Shubman Gill Record: भारतीय वनडे टीम के कप्तान शुभमन गिल शानदार फॉर्म में हैं। अफगानिस्तान के खिलाफ दूसरे वनडे में उन्होंने 154 रनों की यादगार पारी खेलकर न सिर्फ टीम इंडिया को बड़ी जीत दिलाई, बल्कि एक खास उपलब्धि हासिल करते हुए अपने आदर्श विराट कोहली की बराबरी भी कर ली।
अफगानिस्तान के खिलाफ दूसरे वनडे मुकाबले में शुभमन गिल ने शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। उन्होंने सिर्फ 110 गेंदों में 154 रन बनाए और भारतीय पारी की मजबूत नींव रखी। उनकी इस शानदार पारी के लिए उन्हें 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुना गया।
इससे पहले सीरीज के पहले मुकाबले में भी गिल ने नाबाद 84 रन बनाए थे। लगातार दूसरे मैच में शानदार प्रदर्शन के बाद वह एक बार फिर चर्चा में हैं।
शुभमन गिल कई बार सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं कि विराट कोहली उनके आदर्श हैं। अब उन्होंने अपने आइडल के एक खास रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है।
साल 2022 से अब तक शुभमन गिल 22 बार 'प्लेयर ऑफ द मैच' का पुरस्कार जीत चुके हैं। इस मामले में उन्होंने विराट कोहली की बराबरी कर ली है, जिन्होंने इसी अवधि में 22 बार यह सम्मान हासिल किया था।
154 रन की इस पारी के साथ शुभमन गिल वनडे क्रिकेट में 150 या उससे अधिक का स्कोर दो बार बनाने वाले भारतीय बल्लेबाजों की सूची में शामिल हो गए हैं।
इस सूची में शामिल भारतीय बल्लेबाज:
गिल के नाम वनडे क्रिकेट में एक दोहरा शतक भी दर्ज है और वह लगातार बड़े स्कोर बनाने की क्षमता दिखा रहे हैं।
मुकाबले में अफगानिस्तान ने टॉस जीतकर भारत को पहले बल्लेबाजी का न्योता दिया। भारतीय टीम ने निर्धारित ओवरों में 402 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया।
शुभमन गिल के अलावा ईशान किशन ने भी शानदार बल्लेबाजी करते हुए 79 गेंदों में 125 रन बनाए। हालांकि आखिरी चरण में भारत ने तेजी से छह विकेट गंवाए, जिससे टीम 450 रन के संभावित स्कोर तक नहीं पहुंच सकी।
403 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी अफगानिस्तान की टीम 44.3 ओवर में 232 रन पर ऑलआउट हो गई।
भारतीय गेंदबाजों में:
भारत ने इस मुकाबले को बड़े अंतर से जीतकर सीरीज में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली।
लगातार शानदार प्रदर्शन के दम पर शुभमन गिल अब भारतीय क्रिकेट के भविष्य के सबसे बड़े सितारों में गिने जा रहे हैं और उनकी तुलना लगातार विराट कोहली जैसे दिग्गज खिलाड़ियों से की जा रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
Fastest ODI Century by Indian Captains: भारतीय क्रिकेट टीम के नए कप्तान शुभमन गिल ने अफगानिस्तान के खिलाफ शानदार शतक लगाकर एक खास उपलब्धि अपने नाम कर ली है। लखनऊ में खेले गए दूसरे वनडे में गिल ने महज 77 गेंदों में शतक पूरा किया और भारतीय कप्तानों की सबसे तेज वनडे सेंचुरी लगाने वाले खिलाड़ियों की सूची में अपनी जगह बना ली। गिल ने मुकाबले में 110 गेंदों पर 154 रनों की शानदार पारी खेली, जिसमें 22 चौके और 2 छक्के शामिल रहे। उनकी इस विस्फोटक बल्लेबाजी ने उन्हें भारतीय कप्तानों की सबसे तेज शतकीय पारियों की सूची में चौथे स्थान पर पहुंचा दिया। आइए जानते हैं भारत के लिए वनडे क्रिकेट में सबसे तेज शतक लगाने वाले पांच कप्तानों के बारे में। 