पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब एक नए मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष के बीच एक अहम खबर सामने आई है-अगर अमेरिका जमीनी सैन्य कार्रवाई करता है, तो इजरायल उसमें सीधे तौर पर हिस्सा नहीं लेगा।
इजरायली मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फैसला क्षेत्रीय रणनीति और बढ़ते तनाव को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। इससे संकेत मिलते हैं कि संभावित ग्राउंड ऑपरेशन में अमेरिका को अकेले ही आगे बढ़ना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इजरायल का यह रुख कई रणनीतिक कारणों से जुड़ा है:
हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि इजरायल खुफिया या तकनीकी सहयोग देगा या नहीं।
अगर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ईरान में ग्राउंड ऑपरेशन शुरू करता है, तो यह मिशन काफी जटिल और जोखिम भरा हो सकता है।
अमेरिका ने पहले ही क्षेत्र में अपने एयरक्राफ्ट कैरियर, युद्धपोत और फाइटर जेट्स की संख्या बढ़ा दी है, जिससे दबाव की रणनीति अपनाई जा रही है।
इस बीच IRGC (ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड) लगातार आक्रामक बयान दे रही है और अमेरिका को खुली चुनौती दे रही है। इससे यह साफ है कि अगर जमीनी युद्ध शुरू होता है, तो संघर्ष और भी उग्र हो सकता है।
फिलहाल अमेरिका ने जमीनी सैनिक उतारने को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। लेकिन मौजूदा हालात “तूफान से पहले की शांति” जैसे नजर आ रहे हैं।
अगर हालात बिगड़ते हैं, तो यह संघर्ष केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र और वैश्विक राजनीति पर इसका असर पड़ सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
बीजिंग, एजेंसियां। चीन के उत्तरी शांक्सी प्रांत में स्थित एक कोयला खदान में हुए भीषण गैस विस्फोट ने पूरे देश को झकझोर दिया है। सरकारी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस दर्दनाक हादसे में अब तक कम से कम 82 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य मजदूर अभी भी खदान के अंदर फंसे हुए हैं। हादसा शुक्रवार शाम चांगझी शहर की लिउशेन्यू कोयला खदान में हुआ, जहां बड़ी संख्या में श्रमिक भूमिगत खनन कार्य में जुटे थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार प्रारंभिक जानकारी के अनुसार विस्फोट इतना तेज था कि खदान के अंदर अफरा-तफरी मच गई। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने पहले आठ लोगों की मौत और कई मजदूरों के फंसे होने की जानकारी दी थी, लेकिन राहत और बचाव कार्य आगे बढ़ने के साथ मृतकों की संख्या बढ़कर 82 हो गई। बताया जा रहा है कि हादसे के समय करीब 247 मजदूर खदान के भीतर मौजूद थे। राहत और बचाव अभियान जारी हादसे के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन, आपदा राहत बल और बचाव दल मौके पर पहुंच गए। बचावकर्मी लगातार खदान के अंदर फंसे मजदूरों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। गैस और धुएं के कारण राहत अभियान में काफी मुश्किलें आ रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि कई मजदूरों से अब भी संपर्क नहीं हो पाया है। हादसे की जांच शुरू चीन सरकार ने इस घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। शुरुआती आशंका है कि खदान के अंदर गैस रिसाव के कारण विस्फोट हुआ। प्रशासन ने खदान प्रबंधन से सुरक्षा मानकों को