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Prashant Kishor-Chirag Paswan Equation Fuels Bihar Buzz

बिहार की सियासत में नई हलचल! प्रशांत किशोर और चिराग पासवान की नजदीकी के मायने क्या?

surbhi अगस्त 20, 2026 0
Prashant Kishor and Chirag Paswan amid speculation over changing political equations in Bihar
Prashant Kishor Chirag Paswan Political Equation

पटना: बिहार की राजनीति में प्रशांत किशोर और चिराग पासवान को लेकर एक नया सियासी समीकरण चर्चा में है। बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की ओर से बीजेपी को चुनौती मिलने के बाद चिराग पासवान ने उनकी तारीफ की। खास बात यह है कि प्रशांत किशोर भी NDA के दूसरे नेताओं की तुलना में चिराग पासवान के प्रति अपेक्षाकृत नरम रुख रखते हैं।

इस वजह से दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक नजदीकी को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि, चिराग की पार्टी ने साफ किया है कि वह फिलहाल NDA की मजबूत सहयोगी है और गठबंधन से अलग होने जैसी कोई बात नहीं है।

क्या भविष्य के विकल्प खुले रख रहे हैं चिराग?

चिराग पासवान की ओर से प्रशांत किशोर की तारीफ के बाद LJP (रामविलास) के प्रवक्ता प्रोफेसर विनीत कुमार सिंह ने पार्टी का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत संबंध अच्छे हैं, लेकिन पार्टी NDA के साथ मजबूती से खड़ी है।

पार्टी के मुताबिक उसका मौजूदा राजनीतिक लक्ष्य विकसित भारत के विजन को आगे बढ़ाना है। साथ ही, भविष्य में समान विचार और विजन वाली राजनीतिक ताकतों के साथ काम करने के विकल्पों को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है।

यही बात बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है कि क्या चिराग अभी से 2030 की राजनीति को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग विकल्पों को खुला रखना चाहते हैं।

पिता रामविलास पासवान की रणनीति की झलक?

राजनीतिक जानकार चिराग पासवान की मौजूदा रणनीति की तुलना उनके पिता रामविलास पासवान की राजनीति से करते हैं। रामविलास पासवान को लंबे समय तक बदलते राजनीतिक समीकरणों को पहचानने वाले नेता के तौर पर देखा जाता था।

बांकीपुर के चुनावी नतीजे और बिहार की बदलती राजनीति को देखते हुए चिराग भी भविष्य की संभावनाओं पर नजर रख रहे हैं। हालांकि, फिलहाल उनके NDA से अलग होने का कोई संकेत नहीं है।

प्रशांत किशोर और चिराग में क्या समानता?

दोनों नेताओं की राजनीति में कुछ समानताएं भी दिखाई देती हैं।

युवा नेतृत्व: दोनों बिहार की राजनीति में नई पीढ़ी के नेताओं के तौर पर अपनी पहचान बना रहे हैं।

बिहार केंद्रित राजनीति: चिराग पासवान का ‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ का एजेंडा और प्रशांत किशोर का बिहार के विकास पर जोर दोनों को एक समान राजनीतिक स्पेस में खड़ा करता है।

एक-दूसरे के प्रति नरम रुख: प्रशांत किशोर ने NDA के कई नेताओं पर तीखे हमले किए हैं, लेकिन चिराग पासवान को लेकर उनका रुख अपेक्षाकृत सकारात्मक रहा है। दूसरी तरफ चिराग भी प्रशांत किशोर की राजनीतिक सक्रियता की तारीफ करते नजर आए हैं।

क्या 2030 में साथ आ सकते हैं दोनों?

फिलहाल प्रशांत किशोर और चिराग पासवान के साथ आने की कोई तत्काल घोषणा या औपचारिक संकेत नहीं है। चिराग की पार्टी NDA में बनी हुई है, जबकि प्रशांत किशोर अपनी अलग राजनीतिक पहचान और संगठन के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

लेकिन बिहार की राजनीति में 2030 को एक महत्वपूर्ण भविष्य के पड़ाव के तौर पर देखा जा रहा है। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच मौजूदा संवाद और एक-दूसरे के प्रति सकारात्मक रुख को भविष्य के संभावित राजनीतिक समीकरणों के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

