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Mahua Backs Mamata, Targets TMC Rebels

बंगाल के सियासी संकट के बीच महुआ मोइत्रा का पलटवार, बागी नेताओं को बताया ‘अवसरवादी तत्व’

Deepshikha जून 11, 2026 0
Mahua Moitra addresses media while backing Mamata Banerjee amid TMC internal political turmoil
Mahua Moitra Backs Mamata Banerjee

 

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी उथल-पुथल के बीच पार्टी सांसद महुआ मोइत्रा ने बागी नेताओं पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने पार्टी छोड़कर जाने वाले नेताओं को संगठन के लिए नुकसान नहीं, बल्कि एक तरह की "सफाई प्रक्रिया" करार दिया। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख Mamata Banerjee के प्रति अपनी निष्ठा दोहराते हुए कहा कि वह अंतिम समय तक उनके साथ खड़ी रहेंगी।

बागी नेताओं पर साधा निशाना

कृष्णानगर से लोकसभा सांसद Mahua Moitra ने कहा कि जो नेता कठिन समय में पार्टी का साथ छोड़ रहे हैं, वे कभी भी संगठन और उसकी विचारधारा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध नहीं थे।

उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के जाने से पार्टी कमजोर नहीं होती, बल्कि संगठन और अधिक मजबूत तथा स्पष्ट दिशा में आगे बढ़ता है। महुआ ने दावा किया कि टीएमसी से अवसरवादी तत्वों के बाहर जाने को संकट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

ममता बनर्जी के प्रति जताई अटूट निष्ठा

महुआ मोइत्रा ने कहा कि राजनीतिक जीवन के कठिन दौर में पार्टी नेतृत्व ने हमेशा उन पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि इसी विश्वास के कारण वह टीएमसी नेतृत्व के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका राजनीतिक भविष्य तृणमूल कांग्रेस के साथ जुड़ा हुआ है और वह किसी अन्य राजनीतिक दल का हिस्सा बनने की कल्पना भी नहीं करतीं।

अभिषेक बनर्जी के समर्थन में आईं सामने

टीएमसी सांसद ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव Abhishek Banerjee का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दबाव या जांच एजेंसियों की कार्रवाई से पार्टी नेतृत्व को कमजोर नहीं किया जा सकता।

महुआ ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भूमिका मजबूती से निभाती रहेगी और नेतृत्व किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।

कांग्रेस में विलय की चर्चाओं को बताया निराधार

हाल के दिनों में ममता बनर्जी और कांग्रेस नेतृत्व के बीच हुई बैठकों के बाद टीएमसी और कांग्रेस के संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर कई चर्चाएं सामने आई थीं। महुआ मोइत्रा के बयान को इन चर्चाओं के जवाब के रूप में देखा जा रहा है।

उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बरकरार रहेगी और तृणमूल कांग्रेस अपने संगठनात्मक ढांचे और क्षेत्रीय आधार के साथ आगे बढ़ती रहेगी।

टीएमसी में जारी है राजनीतिक खींचतान

पश्चिम बंगाल में टीएमसी के भीतर बढ़ती गुटबाजी और नेताओं के अलग-अलग रुख ने राज्य की राजनीति को नई दिशा दे दी है। एक ओर बागी गुट लगातार अपने समर्थन का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर महुआ मोइत्रा जैसे वरिष्ठ नेता खुलकर ममता बनर्जी के नेतृत्व के समर्थन में सामने आ रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में टीएमसी के भीतर शक्ति संतुलन और नेतृत्व को लेकर संघर्ष और तेज हो सकता है, जिसका असर पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी देखने को मिलेगा।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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लोकसभा में असदुद्दीन ओवैसी का पीएम नरेंद्र मोदी पर तंज
'मित्रों से हेलो फ्रेंड्स तक...', लोकसभा में ओवैसी का पीएम मोदी पर तंज, भाषण को लेकर छिड़ी चर्चा

संसद में ओवैसी ने साधा निशाना   नई दिल्ली, एजेंसियां। लोकसभा में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों और संबोधन के अंदाज को लेकर तंज कसा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री पहले अपने भाषणों की शुरुआत "मित्रों" कहकर करते थे, लेकिन अब उनका अंदाज बदलकर "हेलो फ्रेंड्स" तक पहुंच गया है। ओवैसी की इस टिप्पणी के बाद सदन में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई।   पीएम मोदी के संबोधन अंदाज पर टिप्पणी   ओवैसी ने लोकसभा में बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी के पुराने और नए भाषणों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि समय के साथ प्रधानमंत्री के संबोधन का तरीका बदला है और इसी बदलाव को लेकर उन्होंने व्यंग्य किया। उनके बयान पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों की प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिलीं।   संसद में जारी है राजनीतिक बहस   मानसून सत्र के दौरान विपक्ष कई मुद्दों को लेकर सरकार पर हमलावर है। ओवैसी लगातार संसद में सरकार की नीतियों और फैसलों पर सवाल उठाते रहे हैं। वहीं, भाजपा नेताओं की ओर से भी विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया जा रहा है।   सोशल मीडिया पर बयान की चर्चा   ओवैसी के इस बयान का वीडियो और क्लिप सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया है। कुछ यूजर्स ने इसे राजनीतिक व्यंग्य बताया, जबकि कुछ ने इसे विपक्ष की रणनीति का हिस्सा कहा। संसद में नेताओं के बीच तीखी बहस और बयानबाजी लगातार जारी है।  

