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PoJK चुनावों पर भारत की कड़ी प्रतिक्रिया

PoJK चुनावों को भारत ने बताया 'पूरी तरह छलावा', पाकिस्तान पर दमन के लगाए आरोप

ranjan kumar tiwari अगस्त 5, 2026 0
PoJK चुनावों पर विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया
PoJK चुनावों पर भारत का बयान

विदेश मंत्रालय ने PoJK चुनावों को बताया ‘पूरी तरह छलावा’, पाकिस्तान पर दमन का आरोप

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में कराए गए तथाकथित स्थानीय चुनावों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 4 अगस्त को इन चुनावों को “पूरी तरह छलावा” करार दिया। भारत ने कहा कि ऐसे चुनाव क्षेत्र में जारी जन-असंतोष और लोगों की वास्तविक समस्याओं को छिपा नहीं सकते।

 

पाकिस्तान पर बल प्रयोग और दमन का आरोप

 

 

विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया कि PoJK में लोगों के विरोध और असंतोष का जवाब पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने गोलीबारी, ब्लैकआउट, धमकी और दमन के जरिए दिया। भारत के मुताबिक, जून 2026 से जारी कार्रवाई में कम से कम 90 नागरिकों की जान जा चुकी है.

 

भारत ने पाकिस्तान से क्षेत्र में मानवाधिकारों और नागरिकों के अधिकारों के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है।

 

चुनाव की निष्पक्षता पर भी उठे सवाल

 

 

PoJK में चुनावों के दौरान हिंसा और विरोध-प्रदर्शन की खबरें सामने आई थीं। इससे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठे। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने चुनाव का बहिष्कार किया था और चुनावी धोखाधड़ी का आरोप लगाया था.

 

भारत का कहना है कि चुनाव जैसी प्रक्रिया आयोजित करने से क्षेत्र में लोगों के असंतोष और वहां की वास्तविक स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

 

भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी ध्यान देने को कहा

 

 

विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान की कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित किया है। भारत ने कहा कि पाकिस्तान को अपने नियंत्रण वाले क्षेत्र में लोगों के अधिकारों और लोकतांत्रिक आकांक्षाओं का सम्मान करना चाहिए।

 

PoJK को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से राजनीतिक और कूटनीतिक विवाद जारी है। ताजा बयान से दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर तनाव और बढ़ने की संभावना है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

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Huge flames and thick black smoke rise from a chemical plant in São Paulo, Brazil, after a massive fire and multiple explosions.
ब्राजील के साओ पाउलो में केमिकल प्लांट में भीषण आग, कई धमाकों से दहशत; 150 लोगों को सुरक्षित निकाला गया