1. रोहित शर्मा – 63 गेंदें (अफगानिस्तान, 2023) भारतीय कप्तान के रूप में सबसे तेज वनडे शतक का रिकॉर्ड रोहित शर्मा के नाम है। उन्होंने 2023 वनडे विश्व कप में दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में अफगानिस्तान के खिलाफ सिर्फ 63 गेंदों में शतक जड़ दिया था। यह पारी आज भी भारतीय कप्तानों की सबसे विस्फोटक पारियों में गिनी जाती है। 2. वीरेंद्र सहवाग – 69 गेंदें (वेस्टइंडीज, 2011) साल 2011 में इंदौर के होल्कर स्टेडियम में वेस्टइंडीज के खिलाफ कप्तानी करते हुए वीरेंद्र सहवाग ने केवल 69 गेंदों में शतक पूरा किया था। इसी मैच में उन्होंने 219 रन की ऐतिहासिक दोहरी शतकीय पारी खेली थी। 3. विराट कोहली – 76 गेंदें (श्रीलंका, 2017) विराट कोहली ने 2017 में कोलंबो में श्रीलंका के खिलाफ लक्ष्य का पीछा करते हुए 76 गेंदों में शतक लगाया था। दबाव में खेली गई उनकी यह कप्तानी पारी भारतीय क्रिकेट की यादगार पारियों में शामिल है। 4. रोहित शर्मा – 76 गेंदें (इंग्लैंड, 2025) इस सूची में रोहित शर्मा का नाम दूसरी बार भी शामिल है। साल 2025 में कटक के बाराबती स्टेडियम में इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने 76 गेंदों में शतक लगाकर अपनी आक्रामक बल्लेबाजी का शानदार नमूना पेश किया था। रोहित इस सूची में दो बार जगह बनाने वाले एकमात्र भारतीय कप्तान हैं। 5. शुभमन गिल – 77 गेंदें (अफगानिस्तान, 2026) भारतीय क्रिकेट के नए कप्तान शुभमन गिल ने जून 2026 में लखनऊ के इकाना स्टेडियम में अफगानिस्तान के खिलाफ सिर्फ 77 गेंदों में शतक पूरा किया। उन्होंने मैच में 154 रन की शानदार पारी खेलकर भारत को बड़ी जीत दिलाई और इस प्रतिष्ठित सूची में अपना नाम दर्ज करा लिया। भारतीय कप्तानों द्वारा सबसे तेज वनडे शतक खिलाड़ी विरोधी टीम वर्ष गेंदें रोहित शर्मा अफगानिस्तान 2023 63 वीरेंद्र सहवाग वेस्टइंडीज 2011 69 विराट कोहली श्रीलंका 2017 76 रोहित शर्मा इंग्लैंड 2025 76 शुभमन गिल अफगानिस्तान 2026 77 शुभमन गिल जिस तरह से लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं, उसे देखते हुए माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में वह कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम कर सकते हैं।
लीड्स, एजेंसियां। भारत ने विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप में नीदरलैंड को 95 रन से हरा दिया। लीड्स में स्मृति मंधाना ने 74 रन की पारी में कई रिकॉर्ड अपने नाम किए। वे मेंस और विमेंस टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेट में 600 चौके पूरे करने वाली पहली बल्लेबाज बनीं। बुधवार को मंधाना ने मिताली राज और हरमनप्रीत कौर को पीछे छोड़ दिया। उन्होंने टूर्नामेंट में भारत के लिए सबसे ज्यादा अर्धशतक लगाने का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। दूसरी ओर दीप्ति शर्मा ने इंटरनेशनल क्रिकेट में झूलन गोस्वामी के सबसे ज्यादा विकेट के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली।