हालांकि, अभी इसे किसी संभावित गठबंधन की पुष्टि मानना जल्दबाजी होगी। बिहार की राजनीति में समीकरण तेजी से बदलते हैं और आने वाले वर्षों में ही स्पष्ट होगा कि चिराग पासवान और प्रशांत किशोर एक-दूसरे के साथ खड़े होते हैं या अलग-अलग राजनीतिक रास्तों पर आगे बढ़ते हैं।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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सीवान में AK-47 से चली थीं 4 गोलियां, सुप्रीम कोर्ट में बिहार सरकार का बड़ा खुलासा; जानें फायरिंग की वजह

पटना/सीवान: बिहार के सीवान में छात्र आंदोलन के दौरान हुई पुलिस फायरिंग का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। राज्य सरकार ने अदालत में दाखिल हलफनामे में माना है कि प्रदर्शन के दौरान एक पुलिसकर्मी ने AK-47 से चार राउंड फायर किए थे। हालांकि सरकार का कहना है कि सभी गोलियां हवा में चलाई गई थीं और इस फायरिंग में किसी प्रदर्शनकारी के घायल होने की जानकारी नहीं है। सरकार ने यह भी बताया कि AK-47 से गोली चलाने वाले पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया गया है और उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। भीड़ में फंस गया था पुलिसकर्मी, तभी हुई फायरिंग राज्य सरकार के मुताबिक, 25 जुलाई को सीवान में छात्र आंदोलन के दौरान स्थिति बिगड़ गई थी। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारियों की भीड़ के बीच फंस गया। सरकार का दावा है कि भीड़ से खुद को निकालने और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिसकर्मी ने AK-47 से चार राउंड हवा में फायर किए। सरकार के अनुसार, इन गोलियों से किसी प्रदर्शनकारी के घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है। तीन प्रदर्शनकारियों के घायल होने पर सरकार ने क्या कहा? सीवान में प्रदर्शन के दौरान तीन लोगों के घायल होने की बात सामने आई थी। इस पर बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि इन लोगों को AK-47 से चली गोलियों से चोट नहीं लगी थी। सरकार के अनुसार, हाथी चौक के पास भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान एक सहायक उपनिरीक्षक ने 9 एमएम पिस्टल से दो राउंड फायर किए थे। इसी दौरान तीन प्रदर्शनकारियों को मामूली चोटें आईं। इस तरह सरकार ने AK-47 से हुई फायरिंग और प्रदर्शनकारियों के घायल होने की दोनों घटनाओं को अलग-अलग बताया है। प्रदर्शन में AK-47 के इस्तेमाल पर उठे सवाल राज्य सरकार ने अपने जवाब में यह भी स्पष्ट किया कि AK-47 प्लाटून स्तर का हथियार है और सामान्य कानून-व्यवस्था की स्थिति, जैसे प्रदर्शन या आंदोलन को नियंत्रित करने के लिए इसका इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। सरकार के मुताबिक, इस संबंध में बिहार के डीजीपी की ओर से भी निर्देश जारी किए गए हैं। फायरिंग करने वाले पुलिसकर्मी को निलंबित करने के साथ उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। गोली किस हथियार से चली, जांच में जुटी एजेंसियां फायरिंग की घटना को लेकर जांच अभी जारी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि गोली किस हथियार से चली, फायरिंग कितनी दूरी से हुई और गोली चलाने का कोण क्या था। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटनास्थल पर वास्तव में क्या हुआ था और फायरिंग की परिस्थितियां क्या थीं। कई जिलों में हिंसक हुआ था छात्र आंदोलन बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपने जवाब में बताया कि छात्र आंदोलन के दौरान पटना, जहानाबाद, छपरा, भागलपुर, सीतामढ़ी, औरंगाबाद, कटिहार, किशनगंज और सीवान समेत कई जिलों में प्रदर्शन हिंसक हुए थे। सरकार के मुताबिक, छपरा में शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन बाद में भीड़ उग्र हो गई। इस दौरान पत्थरबाजी और तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं। इसमें दो बीडीओ, तीन पुलिस इंस्पेक्टर, दो सब-इंस्पेक्टर और 11 सिपाहियों के घायल होने की जानकारी दी गई है। सरकार ने यह भी दावा किया कि एक बीडीओ की आंख को गंभीर नुकसान पहुंचा, जबकि दूसरे अधिकारी को भी चोट लगी। बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले छात्रों पर कार्रवाई नहीं सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने छात्रों पर कार्रवाई को लेकर भी अपना पक्ष रखा। सरकार के अनुसार, जिन प्रदर्शनकारी छात्रों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उनके खिलाफ दंडात्मक पुलिस कार्रवाई नहीं की जा रही है। वहीं, आंदोलन के दौरान हिरासत में लिए गए 18 साल से कम उम्र के ऐसे बच्चों, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, उन्हें साधारण बॉन्ड भरने के बाद रिहा कर दिया गया। सीवान में AK-47 से चार राउंड फायरिंग की सरकार की स्वीकारोक्ति के बाद मामला और गंभीर हो गया है। फिलहाल सरकार का दावा है कि फायरिंग हवा में की गई थी और प्रदर्शनकारियों को AK-47 की गोली नहीं लगी। अंतिम तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी।  

