झारखंड

JPSC-JSSC विवाद: बाबूलाल का हमला, बोले- CBI जांच से क्यों भाग रही सरकार?

anjali kumari अगस्त 12, 2026 0
JPSC JSSC Controversy
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रांची। झारखंड में JPSC-JSSC प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार केंद्रीय जांच एजेंसियों से जांच कराने से बच रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आरोपियों को गिरफ्तार कर उन्हें संरक्षण देने की कोशिश कर रही है, ताकि जांच की आंच ऊपर तक न पहुंच सके।

 

ED की ECIR के बाद पूर्व मुख्य सचिव की गिरफ्तारी पर सवाल

 

बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि सरकार अब तक छात्रों से JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित धांधली की ED से जांच कराने की बात कहती रही है। लेकिन ED की ओर से ECIR दर्ज किए जाने के बाद पूर्व मुख्य सचिव और JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते को CID ने गिरफ्तार कर लिया।

 

उन्होंने कहा कि एल. ख्यांग्ते को CID पहले ही चार बार पूछताछ के लिए बुला चुकी थी। मरांडी ने दावा किया कि कुछ वर्ष पहले इसी तरह ACB ने विनय चौबे को ED की जांच से बचाने के लिए गिरफ्तार किया था।

 

राज्य की एजेंसियों की निष्पक्षता पर उठाए सवाल

 

नेता प्रतिपक्ष ने JPSC और JSSC में कथित तौर पर नौकरी बेचने के मामले में कुछ प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आने का दावा किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के करीबी बताए जाने वाले विनोद सिंह, मुख्य सचिव अविनाश कुमार के सहयोगी धर्मेंद्र और पूर्व मुख्य सचिव एल. ख्यांग्ते जैसे नामों के सामने आने के बाद राज्य की जांच एजेंसियों की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

 

मरांडी ने JSSC-CGL मामले में हुई CID जांच का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस मामले में भी छात्रों ने जांच की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए थे।

 

‘CBI जांच से क्यों भाग रही सरकार?’

 

बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर सीधा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार आरोपियों को गिरफ्तार कर केंद्रीय एजेंसियों की जांच की पहुंच को सीमित करना चाहती है। उन्होंने दावा किया कि अगर JPSC-JSSC की कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष CBI जांच होती है, तो उसकी आंच मुख्यमंत्री तक भी पहुंच सकती है।

 

मरांडी ने इसी आशंका को सरकार के CBI जांच से बचने की वजह बताया। हालांकि, ये सभी आरोप विपक्ष की ओर से लगाए गए हैं।

 

11 अगस्त को विधानसभा में CM ने क्या कहा?

 

JPSC-JSSC विवाद के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 11 अगस्त को विधानसभा में सरकार का रुख स्पष्ट किया था। उन्होंने कहा कि सरकार 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा और बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने के लिए तैयार है। इसके अलावा जिन परीक्षाओं के आयोजन में TDPL एजेंसी की भूमिका रही है, उनकी भी जांच कराने की बात कही।

 

मुख्यमंत्री ने भर्ती परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए IIT, IIM और XLRI जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों से सलाह लेने की बात कही। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और सुरक्षित बनाया जाएगा।

 

छात्रों की मांग पर अब भी कायम है गतिरोध

 

वहीं, JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर छात्र लगातार आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों की प्रमुख मांगों में JSSC-CGL परीक्षा परिणाम रद्द करना और TDPL द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं की जांच CBI से कराने की मांग शामिल है।

 

ऐसे में सरकार और आंदोलनरत छात्रों के बीच गतिरोध बना हुआ है। अब बाबूलाल मरांडी के ताजा बयान के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Anjali Kumari Anjali123

झारखंड

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Jharkhand weather forecast showing heavy rain, thunderstorms and lightning alerts across several districts until August 15
15 अगस्त तक झारखंड में बदला मौसम का मिजाज, कई जिलों में भारी बारिश और वज्रपात का अलर्ट

