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Brent Crude Crosses $120 on Trump-Iran Tensions

ट्रंप की सख्ती से कच्चे तेल में लगी आग, ब्रेंट क्रूड $120 के पार, वैश्विक बाजार में हड़कंप

surbhi अप्रैल 30, 2026 0
Brent crude oil prices surge above $120 amid Trump Iran sanctions and Hormuz tensions
Brent Crude Surges Above 120 Dollars

वैश्विक ऊर्जा बाजारों में एक बार फिर भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है और ब्रेंट क्रूड ऑयल $120 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। इस अचानक बढ़ोतरी ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता बढ़ा दी है और इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं से लेकर वैश्विक अर्थव्यवस्था तक पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

इस उछाल की मुख्य वजह अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump का कड़ा रुख बताया जा रहा है, जिन्होंने स्पष्ट किया है कि ईरान पर लगाए गए प्रतिबंध और समुद्री नाकाबंदी फिलहाल जारी रहेगी।

ईरान पर सख्ती और बढ़ता तनाव

डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में कहा कि जब तक ईरान अमेरिका की शर्तों पर परमाणु समझौते को स्वीकार नहीं करता, तब तक Strait of Hormuz पर नौसैनिक दबाव और नाकाबंदी जारी रहेगी। यह क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है।

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि यह रणनीति सैन्य कार्रवाई की तुलना में अधिक प्रभावी है, क्योंकि इससे ईरान की अर्थव्यवस्था पर सीधा दबाव बनता है। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि अगर कूटनीतिक समाधान नहीं निकलता है तो आगे सैन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है।

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज क्यों है दुनिया के लिए अहम?

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे संवेदनशील तेल परिवहन मार्गों में से एक है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ा हिस्सा कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर वैश्विक बाजारों तक पहुंचता है।

जब इस मार्ग में बाधा आती है, तो सप्लाई चेन प्रभावित होती है और तेल की उपलब्धता घट जाती है। परिणामस्वरूप कीमतों में तेज उछाल देखने को मिलता है, जिसका असर सीधे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर भी पड़ता है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरे के बादल

इस स्थिति को लेकर आर्थिक विशेषज्ञों ने गंभीर चेतावनी दी है। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री Jeffrey Sachs ने कहा है कि अगर यह तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी की ओर बढ़ सकती है।

उन्होंने कहा कि बाजार फिलहाल यह उम्मीद लगाए बैठा है कि स्थिति जल्द सामान्य हो जाएगी, लेकिन यदि सप्लाई बाधित रही तो कीमतों में और तेजी आ सकती है।

आम जनता पर सीधा असर

तेल कीमतों में इस बढ़ोतरी का असर सीधे पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है। इससे परिवहन, खाद्य वस्तुएं और अन्य जरूरी सेवाएं भी महंगी हो सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात नहीं सुधरे तो महंगाई एक बार फिर आम लोगों की जेब पर भारी पड़ सकती है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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सोने की कीमतों में तेजी
सोने की कीमतों में फिर तेजी, 24 कैरेट गोल्ड ₹14,955 प्रति ग्राम के करीब

नई दिल्ली, एजेंसियां। सोने की कीमतों में शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 को तेजी देखने को मिली। भारत में 24 कैरेट सोने का भाव करीब ₹14,955 प्रति ग्राम, जबकि 22 कैरेट सोना करीब ₹13,698 प्रति ग्राम पहुंच गया है। सोने की कीमतों में यह तेजी वैश्विक बाजार में मजबूत मांग और अमेरिका-ईरान तनाव से जुड़े घटनाक्रम के बीच देखने को मिल रही है।   24 और 22 कैरेट सोने का भाव बढ़ा   आज के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत करीब ₹1,49,550 और 22 कैरेट सोने की कीमत करीब ₹1,36,987 है। हालांकि, स्थानीय बाजार, टैक्स और ज्वेलरी मेकिंग चार्ज के कारण ग्राहकों को मिलने वाला अंतिम भाव अलग हो सकता है।   वैश्विक घटनाक्रम से मिल रहा सहारा   अंतरराष्ट्रीय बाजार में भू-राजनीतिक अनिश्चितता और अमेरिका-ईरान तनाव से जुड़े घटनाक्रम के कारण सोने में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। ऐसे माहौल में निवेशक अक्सर सोने को अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर देखते हैं। हाल के दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी अनिश्चितता और अमेरिका-ईरान तनाव कम होने की संभावनाओं ने भी सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ाया है।   आगे भी उतार-चढ़ाव की संभावना   विशेषज्ञों की नजर अब अमेरिकी ब्याज दरों की दिशा, डॉलर की चाल और मध्य-पूर्व के घटनाक्रम पर है। इन कारकों में बदलाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतों पर पड़ सकता है।

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Nazara Technologies के Preferential Issue की घोषणा
Nazara Technologies जुटाएगी ₹733.5 करोड़, ₹306 प्रति शेयर के भाव पर Preferential Issue को मंजूरी

