भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर गुरुवार को देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर नरेंद्र मोदी समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें याद किया और उनके योगदान को नमन किया।
राजधानी दिल्ली स्थित ‘वीर भूमि’ में आयोजित प्रार्थना सभा में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री की समाधि पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर राजीव गांधी को याद किया। उन्होंने लिखा, “पूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी जी को उनकी पुण्यतिथि पर नमन।”
प्रधानमंत्री के संदेश के बाद कई राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी सोशल मीडिया पर पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि अर्पित की।
मल्लिकार्जुन खरगे ने वीर भूमि पहुंचकर राजीव गांधी की समाधि पर फूल चढ़ाए और उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान सोनिया गांधी भी मौजूद रहीं।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी अपने पिता की समाधि पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राजीव गांधी के साथ एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा,
“पापा, आपने जिस कुशल, समृद्ध और मजबूत भारत का सपना देखा था, उसे साकार करने की जिम्मेदारी मैं पूरी करूंगा। आपकी सीख, आपके संस्कार और आपकी यादें हमेशा मेरे साथ रहेंगी।”
उनका यह संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में रहा।
राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को मुंबई में हुआ था। उन्होंने 31 अक्टूबर 1984 से 2 दिसंबर 1989 तक भारत के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। उनके कार्यकाल में सूचना प्रौद्योगिकी, टेलीकॉम और आधुनिक भारत की नींव रखने वाले कई कदम उठाए गए।
21 मई 1991 को श्रीपेरंबदूर में चुनाव प्रचार के दौरान एक आत्मघाती हमले में उनकी हत्या कर दी गई थी। उनकी पुण्यतिथि पर हर वर्ष देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। विनेश फोगाट को एशियन गेम्स चयन ट्रायल विवाद में बड़ी राहत मिली है। दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि विनेश फोगाट के मामले की जांच और मूल्यांकन के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की जाए। अदालत ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि विनेश 2026 एशियाई खेलों के चयन ट्रायल में हिस्सा ले सकें। WFI से कोर्ट ने पूछा बड़ा सवाल सुनवाई के दौरान कोर्ट ने Wrestling Federation of India (WFI) को फटकार लगाते हुए पूछा कि आखिर विनेश फोगाट को घरेलू प्रतियोगिताओं के लिए “अयोग्य” क्यों घोषित किया गया। अदालत ने कहा कि खिलाड़ियों और संघ के बीच विवाद का असर खेल और खिलाड़ियों के भविष्य पर नहीं पड़ना चाहिए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि किसी भी प्रकार के मतभेद के बावजूद खिलाड़ियों और खेल के हित सर्वोपरि होने चाहिए। पहले ट्रायल में शामिल होने से किया गया था इनकार इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने 30 और 31 मई को होने वाले एशियन गेम्स चयन ट्रायल में विनेश को शामिल होने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। न्यायमूर्ति पुरुषेन्द्र कुमार कौरव की पीठ ने कहा था कि फिलहाल उन्हें अंतरिम राहत नहीं दी जा सकती क्योंकि WFI पहले ही उन्हें घरेलू प्रतियोगिताओं के लिए अयोग्य घोषित कर चुका है। WFI ने लगाए अनुशासनहीनता के आरोप WFI ने 9 मई को जारी नोटिस में विनेश फोगाट को 26 जून तक घरेलू प्रतियोगिताओं से बाहर कर दिया था। महासंघ का आरोप है कि उन्होंने