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बिहार सरकार ने NEET परीक्षा को लेकर हुए छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लेने और गिरफ्तार छात्रों को रिहा करने का फैसला लिया है। सरकार के इस फैसले के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे जनता और विपक्ष के दबाव का परिणाम बताया। 'सरकार को अल्टीमेटम दिया था' तेजस्वी यादव ने कहा कि विपक्ष ने सरकार को सोमवार तक का समय दिया था और चेतावनी दी थी कि यदि छात्रों पर दर्ज मामले वापस नहीं लिए गए तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार आखिरकार जनता के दबाव के आगे झुक गई और अपना फैसला बदलना पड़ा। सीवान फायरिंग मामले में न्यायिक जांच की मांग तेजस्वी यादव ने सीवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित AK-47 से फायरिंग के मामले में न्यायिक जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि केवल एक कांस्टेबल का निलंबन पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिले के एसपी और अन्य जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि गोली हवा में नहीं चलाई गई, बल्कि छात्रों को निशाना बनाया गया। साथ ही सवाल किया कि फायरिंग का आदेश किसने दिया और सरकार को इसकी जवाबदेही तय करनी चाहिए। सरकार पर लगाए गंभीर आरोप आरजेडी नेता ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मौजूदा शासन बिहार को "पुलिसिया गुंडाराज" की ओर ले जा रहा है। उन्होंने सरकार के 100 दिन पूरे होने पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस अवधि में राज्य को कोई बड़ी उपलब्धि नहीं मिली, जबकि अपराध और भ्रष्टाचार लगातार बढ़ रहे हैं। सीएम की पत्नी के निरीक्षण पर उठाए सवाल तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री की पत्नी द्वारा स्कूल और कॉलेजों के निरीक्षण को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि किस प्रोटोकॉल के तहत उन्हें सरकारी निरीक्षण करने की अनुमति दी गई और उनके साथ बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी क्यों तैनात किए गए। 'जनता नाराज हुई तो सरकार जाएगी' प्रेस वार्ता के दौरान तेजस्वी यादव ने कहा कि यदि जनता का असंतोष इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर केंद्र और बिहार, दोनों की सरकारों पर पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि जनता सरकार के कामकाज से संतुष्ट नहीं है और आने वाले समय में इसका राजनीतिक असर देखने को मिल सकता है।  

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UP Politics: कांग्रेस से गठबंधन पर बदले अखिलेश यादव के सुर? 2027 चुनाव से पहले दिया बड़ा बयान

UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर दिया गया बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। गठबंधन पर सीधे जवाब देने से बचते हुए अखिलेश ने कहा कि "अभी चुनाव दूर है, अभी लोकसभा में हम सब लोग एक साथ हैं।" उनके इस बयान के बाद 2027 के विधानसभा चुनाव में INDIA गठबंधन की रणनीति को लेकर नए कयास लगाए जा रहे हैं। गठबंधन पर क्या बोले अखिलेश यादव? कांग्रेस के साथ भविष्य के गठबंधन को लेकर पूछे गए सवाल पर अखिलेश यादव ने कहा कि फिलहाल विधानसभा चुनाव में काफी समय बाकी है और मौजूदा समय में विपक्षी दल संसद के भीतर एकजुट होकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी किसी तरह के टकराव की जरूरत नहीं है और सभी का ध्यान सामाजिक न्याय तथा जनता के मुद्दों पर होना चाहिए। PDA रणनीति पर फिर जताया भरोसा अखिलेश यादव ने एक बार फिर अपनी PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) रणनीति को दोहराते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी इसी रास्ते पर आगे बढ़ती रहेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी का लक्ष्य सामाजिक न्याय स्थापित करना, संविधान के तहत सभी वर्गों को अधिकार और सम्मान दिलाना तथा कमजोर तबकों की आवाज को मजबूत करना है। सपा प्रमुख ने कहा कि उनकी राजनीतिक प्राथमिकता गठबंधन की अटकलों से अधिक जनता के मुद्दों और सामाजिक न्याय के एजेंडे पर केंद्रित है। BJP को हराने का किया दावा अखिलेश यादव ने कहा कि जिस विपक्षी गठबंधन का उनकी पार्टी हिस्सा है, उसने हाल के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को कई महत्वपूर्ण सीटों पर चुनौती दी और जीत भी हासिल की। उन्होंने कहा कि विपक्ष की एकजुटता ने सकारात्मक परिणाम दिए हैं और पार्टी आगे भी जनता के हितों के मुद्दे उठाती रहेगी। बयान के कई राजनीतिक मायने हालांकि अखिलेश यादव ने कांग्रेस से दूरी बनाने जैसी कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की, लेकिन गठबंधन पर सीधा भरोसा जताने से भी परहेज किया। ऐसे में उनके बयान को राजनीतिक विश्लेषक कई नजरियों से देख रहे हैं। एक ओर उन्होंने मौजूदा विपक्षी एकजुटता की बात दोहराई, वहीं दूसरी ओर भविष्य के विधानसभा चुनाव को लेकर कोई स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं जताई। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सीट बंटवारे, राजनीतिक समीकरण और विपक्षी दलों की रणनीति पर आने वाले समय में तस्वीर और साफ होने की संभावना है। फिलहाल सपा अपनी PDA रणनीति और सामाजिक न्याय के एजेंडे को चुनावी राजनीति का केंद्र बनाए रखने के संकेत दे रही है।  

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Prime Minister Narendra Modi announces fast-track courts and strict action against those involved in paper leak cases.
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PM मोदी का बड़ा ऐलान: पेपर लीक के दोषियों पर सख्ती, फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा

kalpana जुलाई 23, 2026 0

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