झारखंड

आज पेश होगा ₹6,500 करोड़ का अनुपूरक बजट

झारखंड विधानसभा में आज पेश होगा 6,500 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट

ranjan kumar tiwari अगस्त 7, 2026 0
झारखंड विधानसभा में अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा
झारखंड विधानसभा में ₹6,500 करोड़ का अनुपूरक बजट

रांची। झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान शुक्रवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट सदन में पेश किया जाएगा। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर करीब 6,500 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट प्रस्तुत करेंगे। इस बजट में नई योजनाओं, विकास परियोजनाओं और विभिन्न विभागों की अतिरिक्त वित्तीय आवश्यकताओं के लिए राशि का प्रावधान किए जाने की संभावना है.

 

ग्रामीण रोजगार योजना को मिलेगी वित्तीय मजबूती

 

 

अनुपूरक बजट में केंद्र सरकार की विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) [VB-GRAMJ] योजना के क्रियान्वयन के लिए विशेष वित्तीय प्रावधान किया गया है। इसके अलावा राज्य में चल रही विकास योजनाओं को गति देने और नई परियोजनाओं के संचालन के लिए भी अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी।

 

 

चर्चा के बाद सदन से कराया जाएगा पारित

 

 

वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर द्वारा बजट पेश किए जाने के बाद उस पर सदन में चर्चा होगी। चर्चा पूरी होने के बाद अनुपूरक बजट को पारित कराने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

 

 

क्या होता है अनुपूरक बजट?

 

 

अनुपूरक बजट तब लाया जाता है, जब वित्तीय वर्ष के दौरान किसी विभाग को मूल बजट में स्वीकृत राशि से अधिक धन की आवश्यकता होती है या नई योजनाओं और नई वित्तीय जरूरतों के लिए अतिरिक्त स्वीकृति देनी होती है। इसके माध्यम से सरकार विभिन्न योजनाओं के प्रभावी संचालन के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराती है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

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Students protesting against JPSC-JSSC exam irregularities in Jharkhand as government forms a ministerial committee for talks.
JPSC-JSSC आंदोलन: सरकार बोली- बातचीत से निकलेगा हल, छात्रों की चार प्रमुख मांगों पर बनी सहमति का इंतजार

झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। एक ओर सरकार ने चार मंत्रियों की समिति बनाकर बातचीत के जरिए समाधान निकालने का भरोसा दिया है, वहीं आंदोलनकारी छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। गुरुवार को कई मंत्रियों ने इस पूरे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी, जबकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी आंदोलनरत छात्रों से फोन पर बातचीत कर उनका पक्ष जाना। 'पेपर लीक पूरे देश की चुनौती' : चमरा लिंडा झारखंड के कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि पेपर लीक केवल झारखंड की समस्या नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। उनके मुताबिक, संगठित परीक्षा माफिया का नेटवर्क प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने कहा कि केवल सरकार को दोष देने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि पूरे सिस्टम को मजबूत करने की जरूरत है। सरकार गंभीर, चार मंत्रियों की समिति गठित : इरफान अंसारी स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि सरकार युवाओं की समस्याओं को लेकर पूरी तरह गंभीर है। छात्रों से बातचीत के लिए चार मंत्रियों की समिति बनाई जा चुकी है, जो प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता कर समाधान तलाशेगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित चेयरमैन से इस्तीफा लिया और अब तक 12 लोगों को जेल भेजा जा चुका है। योग्य अभ्यर्थियों के हित सुरक्षित रहेंगे : दीपिका पांडेय सिंह ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि सरकार दोषियों को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन अभ्यर्थियों ने पूरी ईमानदारी और योग्यता के आधार पर सफलता हासिल की है, उनके हितों की रक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी की है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। छात्रों की चार प्रमुख मांगें आंदोलन कर रहे छात्रों ने सरकार के सामने चार प्रमुख मांगें रखी हैं— टीडीपीएल द्वारा आयोजित JPSC की सभी विवादित परीक्षाएं तत्काल रद्द की जाएं, जिनमें 14वीं JPSC, JPSC बैकलॉग-2023 और FRO परीक्षा शामिल हैं। जिन परीक्षाओं में अभय तिवारी की भूमिका या संलिप्तता रही है, उन्हें भी रद्द किया जाए। इनमें JSSC CGL और झारखंड PGT भर्ती-2025 जैसी परीक्षाएं शामिल हैं। पूरे मामले की CBI और ED से जांच कराकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए कड़ा कानून बनाया जाए। वार्ता पर अभी भी संशय गुरुवार देर शाम रांची सदर एसडीओ कुमार रजत और एडीएम (लॉ एंड ऑर्डर) धनंजय कुमार आंदोलन स्थल पहुंचे और छात्रों से मुलाकात की। प्रशासन का कहना है कि वार्ता को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है क्योंकि प्रतिनिधिमंडल की अंतिम सूची नहीं मिली है। वहीं आंदोलनकारी छात्रों का दावा है कि उन्होंने अपनी डेलिगेशन लिस्ट पहले ही प्रशासन को भेज दी है। ऐसे में वार्ता की तारीख को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। राहुल गांधी ने छात्रों से की बातचीत कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी आंदोलनरत छात्रों से फोन पर बातचीत की। उन्होंने छात्र पीयूष और रविंद्र से कांग्रेस नेता कुमार राजा के फोन के माध्यम से बात कर उनकी मांगों और आंदोलन की स्थिति की जानकारी ली। राहुल गांधी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि चाहे केंद्र सरकार हो, राज्य सरकार हो या कांग्रेस, सभी को युवाओं के भविष्य और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदारी निभानी चाहिए। कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने भी झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन की पूरी जानकारी ली है। क्या आगे होगा? अब सबकी नजर सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच होने वाली संभावित वार्ता पर है। यदि बातचीत सफल होती है तो आंदोलन को नया मोड़ मिल सकता है, लेकिन यदि मांगों पर सहमति नहीं बनती है तो छात्रों के आंदोलन के और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।  