भारत में आईपीएल के साथ-साथ अब राज्य स्तरीय टी20 लीग्स भी दर्शकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। इन दिनों छत्तीसगढ़ क्रिकेट प्रीमियर लीग (CCPL 2026) चर्चा में है, लेकिन इस बार सुर्खियां किसी तूफानी बल्लेबाजी या शानदार गेंदबाजी की वजह से नहीं, बल्कि मैदान पर हुई एक अनोखी और मजेदार घटना के कारण बटोर रही हैं। बिलासपुर बुल्स और रायगढ़ लायंस के बीच खेले गए मुकाबले में ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसे देखकर खिलाड़ी भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए। इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। आखिरी ओवर में हुआ हाई-वोल्टेज ड्रामा रायपुर में खेले गए इस मुकाबले में रायगढ़ लायंस ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 160 रन बनाए। लक्ष्य का पीछा करने उतरी बिलासपुर बुल्स की टीम मजबूत स्थिति में थी और जीत के बेहद करीब पहुंच चुकी थी। अभिजीत ताह के जल्दी आउट होने के बाद कप्तान आयुष पांडे और पवन परनाटे ने पारी को संभाला। इसके बाद विकल्प तिवारी और प्रतीक यादव की शानदार साझेदारी ने टीम को जीत की दहलीज तक पहुंचा दिया। जब बिलासपुर को जीत के लिए सिर्फ 2 रन चाहिए थे और 23 गेंदें बाकी थीं, तब प्रतीक यादव ने शुभमन अग्रवाल की गेंद पर बड़ा शॉट खेलने की कोशिश की। बाउंड्री लाइन पर शानदार फील्डिंग गेंद लगभग बाउंड्री के पार जाने वाली थी, लेकिन रायगढ़ लायंस के एक फील्डर ने बेहतरीन डाइव लगाकर संभावित छक्के को रोक दिया। मैदान पर मौजूद सभी खिलाड़ी और दर्शक इस शानदार प्रयास की सराहना कर रहे थे। हालांकि, असली ड्रामा इसके बाद शुरू हुआ। बिना मैच जीते ही जश्न मनाने लगे खिलाड़ी बिलासपुर बुल्स के डगआउट में बैठे खिलाड़ियों को लगा कि गेंद बाउंड्री पार चली गई है और टीम जीत चुकी है। इसी गलतफहमी में कई खिलाड़ी मैदान में दौड़ पड़े और खुशी में स्टंप्स भी उखाड़ दिए। लेकिन वास्तव में बल्लेबाज सिर्फ एक रन ही पूरा कर पाए थे और टीम को जीत के लिए अब भी एक रन की जरूरत थी। रायगढ़ लायंस के खिलाड़ियों ने इस पर आपत्ति जताई, जिसके बाद अंपायरों ने रिप्ले की मदद से स्थिति स्पष्ट की। वीडियो देखने के बाद यह पुष्टि हुई कि गेंद बाउंड्री पार नहीं गई थी। इसके बाद बिलासपुर के खिलाड़ियों को वापस मैदान से बाहर भेजा गया और मुकाबला दोबारा शुरू कराया गया। अगली गेंद पर खत्म हुआ मैच कुछ मिनटों की हलचल और हास्यास्पद स्थिति के बाद बिलासपुर बुल्स ने अगली ही गेंद पर मैच अपने नाम कर लिया। विकल्प तिवारी ने शानदार चौका लगाकर टीम को जीत दिलाई। विकल्प तिवारी 39 रन और प्रतीक यादव 30 रन बनाकर नाबाद लौटे। इस जीत के साथ बिलासपुर बुल्स ने प्लेऑफ में शीर्ष स्थान भी हासिल कर लिया। हालांकि, मैच का सबसे चर्चित पल वही रहा जब जीत से पहले ही खिलाड़ी मैदान में घुसकर जश्न मनाने लगे। यही वजह है कि इस अनोखी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।