पटना। बिहार में मानसून सक्रिय बना हुआ है। मौसम विभाग ने शुक्रवार को राज्य के 19 जिलों के लिए बारिश, तेज हवा और वज्रपात को लेकर अलर्ट जारी किया है। कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली गिरने की आशंका जताई गई है।
मौसम विभाग ने पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण, पटना, बेगूसराय, जहानाबाद, नालंदा, शेखपुरा, लखीसराय, नवादा और गया के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। वहीं बक्सर, भोजपुर, अरवल, कैमूर, रोहतास और औरंगाबाद जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए अधिक सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
पूर्वानुमान के अनुसार, प्रभावित जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने और कई स्थानों पर आकाशीय बिजली गिरने की संभावना है। अन्य जिलों में मौसम सामान्य रहने के साथ दिनभर बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है।
बीते 24 घंटों के दौरान पटना के कुछ हिस्सों के अलावा जहानाबाद, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय और खगड़िया समेत कई जिलों में हल्की बारिश दर्ज की गई। हालांकि उमस भरी गर्मी से लोगों को पूरी तरह राहत नहीं मिली। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां और तेज हो सकती हैं।
मौसम विभाग के अनुसार, अगले तीन से चार दिनों में बारिश का दायरा उत्तर और पूर्वी बिहार की ओर बढ़ने की संभावना है। उत्तर, मध्य और दक्षिण बिहार के अधिकांश हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। राजधानी पटना में भी रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है।
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, बिहार में अब भी सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है, लेकिन बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और सक्रिय मानसूनी ट्रफ के कारण मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने तथा मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने की अपील की है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
पटना: बिहार में मौसम एक बार फिर करवट ले रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने शुक्रवार को राज्य के 19 जिलों के लिए बारिश, तेज हवा और आकाशीय बिजली को लेकर अलर्ट जारी किया है। कुछ जिलों में येलो अलर्ट, जबकि छह जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की गई है। इन 13 जिलों में येलो अलर्ट मौसम विभाग ने निम्न जिलों में हल्की से मध्यम बारिश, तेज हवा और वज्रपात की संभावना जताते हुए येलो अलर्ट जारी किया है। पूर्वी चंपारण पश्चिम चंपारण गोपालगंज सीवान सारण पटना बेगूसराय जहानाबाद नालंदा शेखपुरा लखीसराय नवादा गया इन 6 जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट इन जिलों में मौसम ज्यादा खराब रहने की आशंका है। बक्सर भोजपुर अरवल कैमूर रोहतास औरंगाबाद इन क्षेत्रों में तेज बारिश के साथ तेज हवाएं और बिजली गिरने की संभावना अधिक है। 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है हवा मौसम विभाग के अनुसार, प्रभावित जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और कई स्थानों पर आकाशीय बिजली गिरने की संभावना है। अन्य जिलों में मौसम सामान्य रहने की संभावना है, हालांकि दिनभर बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है। पिछले 24 घंटे में कैसा रहा मौसम? बीते 24 घंटों के दौरान पटना के कुछ हिस्सों सहित जहानाबाद, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय और खगड़िया समेत कई जिलों में हल्की बारिश दर्ज की गई। कई क्षेत्रों में बादल छाए रहे, लेकिन उमस भरी गर्मी से लोगों को खास राहत नहीं मिली। अगले 3 से 4 दिनों में बढ़ेगा बारिश का दायरा मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले तीन से चार दिनों में बारिश का दायरा उत्तर और पूर्वी बिहार की ओर बढ़ सकता है। इस दौरान उत्तर, मध्य और दक्षिण बिहार के अधिकांश जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। राजधानी पटना में भी रुक-रुककर बारिश जारी रहने का अनुमान है। मौसम वैज्ञानिकों ने क्या बताया? मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बिहार में अभी भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। फिलहाल मॉनसूनी ट्रफ बिहार के आसपास सक्रिय है और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी वाली पूर्वी हवाओं के कारण लगातार बादल बन रहे हैं। इसी वजह से राज्य के विभिन्न हिस्सों में रुक-रुककर बारिश हो रही है। मौसम विभाग का मानना है कि आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियों में और तेजी आ सकती है।