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झारखंड छात्र आंदोलन के बीच सरकार का बड़ा कदम, राधाकृष्ण किशोर ने बातचीत की अपील रांची। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन जारी है। इसी बीच राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों से सरकार के साथ बातचीत करने की अपील की है। सरकार ने छात्रों की मांगों पर चर्चा के लिए कैबिनेट मंत्रियों की एक समिति गठित करने का फैसला किया है।   छात्रों की मांगों पर बातचीत का प्रस्ताव   छात्रों का आंदोलन मुख्य रूप से भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं की जांच तथा भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर चल रहा है। प्रदर्शनकारी छात्र सरकार से इस मामले में ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि सरकार छात्रों के कल्याण और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आंदोलन कर रहे छात्रों से सरकार के साथ संवाद करने की अपील की है।   सरकार ने बनाई मंत्रियों की समिति   छात्रों के साथ बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए झारखंड सरकार ने कैबिनेट मंत्रियों की एक समिति गठित की है। समिति का उद्देश्य प्रदर्शनकारी छात्रों की मांगों को सुनना और उनके समाधान के लिए सरकार के स्तर पर आवश्यक कदमों पर चर्चा करना है। सरकार की इस पहल को आंदोलन को बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।   छात्र भी बातचीत के लिए तैयार   ताजा घटनाक्रम में छात्रों की ओर से भी सरकार के साथ बातचीत को लेकर सहमति के संकेत मिले हैं। हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्रों ने बातचीत को लेकर अपनी कुछ शर्तें रखी हैं। वे चाहते हैं कि चर्चा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मौजूदगी में और मीडिया के सामने हो, ताकि बातचीत में पारदर्शिता बनी रहे।   भर्ती परीक्षाओं की जांच पर टिकी नजर   छात्रों के आंदोलन के बीच भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच भी जारी है। रिपोर्ट के मुताबिक, मामले में CID की जांच आगे बढ़ रही है और कुछ गिरफ्तारियां भी हुई हैं। अब सरकार और छात्रों के बीच होने वाली बातचीत में भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया, कथित गड़बड़ियों की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई जैसे मुद्दे प्रमुख रह सकते हैं। सरकार की बातचीत की पहल के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि छात्रों और सरकार के बीच संवाद कब शुरू होता है और आंदोलन को समाप्त करने के लिए कोई ठोस समाधान निकल पाता है या नहीं।

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Jharkhand Legislative Assembly
झारखंड विधानसभा के 750 मीटर दायरे में धारा 163 लागू, धरना-प्रदर्शन पर रोक

रांची। झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र को देखते हुए रांची जिला प्रशासन ने विधानसभा के नए परिसर के 750 मीटर के दायरे में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है। यह आदेश 6 अगस्त की सुबह 8 बजे से 12 अगस्त की रात 10 बजे तक प्रभावी रहेगा। छात्रों के विधानसभा घेराव के ऐलान के बीच प्रशासन के इस कदम को सुरक्षा व्यवस्था से जोड़कर देखा जा रहा है।   पांच या उससे अधिक लोगों के जुटने पर रोक   प्रशासन के आदेश के अनुसार निषेधाज्ञा की अवधि में विधानसभा के 750 मीटर के दायरे में पांच या उससे अधिक लोगों के एक जगह जमा होने पर रोक रहेगी। इसके साथ ही धरना, प्रदर्शन, घेराव, जुलूस, रैली और आमसभा आयोजित करने की अनुमति नहीं होगी। ध्वनि विस्तारक यंत्र के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध रहेगा। हालांकि सरकारी ड्यूटी में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों तथा सरकारी कार्यक्रमों को इस आदेश से छूट दी गई है।   हथियार और पारंपरिक हथियार ले जाने पर भी प्रतिबंध   निषेधाज्ञा के दौरान किसी भी तरह के अस्त्र-शस्त्र लेकर चलने पर रोक रहेगी। प्रशासन ने लाठी-डंडा, तीर-धनुष, भाला और गड़ासा जैसे पारंपरिक हथियारों के साथ चलने पर भी प्रतिबंध लगाया है। हालांकि यह आदेश झारखंड हाईकोर्ट परिसर पर लागू नहीं होगा।   छात्र आंदोलन के बीच प्रशासन का फैसला   झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलनकारी छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर विधानसभा घेराव का ऐलान किया था। इसी बीच विधानसभा का मानसून सत्र भी 6 से 12 अगस्त तक आयोजित किया जा रहा है।   छात्रों की मांगों और आंदोलन को लेकर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत की कोशिश भी चल रही है। ताजा अपडेट के अनुसार छात्र सरकार से बातचीत के लिए तैयार हैं, जबकि आंदोलन से जुड़े कुछ नेता अपनी मांगों को लेकर अब भी धरने पर हैं।   विधानसभा सत्र के दौरान सुरक्षा बढ़ी   विधानसभा सत्र और छात्र आंदोलन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। निषेधाज्ञा लागू करने का उद्देश्य विधानसभा परिसर के आसपास कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी अप्रिय स्थिति को रोकना बताया गया है। अब विधानसभा सत्र के दौरान JPSC-JSSC विवाद और छात्रों की मांगों पर सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ने की संभावना है।

abhishek singh अगस्त 6, 2026 0
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