रांची। झारखंड में CCTV इंस्टॉलेशन को लेकर नये घोटाले का आरोप लगा है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर CCTV टेंडर में बड़े भ्रष्टाचार की आशंका जताते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में CCTV इंस्टॉलेशन की निविदा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और यह मामला शराब घोटाले की तरह किसी खास कंपनी को फायदा पहुंचाने की कोशिश जैसा दिख रहा है।
बाबूलाल मरांडी ने अपने पत्र में कहा कि पहले जारी की गई निविदा को निरस्त कर दिया गया, लेकिन अब दोबारा उसी तरह की निविदा निकाली गई है। उन्होंने दावा किया कि पूरी प्रक्रिया को एक खास सिंडिकेट के अनुसार तैयार किया जा रहा है। पत्र में उन्होंने टाटा एडवांस्ड सिस्टम का भी जिक्र किया और कहा कि कुछ प्रभावशाली लोगों के साथ मिलकर इस कंपनी को लाभ पहुंचाने की कोशिश हो रही है।
मरांडी ने अपने आरोपों में पूर्व आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल का नाम लेते हुए कहा कि जिस विभाग में पहले से भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे अधिकारी रहे हों, वहां पारदर्शिता की उम्मीद कम ही है। उन्होंने मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि “जो जितना बड़ा भ्रष्टाचारी, वो उतना बड़ा अधिकारी” वाली स्थिति राज्य में बन गई है।
पत्र में यह भी आरोप लगाया गया कि संविदा पर काम कर रहे कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की धमकी देकर फाइल आगे बढ़वाई गई। मरांडी ने कहा कि पहले जहां कर्मचारियों को दो साल का सेवा विस्तार मिलता था, अब सिर्फ छह महीने का विस्तार दिया जा रहा है, ताकि विरोध की आवाज दबाई जा सके।
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि केवल निविदा रद्द करना काफी नहीं है, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो इसकी राजनीतिक और प्रशासनिक लपट सरकार तक भी पहुंच सकती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची। हेमंत सोरेन ने रांची स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में सात वर्षीय बाल तैराक इशांक सिंह से मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने इशांक सिंह को उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए 5 लाख रुपये का चेक, अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने इशांक को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए उनकी सफलता को पूरे झारखंड के लिए गर्व का क्षण बताया। पाल्क स्ट्रेट पार कर बनाया विश्व रिकॉर्ड रांची के बाल तैराक इशांक सिंह ने 30 अप्रैल 2026 को लगातार 9 घंटे 50 मिनट तक तैरकर भारत और श्रीलंका के बीच स्थित चुनौतीपूर्ण पाल्क स्ट्रेट को पार किया। करीब 29 किलोमीटर लंबी इस समुद्री दूरी को पार कर उन्होंने विश्व रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज किया। उनकी इस उपलब्धि के लिए उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने की प्रतिभा की सराहना मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि इतनी कम उम्र में इशांक सिंह ने कठिन परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि इशांक ने देश और दुनिया में झारखंड का नाम रोशन किया है और उनकी सफलता राज्य के अन्य खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि इशांक भविष्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे। खेल प्रतिभाओं को हर संभव मदद का भरोसा मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है। झारखंड की नई खेल नीति के तहत खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इशांक जैसे प्रतिभाशाली बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव सहायता करेगी। तैराकी सुविधाओं के विस्तार पर जोर इस मौके पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राज्य में तैराकी प्रशिक्षण और आधुनिक सुविधाओं के विस्तार के लिए कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने खेल विभाग के अधिकारियों से वर्तमान तैराकी सुविधाओं और व्यवस्थाओं की जानकारी भी ली। मुख्यमंत्री ने इशांक सिंह के माता-पिता और उनके कोच को भी सम्मानित किया। कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद कार्यक्रम में खेल मंत्री सुदिव्य कुमार, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, खेल विभाग के सचिव मुकेश कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
