अभियान के संकेत मिलते हैं।

हजारों मौतों का दावा, आंकड़ों में बड़ा अंतर

इस पूरे अभियान में मौतों के आंकड़े अलग-अलग स्रोतों में भिन्न हैं:

  • फिलीपींस पुलिस: लगभग 6,000 मौतें
  • मानवाधिकार संगठन: 20,000 से 30,000 तक मौतों का अनुमान

यह अंतर इस मामले को और अधिक विवादास्पद बनाता है।

दुतेर्ते की सफाई और कानूनी लड़ाई

81 वर्षीय दुतेर्ते ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उनके वकीलों का कहना है कि यह मामला “बिना पुष्टि वाले गवाहों” और संदिग्ध बयानों पर आधारित है।

दुतेर्ते फिलहाल अदालत की कार्यवाही में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हुए हैं और वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए जुड़े रहे हैं।

ICC का बड़ा कदम और अपीलें खारिज

ICC की अपील पीठ ने पहले ही दुतेर्ते की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें कहा गया था कि फिलीपींस के कोर्ट से हटने के बाद ICC को इस मामले पर अधिकार नहीं है।

इसके साथ ही अदालत ने यह भी माना कि अब मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है।

पीड़ित परिवारों की प्रतिक्रिया: “यह न्याय की शुरुआत है”

फिलीपींस में इस फैसले का कई पीड़ित परिवारों ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह निर्णय वर्षों से चले आ रहे दर्द और अन्याय के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम है।

कुछ परिवारों ने कहा कि अब उम्मीद है कि उनके प्रियजनों को आखिरकार न्याय मिल सकेगा।

मानवाधिकार संगठनों ने भी इस फैसले को ऐतिहासिक बताया है। उनका कहना है कि यह संदेश देता है कि चाहे कोई भी नेता हो, गंभीर अपराधों से बच नहीं सकता।

वैश्विक न्याय व्यवस्था के लिए अहम मामला

रोड्रिगो दुतेर्ते का यह मामला अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह ट्रायल इस बात की परीक्षा होगा कि वैश्विक स्तर पर सत्ता में रहे नेताओं को मानवाधिकार उल्लंघन के लिए कितनी जवाबदेही तय की जाती है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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काला सागर में MV OMORFI पोत पर हमले से भारत सख्त, यूक्रेन के राजदूत तलब; समुद्री सुरक्षा पर जताई गहरी चिंता

Black Sea MV OMORFI Attack: काला सागर में मालवाहक पोत MV OMORFI पर हुए हमले के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। इस हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई, जबकि दो अन्य भारतीय सुरक्षित बच गए। घटना को गंभीरता से लेते हुए विदेश मंत्रालय (MEA) ने भारत में यूक्रेन के राजदूत डॉ. ओलेक्जेंडर पोलिशचुक को तलब किया और वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों को लेकर गहरी चिंता और कड़ी नाराजगी जताई। विदेश मंत्रालय ने जताई कड़ी आपत्ति विदेश मंत्रालय ने यूक्रेनी राजदूत से कहा कि निर्दोष नाविकों और आम नागरिकों की जान को खतरे में डालने वाली ऐसी कार्रवाई किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। भारत ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा, नौवहन की स्वतंत्रता और वैश्विक व्यापार को सुरक्षित रखना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है। मंत्रालय ने यूक्रेन सरकार तक भारत की गंभीर चिंता तत्काल पहुंचाने का आग्रह भी किया। हमले के समय जहाज पर थे तीन भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, 18 जुलाई को जब MV OMORFI पर हमला हुआ, उस समय जहाज पर चालक दल के कुल 10 सदस्य मौजूद थे, जिनमें तीन भारतीय नागरिक भी शामिल थे। हमले में एक भारतीय की मौत हो गई, जबकि दो अन्य भारतीय सुरक्षित हैं। घटना के बाद भारतीय दूतावास लगातार दोनों नागरिकों के संपर्क में है और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा पर जोर भारत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में चलने वाले वाणिज्यिक जहाजों को किसी भी सैन्य संघर्ष का निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। ऐसे हमले न केवल नाविकों की जान जोखिम में डालते हैं, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी गंभीर असर डालते हैं। भारत ने सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय कानूनों और समुद्री नियमों का पालन करने की अपील की है। हाल ही में रूसी हमले पर भी जताई थी चिंता यह घटना यूक्रेन के तट के पास एक अन्य वाणिज्यिक जहाज पर हुए रूसी हमले के कुछ ही दिनों बाद सामने आई है। उस हमले में चार भारतीयों समेत 10 लोगों की मौत हुई थी। रूस ने दावा किया था कि जहाज पर सैन्य सामग्री ले जाई जा रही थी, लेकिन भारत ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा था कि जहाज में केवल अनाज लदा हुआ था। भारत ने एक बार फिर दोहराया है कि युद्ध या संघर्ष के दौरान भी अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए और व्यापारिक जहाजों को किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई से दूर रखा जाना चाहिए। विदेश मंत्रालय ने कहा कि समुद्री सुरक्षा और वैश्विक व्यापार की निर्बाध आवाजाही अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्राथमिकता होनी चाहिए।  