अनुशासनहीनता की और एंटी-डोपिंग नियमों का पालन नहीं किया। संघ का कहना है कि संन्यास के बाद वापसी करने वाले खिलाड़ियों को यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग के नियमों के तहत छह महीने पहले नोटिस देना होता है, लेकिन विनेश ने यह प्रक्रिया पूरी नहीं की। चयन नीति पर उठे सवाल विनेश फोगाट ने WFI की नई चयन नीति को भी अदालत में चुनौती दी है। नई नीति के तहत केवल हालिया राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के पदक विजेता खिलाड़ी ही एशियन गेम्स ट्रायल के लिए पात्र होंगे। विनेश का कहना है कि यह नीति अनुभवी खिलाड़ियों के साथ अन्याय कर सकती है।
Central Bureau of Investigation की जांच में NEET पेपर लीक मामले को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसी के अनुसार, मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG का प्रश्नपत्र पांच राज्यों में बेचा गया था। इनमें सबसे ज्यादा मामले Maharashtra से सामने आए हैं, जबकि Rajasthan दूसरे स्थान पर है। सीबीआई अधिकारियों के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और जब्त किए गए डिजिटल गैजेट्स की जांच के बाद यह जानकारी सामने आई है। एजेंसी का मानना है कि आने वाले दिनों में इस घोटाले का दायरा और बड़ा हो सकता है। महाराष्ट्र बना पेपर लीक का सबसे बड़ा केंद्र जांच में पता चला है कि पेपर लीक नेटवर्क का सबसे बड़ा संचालन महाराष्ट्र से हो रहा था। यहीं से कथित “क्वेश्चन बैंक” राजस्थान समेत अन्य राज्यों के छात्रों तक पहुंचाया गया। सीबीआई को महाराष्ट्र और राजस्थान में पेपर के प्रिंट निकालकर बेचने के सबूत मिले हैं। अधिकारियों का कहना है कि कई लोगों ने प्रश्नपत्र आगे दूसरे छात्रों और अभिभावकों तक भी पहुंचाया, जिससे इसका दायरा काफी बढ़ गया। इसी कारण एजेंसी अभी यह तय नहीं कर पा रही है कि आखिर कितने छात्रों तक पेपर पहुंचा था। पेरेंट्स भी जांच एजेंसी के निशाने पर अब जांच केवल पेपर लीक करने वाले बिचौलियों और मास्टरमाइंड तक सीमित नहीं है। सीबीआई अब उन अभिभावकों की भी पहचान कर रही है, जिन्होंने कथित तौर पर भारी रकम देकर पेपर खरीदा था। एजेंसी उन बैंक खातों की जांच कर रही है, जिनसे आरोपी शिवराज मोटेगांवकर, पी.वी. कुलकर्णी और उनकी सहयोगी मनीषा वाघमारे के खातों में पैसे ट्रांसफर किए गए थे। सूत्रों के अनुसार, एजेंसी ऐसे सभी पेरेंट्स की सूची तैयार कर रही है, जिनके खिलाफ वित्तीय लेन-देन के सबूत मिले हैं। कई टीमें जांच में जुटीं सीबीआई की कई टीमें अलग-अलग स्तर पर जांच में लगी हुई हैं। दो टीमें उन संदिग्ध किरदारों के खिलाफ सबूत जुटा रही हैं, जिनकी भूमिका National Testing Agency (NTA) के बाहर मानी जा रही है। वहीं, तीन अन्य टीमें पेपर खरीदने वाले छात्रों और उनके परिजनों तक पहुंचने की तैयारी कर रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, 20 मई की रात महाराष्ट्र से कार्रवाई की शुरुआत भी हो चुकी है और जल्द ही दूसरे राज्यों में भी छापेमारी हो सकती है। अब तक 11 आरोपी गिरफ्तार जांच एजेंसी अब तक कुल 11 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें सबसे ज्यादा सात आरोपी महाराष्ट्र से हैं। सीबीआई का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है और डिजिटल डेटा, बैंक ट्रांजैक्शन व कॉल रिकॉर्ड्स की भी जांच की जा रही है। 