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तेजस्वी यादव का आज फिर बिहार दौरा, पटना से मधुबनी-दरभंगा तक 11 घंटे का कार्यक्रम; जानें पूरा रूट

पटना: बुधवार को राजभवन मार्च और प्रदर्शन के बाद बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव गुरुवार को फिर सड़क पर नजर आएंगे। 20 अगस्त को उनका पटना से मधुबनी और दरभंगा तक सड़क मार्ग से दौरा प्रस्तावित है। इस दौरान वे कई परिवारों से मुलाकात करेंगे और शोक संतप्त परिजनों से भी मिलेंगे। जारी कार्यक्रम के मुताबिक तेजस्वी यादव सुबह 10:45 बजे पटना के 1, पोलो रोड स्थित आवास से रवाना होंगे। उनका काफिला हाजीपुर, वैशाली होते हुए मधुबनी और फिर दरभंगा पहुंचेगा। देर रात करीब 10:05 बजे उनके पटना लौटने का कार्यक्रम है। सुबह 10:45 बजे पटना से रवाना होंगे तेजस्वी यादव गुरुवार सुबह अपने पटना स्थित आवास से निकलेंगे। करीब 11:45 बजे हाजीपुर में स्वर्गीय राम नरेश राय के आवास पर पहुंचेंगे। यहां वे परिवार के सदस्यों से मुलाकात करेंगे। इसके बाद दोपहर 12:15 बजे मधुबनी के लिए रवाना होंगे। पूरे दौरे के दौरान वे सड़क मार्ग से यात्रा करेंगे। दोपहर 3:30 बजे मधुबनी पहुंचने का कार्यक्रम तेजस्वी यादव का काफिला करीब 3:30 बजे मधुबनी जिला अतिथि गृह पहुंचेगा। यहां कुछ समय रुकने के बाद वे अगले कार्यक्रम के लिए निकलेंगे। शाम 4:15 बजे अतिथि गृह से रवाना होकर 4:50 बजे अरैर थाना क्षेत्र में स्वर्गीय रंजन कुमार यादव के आवास पर पहुंचेंगे। यहां वे परिजनों से मुलाकात करेंगे। शाम को दरभंगा जाएंगे तेजस्वी मधुबनी का कार्यक्रम पूरा करने के बाद तेजस्वी यादव करीब 5:20 बजे दरभंगा के लिए रवाना होंगे। शाम 6:30 बजे वे दरभंगा के पुरानी मुंसफी, वार्ड नंबर-25 पहुंचेंगे। यहां वे स्वर्गीय मो. फैज के पिता असद अहमद के आवास पर जाकर परिवार से मुलाकात करेंगे। रात 6:55 बजे दरभंगा से पटना के लिए निकलेंगे दरभंगा में कार्यक्रम पूरा करने के बाद तेजस्वी यादव शाम 6:55 बजे पटना के लिए रवाना होंगे। तय कार्यक्रम के अनुसार वे रात करीब 10:05 बजे 1, पोलो रोड स्थित अपने आवास पहुंचेंगे। तेजस्वी यादव का आज का पूरा कार्यक्रम समय कार्यक्रम 10:45 AM पटना से प्रस्थान 11:45 AM हाजीपुर में राम नरेश राय के आवास पर मुलाकात 12:15 PM मधुबनी के लिए रवाना 3:30 PM मधुबनी जिला अतिथि गृह पहुंचेंगे 4:15 PM अतिथि गृह से प्रस्थान 4:50 PM अरैर में रंजन कुमार यादव के परिजनों से मुलाकात 5:20 PM मधुबनी से दरभंगा रवाना 6:30 PM दरभंगा में असद अहमद के परिवार से मुलाकात 6:55 PM दरभंगा से पटना के लिए रवाना 10:05 PM पटना स्थित आवास पहुंचने का कार्यक्रम बुधवार के प्रदर्शन के बाद आज अलग-अलग जिलों में रहेंगे तेजस्वी तेजस्वी यादव का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब बुधवार को पटना में RJD के राजभवन मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया था और तेजस्वी यादव को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया था। इसके अगले ही दिन तेजस्वी का कई जिलों का दौरा राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। हालांकि, जारी कार्यक्रम के मुताबिक गुरुवार की उनकी प्रमुख गतिविधियां लोगों और शोक संतप्त परिवारों से मुलाकात पर केंद्रित रहेंगी। v

