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Trump Escalates Tensions With Cuba Remark

US-Cuba Tension: ट्रंप का बड़ा बयान–‘एयरक्राफ्ट कैरियर भेजूंगा, क्यूबा सरेंडर कर देगा’, बढ़ सकती है नई टकराव की स्थिति

surbhi मई 2, 2026 0
Donald Trump speaking about Cuba amid rising US-Cuba tensions and possible new sanctions
Trump Cuba Warning Aircraft Carrier Statement

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बयान को लेकर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने क्यूबा को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। फ्लोरिडा के पाम बीचेस में एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका “बहुत जल्द क्यूबा पर कब्जा करने वाला है”, जिससे कूटनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई।

‘एयरक्राफ्ट कैरियर भेजूंगा, तुरंत सरेंडर करेंगे’

कार्यक्रम में बोलते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने मजाकिया लेकिन तीखे अंदाज में कहा कि अगर अमेरिका अपना एयरक्राफ्ट कैरियर क्यूबा के पास भेज दे, तो वहां के लोग तुरंत आत्मसमर्पण कर देंगे।
उन्होंने कहा, “हम वहां लगभग तुरंत कब्जा कर सकते हैं, वे धन्यवाद कहेंगे और हार मान लेंगे।”

इस बयान के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या ट्रंप इसे हल्के-फुल्के अंदाज में कह रहे थे या यह किसी संभावित रणनीति का संकेत है।

बयान के पीछे क्या संकेत?

ट्रंप ने अपने बयान को विस्तार से नहीं समझाया, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान अमेरिका की सख्त विदेश नीति का हिस्सा हो सकता है।
हालांकि, व्हाइट हाउस की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, जिससे स्थिति और अस्पष्ट बनी हुई है।

क्यूबा पर नए प्रतिबंधों का ऐलान

इस बयान के साथ ही डोनाल्ड ट्रंप ने 1 मई 2026 को क्यूबा के खिलाफ नए प्रतिबंध लागू करने का आदेश दिया है।
इन प्रतिबंधों में:

  • क्यूबा के कुछ अधिकारियों और संस्थाओं को निशाना बनाया गया है
  • उनके साथ लेन-देन करने वाले विदेशी बैंकों को चेतावनी दी गई है

विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम क्यूबा पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है।

अमेरिका-क्यूबा संबंधों का इतिहास

अमेरिका और क्यूबा के बीच संबंध दशकों से तनावपूर्ण रहे हैं।
क्यूबा मिसाइल संकट के बाद से दोनों देशों के बीच अविश्वास बना हुआ है।
हालांकि कुछ समय के लिए रिश्तों में सुधार की कोशिश हुई, लेकिन हाल के वर्षों में फिर से तनाव बढ़ता नजर आ रहा है।

क्या बढ़ेगा सैन्य टकराव?

ट्रंप के बयान के बाद यह आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका क्यूबा के खिलाफ और सख्त कदम उठा सकता है।
हालांकि, अभी तक किसी सैन्य कार्रवाई का आधिकारिक संकेत नहीं मिला है।
फिर भी, एयरक्राफ्ट कैरियर जैसे शब्दों का इस्तेमाल यह दिखाता है कि अमेरिका अपनी सैन्य ताकत का संदेश देना चाहता है।

वैश्विक राजनीति पर असर

इस बयान का असर केवल अमेरिका और क्यूबा तक सीमित नहीं रहेगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर तनाव बढ़ता है तो इसका असर लैटिन अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।
इसके अलावा, यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका पहले से ही ईरान और अन्य क्षेत्रों में तनाव का सामना कर रहा है।

आगे क्या?

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप का यह बयान केवल राजनीतिक संदेश है या आने वाले किसी बड़े कदम की झलक।
लेकिन इतना तय है कि इस बयान और नए प्रतिबंधों के बाद अमेरिका और क्यूबा के रिश्तों में और तल्खी आ सकती है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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PM Kisan Yojana
PM Kisan Yojana: किसानों को जल्द मिल सकती है 24वीं किस्त, जानें कब जारी हो सकता है पैसा

नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM Kisan Yojana) से जुड़े करोड़ों किसानों के लिए बड़ी खबर है। इस योजना की 24वीं किस्त जल्द जारी होने की उम्मीद है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक किस्त जारी करने की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है, लेकिन योजना के तय पैटर्न के आधार पर इसकी संभावित तारीख का अनुमान लगाया जा रहा है।   किसानों को सालाना मिलते हैं 6 हजार रुपये   प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह राशि तीन किस्तों में किसानों के बैंक खातों में भेजी जाती है। प्रत्येक किस्त में 2,000 रुपये डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के खाते में ट्रांसफर किए जाते हैं।   अब तक जारी हो चुकी हैं 23 किस्तें   पीएम किसान योजना के तहत अब तक 23 किस्तें जारी की जा चुकी हैं। पिछली यानी 23वीं किस्त 20 जून 2026 को जारी की गई थी, जिसका लाभ देशभर के 9 करोड़ से ज्यादा पात्र किसानों को मिला था। अब किसानों को 24वीं किस्त का इंतजार है।   कब जारी हो सकती है 24वीं किस्त?   योजना के नियमों के अनुसार, पीएम किसान योजना की किस्तें आमतौर पर करीब चार महीने के अंतराल पर जारी की जाती हैं। ऐसे में जून 2026 में 23वीं किस्त जारी होने के बाद 24वीं किस्त अक्टूबर 2026 के आसपास जारी होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, अंतिम तारीख की घोषणा केंद्र सरकार की ओर से ही की जाएगी।   किस्त पाने के लिए जरूरी हैं ये काम   24वीं किस्त का लाभ लेने के लिए किसानों को कुछ जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी: ई-केवाईसी (e-KYC) पूरी होना जरूरी है। बैंक खाते की जानकारी सही होनी चाहिए। आधार और बैंक खाते की जानकारी अपडेट होनी चाहिए। भूमि संबंधी रिकॉर्ड का सत्यापन पूरा होना चाहिए। किसानों को सलाह दी गई है कि वे पीएम किसान योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना लाभार्थी स्टेटस समय-समय पर जांचते रहें, ताकि किस्त से जुड़ी किसी भी समस्या से बचा जा सके।

anjali kumari अगस्त 3, 2026 0
ग्रीस के एथेंस के पास जंगल की आग बुझाने के दौरान हेलीकॉप्टर हादसा

एथेंस के पास जंगल की आग बुझाते समय दो हेलीकॉप्टर टकराए, दो की मौत

इंडोनेशिया के यात्री जहाज में लगी भीषण आग

इंडोनेशिया में यात्री जहाज में भीषण आग, 5 की मौत; 41 लोग अब भी लापता

Pakistan Information Minister Ataullah Tarar addresses media while alleging a US-backed anti-Pakistan propaganda campaign.

'अमेरिका पाकिस्तान के खिलाफ चला रहा प्रोपेगेंडा', पाक मंत्री अताउल्लाह तरार का बड़ा दावा; अमेरिकी फंडिंग के आरोप से मची हलचल

Crash site of a tourist plane near Peru's Nazca Lines that killed all 13 people on board.
पेरू में यूरोपीय पर्यटकों को ले जा रहा विमान दुर्घटनाग्रस्त, 13 लोगों की मौत; नाज्का लाइन्स की सैर पर निकला था विमान