रांची। झारखंड में मौसम लगातार करवट बदल रहा है। पिछले कुछ दिनों से हो रही बारिश के कारण लोगों को गर्मी से राहत मिली है। मौसम विभाग ने राज्य में 12 मई तक बादल छाए रहने, हल्की से मध्यम बारिश और तेज हवा चलने की संभावना जताई है। इसके लिए येलो अलर्ट भी जारी किया गया है। कई जिलों में बारिश दर्ज पिछले 24 घंटों में राज्य के कई हिस्सों में बारिश हुई। सबसे अधिक बारिश सिमडेगा में 34.2 मिमी रिकॉर्ड की गई, जबकि गुमला में भी हल्की बारिश हुई। बारिश के बावजूद कई जिलों के तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई। रांची का अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस, मेदिनीनगर का 36.2 डिग्री, जमशेदपुर का 34.8 डिग्री और बोकारो का 34.1 डिग्री सेल्सियस रहा। 7 और 8 मई को बारिश और तेज हवा के आसार मौसम विभाग के अनुसार 7 और 8 मई को गढ़वा, चतरा, पलामू और लातेहार को छोड़कर राज्य के अधिकांश हिस्सों में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश और गरज के साथ बारिश हो सकती है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की भी संभावना है। 12 मई तक जारी रहेगा असर मौसम विभाग का अनुमान है कि 9 से 12 मई तक भी राज्य के कई इलाकों में बारिश और बादल छाए रहने का सिलसिला जारी रहेगा। 11 मई को उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों को छोड़कर बाकी जिलों में बारिश की संभावना जताई गई है। 12 मई को भी कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। लोगों को सतर्क रहने की सलाह मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी है। तेज हवा और गरज के दौरान खुले स्थानों से दूर रहने और आवश्यक सावधानी बरतने को कहा गया है।
रांची। झारखंड कांग्रेस में जंबो जेट कमेटी को लेकर कोहराम मचा हुआ है। पार्टी की अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने लगातार तीसरे दिन पार्टी नेतृत्व को पत्र लिखकर नया विवाद खड़ा कर दिया है। पहले दो पत्र प्रदेश प्रभारी को भेजने के बाद तीसरा पत्र उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश को लिखा है। इस बार उन्होंने सीधे प्रदेश कांग्रेस की नई कमेटी के आकार और गठन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। किसे खुश करने के लिए बनाई ये कमेटी उन्होंने पूछा कि आखिर इतनी बड़ी कमेटी की जरूरत क्यों पड़ी। वित्त मंत्री ने अलग-अलग राज्यों की विधानसभा सीटों और वहां की प्रदेश कमेटियों का उदाहरण देते हुए कहा कि झारखंड में जरूरत से ज्यादा लंबी टीम बनाई गई है। उन्होंने यह भी पूछा कि किन नेताओं के परिजनों को संगठन में जगह दी गई, इसकी जानकारी कार्यकर्ताओं को दी जानी चाहिए। ‘बोइंग 737 जैसी कमेटी’ टिप्पणी से बढ़ी तल्खी राधाकृष्ण किशोर ने अपने पत्र में कांग्रेस भवन की व्यवस्था पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष खुद 8x8 के कमरे में बैठते हैं, तो 314 पदाधिकारी आखिर कहां बैठेंगे। उन्होंने नई टीम की तुलना बोइंग 737 विमान से करते हुए लिखा कि क्या कुछ बड़े नेताओं को खुश करने के लिए इतनी लंबी कमेटी बनाई गई है। नया कार्यालय भवन तक नहीं मिला उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस सरकार में साझेदार होने के बावजूद प्रदेश नेतृत्व मुख्यमंत्री से नया कार्यालय भवन तक नहीं दिला पाया। इस टिप्पणी के बाद पार्टी के भीतर बहस और तेज हो गई है। संगठन के कई नेता अब खुलकर प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं। वहीं कुछ नेताओं का मानना है कि वित्त मंत्री ने जिन सवालों को उठाया है, उन पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। पार्टी का पक्ष- पुरानी कमेटी से छोटी है नई टीम प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष सह मीडिया चेयरमैन सतीश पॉल मुंजनी ने वित्त मंत्री के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि नई कमेटी 314 नहीं बल्कि 269 सदस्यीय है। यह पिछली 280 सदस्यीय कमेटी से छोटी है। उन्होंने कहा कि इस बार सभी सदस्यों को जिम्मेदारी भी दी गई है। कार्यालय भवन के मुद्दे पर उन्होंने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष मुख्यमंत्री से मिलकर जमीन उपलब्ध कराने का आग्रह कर चुके हैं। इस संबंध में पत्र भी दिया गया है और सरकार की ओर से सकारात्मक आश्वासन मिला है। मामला अभी प्रक्रिया में है। मंत्री-विधायकों में चुप्पी, लेकिन अंदरखाने समर्थन भी वित्त मंत्री के लगातार पत्रों ने कांग्रेस के भीतर नई बहस छेड़ दी है। हाल के दिनों में उन्होंने एससी आयोग, जेटेट नियमावली में अंगिका और भोजपुरी को क्षेत्रीय भाषा का दर्जा देने और हजारीबाग दुष्कर्म मामले में भी प्रदेश नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। अब पार्टी के मंत्री और विधायक खुलकर बोलने से बच रहे हैं। कांग्रेस कोटे की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, डॉ. इरफान अंसारी समेत कई विधायकों ने टिप्पणी से इनकार किया। हालांकि कुछ विधायकों ने माना कि वित्त मंत्री द्वारा उठाए गए मुद्दों की जांच होनी चाहिए। इससे साफ है कि कांग्रेस में असंतोष की आवाज अब दब नहीं रही, बल्कि संगठन के भीतर ‘कमेटी वार’ का रूप लेती जा रही है।