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पेपर लीक विवाद पर अन्ना हजारे का पीएम मोदी को पत्र, धर्मेंद्र प्रधान को हटाने की मांग

anjali kumari जुलाई 23, 2026 0
Paper Leak Controversy
Paper Leak Controversy

अहिल्यानगर, एजेंसियां। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने कहा कि छात्रों के लगातार विरोध प्रदर्शन, पेपर लीक के आरोपों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों के बीच जवाबदेही तय करना आवश्यक है। हजारे का कहना है कि मंत्री का इस्तीफा सरकार की कमजोरी नहीं, बल्कि सुशासन और जवाबदेही का संदेश होगा।

 

छात्रों की नाराजगी को गंभीरता से लेने की अपील

 

अपने पत्र में अन्ना हजारे ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन और हालिया हिंसा व पुलिस कार्रवाई पर चिंता जताई। उन्होंने लिखा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हिंसा और अत्यधिक बल प्रयोग किसी के हित में नहीं है। उनके अनुसार, देशभर के लाखों युवा पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और बेरोजगारी जैसी समस्याओं से परेशान हैं, इसलिए उनकी नाराजगी को केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा मानकर नहीं देखा जाना चाहिए।

 

पेपर लीक और जवाबदेही पर उठाए सवाल

 

हजारे ने अपने पत्र में नीट परीक्षा से जुड़े विवादों का उल्लेख करते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली में बार-बार सामने आ रही अनियमितताएं गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक विफलताओं की जिम्मेदारी तय करने के बजाय उसका दोष अधीनस्थ अधिकारियों पर डाल दिया जाता है, जबकि सफलता का श्रेय सरकार लेती है। उन्होंने कहा कि जवाबदेही तय करने के लिए शिक्षा मंत्री का इस्तीफा उचित कदम होगा।

 

'सरकार की ताकत नहीं घटेगी, व्यवस्था मजबूत होगी'

 

अन्ना हजारे ने कहा कि पिछले कई दिनों से छात्र और अभिभावक शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे हैं और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनके अनुसार, जवाबदेही के आधार पर मंत्री का इस्तीफा लेने से सरकार की शक्ति कम नहीं होगी, बल्कि अन्य मंत्रियों को भी अपने विभागों के बेहतर संचालन का संदेश मिलेगा और शासन व्यवस्था में सुधार आएगा।

 

संवाद को बताया लोकतंत्र का सबसे बेहतर रास्ता

 

हजारे ने पत्र में यह भी कहा कि सरकार को प्रदर्शनकारियों से बातचीत करनी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से जारी विरोध प्रदर्शन और भूख हड़ताल के बावजूद सरकार की ओर से कोई वरिष्ठ प्रतिनिधि बातचीत के लिए आगे नहीं आया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद हमेशा टकराव से बेहतर विकल्प होता है और नागरिकों की आवाज को सम्मानपूर्वक सुनना ही लोकतांत्रिक मूल्यों की असली परीक्षा है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Police use tear gas as clashes erupt between protesters and security personnel near Jantar Mantar and Parliament Street in New Delhi.
जंतर-मंतर पर बवाल: पथराव, आंसू गैस और इंटरनेट बंद, संसद मार्ग पर देर रात तक हंगामा