रांची: झारखंड में अगले कुछ दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने वाला है। मौसम विभाग ने 12 से 15 अगस्त के बीच राज्य के अलग-अलग हिस्सों में गरज-चमक, तेज हवाओं और भारी बारिश की संभावना जताई है। इस दौरान हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। कई जिलों के लिए येलो अलर्ट भी जारी किया गया है। 12-13 अगस्त को इन जिलों में भारी बारिश मौसम विभाग के मुताबिक, 12 और 13 अगस्त को झारखंड के दक्षिणी हिस्सों में मौसम ज्यादा सक्रिय रह सकता है। सिमडेगा, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां में भारी बारिश की संभावना है। वहीं, राज्य के अन्य हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। 13 अगस्त को दक्षिणी झारखंड के कुछ स्थानों पर भारी बारिश का अनुमान है। इस दौरान गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ वज्रपात की स्थिति भी बन सकती है। 14 अगस्त को 9 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने 14 अगस्त को रांची, खूंटी, लातेहार, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां में भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी दी है। इन इलाकों में रहने वाले लोगों को खराब मौसम के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। खासकर आकाशीय बिजली चमकने के दौरान खुले मैदान, पेड़ और बिजली के खंभों के आसपास जाने से बचने को कहा गया है। 15 अगस्त को इन जिलों में येलो अलर्ट 15 अगस्त को भी झारखंड के कई जिलों में मौसम खराब रहने की संभावना है। रांची, रामगढ़, खूंटी, हजारीबाग, चतरा, पलामू, गढ़वा, लातेहार, लोहरदगा और गुमला में भारी बारिश के साथ वज्रपात का खतरा जताया गया है। इन जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। राज्य के बाकी हिस्सों में आंशिक रूप से बादल छाए रहने और कुछ स्थानों पर हल्की बारिश होने का अनुमान है। तेज हवा और वज्रपात को लेकर सावधानी जरूरी मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक स्थानीय मौसम प्रणालियों के प्रभाव से झारखंड में बारिश जारी रह सकती है। कई जगहों पर अचानक तेज बारिश के साथ तेज हवाएं चलने की संभावना है। लोगों को सलाह दी गई है कि गरज-चमक और तेज हवा के दौरान अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें और मौसम खराब होने पर सुरक्षित स्थान पर रहें।  

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झारखंड परीक्षा धांधली पर CM हेमंत सोरेन का बड़ा आरोप, यूपी की कंपनी से जोड़ा कनेक्शन

रांची। झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र तय कार्यक्रम से एक दिन पहले मंगलवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और छात्रों के आंदोलन को लेकर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर हंगामा हुआ। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सदन में सरकार का पक्ष रखते हुए परीक्षा गड़बड़ी के लिए उत्तर प्रदेश की एक कंपनी को जिम्मेदार ठहराया और विपक्ष पर छात्रों के मुद्दे को राजनीतिक रूप से इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।   छात्रों के मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेरा   सदन की कार्यवाही के दौरान भाजपा विधायकों ने JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और आंदोलन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार को घेरा। मुख्यमंत्री के संबोधन के दौरान भी विपक्षी विधायक वेल में पहुंचकर नारेबाजी करते रहे।   भारी हंगामे के बावजूद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने करीब 15 मिनट तक भर्ती परीक्षाओं और छात्रों की मांगों पर सरकार का पक्ष रखा।   परीक्षा गड़बड़ी के लिए यूपी की कंपनी पर आरोप   मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आरोप लगाया कि जिन परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की शिकायत सामने आई है, उनके आयोजन से जुड़ी कंपनी टीडीपीएल उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की है। उन्होंने दावा किया कि इसी कंपनी के माध्यम से परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई और इसके पीछे बिहार तथा उत्तर प्रदेश के लोगों के साथ मिलीभगत की भी जांच की जा रही है।   हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित कंपनी या विपक्ष की ओर से प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। सरकार ने कहा है कि टीडीपीएल द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं की जांच के लिए वह तैयार है।   14वीं JPSC समेत कई परीक्षाओं की जांच को तैयार सरकार   मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों की मांगों को लेकर सरकार की मंशा स्पष्ट है। उन्होंने 14वीं JPSC परीक्षा के अलावा 2023 और 2025 की बैकलॉग परीक्षाओं का भी उल्लेख किया। हेमंत सोरेन ने कहा कि टीडीपीएल द्वारा आयोजित जिन-जिन परीक्षाओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उनकी जांच कराने के लिए सरकार तैयार है। सरकार का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है।   JPSC-JSSC में सुधार के प्रस्ताव पर छात्रों से सहमति का दावा   मुख्यमंत्री ने कहा कि JPSC और JSSC की भर्ती प्रक्रिया में सुधार को लेकर सरकार ने जो सुझाव दिए हैं, आंदोलनकारी छात्र भी उन पर सहमत हैं। उन्होंने कहा कि सरकार भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया में सुधार कर युवाओं के हितों की रक्षा करना चाहती है।   JPSC-JSSC विवाद को लेकर छात्र लंबे समय से परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।   नोटों का बंडल लहराने पर सदन में बढ़ा हंगामा   मुख्यमंत्री के संबोधन के दौरान भाजपा विधायक सीपी सिंह ने 500 रुपये के नोटों का बंडल लहराकर सरकार पर नौकरी के बदले पैसे लेने का आरोप लगाया। इससे सदन में हंगामा और तेज हो गया।   सीएम हेमंत सोरेन ने पलटवार करते हुए भाजपा पर लोकतंत्र को पैसे के बल पर प्रभावित करने का आरोप लगाया। दोनों पक्षों के बीच तीखी बयानबाजी के बीच सदन का माहौल काफी गरम रहा।   भाजपा और RSS पर भी मुख्यमंत्री का हमला   अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने भाजपा और RSS पर भी निशाना साधा। उन्होंने विपक्ष पर छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक रूप देने का आरोप लगाया। सीएम ने कहा कि विपक्ष छात्रों की आड़ में अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने भाजपा पर तिरंगे को लेकर भी टिप्पणी की और विपक्ष के रवैये पर सवाल उठाए।   एक दिन पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुआ सत्र   झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र तय कार्यक्रम के मुताबिक बुधवार तक चलना था, लेकिन लगातार हंगामे के बीच मंगलवार को ही इसे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। संसदीय कार्यमंत्री के आग्रह के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा की। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि भारी मन से उन्हें यह निर्णय लेना पड़ रहा है।   JPSC-JSSC विवाद और छात्रों के आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद परीक्षा गड़बड़ी को लेकर राजनीतिक टकराव और बढ़ने के आसार हैं। अब निगाह इस बात पर है कि सरकार कथित अनियमितताओं की जांच को लेकर आगे क्या कार्रवाई करती है।

