रांची। झारखंड के सरकारी कॉलेजों में साइंस की पढ़ाई व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी की गई है। नए शैक्षणिक सत्र 2026-30 से अब हर सरकारी कॉलेज में विज्ञान (बीएससी) की पढ़ाई नहीं होगी। राज्य सरकार ने चुनिंदा कॉलेजों को ही विज्ञान शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य संसाधनों का बेहतर उपयोग, प्रयोगशालाओं को मजबूत बनाना और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण विज्ञान शिक्षा उपलब्ध कराना है। हालांकि इस नई व्यवस्था से छात्रों के सामने पसंदीदा कॉलेज चुनने के विकल्प भी सीमित हो जाएगी।
राजधानी रांची में अब रांची विश्वविद्यालय के केवल डोरंडा कॉलेज, रांची वीमेंस कॉलेज और मारवाड़ी कॉलेज में ही विज्ञान संकाय की पढ़ाई होगी। पहले शहर के छह सरकारी कॉलेजों में बीएससी की पढ़ाई होती थी। नई व्यवस्था के तहत इन तीन कॉलेजों में कुल 1620 सीटों पर दाखिला लिया जाएगा। वहीं जमशेदपुर में भी विज्ञान की पढ़ाई चार की जगह अब केवल ग्रेजुएट कॉलेज, को-ऑपरेटिव कॉलेज और एलबीएसएम कॉलेज में होगी। हालांकि धनबाद के दोनों सरकारी कॉलेजों में विज्ञान की पढ़ाई पहले की तरह जारी रहेगी।
विज्ञान के साथ-साथ इन तीन प्रमुख कॉलेजों में कला, वाणिज्य और विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रम भी संचालित होंगे। डोरंडा कॉलेज में विज्ञान के अलावा हिंदी, अंग्रेजी, भूगोल, जियोलॉजी, इतिहास, राजनीति विज्ञान, वाणिज्य, अर्थशास्त्र, पर्यावरण विज्ञान और क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई होगी। रांची वीमेंस कॉलेज में भी विज्ञान के साथ कला एवं वाणिज्य के प्रमुख विषय उपलब्ध रहेंगे। वहीं मारवाड़ी कॉलेज में कॉमर्स, अर्थशास्त्र, हिंदी, अंग्रेजी, इतिहास, राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र और वोकेशनल कोर्स संचालित किए जाएंगे।
इसके अलावा जेएन कॉलेज, धुर्वा, आरएलएसवाई कॉलेज और एसएस मेमोरियल कॉलेज जैसे अन्य सरकारी कॉलेजों को मुख्य रूप से कला, वाणिज्य और सामाजिक विज्ञान विषयों पर केंद्रित किया गया है।
सरकार का मानना है कि विज्ञान शिक्षा को सीमित कॉलेजों में केंद्रित करने से आधुनिक प्रयोगशालाओं, उपकरणों और विशेषज्ञ शिक्षकों का बेहतर उपयोग हो सकेगा। इससे शोध और प्रयोगात्मक शिक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा तथा छात्रों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिलेंगी।
हालांकि इस बदलाव का दूसरा पक्ष भी है। अब कई छात्रों को अपने घर के नजदीकी कॉलेज के बजाय दूसरे कॉलेज में दाखिला लेना पड़ेगा, जिससे आवागमन और रहने का अतिरिक्त खर्च बढ़ सकता है। साथ ही तीन कॉलेजों में छात्रों की संख्या बढ़ने से सीटों पर प्रतिस्पर्धा और शैक्षणिक दबाव भी बढ़ने की संभावना है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची। झारखंड में अगले एक सप्ताह तक मौसम का मिजाज बदला रहेगा। मौसम विज्ञान केंद्र ने 27 जून से 3 जुलाई तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश, मेघ गर्जन और वज्रपात की संभावना को देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया है। राजधानी रांची समेत कई जिलों में आसमान में बादल छाए रहने और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। वहीं 1 जुलाई को रांची में कुछ स्थानों पर भारी बारिश भी हो सकती है। हालांकि पलामू, चतरा और गढ़वा जैसे जिलों में फिलहाल गर्मी का असर बने रहने की संभावना है। सामान्य से काफी कम हुई जून की बारिश मौसम विभाग के अनुसार, 1 से 26 जून के बीच झारखंड में सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई है। इस अवधि में राज्य में सामान्य बारिश 149.8 मिमी होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक केवल 59 मिमी वर्षा हुई है, जो सामान्य से करीब 61 प्रतिशत कम है। राजधानी रांची में भी 158.2 मिमी के मुकाबले केवल 125.7 मिमी बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में होने वाली बारिश से वर्षा की कमी कुछ हद तक पूरी हो सकती है। वज्रपात से चार लोगों की मौत शुक्रवार को झारखंड में वज्रपात की अलग-अलग घटनाओं में चार लोगों की मौत हो गई। लोहरदगा में बकरी चरा रही एक महिला की आकाशीय बिजली गिरने से जान चली गई। वहीं कुडू, लातेहार के बालूमाथ और चतरा जिले के लावालौंग क्षेत्र में भी वज्रपात की चपेट में आने से तीन अन्य लोगों की मौत हो गई। इन घटनाओं के बाद मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों, खेतों और पेड़ों के नीचे जाने से बचने की अपील की है। तापमान में आएगी गिरावट 27 से 30 जून के दौरान राज्य में मौसम सामान्यतः बादलों से घिरा रहेगा। कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश और मेघ गर्जन की संभावना है। इस दौरान अधिकतम तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है, जिससे लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। मौसम विभाग ने लोगों से मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने और खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी है।