3 मई को हुई थी परीक्षा, 12 मई को रद्द NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को देश के 551 शहरों और विदेश के 14 केंद्रों पर आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में करीब 23 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया था। NTA के अनुसार, 7 मई की शाम परीक्षा में गड़बड़ी की शिकायतें मिलने लगी थीं। इसके बाद मामला केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा गया। जांच में शुरुआती स्तर पर गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई और री-एग्जाम कराने का फैसला लिया गया। जांच का दायरा बढ़ने की संभावना सीबीआई अधिकारियों का कहना है कि यह मामला शुरुआती अनुमान से कहीं ज्यादा बड़ा हो सकता है। एजेंसी को शक है कि पेपर लीक नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था और इसमें शिक्षा माफिया, बिचौलियों और प्रभावशाली लोगों की भूमिका हो सकती है। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।
भारत के खिलाफ बड़े आतंकी हमलों में शामिल एक और आतंकवादी के मारे जाने की खबर सामने आई है। पुलवामा आतंकी हमले की साजिश रचने वाले आतंकवादी Burhan Hamza की पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में गोली मारकर हत्या कर दी गई। सूत्रों के मुताबिक, बुरहान हमजा को मुजफ्फराबाद में अज्ञात हमलावरों ने निशाना बनाया। वह पाकिस्तान आधारित आतंकी नेटवर्क से जुड़ा हुआ था और लंबे समय से भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर था। पुलवामा हमले की साजिश में थी अहम भूमिका बुरहान हमजा का नाम 14 फरवरी 2019 को हुए Pulwama attack की साजिश से जुड़ा था। इस आतंकी हमले में सीआरपीएफ (CRPF) के 40 जवान शहीद हो गए थे। यह हमला जम्मू-कश्मीर में भारतीय सुरक्षा बलों पर हुए सबसे घातक हमलों में से एक माना जाता है। जांच एजेंसियों के अनुसार, बुरहान पाकिस्तान में बैठकर आतंकियों की भर्ती, प्रशिक्षण और हमले की योजना तैयार करने में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। 2022 में भारत सरकार ने घोषित किया था आतंकवादी केंद्र की Narendra Modi सरकार ने साल 2022 में बुरहान हमजा को आधिकारिक रूप से आतंकवादी घोषित किया था। गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में उसका असली नाम अरजुमंद गुलजार डार बताया गया था। अधिसूचना के मुताबिक, वह पुलवामा जिले के खरबतपोरा, रत्नीपोरा का निवासी था और आतंकी संगठन Al-Badr से जुड़ा हुआ था। अल-बदर को UAPA के तहत प्रतिबंधित आतंकी संगठन घोषित किया गया है। पढ़ाई के बहाने गया पाकिस्तान, बना आतंकी कमांडर जानकारी के अनुसार, बुरहान हमजा साल 2017 में उच्च शिक्षा हासिल करने के बहाने पाकिस्तान गया था। वहां पहुंचने के बाद वह अल-बदर आतंकी संगठन में शामिल हो गया और धीरे-धीरे संगठन का सक्रिय कमांडर बन गया। सुरक्षा एजेंसियों का मानना था कि वह पाकिस्तान में रहकर भारत विरोधी आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की रणनीति तैयार करता था। कैसे हुआ था पुलवामा हमला? 14 फरवरी 2019 को जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) पर सीआरपीएफ जवानों का बड़ा काफिला गुजर रहा था। इस काफिले में 78 बसें और कई अन्य वाहन शामिल थे। दोपहर के समय जब काफिला पुलवामा पहुंचा, तभी एक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से भरी कार को सीआरपीएफ की बस से टकरा दिया। टक्कर के तुरंत बाद जोरदार विस्फोट हुआ, जिसमें बस के परखच्चे उड़ गए। इस भयावह हमले में 40 जवान मौके पर ही शहीद हो गए थे। हमले के बाद पूरे देश में आक्रोश फैल गया था। भारत ने बालाकोट एयरस्ट्राइक से दिया था जवाब पुलवामा हमले के जवाब में भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट में एयरस्ट्राइक की थी। भारतीय वायुसेना ने आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाते हुए बड़ी कार्रवाई की थी, जिसे भारत की आतंकवाद के खिलाफ सख्त नीति के तौर पर देखा गया।