anjali kumari अगस्त 11, 2026 0
झारखंड छात्र आंदोलन में पुलिस कार्रवाई पर सैम पित्रोदा की प्रतिक्रिया

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Wheelchair facility for patients and persons with disabilities at a government hospital in Dhanbad
सांसद मद से अस्पतालों में मिलेंगी व्हीलचेयर, मरीजों और दिव्यांगजनों को होगी राहत

धनबाद: धनबाद लोकसभा क्षेत्र के विभिन्न रेलवे स्टेशनों से जुड़े सरकारी अस्पतालों में अब मरीजों और दिव्यांगजनों की सुविधा के लिए व्हीलचेयर उपलब्ध करायी जायेगी. यह व्यवस्था सांसद मद से वित्तीय वर्ष 2025-26 के तहत की जाएगी. इसके लिए लघु सिंचाई प्रमंडल, धनबाद की ओर से अतिअल्पकालीन कोटेशन आमंत्रित किया गया है. अस्पतालों में उपलब्ध होंगी व्हीलचेयर योजना के तहत चयनित सरकारी अस्पतालों में सार्वजनिक उपयोग के लिए व्हीलचेयर की आपूर्ति की जाएगी. इसमें मैनुअल या मोटर चालित व्हीलचेयर उपलब्ध कराने का प्रावधान रखा गया है. अस्पतालों में व्हीलचेयर की सुविधा मिलने से बुजुर्ग, दिव्यांग और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में काफी सहूलियत होगी. मरीजों के परिजनों और अस्पताल कर्मियों को भी इससे मदद मिलेगी. सांसद मद से होगी व्यवस्था यह पहल धनबाद लोकसभा क्षेत्र के अस्पतालों में मरीजों की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से की जा रही है. सांसद मद से होने वाली इस व्यवस्था के तहत अस्पतालों में व्हीलचेयर की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी, ताकि जरूरतमंद मरीजों को तत्काल सुविधा मिल सके. 14 अगस्त तक जमा होगा कोटेशन व्हीलचेयर की आपूर्ति के लिए इच्छुक आपूर्तिकर्ता 14 अगस्त 2026 को सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक अपना कोटेशन लघु सिंचाई प्रमंडल, धनबाद के कार्यालय में जमा कर सकेंगे. निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद 14 अगस्त को ही दोपहर 3 बजे कोटेशन खोला जाएगा. विभाग ने प्रक्रिया को जल्द पूरा करने के लिए अतिअल्पकालीन कोटेशन आमंत्रित किया है. सार्वजनिक सुविधा के रूप में होगा इस्तेमाल अस्पतालों में उपलब्ध करायी जाने वाली व्हीलचेयर का इस्तेमाल मरीजों और दिव्यांगजनों की सार्वजनिक सुविधा के लिए किया जाएगा. विभाग की ओर से जारी सूचना के अनुसार खरीद और आपूर्ति की पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत पूरी की जाएगी. इस पहल से रेलवे स्टेशनों से जुड़े सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचने वाले जरूरतमंद मरीजों को आने-जाने में राहत मिलने की उम्मीद है.  

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