राजधानी दिल्ली में CJP के विरोध प्रदर्शन के दौरान 22 जुलाई की रात संसद मार्ग और जंतर-मंतर के आसपास का इलाका हिंसा की चपेट में आ गया। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प, पथराव और आंसू गैस के गोले दागे जाने से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हालात को काबू में करने के लिए भारी पुलिस बल और अर्धसैनिक जवानों की तैनाती करनी पड़ी। घटना में दो एसीपी समेत पांच पुलिसकर्मी घायल हुए। प्रमुख बातें जंतर-मंतर और संसद मार्ग पर प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़की। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच पथराव और झड़प। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। दो एसीपी सहित पांच पुलिसकर्मी घायल। मध्य दिल्ली के कई इलाकों में इंटरनेट सेवा अस्थायी रूप से बंद। संसद मार्ग और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई। संसद मार्ग पर अचानक बिगड़े हालात मंगलवार रात जंतर-मंतर से सटे संसद मार्ग पर प्रदर्शन के दौरान अचानक स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पार्क होटल के पास मौजूद प्रदर्शनकारियों का एक समूह उग्र हो गया और पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। देखते ही देखते कनॉट प्लेस और संसद मार्ग के आसपास अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने का प्रयास किया, लेकिन कुछ देर तक दोनों पक्षों के बीच तनाव बना रहा। CJP वॉलंटियर्स ने संभाला मोर्चा स्थिति को शांत कराने के लिए पुलिस ने CJP के स्वयंसेवकों की मदद ली। लाउडस्पीकर से लैस एक पुलिस बस पर वॉलंटियर को बैठाकर प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील कराई गई। वॉलंटियर्स ने कहा कि हिंसा से आंदोलन की छवि खराब होगी और प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बनाए रखना जरूरी है। पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले भीड़ के लगातार उग्र होने के बाद पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने कार्रवाई शुरू की। प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाने के लिए आंसू गैस के गोले दागे गए और हल्का बल प्रयोग भी किया गया। इस दौरान दो एसीपी, एक इंस्पेक्टर, एक हेड कॉन्स्टेबल और एक कॉन्स्टेबल घायल हो गए। सभी घायल पुलिसकर्मियों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। सड़क पर बैठे प्रदर्शनकारी, सुरक्षा बढ़ी पुलिस कार्रवाई के बाद कई प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए और नारेबाजी करने लगे। हालात को देखते हुए जंतर-मंतर से संसद मार्ग तक जाने वाले सभी रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी गई। दंगा-रोधी वाहन और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती कर पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया। इंटरनेट सेवा अस्थायी रूप से बंद हिंसा और अफवाहों के प्रसार को रोकने के लिए प्रशासन ने मध्य दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दीं। कई लोगों के मोबाइल फोन पर इंटरनेट सेवा बंद होने के संदेश आने लगे। सुरक्षा एजेंसियां पूरी रात हालात पर नजर बनाए रहीं। पुलिस कर रही मामले की जांच पुलिस ने घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर उपद्रवियों की पहचान शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, इलाके में सुरक्षा व्यवस्था अभी भी कड़ी रखी गई है।  

kalpana जुलाई 23, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi announces fast-track courts and strict action against those involved in paper leak cases.

PM मोदी का बड़ा ऐलान: पेपर लीक के दोषियों पर सख्ती, फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा

जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

जंतर-मंतर प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार, याचिका खारिज

'मोदी है तो मुमकिन है' गाने और दबाव पर बयान देते अभिनेता राजकुमार राव

'मोदी है तो मुमकिन है' गाने को लेकर राजकुमार राव का बयान, बोले- "आप नहीं जानते कितना दबाव होता है"

CJP leaders respond to PM Modi's NEET announcement, demanding Education Minister Dharmendra Pradhan's resignation.
CJP का PM मोदी को जवाब: "फास्ट-ट्रैक कोर्ट नहीं, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा चाहिए"

NEET पेपर लीक मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सरकार के प्रस्ताव को अपर्याप्त बताते हुए अपनी मांगों पर कायम रहने का ऐलान किया है। CJP ने कहा कि उनकी प्राथमिक मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। साथ ही प्रधानमंत्री से छात्रों से सार्वजनिक माफी मांगने और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार करने की भी मांग की गई है। प्रमुख बातें PM मोदी ने पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने का ऐलान किया। CJP ने कहा- "फास्ट-ट्रैक कोर्ट नहीं, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा चाहिए।" संगठन ने प्रधानमंत्री से छात्रों से सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की। जंतर-मंतर पर CJP का आंदोलन लगातार जारी। सरकार और CJP दोनों ने बातचीत की इच्छा जताई। PM के ऐलान पर CJP की प्रतिक्रिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया पोस्ट के तुरंत बाद CJP ने अपने आधिकारिक X हैंडल पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केवल फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने से छात्रों की मांगें पूरी नहीं होंगी। संगठन ने कहा कि सरकार को सबसे पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेना चाहिए। CJP ने अपने पोस्ट में लिखा कि सरकार को भ्रष्ट परीक्षा व्यवस्था में सुधार करना चाहिए और छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। "युवाओं की आवाज सुनी जाए" CJP ने अपने पोस्ट में कहा, "सबसे पहले युवाओं की मांग स्वीकार कीजिए। हमें धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा चाहिए। भ्रष्ट सिस्टम को सुधारा जाए और सभी छात्रों से माफी मांगी जाए। ये आपके देश के युवा हैं, जो अपने भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं।" संगठन ने प्रधानमंत्री के पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। जंतर-मंतर पर जारी है प्रदर्शन NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं के विरोध में CJP का धरना जंतर-मंतर पर लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार, जवाबदेही तय करने और परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने की मांग कर रहे हैं। बातचीत के लिए तैयार दोनों पक्ष छात्र आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने बातचीत की इच्छा जताई है। वहीं CJP नेताओं अभिजीत दीपके और सौरभ दास ने भी कहा है कि वे वार्ता के लिए तैयार हैं। हालांकि, उनका कहना है कि सरकार का प्रतिनिधि जंतर-मंतर या किसी तटस्थ स्थान पर आकर बातचीत करे। सरकार की ओर से क्या कहा गया? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि पेपर लीक के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी सोशल मीडिया पर छात्रों के हितों की रक्षा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात दोहराई।  