surbhi अगस्त 20, 2026 0
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RJD Raj Bhavan march in Patna sees police barricading, water cannon action and Tejashwi Yadav detention
पटना में RJD के राजभवन मार्च पर बवाल, वाटर कैनन से लेकर तेजस्वी यादव की हिरासत तक जानिए पूरा घटनाक्रम

पटना: बिहार में छात्रों, रोजगार, परीक्षा व्यवस्था और कथित पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर RJD के राजभवन मार्च के दौरान बुधवार को पटना में जमकर हंगामा हुआ। जेपी गोलंबर से शुरू हुआ मार्च डाक बंगला चौराहे तक पहुंचा, जहां पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। प्रदर्शन के दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को पुलिस ने प्रिवेंटिव डिटेंशन में लिया। बाद में उन्हें सचिवालय थाने ले जाया गया। हालांकि, कुछ समय बाद उन्हें छोड़ दिया गया। बैरिकेडिंग पर बढ़ा तनाव, पुलिस ने चलाया वाटर कैनन RJD कार्यकर्ताओं का मार्च डाक बंगला चौराहे की ओर बढ़ रहा था। यहां पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे जाने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। बैरिकेडिंग के पास प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारी लगातार आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, जबकि पुलिस उन्हें प्रतिबंधित क्षेत्र की ओर जाने से रोक रही थी। तेजस्वी यादव को लिया गया हिरासत में मार्च के दौरान पुलिस ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को प्रिवेंटिव डिटेंशन में लिया। उन्हें सचिवालय थाने ले जाया गया। पुलिस के मुताबिक, राजभवन का इलाका प्रतिबंधित क्षेत्र है और प्रदर्शनकारी वहां जाने की कोशिश कर रहे थे। बाद में तेजस्वी यादव को हिरासत से रिहा कर दिया गया। उनकी रिहाई के बावजूद RJD नेताओं और कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन जारी रहा। AK-47 के कटआउट लेकर पहुंचे RJD कार्यकर्ता मार्च के दौरान कुछ RJD कार्यकर्ता AK-47 जैसे दिखने वाले कटआउट लेकर भी पहुंचे। इसके जरिए सीवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मी द्वारा कथित तौर पर AK-47 से हवाई फायरिंग किए जाने की घटना का विरोध किया गया। इस घटना का एक वीडियो सामने आने के बाद संबंधित पुलिसकर्मी को निलंबित किए जाने की बात सामने आई थी। RJD नेताओं ने इसी मुद्दे को लेकर सरकार से जवाब मांगा और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। मीसा भारती ने DM-SP पर कार्रवाई की मांग की RJD सांसद मीसा भारती ने इस मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में प्रदर्शन के दौरान AK-47 के इस्तेमाल की बात स्वीकार की है। मीसा भारती ने संबंधित जिले के DM और SP के खिलाफ कार्रवाई और उन्हें तत्काल निलंबित करने की मांग उठाई। राज्यपाल के सचिव को सौंपा ज्ञापन तेजस्वी यादव की हिरासत के बाद RJD का एक प्रतिनिधिमंडल राजभवन पहुंचा। इसमें मनोज झा, सुधाकर सिंह, अब्दुल वारिस सिद्दीकी समेत पार्टी के कई नेता शामिल थे। राज्यपाल की गैरमौजूदगी में प्रतिनिधिमंडल ने उनके सचिव को ज्ञापन सौंपा। इसमें परीक्षा व्यवस्था, कथित पेपर लीक, रोजगार और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई समेत कई मुद्दे उठाए गए। RJD नेताओं ने इन मामलों में सरकार से जवाब और उचित कार्रवाई की मांग की।  

surbhi अगस्त 20, 2026 0
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