ब्राजील के साओ पाउलो राज्य में स्थित एक केमिकल प्लांट में भीषण आग लगने के बाद कई जोरदार धमाके हुए, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आग इतनी विकराल थी कि आसमान में सैकड़ों फीट तक घना काला धुआं और आग की ऊंची लपटें दिखाई देने लगीं। एहतियात के तौर पर आसपास के इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकाला गया और करीब 150 लोगों का रेस्क्यू किया गया। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, आग ग्रेटर साओ पाउलो के इटाक्वाक्वेसेटुबा (Itaquaquecetuba) स्थित क्वेमा क्विमिका (Quema Quimica) नामक रासायनिक संयंत्र में स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 3 बजे लगी। कई धमाकों से दहशत, घर छोड़कर भागे लोग आग लगने के कुछ ही देर बाद प्लांट में लगातार कई धमाके हुए, जिससे आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों में दहशत फैल गई। कई परिवार एहतियातन अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर चले गए। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में फैक्ट्री से उठती आग की विशाल लपटें और 100 फीट से अधिक ऊंचाई तक उठता काला धुआं साफ दिखाई दे रहा है। अधिकारियों ने भी घटनास्थल पर कई विस्फोट होने की पुष्टि की है। 30 दमकल गाड़ियां और 60 से ज्यादा फायरफाइटर मौके पर आग पर काबू पाने के लिए 30 दमकल गाड़ियों और 60 से अधिक दमकलकर्मियों को मौके पर तैनात किया गया है। फायर ब्रिगेड लगातार आग बुझाने और उसे आसपास की औद्योगिक इकाइयों तक फैलने से रोकने की कोशिश कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, अब तक किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है। सॉल्वेंट टैंक बन रहे आग की बड़ी वजह स्थानीय मीडिया के अनुसार, जिस प्लांट में आग लगी है वहां सॉल्वेंट स्टोर करने के लिए 24 बड़े टैंक मौजूद हैं। प्रत्येक टैंक की क्षमता लगभग 31 क्यूबिक मीटर बताई गई है। इन टैंकों में मौजूद अत्यधिक ज्वलनशील रसायनों के कारण आग तेजी से फैलती गई और लगातार धमाके होते रहे। एक वायरल वीडियो में धमाके की वजह से मैनहोल का ढक्कन हवा में उछलता दिखाई देता है। बताया गया है कि इस विस्फोट की चपेट में आने से वहां से गुजर रहा एक व्यक्ति गिर पड़ा, हालांकि उसकी स्थिति को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। आसपास की बिजली आपूर्ति बंद स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने आसपास के क्षेत्रों की बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद कर दी है, ताकि किसी बड़े हादसे से बचा जा सके। प्रभावित क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। क्या बनाती है यह कंपनी? आग से प्रभावित कंपनी Quema Quimica सॉल्वेंट्स और पॉलिएस्टर रेजिन के उत्पादन और विपणन का काम करती है। चूंकि प्लांट में बड़ी मात्रा में ज्वलनशील रसायन मौजूद हैं, इसलिए आग बुझाने का अभियान काफी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। फिलहाल दमकल विभाग की टीमें लगातार आग पर काबू पाने में जुटी हैं और घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि आग पूरी तरह बुझने के बाद ही नुकसान और संभावित कारणों का विस्तृत आकलन किया जाएगा।  

kalpana अगस्त 5, 2026 0
Baloch activists call for observing August 11 as Balochistan's Independence Day and seek international recognition.

बलूचिस्तान का बड़ा ऐलान, 11 अगस्त को मनाएगा 'स्वतंत्रता दिवस'; पाकिस्तान से अलग राष्ट्र की फिर उठी मांग

Former Bangladesh Prime Minister Sheikh Hasina is set to address the media during her first press conference in a year.

क्या बांग्लादेश लौटेंगी शेख हसीना? एक साल बाद आज करेंगी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस, बड़े ऐलान के संकेत

Diplomatic efforts between the United States and Iran intensify as Qatar signals a draft agreement is under discussion.

US-ईरान तनाव कम होने के संकेत, समझौते का ड्राफ्ट तैयार; कतर बोला- अगले कुछ दिनों में हो सकती है डील

Indian-flagged cargo vessel MSV Faize Noore Oliya sinks off Yemen after an attack as rescue teams evacuate the crew.
यमन तट के पास हमले के बाद भारतीय मालवाहक जहाज डूबा, 13 भारतीय नाविक सुरक्षित बचाए गए