kalpana जुलाई 23, 2026 0
Opposition leaders protest in Parliament over the NEET controversy, demanding Education Minister Dharmendra Pradhan's resignation.

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सोनम वांगचुक ने अनशन खत्म करने के लिए रखी शर्त, छात्र प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई न करने की मांग

CJP Protest: सोनम वांगचुक ने अनशन तोड़ने के लिए सरकार के सामने रखी शर्त, छात्र प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई नहीं करने की मांग

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नसीरुद्दीन शाह का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बयान और शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिक्रिया
नसीरुद्दीन शाह का प्रधानमंत्री मोदी पर बयान, बोले- "जो खुद अनपढ़ हैं वो पढ़ाई की अहमियत क्या जाने"; बयान पर सियासी बहस तेज

नई दिल्ली, एजेंसियां। दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह अपने एक बयान को लेकर चर्चा में आ गए हैं। उन्होंने शिक्षा और राजनीति को लेकर टिप्पणी करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और कहा कि जो व्यक्ति खुद शिक्षा के महत्व को नहीं समझता, वह शिक्षा व्यवस्था को लेकर सही फैसले कैसे ले सकता है। नसीरुद्दीन शाह ने यह भी कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी को "गंभीरता से नहीं लेते"। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस शुरू हो गई है।   शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के मुद्दे पर रखी राय   नसीरुद्दीन शाह ने छात्रों से जुड़े मुद्दों और शिक्षा व्यवस्था पर अपनी बात रखते हुए कहा कि देश में शिक्षा को सबसे ज्यादा प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी देश का भविष्य उसकी शिक्षा व्यवस्था पर निर्भर करता है और छात्रों की समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।   प्रधानमंत्री मोदी पर की टिप्पणी   अभिनेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शिक्षा और नीतियों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा की अहमियत वही व्यक्ति बेहतर समझ सकता है जिसने खुद शिक्षा को महत्व दिया हो। उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं।   बयान पर शुरू हुई राजनीतिक बहस   नसीरुद्दीन शाह के बयान के बाद भाजपा समर्थकों और विपक्षी नेताओं के बीच प्रतिक्रिया देखने को मिली। भाजपा समर्थकों ने इसे राजनीतिक टिप्पणी बताते हुए आलोचना की, जबकि कुछ विपक्षी समर्थकों ने इसे शिक्षा और लोकतांत्रिक बहस का हिस्सा बताया।   पहले भी राजनीतिक मुद्दों पर बोल चुके हैं नसीरुद्दीन शाह   नसीरुद्दीन शाह पहले भी सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय खुलकर रखते रहे हैं। वह कई बार सरकार की नीतियों, सामाजिक माहौल और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर बयान दे चुके हैं। उनके बयानों पर अक्सर चर्चा और विवाद दोनों देखने को मिलते हैं।   शिक्षा और राजनीति पर बहस जारी   नसीरुद्दीन शाह के ताजा बयान ने एक बार फिर शिक्षा, नेतृत्व और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर उनके समर्थक इसे एक कलाकार की सामाजिक चिंता बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आलोचक इसे राजनीतिक आरोप के रूप में देख रहे हैं।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 23, 2026 0
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