स्वास्थ्य

Morning Headache: 6 Causes & Easy Prevention Tips

सुबह का सिरदर्द कहीं शरीर का अलर्ट तो नहीं? जानें 6 कारण और बचाव के आसान तरीके

anmol जुलाई 24, 2026 0
Person holding their head after waking up, highlighting morning headache causes and prevention tips.
Morning Headache Causes and Prevention Tips

Morning Headache Causes: अगर आपकी सुबह की शुरुआत अक्सर सिरदर्द के साथ होती है, तो इसे सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। सुबह उठते ही होने वाला सिरदर्द कई बार शरीर की किसी अंदरूनी समस्या या बिगड़ती जीवनशैली का संकेत हो सकता है। खराब नींद, शरीर में पानी की कमी, तनाव, ब्लड प्रेशर में बदलाव और कुछ अन्य स्वास्थ्य कारण इसके पीछे जिम्मेदार हो सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि सुबह का सिरदर्द बार-बार हो रहा है, तो केवल दर्द निवारक दवा लेने के बजाय इसकी असली वजह जानना और समय रहते सुधार करना जरूरी है।

सुबह उठते ही सिरदर्द होने के 6 बड़े कारण

1. पर्याप्त और अच्छी नींद न लेना

अगर आपकी नींद पूरी नहीं होती या रात में बार-बार टूटती है, तो सुबह उठने पर सिरदर्द महसूस हो सकता है। अच्छी गुणवत्ता वाली 7–8 घंटे की नींद शरीर और मस्तिष्क दोनों के लिए जरूरी है।

2. डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी)

रातभर पानी न पीने या दिनभर पर्याप्त पानी न लेने से शरीर डिहाइड्रेट हो सकता है। इसका असर सुबह सिर भारी लगने और सिरदर्द के रूप में दिखाई दे सकता है।

3. नींद में दांत पीसना या जबड़ा कसना

कुछ लोगों को नींद के दौरान दांत पीसने (Bruxism) या जबड़ा कसकर रखने की आदत होती है। इससे सिर और चेहरे की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ता है, जो सुबह दर्द का कारण बन सकता है।

4. तनाव और मानसिक दबाव

लगातार तनाव, चिंता और मानसिक थकान भी सुबह के सिरदर्द का एक प्रमुख कारण हो सकते हैं। तनाव शरीर की मांसपेशियों और नसों पर असर डालता है, जिससे दर्द बढ़ सकता है।

5. ब्लड प्रेशर में बदलाव

कुछ लोगों में सुबह के समय ब्लड प्रेशर बढ़ने या असंतुलित रहने के कारण भी सिरदर्द की समस्या हो सकती है। यदि यह समस्या बार-बार हो, तो नियमित जांच कराना जरूरी है।

6. दर्द निवारक दवाओं का अधिक सेवन

बार-बार पेनकिलर लेने से रिबाउंड हेडेक (Rebound Headache) की समस्या हो सकती है, जिसमें दवा का असर खत्म होने के बाद सिरदर्द फिर शुरू हो जाता है।

सुबह के सिरदर्द से बचने के आसान उपाय

  • रोजाना 7–8 घंटे की अच्छी और पर्याप्त नींद लें।
  • हर दिन एक ही समय पर सोने और जागने की आदत बनाएं।
  • दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
  • सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल बंद करें।
  • रात में अत्यधिक कैफीन और शराब के सेवन से बचें।
  • तनाव कम करने के लिए मेडिटेशन और रिलैक्सेशन तकनीकों को अपनाएं।
  • अगर खर्राटे, नींद में सांस रुकने या दांत पीसने की समस्या हो, तो विशेषज्ञ से सलाह लें।

कौन-से योग और प्राणायाम मददगार हो सकते हैं?

सुबह नियमित रूप से अनुलोम-विलोम, भ्रामरी प्राणायाम, बालासन, शशांकासन और मार्जरी-व्याघ्रासन (Cat-Cow Pose) करने से तनाव कम करने, शरीर को रिलैक्स रखने और बेहतर नींद में मदद मिल सकती है। हालांकि, यदि सिरदर्द लगातार बना रहे या तेज हो, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर न रहें और डॉक्टर से जांच जरूर कराएं।

कब डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें?

यदि सुबह का सिरदर्द रोजाना हो, बहुत तेज हो, इसके साथ चक्कर, धुंधला दिखना, उल्टी, बोलने में परेशानी या शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी महसूस हो, तो इसे सामान्य सिरदर्द समझकर नजरअंदाज न करें और तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।

ध्यान रखें: सुबह का सिरदर्द कई बार शरीर का एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है। समय पर कारण की पहचान, संतुलित जीवनशैली, पर्याप्त नींद, नियमित योग और सही खानपान अपनाकर इस समस्या के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

 

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Anmol Manisha

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Omega 3
Omega-3 Fatty Acid: दिल-दिमाग ही नहीं, पूरे शरीर के लिए फायदेमंद है ओमेगा-3, जानें क्यों जरूरी है इसकी सही मात्रा

नई दिल्ली, एजेंसियां। ओमेगा-3 फैटी एसिड को अक्सर केवल हृदय और मस्तिष्क की सेहत से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह शरीर के कई अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के लिए भी बेहद जरूरी पोषक तत्व है। चूंकि शरीर इसे पर्याप्त मात्रा में स्वयं नहीं बना पाता, इसलिए इसकी पूर्ति भोजन या सप्लीमेंट्स के माध्यम से करनी पड़ती है।   इन खाद्य पदार्थों से मिल सकता है ओमेगा-3   मछली, अखरोट, अलसी के बीज, चिया सीड्स और कुछ वनस्पति तेल ओमेगा-3 के प्रमुख स्रोत माने जाते हैं। संतुलित आहार में इनका नियमित सेवन शरीर को आवश्यक फैटी एसिड उपलब्ध कराने में मदद करता है।   हार्ट और ब्रेन हेल्थ के लिए फायदेमंद   अध्ययनों के अनुसार ओमेगा-3 दिल की धड़कन को संतुलित रखने, खराब वसा (बैड फैट) को कम करने और मस्तिष्क की कोशिकाओं के बेहतर कार्य में मदद करता है। यह याददाश्त और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में भी सहायक माना जाता है।   सूजन, जोड़ों और त्वचा को भी मिलता है लाभ   विशेषज्ञों का कहना है कि ओमेगा-3 शरीर में लंबे समय तक रहने वाली सूजन (इंफ्लेमेशन) को कम करने में मदद कर सकता है, जिससे हृदय रोग, डायबिटीज और जोड़ों से जुड़ी समस्याओं का जोखिम कम हो सकता है। इसके अलावा यह जोड़ों के दर्द और अकड़न में राहत पहुंचाने के साथ त्वचा की नमी बनाए रखने और उसकी प्राकृतिक सुरक्षा परत को मजबूत करने में भी सहायक होता है।   संतुलित आहार पर दें ध्यान   स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि ओमेगा-3 से भरपूर खाद्य पदार्थों को नियमित रूप से अपनी डाइट में शामिल करें। हालांकि, किसी भी प्रकार का सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर या पोषण विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर माना जाता है।

abhishek singh जुलाई 22, 2026 0
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