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RCB Beat MI, Enter IPL Top-3

IPL 2026 Points Table: RCB ने पलटा मुकाबला, MI को घर में हराकर टॉप-3 में बनाई जगह

surbhi अप्रैल 13, 2026 0
RCB players celebrate victory over Mumbai Indians during IPL 2026 match at Mumbai stadium.
RCB Defeats MI in IPL 2026

IPL 2026 के 20वें मुकाबले में Royal Challengers Bengaluru ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मुंबई Indians को 18 रनों से हराकर अंक तालिका में बड़ा उलटफेर कर दिया। इस जीत के साथ आरसीबी ने टॉप-3 में जगह बना ली, जबकि मुंबई इंडियंस आठवें स्थान पर खिसक गई।

RCB की धमाकेदार बल्लेबाजी

पहले बल्लेबाजी करते हुए आरसीबी ने आक्रामक शुरुआत की।
Virat Kohli और फिल सॉल्ट ने पहले विकेट के लिए 120 रनों की साझेदारी कर टीम को मजबूत आधार दिया। कोहली ने 50 रनों की अहम पारी खेली, जबकि सॉल्ट ने 78 रन बनाकर मुंबई के गेंदबाजों पर दबाव बना दिया।

इसके बाद Rajat Patidar ने सिर्फ 20 गेंदों में 53 रन ठोककर मैच पूरी तरह आरसीबी की ओर मोड़ दिया। अंत में टिम डेविड ने 16 गेंदों में नाबाद 34 रन बनाकर टीम का स्कोर 240 तक पहुंचा दिया।

लक्ष्य का पीछा करते हुए लड़खड़ाई MI

241 रनों के बड़े लक्ष्य का पीछा करने उतरी मुंबई इंडियंस की शुरुआत अच्छी रही, लेकिन जल्द ही टीम को बड़ा झटका लगा।
Rohit Sharma 19 रन बनाकर चोटिल हो गए और मैदान छोड़ना पड़ा, जिससे टीम की लय टूट गई।

रयान रिकेल्टन (37) ने कुछ अच्छे शॉट लगाए, जबकि कप्तान Suryakumar Yadav 33 रन बनाकर आउट हो गए। तिलक वर्मा भी प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहे।

गेंदबाजी में RCB का दबदबा

मध्य ओवरों में Suyash Sharma के दो अहम विकेटों ने मैच का रुख बदल दिया।
वहीं Krunal Pandya ने किफायती गेंदबाजी करते हुए 4 ओवर में सिर्फ 26 रन देकर दबाव बनाए रखा।

हालांकि अंत में शेरफेन रदरफोर्ड ने 71* रनों की विस्फोटक पारी खेलकर मैच को रोमांचक बनाया, लेकिन टीम को जीत नहीं दिला सके। मुंबई इंडियंस 20 ओवर में 222/5 तक ही पहुंच सकी।

पॉइंट्स टेबल पर असर

इस जीत के साथ आरसीबी ने न केवल मैच जीता, बल्कि अंक तालिका में अपनी स्थिति भी मजबूत कर ली। वहीं मुंबई इंडियंस के लिए प्लेऑफ की राह अब और चुनौतीपूर्ण हो गई है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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इंग्लिश प्रीमियर लीग के खिताबी मुकाबले में Manchester City ने शानदार प्रदर्शन करते हुए Chelsea को 3-0 से करारी शिकस्त दी। इस जीत के साथ सिटी ने टाइटल रेस को और रोमांचक बना दिया है और लीडर Arsenal पर दबाव बढ़ा दिया है। दूसरे हाफ में सिटी का तूफान पहले हाफ में मुकाबला संतुलित नजर आया, लेकिन दूसरे हाफ में मैनचेस्टर सिटी ने पूरी तरह मैच पर कब्जा कर लिया। निकोल ओ’रेली ने 51वें मिनट में पहला गोल कर टीम को बढ़त दिलाई। इसके बाद रायन चेरकी की शानदार प्लेमेकिंग के दम पर मार्क गुएही ने 57वें मिनट में दूसरा गोल दागा। 68वें मिनट में Jérémy Doku ने तीसरा गोल कर मैच को पूरी तरह एकतरफा बना दिया। टाइटल रेस में बढ़ा रोमांच कोच Pep Guardiola की टीम अब आर्सेनल से सिर्फ 6 अंक पीछे है और उनके पास एक मैच का अतिरिक्त फायदा भी है। ऐसे में दोनों टीमों के बीच होने वाला मुकाबला इस सीजन के खिताब का फैसला कर सकता है। लगातार तीन बड़ी जीत (आर्सेनल और लिवरपूल के खिलाफ कप मुकाबले सहित) ने सिटी की फॉर्म और आत्मविश्वास को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। Chelsea की मुश्किलें बढ़ीं इस हार के साथ चेल्सी की चैंपियंस लीग में जगह बनाने की उम्मीदों को झटका लगा है। टीम पिछले 7 मैचों में सिर्फ एक जीत दर्ज कर पाई है और अब टॉप-5 से 4 अंक पीछे है। Tottenham पर मंडराया रेलिगेशन का खतरा दूसरी ओर, Tottenham Hotspur की स्थिति और खराब हो गई है। सुंदरलैंड के खिलाफ 1-0 की हार के बाद टीम रेलिगेशन जोन के और करीब पहुंच गई है। नॉर्दी मुकिएले के गोल ने स्पर्स को सीजन की 16वीं हार थमा दी। अब टीम सेफ्टी जोन से 2 अंक पीछे है और सिर्फ 6 मैच बाकी हैं। सीजन के अंतिम चरण में बढ़ा रोमांच प्रीमियर लीग अब अपने निर्णायक दौर में पहुंच चुकी है। एक तरफ मैनचेस्टर सिटी की वापसी ने खिताबी जंग को दिलचस्प बना दिया है, तो दूसरी ओर टॉटेनहम के सामने रेलिगेशन से बचने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।  