पटना/सहरसा: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई (EOU) का अभियान लगातार तेज हो रहा है। इसी कड़ी में शुक्रवार को सहरसा के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) अजीत अमर के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में बड़ी कार्रवाई की गई। EOU की टीम ने उनके चार अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की। इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है। आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज बिहार पुलिस मुख्यालय के आर्थिक अपराध प्रभाग के अनुसार, विश्वसनीय स्रोतों से मिली जानकारी के सत्यापन के बाद EOU थाना कांड संख्या-17/26 दिनांक 6 अगस्त 2026 को दर्ज किया गया। यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(बी) के तहत दर्ज किया गया है। इसके बाद विशेष न्यायालय से तलाशी वारंट प्राप्त कर कार्रवाई शुरू की गई। प्रारंभिक जांच में क्या सामने आया? EOU की शुरुआती जांच में अजीत अमर के पास 62,20,550 रुपये की आय से अधिक संपत्ति होने के प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिले हैं। जांच एजेंसी के अनुसार यह राशि उनकी ज्ञात वैध आय की तुलना में करीब 72.35 प्रतिशत अधिक है। इसी आधार पर उनके खिलाफ मामला दर्ज कर व्यापक जांच शुरू की गई है। इन चार ठिकानों पर एक साथ छापेमारी DSP स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में गठित अलग-अलग टीमों ने शुक्रवार सुबह चार स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया। सिवान जिले के दरौंधा थाना क्षेत्र के रैनी गांव स्थित पैतृक एवं निजी मकान सहरसा के नया बाजार स्थित किराये का आवास सहरसा स्थित सरकारी कार्यालय छपरा के गंडक कॉलोनी स्थित सरकारी आवास चारों स्थानों पर बैंक रिकॉर्ड, संपत्ति के दस्तावेज, निवेश, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। विशेष न्यायालय से वारंट लेकर हुई कार्रवाई EOU ने बताया कि यह पूरी कार्रवाई विशेष न्यायालय निगरानी, उत्तर बिहार, मुजफ्फरपुर से तलाशी वारंट प्राप्त करने के बाद की जा रही है। जांच एजेंसी का उद्देश्य आरोपी अधिकारी की चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों, निवेश, नकदी और अन्य वित्तीय लेन-देन से जुड़े साक्ष्य जुटाना है। शिक्षा विभाग में मची हलचल अजीत अमर वर्तमान में सहरसा में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) के पद पर कार्यरत हैं। उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर और चार ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की खबर सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में चर्चा का माहौल है। सूत्रों के मुताबिक, जांच टीम संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों के साथ-साथ डिजिटल रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की भी जांच कर रही है। हालांकि अब तक किसी नकदी, आभूषण या अन्य बरामदगी की आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। तलाशी पूरी होने के बाद आएगी विस्तृत रिपोर्ट EOU का कहना है कि फिलहाल तलाशी अभियान जारी है। छापेमारी पूरी होने के बाद जब्त दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा। यदि जांच में आय से अधिक संपत्ति के अलावा अन्य वित्तीय अनियमितताओं के प्रमाण मिलते हैं, तो जांच का दायरा और बढ़ाया जा सकता है। इसके बाद साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