यमन के तट के पास मंगलवार (4 अगस्त) को हुए हमले में भारतीय झंडे वाला मालवाहक जहाज MSV Faize Noore Oliya डूब गया। राहत की बात यह रही कि जहाज पर सवार 13 भारतीयों समेत कुल 14 चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया। इस घटना के बाद भारत सरकार ने कमर्शियल जहाजों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा करते हुए समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर घटना की जानकारी साझा करते हुए बताया कि जहाज यमन के समुद्री क्षेत्र के पास एक प्रोजेक्टाइल की चपेट में आने के बाद पलट गया और डूब गया। हमले को लेकर सामने आए अलग-अलग दावे हमले की परिस्थितियों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। भारत सरकार के अनुसार जहाज एक प्रोजेक्टाइल की चपेट में आया था, जबकि यमन सरकार समर्थित नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज का दावा है कि पश्चिमी तट के पास विस्फोटकों से भरी एक नाव के जरिए जहाज पर हमला किया गया। फिलहाल हमले की वास्तविक परिस्थितियों की पुष्टि नहीं हो सकी है और मामले की जांच जारी है। विदेश मंत्रालय ने जताई कड़ी आपत्ति विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर चलने वाले व्यावसायिक जहाजों पर किसी भी प्रकार के हमले अस्वीकार्य हैं। मंत्रालय ने कहा कि वैश्विक व्यापार और समुद्री सुरक्षा के लिए ऐसे हमलों को तत्काल रोका जाना चाहिए तथा सभी देशों को सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। सर्बानंद सोनोवाल ने क्या कहा? केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने एक्स पर लिखा कि भारतीय मालवाहक जहाज MSV Faize Noore Oliya पर हुआ हमला पूरी तरह अस्वीकार्य है और भारत इसकी कड़ी निंदा करता है। उन्होंने बताया कि जहाज पर सवार 13 भारतीयों सहित सभी 14 नाविकों को यमन कोस्ट गार्ड ने सुरक्षित बचाकर मोखा (Mocha) बंदरगाह पहुंचा दिया है। सोनोवाल ने कहा कि उन्होंने महानिदेशक समुद्री प्रशासन (DGMA) को निर्देश दिए हैं कि सभी संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और बचाए गए चालक दल को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाए। भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर सरकार की नजर भारत सरकार लगातार यमन और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में सुरक्षा स्थिति पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों के अनुसार भारतीय दूतावास और संबंधित एजेंसियां चालक दल के सदस्यों से संपर्क में हैं और उनकी सुरक्षित वापसी के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। यह घटना एक बार फिर लाल सागर और यमन के आसपास के समुद्री क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों को उजागर करती है, जहां पिछले कुछ समय से व्यावसायिक जहाजों पर हमलों की घटनाएं अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बनी हुई हैं।  

kalpana अगस्त 5, 2026 0
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PoJK चुनावों पर विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया

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शेख हसीना के वर्चुअल कार्यक्रम पर विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया
शेख हसीना के वर्चुअल संबोधन से भारत सरकार ने बनाई दूरी, विदेश मंत्रालय ने जारी किया स्पष्टीकरण

सरकार ने शेख हसीना के भारत से दिए जाने वाले बयान से बनाई दूरी, कहा- कार्यक्रम से भारत सरकार का कोई संबंध नहीं नई दिल्ली, एजेंसियां। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत से होने वाले वर्चुअल संबोधन को लेकर भारत सरकार ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि नई दिल्ली में आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम निजी प्रकृति का है और भारत सरकार का इससे कोई संबंध नहीं है।   विदेश मंत्रालय ने साफ किया रुख     विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि शेख हसीना जिस कार्यक्रम में संबोधित करने वाली हैं, वह भारत सरकार द्वारा आयोजित या प्रायोजित कार्यक्रम नहीं है। मंत्रालय ने इस आयोजन से खुद को स्पष्ट रूप से अलग कर लिया है। यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब शेख हसीना के भारत से दिए जाने वाले संबोधन को लेकर बांग्लादेश में राजनीतिक हलचल बढ़ गई है।     बांग्लादेश ने मीडिया को दी चेतावनी     शेख हसीना के प्रस्तावित वर्चुअल संबोधन को लेकर बांग्लादेश सरकार ने भी सख्त रुख अपनाया है। वहां के अधिकारियों ने मीडिया संस्थानों को शेख हसीना के बयान को प्रकाशित या प्रसारित नहीं करने की चेतावनी दी है। बांग्लादेश की ओर से आशंका जताई गई है कि उनका संबोधन देश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को प्रभावित कर सकता है।     भारत-बांग्लादेश संबंधों के बीच बढ़ी संवेदनशीलता     शेख हसीना पिछले वर्ष बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल के बाद भारत आई थीं। इसके बाद से उनका भारत में रहना दोनों देशों के बीच संवेदनशील कूटनीतिक मुद्दा बना हुआ है।   भारत सरकार ने इस पूरे मामले में यह स्पष्ट करने की कोशिश की है कि शेख हसीना का निजी कार्यक्रम भारत सरकार की आधिकारिक गतिविधि नहीं है। ऐसे में इस आयोजन को भारत सरकार की आधिकारिक राजनीतिक पहल के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

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