रांची। झारखंड में मानसून सक्रिय होने के साथ ही मौसम विभाग ने आज राज्य के कई जिलों के लिए भारी बारिश, वज्रपात और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है। लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से घर से बाहर नहीं निकलने की अपील की गई है। मौसम विभाग के अनुसार, कई इलाकों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश हो सकती है। इन जिलों में ज्यादा असर की संभावना मौसम विभाग के मुताबिक रांची, बोकारो, धनबाद, जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम), पश्चिमी सिंहभूम, खूंटी, सरायकेला-खरसावां, गुमला, सिमडेगा और रामगढ़ समेत कई जिलों में भारी बारिश और वज्रपात की आशंका जताई गई है। कुछ क्षेत्रों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं। किसानों और आम लोगों के लिए सलाह प्रशासन ने किसानों से खराब मौसम के दौरान खेतों में काम करने से बचने की सलाह दी है। वहीं आम लोगों से खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों के पास खड़े न होने की अपील की गई है। तेज बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति भी बन सकती है। अगले 48 घंटे तक मौसम रहेगा सक्रिय मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 48 घंटे तक झारखंड के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। कुछ स्थानों पर मध्यम से भारी वर्षा दर्ज होने की संभावना है, जिससे तापमान में भी गिरावट आ सकती है।
रांची। झारखंड, बिहार और ओडिशा क्षेत्र का मोस्ट वांटेड और एक करोड़ रुपये का इनामी माओवादी कमांडर मिसिर बेसरा एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने में सफल रहा है। लगभग 3000 सुरक्षा बलों की घेराबंदी के बावजूद वह सारंडा के जंगलों से निकलकर कोल्हान क्षेत्र के घने जंगलों में पहुंच गया है। उसके साथ उसके करीबी सहयोगी अजय महतो के भी होने की सूचना है। नई खुफिया जानकारी मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने अब अभियान का दायरा सारंडा से बढ़ाकर दलमा और आसपास के इलाकों तक विस्तारित कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, सूत्रों के अनुसार, पिछले एक महीने से केंद्रीय सुरक्षा बलों, झारखंड पुलिस और झारखंड जगुआर की संयुक्त टीम ने सारंडा के जराइकेला, गोइलकेरा और बलिबा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अभियान चला रखा था। घने जंगलों, दुर्गम पहाड़ियों और लैंडमाइंस के खतरे के बीच नक्सलियों की घेराबंदी की गई थी। हालांकि, रात के समय सुरक्षा बलों की सीमित गतिविधियों का फायदा उठाकर मिसिर बेसरा अपने साथियों के साथ छोटे-छोटे समूहों में बंट गया और अलग-अलग रास्तों से जंगल से निकलने में सफल रहा। बताया जा रहा है कि बेसरा सबसे पहले केवल एक सहयोगी के साथ सुरक्षित स्थान पर पहुंचा, जबकि अन्य नक्सली बाद में अलग-अलग समूहों में उससे जा मिले। खुफिया एजेंसियों के अनुसार खुफिया एजेंसियों के अनुसार, नक्सली नेटवर्क अब तीन हिस्सों में बंट चुका है। पहला और सबसे अहम समूह मिसिर बेसरा का कोर ग्रुप है, जिसमें अजय महतो सहित दो हार्डकोर नक्सली शामिल हैं। दूसरा समूह 10 से 15 नक्सलियों का है, जो सारंडा-ओडिशा सीमा क्षेत्र में सक्रिय है, जबकि तीसरा समूह करीब नौ नक्सलियों के साथ पोड़ाहाट के जंगलों में मौजूद बताया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लगातार अभियानों के कारण नक्सलियों की लॉजिस्टिक सप्लाई लगभग ठप हो चुकी है और उनके बड़े ठिकाने भी ध्वस्त किए जा चुके हैं। पहले की तुलना में मिसिर बेसरा के पास न तो पर्याप्त कैडर शक्ति बची है और न ही स्थानीय स्तर पर मजबूत समर्थन। अधिकारियों का मानना है कि जंगल से बाहर निकलने के बाद उसकी गतिविधियों पर निगरानी रखना आसान होगा और उसके सामने आत्मसमर्पण के अलावा विकल्प सीमित रह गए हैं। पुलिस अधीक्षक अमित रेणु ने बताया चाईबासा के पुलिस अधीक्षक अमित रेणु ने बताया कि कोल्हान के जंगलों में भी घेराबंदी तेज कर दी गई है। ड्रोन निगरानी, ग्राउंड इंटेलिजेंस और संयुक्त सुरक्षा अभियान के जरिए नक्सलियों की तलाश जारी है। उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में नक्सलियों की मुश्किलें और बढ़ेंगी तथा सुरक्षा बल उन्हें जल्द पकड़ने या आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करने की दिशा में लगातार कार्रवाई कर रहे हैं।