मुंबई, एजेंसियां। गेमिंग कंपनी Nazara Technologies ने कारोबार के विस्तार और विकास योजनाओं के लिए बड़ी पूंजी जुटाने का फैसला किया है। कंपनी के बोर्ड ने करीब ₹733.5 करोड़ का Preferential Issue मंजूर किया है। इसके तहत कंपनी ₹306 प्रति शेयर के भाव पर नए इक्विटी शेयर जारी करेगी।   2.39 करोड़ से ज्यादा शेयर जारी होंगे     कंपनी के बोर्ड ने अधिकतम 2,39,70,676 इक्विटी शेयर जारी करने को मंजूरी दी है। इन शेयरों का इश्यू प्राइस ₹306 प्रति शेयर रखा गया है। इस पूरी प्रक्रिया से कंपनी को करीब ₹733.5 करोड़ की नई पूंजी मिलने की उम्मीद है।   कंपनी की ओर से यह पूंजी जुटाने का कदम ऐसे समय में आया है जब Nazara अपने गेमिंग और डिजिटल मनोरंजन कारोबार को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है।   नई पूंजी का इस्तेमाल विस्तार में     Preferential Issue से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल कंपनी की विकास और विस्तार योजनाओं को मजबूत करने में किया जा सकता है। कंपनी गेमिंग, डिजिटल मनोरंजन और इससे जुड़े कारोबार में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए निवेश कर रही है। बाजार के लिए यह फंडरेजिंग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे कंपनी को अपने विस्तार के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन मिलेंगे।     निवेशकों की नजर शेयर पर     Nazara Technologies के इस फैसले पर शेयर बाजार के निवेशकों की नजर बनी हुई है। Preferential Issue से कंपनी में नई पूंजी आने के साथ-साथ नए निवेशकों और रणनीतिक भागीदारों की हिस्सेदारी बढ़ सकती है।   हालांकि, Preferential Issue के कारण शेयरों की संख्या बढ़ने से मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी में संभावित dilution का पहलू भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। इसलिए बाजार कंपनी की पूंजी जुटाने की योजना और उसके इस्तेमाल के परिणामों पर नजर रखेगा।

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डाबर इंडिया के सिलवासा प्लांट को USFDA का चेतावनी पत्र
USFDA ने डाबर इंडिया के सिलवासा प्लांट को जारी किया चेतावनी पत्र, CGMP मानकों में खामियां

सिलवासा, एजेंसियां। अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (USFDA) ने डाबर इंडिया के सिलवासा स्थित दवा निर्माण संयंत्र को Current Good Manufacturing Practices (CGMP) से जुड़ी गंभीर खामियों को लेकर चेतावनी पत्र जारी किया है। नियामक ने कंपनी की गुणवत्ता नियंत्रण और विनिर्माण प्रक्रियाओं से जुड़े कई पहलुओं पर सवाल उठाए हैं।   उत्पादन और प्रक्रिया नियंत्रण पर उठे सवाल   FDA के आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार, डाबर के संयंत्र में उत्पादन एवं प्रक्रिया नियंत्रण के लिए पर्याप्त लिखित प्रक्रियाओं को लेकर खामियां पाई गईं। नियामक के मुताबिक, इन प्रक्रियाओं का उद्देश्य दवा उत्पादों की पहचान, क्षमता, शुद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना होता है। निरीक्षण में कुछ उत्पादों के लिए प्रक्रिया सत्यापन (Process Validation) से जुड़ी कमियां भी सामने आईं। FDA ने स्थिरता परीक्षण कार्यक्रम के नियंत्रण और परीक्षण के दौरान रखे गए नमूनों के रिकॉर्ड से संबंधित समस्याओं का भी उल्लेख किया है।   डेटा और गुणवत्ता प्रणाली पर भी चिंता   USFDA की कार्रवाई ऐसे समय सामने आई है जब डाबर के सिलवासा संयंत्र को लेकर पहले भी नियामकीय चिंताएं सामने आ चुकी हैं। जून 2026 में FDA ने संयंत्र के एक हिस्से में निर्मित कुछ दवाओं पर Import Alert 66-40 लगाया था। उस समय डाबर ने कहा था कि मामला संयंत्र के सीमित हिस्से में बनने वाले निजी लेबल उत्पादों से जुड़ा है और इसका कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं है। कंपनी ने यह भी कहा था कि सिलवासा संयंत्र का संचालन जारी है और वह FDA द्वारा बताए गए मुद्दों को दूर करने के लिए सुधारात्मक एवं निवारक कार्रवाई कर रही है।   FDA ने सुधारात्मक कार्रवाई की मांग की   चेतावनी पत्र के बाद कंपनी को नियामक की ओर से उठाई गई कमियों का समाधान करने और सुधारात्मक कदमों की जानकारी देने की आवश्यकता होगी। FDA की ऐसी कार्रवाई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दवा निर्माण प्रक्रिया अमेरिकी गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हो। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि चेतावनी पत्र को कंपनी के सभी उत्पादों पर प्रतिबंध या पूरे सिलवासा संयंत्र के बंद होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार नियामकीय चिंता संयंत्र के दवा निर्माण और गुणवत्ता प्रणालियों से जुड़े विशिष्ट पहलुओं पर है।   कंपनी के कारोबार पर असर कितना होगा   डाबर ने पहले स्पष्ट किया था कि USFDA की कार्रवाई से प्रभावित कारोबार कंपनी के कुल कारोबार का बहुत छोटा हिस्सा है। कंपनी के मुताबिक, सिलवासा संयंत्र का बड़ा हिस्सा सामान्य रूप से संचालित होता रहा है और घरेलू कारोबार पर इसका व्यापक असर नहीं पड़ा है। अब निवेशकों की नजर कंपनी की ओर से उठाए जाने वाले सुधारात्मक कदमों और USFDA के साथ आगे की प्रक्रिया पर रहेगी। अगर कंपनी नियामक द्वारा बताई गई कमियों को समय पर दूर करती है, तो आगे की कार्रवाई का असर सीमित रह सकता है।

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