दुनिया

US Senators Push Stronger India Ties Against China

अमेरिकी सांसदों ने चीन को बताया सबसे बड़ा खतरा, भारत के साथ मजबूत साझेदारी पर दिया जोर

surbhi मई 8, 2026 0
US lawmakers discussing China threat and stronger India-US strategic partnership in Indo-Pacific region
US Pushes Stronger India Partnership Against China

United States में चीन को लेकर चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। अब अमेरिकी सांसदों के एक द्विदलीय समूह ने चीन को अमेरिका का “सबसे बड़ा रणनीतिक प्रतिद्वंदी” बताते हुए ट्रंप प्रशासन से भारत के साथ रिश्ते और मजबूत करने की अपील की है।

अमेरिकी सीनेट में पेश किए गए इस प्रस्ताव में कहा गया है कि China के पास अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की सुरक्षा, आर्थिक ताकत और रणनीतिक हितों को कमजोर करने की क्षमता और मंशा दोनों मौजूद हैं। प्रस्ताव में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों और आर्थिक दबाव की रणनीति पर भी चिंता जताई गई है।

दोनों पार्टियों के सांसदों ने पेश किया प्रस्ताव

यह प्रस्ताव अमेरिकी सीनेटर Chris Coons समेत रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक सांसदों के समूह ने पेश किया।

प्रस्ताव में आरोप लगाया गया कि चीन:

  • अपनी सैन्य ताकत तेजी से बढ़ा रहा है
  • साइबर और स्पेस तकनीक में विस्तार कर रहा है
  • हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दबाव की नीति अपना रहा है
  • ताइवान के खिलाफ आक्रामक रवैया दिखा रहा है

सांसदों ने कहा कि बीजिंग इंडो-पैसिफिक में “जबरदस्ती और आक्रामक रणनीति” के जरिए क्षेत्रीय संतुलन बदलने की कोशिश कर रहा है।

भारत के साथ गहरे जुड़ाव की सलाह

प्रस्ताव का सबसे अहम हिस्सा भारत को लेकर माना जा रहा है। अमेरिकी सांसदों ने कहा कि चीन का मुकाबला करने के लिए अमेरिका को भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी और मजबूत करनी चाहिए।

सीनेटरों ने खासतौर पर Quadrilateral Security Dialogue यानी QUAD को मजबूत करने की बात कही। इस समूह में:

  • India
  • United States
  • Japan
  • Australia

शामिल हैं।

अमेरिका का मानना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने में QUAD की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है।

चीन पर लगे गंभीर आरोप

अमेरिकी सांसदों ने चीन पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रस्ताव में कहा गया कि:

  • चीन अमेरिकी तकनीक और बौद्धिक संपदा चोरी करता है
  • जबरन टेक्नोलॉजी ट्रांसफर कराता है
  • वैश्विक बाजारों में अनुचित प्रतिस्पर्धा करता है
  • सरकारी मदद से रणनीतिक उद्योगों पर कब्जा करने की कोशिश करता है

इसके अलावा चीन पर रूस, ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देशों को सैन्य तकनीक और सामग्री उपलब्ध कराने का भी आरोप लगाया गया।

AI और क्वांटम टेक्नोलॉजी को लेकर चिंता

प्रस्ताव में कहा गया कि चीन:

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
  • क्वांटम कंप्यूटिंग
  • एडवांस सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी

जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सांसदों ने चेतावनी दी कि ये तकनीकें भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था और सैन्य ताकत तय करेंगी।

उन्होंने अमेरिका से इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने और चीन पर कड़े एक्सपोर्ट कंट्रोल लगाने की मांग की।

ताइवान और साउथ चाइना सी पर भी फोकस

प्रस्ताव में Taiwan Strait और South China Sea में शांति और स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया गया।

अमेरिकी सांसदों ने कहा कि इन क्षेत्रों में नेविगेशन की आजादी सुनिश्चित करना जरूरी है, क्योंकि चीन लगातार वहां सैन्य दबाव बढ़ा रहा है।

क्यों अहम माना जा रहा है यह प्रस्ताव?