रोहतास: बिहार के रोहतास जिले के दिनारा थाना क्षेत्र के योगिया गांव में मजदूर चंदेश्वर चौधरी की कथित हत्या के बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया। हत्या, फायरिंग, आगजनी, शव बरामदगी और मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी तक की घटनाओं ने इस मामले को राज्यभर में चर्चा का विषय बना दिया है। पुलिस फिलहाल पूरे घटनाक्रम की गहन जांच कर रही है और कई दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। कैसे शुरू हुआ पूरा मामला? बताया जा रहा है कि बुधवार सुबह करीब छह बजे मजदूर चंदेश्वर चौधरी अपने परिचित केदार चौधरी के साथ गांव के ही अजीत तिवारी के बुलावे पर उनके दलान पहुंचे थे। केदार चौधरी के अनुसार, वहां पहुंचते ही अजीत तिवारी ने चंदेश्वर के साथ मारपीट शुरू कर दी। केदार ने दावा किया कि वह किसी तरह वहां से भागने में सफल रहे। बाहर निकलने के दौरान उन्हें गोली चलने की आवाज सुनाई दी। आरोप है कि इसके बाद घायल चंदेश्वर चौधरी को अजीत तिवारी अपनी टाटा सफारी में बैठाकर मौके से फरार हो गया। हत्या के बाद भड़की हिंसा और आगजनी घटना की खबर गांव में फैलते ही लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित ग्रामीणों ने आरोपी के दलान और परिसर में जमकर तोड़फोड़ की। आरोप है कि मोबाइल टावर के लिए रखे डीजल का इस्तेमाल कर दलान में आग लगा दी गई। परिसर में खड़ी कई गाड़ियों को भी आग के हवाले कर दिया गया। हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल बुलाना पड़ा। दलान की तलाशी में क्या मिला? घटना के बाद पुलिस ने आरोपी अजीत तिवारी के परिसर की तलाशी ली। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक वहां से बड़ी संख्या में विदेशी शराब की खाली बोतलें और कुछ सीलबंद महंगी अंग्रेजी शराब की बोतलें मिलीं। हालांकि, पुलिस ने अब तक इस बरामदगी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। बरामद सामग्री को जांच के लिए जब्त कर लिया गया है। रातभर डीजे और फायरिंग के दावे ग्रामीणों का दावा है कि घटना से एक रात पहले आरोपी के दलान पर देर रात तक तेज आवाज में डीजे बज रहा था और कई राउंड फायरिंग की आवाजें भी सुनी गई थीं। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि बुधवार सुबह आरोपी ने अपने पालतू कुत्ते को भी गोली मार दी, जिससे वह घायल हो गया। पुलिस ने घायल कुत्ते का इलाज कराया है, लेकिन इन दावों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं की गई है। घटनास्थल से रायफल बरामद पुलिस ने घटनास्थल से एक रायफल भी बरामद की है। प्रारंभिक जांच में इससे गोली चलने की बात सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि हत्या किन परिस्थितियों में हुई और बरामद हथियार का इस मामले से क्या संबंध है। 36 घंटे बाद नहर से मिला शव घटना के करीब 36 घंटे बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी अजीत तिवारी की निशानदेही पर सुरतापुर गांव के पास नहर से चंदेश्वर चौधरी का शव बरामद किया। रोहतास एसपी रौशन कुमार के निर्देश पर नहर का पानी कम कराया गया। इसके बाद एसडीआरएफ और गोताखोरों की मदद से शव को बाहर निकाला गया। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। गाजीपुर से गिरफ्तार हुआ मुख्य आरोपी रोहतास पुलिस ने मुख्य आरोपी अजीत तिवारी को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से गिरफ्तार कर लिया है। एसपी रौशन कुमार के मुताबिक, हत्या के कारण, फायरिंग, कथित शराब बरामदगी, आगजनी और पूरे घटनाक्रम की हर कड़ी की वैज्ञानिक और कानूनी तरीके से जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। आरोपी के बारे में क्या जानकारी सामने आई? स्थानीय सूत्रों के अनुसार, करीब 55 वर्षीय अजीत तिवारी के दो बेटे हैं। एक बेटा गांव से बाहर पढ़ाई करता है, जबकि दूसरा गांव में रहकर खेती-बाड़ी संभालता है। ग्रामीणों का दावा है कि आरोपी के पास करीब 100 बीघा कृषि भूमि है। हालांकि पुलिस ने इन जानकारियों की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। गांव में अब भी तनाव घटना के बाद योगिया गांव में अब भी तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। बिक्रमगंज डीएसपी सहित कई थानों की पुलिस और अतिरिक्त सुरक्षा बल गांव में तैनात हैं। रोहतास एसपी ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा है कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है और दोषियों के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।