मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 5 अगस्त 2026 को कारोबार की शुरुआत तेजी के साथ हुई, लेकिन बाद में प्रमुख सूचकांकों में नरमी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में Sensex करीब 450 अंक चढ़ा, जबकि Nifty 50 ने 24,600 का स्तर पार किया। बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों की नजर आज होने वाली RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के फैसले पर टिकी हुई है।
सुबह के शुरुआती कारोबार में Sensex करीब 0.8 फीसदी बढ़कर 79,055 के आसपास पहुंच गया था। वहीं Nifty 50 करीब 0.22 फीसदी की बढ़त के साथ 24,669 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। हालांकि बाद के अपडेट में Nifty करीब 24,606 के आसपास आ गया, जिससे शुरुआती तेजी कुछ कम हुई।
आज बाजार के लिए सबसे बड़ा घरेलू ट्रिगर RBI की MPC बैठक का फैसला है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा मौद्रिक नीति का ऐलान करेंगे। बाजार में फिलहाल रेपो रेट को मौजूदा स्तर पर बनाए रखने की उम्मीद है, लेकिन निवेशक गवर्नर के रुख और आगे की ब्याज दरों को लेकर संकेतों पर खास नजर रखेंगे।
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने भी भारतीय बाजार की धारणा को कुछ सहारा दिया है। शुरुआती कारोबार के दौरान Brent crude करीब 1.1 फीसदी गिरकर 78.50 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा। इसके अलावा वैश्विक बाजारों के सकारात्मक संकेतों का भी घरेलू शेयर बाजार पर असर देखने को मिला।
निवेशकों की नजर अब RBI के फैसले के साथ-साथ महंगाई, आर्थिक विकास और मौद्रिक नीति के भविष्य के रुख पर रहेगी। आज के कारोबार में Sensex और Nifty में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है। इसलिए फिलहाल बाजार में शुरुआती तेजी के बाद सावधानीपूर्ण कारोबार देखने को मिल रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
अमेज़न का 3 ट्रिलियन डॉलर क्लब में प्रवेश, AI और AWS की तेज ग्रोथ से शेयरों में जोरदार उछाल न्यूयॉर्क, एजेंसियां। ई-कॉमर्स और क्लाउड कंप्यूटिंग क्षेत्र की दिग्गज कंपनी Amazon ने बाजार पूंजीकरण के मामले में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी पहली बार 3 ट्रिलियन डॉलर के बाजार मूल्यांकन के स्तर को पार कर गई। इसके साथ ही Amazon दुनिया की उन चुनिंदा कंपनियों में शामिल हो गई है, जिनका बाजार पूंजीकरण 3 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है। मजबूत नतीजों के बाद शेयर में तेजी Amazon के शेयरों में तेज उछाल के पीछे कंपनी के मजबूत तिमाही नतीजों को प्रमुख वजह माना जा रहा है। कंपनी के शेयर में करीब 5 फीसदी की तेजी आई और यह लगभग 285 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। इस तेजी ने Amazon के बाजार पूंजीकरण को 3 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। AWS और AI बनी बड़ी ताकत Amazon की क्लाउड इकाई AWS (Amazon Web Services) की तेज वृद्धि ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा सेंटर की मांग में तेजी आई है, जिसका फायदा AWS को मिल रहा है। Amazon ने AI से जुड़ी बुनियादी संरचना में बड़े निवेश की योजना भी बनाई है। बाजार में यह उम्मीद बढ़ी है कि AI से जुड़ा खर्च आने वाले वर्षों में AWS के कारोबार और कंपनी की कमाई को और मजबूत कर सकता है। 3 ट्रिलियन डॉलर क्लब में पांचवीं कंपनी Amazon के 3 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार करने के साथ ही वह इस स्तर तक पहुंचने वाली पांचवीं कंपनी बन गई है। इससे पहले Apple, Microsoft, Nvidia और Alphabet जैसी कंपनियां इस क्लब में शामिल हो चुकी हैं। Amazon ने जून 2024 में 2 ट्रिलियन डॉलर का बाजार मूल्यांकन हासिल किया था। करीब दो साल बाद कंपनी ने 3 ट्रिलियन डॉलर का स्तर पार कर लिया है। यह उपलब्धि कंपनी के ई-कॉमर्स कारोबार के साथ-साथ क्लाउड और AI क्षेत्र में बढ़ती ताकत को भी दर्शाती है।
नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने एक बार फिर रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को मौद्रिक नीति समिति की बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपना रुख तटस्थ बनाए रखने का फैसला किया है। रेपो रेट में लगातार चौथी बार बदलाव नहीं होने का सीधा असर उन लोगों पर पड़ सकता है, जिन्होंने फ्लोटिंग ब्याज दर पर होम लोन, कार लोन या अन्य कर्ज ले रखा है। फिलहाल दरों में बढ़ोतरी नहीं होने से ऐसे कर्जदारों पर ईएमआई बढ़ने का तत्काल दबाव नहीं आएगा। रेपो रेट में क्यों नहीं हुआ बदलाव? आरबीआई का यह फैसला ऐसे समय आया है जब देश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत बनी हुई है और महंगाई के मोर्चे पर भी स्थिति पहले की तुलना में बेहतर नजर आ रही है। मौद्रिक नीति समिति ने मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए ब्याज दरों को स्थिर रखना उचित समझा है। रेपो रेट वह दर है जिस पर आरबीआई वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक कर्ज देता है। जब रेपो रेट बढ़ता है तो बैंकों के लिए फंड की लागत बढ़ सकती है और इसका असर कर्ज की ब्याज दरों पर पड़ सकता है। वहीं रेपो रेट में कटौती होने पर लोन सस्ता होने की संभावना बढ़ती है। इसलिए मौजूदा फैसले का सबसे सीधा मतलब यह है कि अभी कर्जदारों को ब्याज दरों में तत्काल बढ़ोतरी का सामना नहीं करना पड़ेगा। दिसंबर 2025 में आखिरी बार बदली थी दर रेपो रेट में आखिरी बदलाव दिसंबर 2025 में हुआ था। उस समय आरबीआई ने इसे 5.50 प्रतिशत से घटाकर 5.25 प्रतिशत कर दिया था। इसके बाद फरवरी, अप्रैल और जून 2026 की मौद्रिक नीति बैठकों में भी केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट को स्थिर रखा। अब अगस्त की बैठक में भी 5.25 प्रतिशत की दर बरकरार रखी गई है। इसका मतलब है कि आरबीआई फिलहाल ब्याज दरों में स्थिरता बनाए रखने की नीति पर आगे बढ़ रहा है। होम लोन और कार लोन लेने वालों को क्या फायदा? अगर आपने फ्लोटिंग ब्याज दर पर होम लोन, कार लोन या कोई अन्य कर्ज लिया है, तो मौजूदा फैसला आपके लिए राहत भरा हो सकता है। रेपो रेट में बढ़ोतरी नहीं होने की वजह से बैंकों पर तुरंत ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव नहीं बनेगा। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि आपकी ईएमआई केवल आरबीआई की रेपो रेट पर निर्भर नहीं करती। बैंक की नीतियां, लोन का प्रकार, ब्याज दर का ढांचा और अन्य कारक भी आपकी वास्तविक ईएमआई को प्रभावित कर सकते हैं। नए लोन लेने वालों के लिए भी राहत रेपो रेट को स्थिर रखने का फायदा केवल मौजूदा कर्जदारों तक सीमित नहीं है। नए होम लोन, कार लोन या बिजनेस लोन लेने की योजना बना रहे लोगों के लिए भी तत्काल ब्याज दरों में बढ़ोतरी का खतरा कम हुआ है। वहीं कारोबार और उद्योगों के लिए भी स्थिर ब्याज दरें महत्वपूर्ण हैं। उधारी की लागत में अचानक वृद्धि नहीं होने से कंपनियों की निवेश और विस्तार योजनाओं को कुछ राहत मिल सकती है। अर्थव्यवस्था पर RBI का भरोसा आरबीआई गवर्नर ने कहा कि वैश्विक स्तर पर चुनौतियां बनी हुई हैं। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण प्रमुख व्यापारिक मार्ग प्रभावित हो रहे हैं, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसके बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए है। केंद्रीय बैंक ने मौजूदा वित्त वर्ष में वास्तविक जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.7 प्रतिशत रखा है, जो पिछले अनुमान से 10 बेसिस पॉइंट अधिक है। महंगाई पर भी RBI की नजर आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष में सीपीआई महंगाई दर के करीब 5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। दूसरी तिमाही में महंगाई 4.7 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 5.9 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। हालांकि, मानसून की स्थिति और उसके असमान वितरण को लेकर कृषि क्षेत्र पर अनिश्चितता बनी हुई है। अल नीनो जैसी परिस्थितियों के बीच बारिश का पैटर्न खेती और खाद्य कीमतों को प्रभावित कर सकता है। आगे क्या देखना होगा? आरबीआई के मौजूदा फैसले से साफ संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल जल्दबाजी में ब्याज दरों में बदलाव करने के पक्ष में नहीं है। महंगाई, आर्थिक विकास, मानसून और वैश्विक परिस्थितियां आने वाली मौद्रिक नीति बैठकों में अहम भूमिका निभाएंगी। कर्जदारों के लिए फिलहाल सबसे बड़ी राहत यही है कि रेपो रेट में बढ़ोतरी नहीं हुई है। हालांकि, अगर भविष्य में आरबीआई ब्याज दरों में कटौती करता है तो होम लोन और अन्य फ्लोटिंग रेट वाले कर्जदारों को ईएमआई के मोर्चे पर और राहत मिलने की उम्मीद बढ़ सकती है।
RBI की मौद्रिक नीति पर आज फैसला, रेपो रेट को लेकर बाजार की नजर MPC बैठक पर मुंबई, एजेंसियां। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) आज अपनी द्विमासिक बैठक के फैसले का ऐलान करेगी। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा मौद्रिक नीति का फैसला पेश करेंगे। बाजार की सबसे ज्यादा नजर इस बात पर है कि केंद्रीय बैंक रेपो रेट में कोई बदलाव करता है या उसे मौजूदा स्तर पर बरकरार रखता है। 5.25 फीसदी रेपो रेट पर टिकी नजर जून की पिछली MPC बैठक में RBI ने रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर बरकरार रखा था। इस बार भी अर्थशास्त्रियों और बाजार विशेषज्ञों के बीच दर को मौजूदा स्तर पर बनाए रखने की उम्मीद मजबूत है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, 72 में से 68 अर्थशास्त्रियों ने दरों में बदलाव नहीं होने का अनुमान जताया है। फिलहाल बाजार का फोकस केवल रेपो रेट पर नहीं है, बल्कि RBI के महंगाई और आर्थिक विकास के अनुमान तथा आगे की मौद्रिक नीति को लेकर गवर्नर के संकेतों पर भी रहेगा। महंगाई और आर्थिक विकास पर RBI का रुख अहम मौद्रिक नीति के फैसले में महंगाई और आर्थिक विकास दोनों महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। हाल के महीनों में महंगाई के मोर्चे पर स्थिति में सुधार के संकेत मिले हैं, जबकि घरेलू आर्थिक गतिविधियां भी मजबूत बनी हुई हैं। ऐसे में RBI के सामने विकास को समर्थन देने और महंगाई पर नियंत्रण बनाए रखने के बीच संतुलन कायम रखने की चुनौती है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और मानसून से जुड़े जोखिमों पर भी केंद्रीय बैंक की नजर रहेगी। लोन और EMI पर भी पड़ेगा असर अगर RBI रेपो रेट में बदलाव करता है तो इसका असर बैंकों की उधारी लागत पर पड़ सकता है। खासतौर पर रेपो रेट से जुड़े होम लोन और अन्य फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज की ब्याज दरों और EMI पर इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। वहीं, दरों को स्थिर रखने पर तत्काल EMI में बदलाव की संभावना कम रहेगी। अब सभी की नजर RBI के आधिकारिक फैसले और गवर्नर संजय मल्होत्रा के बयान पर है। इससे आने वाले महीनों में ब्याज दरों की दिशा और बाजार की चाल को लेकर महत्वपूर्ण संकेत मिल सकते हैं।