हालांकि यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, लेकिन इसे वॉशिंगटन में चीन को लेकर बढ़ती चिंता का बड़ा संकेत माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • अमेरिका अब चीन को केवल आर्थिक प्रतिद्वंदी नहीं, बल्कि सुरक्षा चुनौती के रूप में देख रहा है
  • भारत की रणनीतिक अहमियत तेजी से बढ़ रही है
  • इंडो-पैसिफिक क्षेत्र आने वाले वर्षों में वैश्विक राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन सकता है

अमेरिका की यह नई रणनीति आने वाले समय में चीन-अमेरिका संबंधों को और तनावपूर्ण बना सकती है, जबकि भारत की भूमिका वैश्विक शक्ति संतुलन में और मजबूत होती दिखाई दे रही है।

 

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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US sanctions imposed on Chinese and Hong Kong firms accused of supporting Iran’s drone and missile programs
चीन-हांगकांग की कंपनियों पर अमेरिका का शिकंजा, ईरान को ड्रोन-मिसाइल सप्लाई का आरोप

अमेरिका ने ईरान के ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को समर्थन देने के आरोप में चीन और हांगकांग की कई कंपनियों समेत 10 संस्थाओं और व्यक्तियों पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं. अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की इस कार्रवाई को ईरान के सैन्य नेटवर्क पर बढ़ते दबाव के रूप में देखा जा रहा है. यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब मध्य पूर्व में तनाव बना हुआ है और अमेरिका-ईरान संबंधों में किसी समाधान के संकेत फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं. दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संभावित चीन दौरे से पहले इस कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है. ड्रोन और मिसाइल निर्माण में मदद का आरोप अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार, प्रतिबंधित कंपनियों और व्यक्तियों पर आरोप है कि वे ईरान को शहेद ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल बनाने के लिए जरूरी इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स, मशीनरी और कच्चा माल उपलब्ध करा रहे थे. अमेरिका का कहना है कि यह नेटवर्क ईरान की सैन्य क्षमता को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभा रहा था. ट्रेजरी विभाग ने साफ किया कि वह भविष्य में भी ईरान के सैन्य और रक्षा ढांचे को कमजोर करने के लिए आर्थिक प्रतिबंधों का इस्तेमाल जारी रखेगा. चीन और हांगकांग की कंपनियां निशाने पर प्रतिबंधों की सूची में चीन की Yushita Shanghai International Trade Company का नाम प्रमुख रूप से शामिल है. अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि यह कंपनी ईरान के हथियार कार्यक्रम के लिए सामग्री जुटाने में मदद कर रही थी. इसके अलावा दुबई स्थित Elite Energy FZCO पर भी कार्रवाई की गई है. आरोप है कि इस कंपनी ने हांगकांग की एक फर्म को करोड़ों डॉलर ट्रांसफर किए, जिनका इस्तेमाल ईरानी नेटवर्क के लिए किया गया. हांगकांग की HK Hesin Industry और बेलारूस की Armory Alliance पर भी ईरान के लिए बिचौलिये की भूमिका निभाने का आरोप लगाया गया है. Mustad Ltd पर गंभीर आरोप अमेरिकी अधिकारियों ने हांगकांग की Mustad Ltd पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं. ट्रेजरी विभाग के मुताबिक, कंपनी ने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के लिए हथियारों और रक्षा उपकरणों की खरीद में मदद की. अमेरिका ने कहा कि ऐसे नेटवर्क वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा हैं और इनके खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी रहेगी. विदेशी बैंकों और रिफाइनरियों पर भी नजर ट्रेजरी विभाग ने संकेत दिया है कि भविष्य में उन विदेशी बैंकों, एयरलाइंस और कंपनियों पर भी कार्रवाई की जा सकती है जो ईरान के प्रतिबंधित व्यापार को सहयोग दे रहे हैं. इसमें चीन की तथाकथित “टीपॉट” ऑयल रिफाइनरियां भी शामिल हैं, जिन पर ईरानी तेल खरीदने के आरोप लगते रहे हैं. अमेरिका का कहना है कि उसका उद्देश्य ईरान को दोबारा सैन्य ताकत बढ़ाने से रोकना और उसके वैश्विक सप्लाई नेटवर्क को कमजोर करना है.  

surbhi मई 9, 2026 0
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