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PoK के रावलकोट में हिंसा, प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग का दावा; 9 लोगों की मौत की खबर, वीडियो वायरल

Rawalakot (PoK): पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के रावलकोट में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने गोलीबारी की, जिसमें कम से कम 9 लोगों की मौत होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इस आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बातचीत विफल होने के बाद बढ़ा तनाव रिपोर्ट्स के मुताबिक, जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) और प्रशासन के बीच कई दौर की बातचीत बेनतीजा रही। इसके बाद हजारों प्रदर्शनकारी मुजफ्फराबाद की ओर मार्च की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ, जिसके बाद गोलीबारी की खबर सामने आई। 52 दिनों से जारी है आंदोलन बताया जा रहा है कि रावलकोट और आसपास के क्षेत्रों में पिछले 52 दिनों से विरोध प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारी विभिन्न स्थानीय मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। ताजा घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। वीडियो में कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि गोलीबारी में कई लोगों की मौत हुई और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। हालांकि, इन वीडियो और मौतों के दावों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। एक वायरल वीडियो में एक व्यक्ति रावलकोट के हालात बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मीडिया से हस्तक्षेप की अपील करता दिखाई दे रहा है। वह दावा करता है कि फायरिंग के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। प्रशासन की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। फिलहाल पाकिस्तानी प्रशासन की ओर से हताहतों की संख्या या कार्रवाई को लेकर विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। वहीं, हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।  

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वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि दोनों देशों के बीच शांति समझौते की अच्छी संभावना बन रही है और बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि कूटनीतिक प्रयास विफल रहे और ईरान ने समझौते का पालन नहीं किया, तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।   'बातचीत अच्छी चल रही है, लेकिन विकल्प खुले हैं'   ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच "अच्छी बातचीत" चल रही है और उन्हें उम्मीद है कि एक समझौता संभव है। उन्होंने कहा, "समझौते की बहुत अच्छी संभावना है, लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो हम फिर से हमले करेंगे।" ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान के साथ कूटनीतिक समाधान चाहता है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।   क्षेत्रीय तनाव अभी भी बरकरार   हालांकि बातचीत आगे बढ़ रही है, लेकिन पश्चिम एशिया में तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। हाल के दिनों में ईरान समर्थित समूहों द्वारा ड्रोन हमलों और रणनीतिक क्षेत्रों में गतिविधियां बढ़ने से सुरक्षा चिंताएं बनी हुई हैं। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह क्षेत्र में अपने सैन्य और समुद्री हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।   समझौते पर दुनिया की नजर   विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होता है, तो इससे पश्चिम एशिया में तनाव कम हो सकता है और वैश्विक ऊर्जा बाजारों को भी राहत मिलेगी। हालांकि दोनों पक्षों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद अब भी बने हुए हैं, इसलिए आने वाले दिनों की बातचीत को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  

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