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WTC में बड़ा बदलाव संभव: 2027 से 12 टीमों का विस्तार, एक-बार के टेस्ट को भी मिल सकता है दर्जा

दुबई: अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। International Cricket Council (ICC) विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के अगले चक्र में अहम सुधारों पर विचार कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2027 से WTC में टीमों की संख्या 9 से बढ़ाकर 12 की जा सकती है, साथ ही वन-ऑफ टेस्ट मैचों को भी प्वाइंट्स सिस्टम में शामिल करने का प्रस्ताव सामने आया है। किन टीमों को मिल सकता है मौका? प्रस्ताव के अनुसार, जिम्बाब्वे, आयरलैंड और अफगानिस्तान को WTC में शामिल किया जा सकता है। इससे टेस्ट क्रिकेट का दायरा बढ़ेगा और नई टीमों को बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। वन-ऑफ टेस्ट को मिलेगा नया महत्व अब तक WTC में केवल दो या उससे अधिक टेस्ट मैचों की सीरीज को ही शामिल किया जाता है। लेकिन नए प्रस्ताव के तहत एक-बार खेले जाने वाले टेस्ट (One-off Test) को भी WTC पॉइंट्स में जोड़ा जा सकता है। इस बदलाव से बड़े क्रिकेटिंग देश जैसे भारत छोटी टीमों के साथ एकल टेस्ट मैच खेलकर उन्हें अधिक मौके दे सकते हैं। क्यों जरूरी है यह बदलाव? क्रिकेट कैलेंडर में लगातार बढ़ते T20 लीग और व्यस्त शेड्यूल के कारण टेस्ट क्रिकेट को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। ऐसे में ICC का यह कदम टेस्ट क्रिकेट को ज्यादा प्रतिस्पर्धी और समावेशी बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। फैसला अभी बाकी हालांकि, इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला जय शाह की अध्यक्षता वाले ICC बोर्ड को लेना है। पहले भी दो-स्तरीय टेस्ट सिस्टम (Two-tier structure) का प्रस्ताव खारिज किया जा चुका है, इसलिए इस बार भी सभी पहलुओं पर गहन चर्चा होगी। क्या होगा असर? अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो: टेस्ट क्रिकेट में ज्यादा टीमों की भागीदारी बढ़ेगी छोटे देशों को बड़े देशों के खिलाफ खेलने का मौका मिलेगा WTC और अधिक रोमांचक और प्रतिस्पर्धी बनेगा

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पाकिस्तान के स्टार बल्लेबाज Babar Azam ने T20 क्रिकेट में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली है। उन्होंने दिग्गज बल्लेबाज Chris Gayle का बड़ा वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ते हुए सबसे तेज 12,000 रन बनाने का कारनामा अपने नाम कर लिया है। सबसे तेज 12,000 रन बनाने वाले बल्लेबाज बने बाबर बाबर आज़म ने यह उपलब्धि महज 338 पारियों में हासिल की, जबकि क्रिस गेल ने इसी मुकाम तक पहुंचने में 343 पारियां ली थीं। इस सूची में Virat Kohli (360 पारियां) और David Warner (368 पारियां) भी शामिल हैं, लेकिन बाबर ने सभी को पीछे छोड़ते हुए नया इतिहास रच दिया। PSL में खेली शानदार पारी यह ऐतिहासिक उपलब्धि बाबर ने Pakistan Super League के एक मुकाबले में हासिल की, जहां उन्होंने पेशावर ज़ल्मी के लिए खेलते हुए 51 गेंदों में 87 रनों की शानदार पारी खेली। इस पारी में 10 चौके और 2 छक्के शामिल थे, जिसकी बदौलत टीम ने 246/3 का बड़ा स्कोर खड़ा किया। आलोचनाओं के बीच दिया करारा जवाब हाल के समय में बाबर आज़म की T20 बल्लेबाजी को लेकर सवाल उठ रहे थे, लेकिन इस रिकॉर्ड ने सभी आलोचनाओं का जवाब दे दिया है। उन्होंने साबित कर दिया कि वह छोटे फॉर्मेट में भी लगातार शानदार प्रदर्शन करने की क्षमता रखते हैं। आंकड़ों में बाबर का दबदबा इस पारी के बाद बाबर आज़म के T20 करियर में कुल 12,074 रन हो गए हैं, जो उनके शानदार और निरंतर प्रदर्शन का प्रमाण है।  

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