Peru Plane Crash: दक्षिण अमेरिकी देश पेरू में बड़ा विमान हादसा हुआ है। नाज्का (Nazca) शहर के पास यूरोपीय पर्यटकों को लेकर उड़ान भरने वाला एक छोटा विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें सवार सभी 13 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में इटली, स्पेन और जर्मनी के पर्यटक शामिल हैं। स्थानीय अधिकारियों के हवाले से पीटीआई ने बताया कि हादसा नाज्का शहर के बाहरी इलाके में एक खेत में हुआ। दुर्घटना के बाद राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंचा, लेकिन विमान में सवार किसी भी व्यक्ति को बचाया नहीं जा सका। नाज्का लाइन्स की सैर के लिए निकला था विमान नाज्का प्रशासन के अनुसार, विमान ने शनिवार को इका (Ica) शहर से उड़ान भरी थी और इसका संचालन पेरू की निजी विमानन कंपनी एरोडियाना (Aerodiana) कर रही थी। कंपनी पिछले 14 वर्षों से सेसना ग्रैंड कैरावान (Cessna Grand Caravan) विमानों के जरिए पर्यटकों को विश्व प्रसिद्ध नाज्का लाइन्स का हवाई भ्रमण कराती रही है। ये विशाल भू-आकृतियां पेरू के रेगिस्तान में सदियों पहले बनाई गई थीं और इन्हें केवल आसमान से ही स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। कई देशों के पर्यटकों की गई जान पेरू के परिवहन मंत्रालय के अनुसार, हादसे में सात इतालवी, दो स्पेनिश और दो जर्मन नागरिकों की मौत हुई है। इसके अलावा विमान के पायलट अमेरिको सालाजार और सह-पायलट इरेन्का गुआनिलो डेल कार्पियो भी इस दुर्घटना में जान गंवा बैठे। हादसे की जांच शुरू पेरू की सरकार ने दुर्घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि विमान हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए तकनीकी जांच की जा रही है। इस बीच राष्ट्रपति केइको फुजीमोरी ने हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई। उन्होंने कहा कि स्थिति की समीक्षा की जा रही है और जरूरत पड़ने पर संबंधित हवाई अड्डे को अस्थायी रूप से बंद करने पर भी विचार किया जाएगा। हालांकि अंतिम फैसला जांच रिपोर्ट मिलने के बाद लिया जाएगा।  

kalpana अगस्त 3, 2026 0
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इंडोनेशिया में समुद्र के बीच नौका में भीषण आग, 5 लोगों की मौत; 41 यात्री लापता, राहत अभियान जारी

Indonesia Boat Fire: इंडोनेशिया के मदुरा द्वीप के पास रविवार सुबह एक बड़ा समुद्री हादसा हुआ। सुराबाया से सुलावेसी द्वीप जा रही यात्रियों से भरी 'केएमपी मुटियारा सेंटोसा 2' नौका में अचानक भीषण आग लग गई। इस हादसे में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि 41 यात्री अब भी लापता हैं। नौका पर चालक दल सहित करीब 250 लोग सवार थे। यात्रा के कुछ घंटे बाद लगी आग अधिकारियों के मुताबिक, नौका तंजुंग पेराक बंदरगाह (सुराबाया) से रवाना होकर मकासार जा रही थी। यात्रा शुरू होने के कुछ ही घंटों बाद कप्तान ने आपातकालीन नियंत्रण कक्ष को जहाज में आग लगने की सूचना दी। इसके तुरंत बाद नौका से संपर्क टूट गया। सुराबाया खोज एवं बचाव (SAR) कार्यालय ने बताया कि हादसे के समय नौका सपुदी द्वीप से लगभग 19 समुद्री मील उत्तर में थी। जान बचाने के लिए समुद्र में कूदे यात्री सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि आग तेजी से पूरी नौका में फैल गई और उससे घना काला धुआं उठने लगा। घबराए यात्री लाइफ जैकेट पहनकर जहाज के एक हिस्से में इकट्ठा हो गए, जबकि कई लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए जलती नौका से सीधे समुद्र में छलांग लगा दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग इतनी तेजी से फैली कि कई यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकलने का पर्याप्त समय नहीं मिल सका। कई जहाज राहत अभियान में जुटे हादसे की सूचना मिलते ही आसपास मौजूद जहाज तुरंत बचाव कार्य में जुट गए। सुराबाया खोज एवं बचाव कार्यालय के प्रमुख नानंग सिगिट ने बताया कि टीबी हसनूर 26 और ब्रिटिश मेंटर नामक जहाज समुद्र में कूदे यात्रियों को सुरक्षित निकाल रहे हैं। इसके अलावा चार अन्य जहाज भी राहत और बचाव अभियान में लगाए गए हैं। बचाव दल लापता यात्रियों की तलाश में लगातार समुद्र में सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। आग लगने के कारणों की जांच शुरू फिलहाल नौका में आग लगने की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। इंडोनेशियाई समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि सभी यात्रियों और चालक दल के सदस्यों का पता लगाने के बाद ही हादसे की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी। इंडोनेशिया हजारों द्वीपों वाला देश है, जहां समुद्री परिवहन लोगों की आवाजाही का प्रमुख साधन है। हालांकि, सुरक्षा मानकों में कमी और खराब मौसम के कारण वहां समय-समय पर इस तरह के समुद्री हादसे सामने आते रहे हैं।  

kalpana अगस्त 3, 2026 0
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