लेकर जवाब मांगा है। इस हादसे के बाद एक बार फिर चीन की खदानों में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट माने जाने वाले स्टारशिप के नए और अपग्रेडेड वर्जन Starship V3 का पहला टेस्ट लॉन्च सफलता और चुनौतियों का मिला-जुला उदाहरण बन गया। अमेरिकी कंपनी SpaceX ने भारतीय समयानुसार 23 मई की सुबह टेक्सास स्थित स्टारबेस लॉन्च साइट से इसका 12वां टेस्ट लॉन्च किया। लॉन्च के दौरान रॉकेट के एक इंजन में तकनीकी खराबी आ गई, जिससे मिशन पर खतरा मंडराने लगा। इसके बावजूद स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट लगभग एक घंटे की उड़ान के बाद हिंद महासागर में सफलतापूर्वक लैंड करने में कामयाब रहा। यह पहली बार था जब SpaceX ने अपने न्यू जनरेशन Starship V3 सिस्टम का इस्तेमाल किया। 403 फीट ऊंचा है स्टारशिप सिस्टम स्टारशिप सिस्टम दो हिस्सों से मिलकर बना है - ऊपरी हिस्सा Starship spacecraft और निचला हिस्सा Super Heavy Booster। दोनों को मिलाकर कुल ऊंचाई करीब 403 फीट है। इसे पूरी तरह reusable बनाया गया है, ताकि भविष्य में एक ही रॉकेट को कई बार इस्तेमाल किया जा सके। बूस्टर की कंट्रोल्ड लैंडिंग नहीं हो पाई लॉन्च के बाद Super Heavy Booster ने अपना “boost back burn” पूरी तरह पूरा नहीं किया। यह वही प्रक्रिया होती है जिसके जरिए बूस्टर वापस पृथ्वी पर नियंत्रित तरीके से उतरता है। तकनीकी गड़बड़ी के कारण बूस्टर समुद्र में पूरी तरह नियंत्रित तरीके से लैंड नहीं कर सका। छह में से सिर्फ पांच इंजन चालू हुए स्टेज सेपरेशन के बाद Starship spacecraft के छह इंजनों में से केवल पांच ही चालू हो पाए। एक इंजन स्टार्ट नहीं होने के कारण रॉकेट तय ऑर्बिटल पाथ तक नहीं पहुंच सका। हालांकि इसकी उड़ान “suborbital trajectory” के भीतर बनी रही, जिससे मिशन पूरी तरह विफल होने से बच गया। इंजन फेल होने की वजह से अंतरिक्ष में दोबारा इंजन स्टार्ट करने का परीक्षण भी नहीं हो सका। इसके बावजूद टीम ने स्पेसक्राफ्ट को सुरक्षित तरीके से हिंद महासागर में उतार लिया। क्या था इस टेस्ट का मुख्य उद्देश्य इस मिशन का लक्ष्य था: Starship V3 को सफलतापूर्वक लॉन्च करना Super Heavy Booster और Starship का सफल separation अंतरिक्ष में इंजन दोबारा चालू करने का परीक्षण स्पेसक्राफ्ट को सुरक्षित तरीके से समुद्र में उतारना SpaceX का कहना है कि इस टेस्ट से मिले डेटा का इस्तेमाल भविष्य के मिशनों और मंगल अभियान की तैयारी में किया जाएगा। पिछले टेस्टों में क्या हुआ था 11वां टेस्ट: पहली बार 8 डमी सैटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़े गए 14 अक्टूबर 2025 को हुए इस मिशन में पहली बार Starship ने आठ Starlink simulator satellites अंतरिक्ष में छोड़े। Super Heavy Booster की अमेरिका की खाड़ी में वॉटर लैंडिंग हुई, जबकि Starship हिंद महासागर में उतरा। मिशन करीब 1 घंटे 6 मिनट तक चला। 10वां टेस्ट: सैटेलाइट डिप्लॉयमेंट और इंजन टेस्ट सफल 27 अगस्त 2025 को हुए टेस्ट में Starship ने सफलतापूर्वक Starlink simulator satellites deploy किए। इस मिशन में इंजन रीस्टार्ट और स्पेसक्राफ्ट कंट्रोल सिस्टम के कई अहम परीक्षण पूरे हुए। 29 जून 2025: स्टैटिक फायर टेस्ट में ब्लास्ट 10वें टेस्ट से पहले 29 जून 2025 को स्टैटिक फायर टेस्ट के दौरान Starship में जोरदार विस्फोट हो गया था। टेस्ट के दौरान रॉकेट को जमीन पर खड़ा रखकर इंजन चालू किए गए थे, तभी ऊपरी हिस्से में धमाका हो गया और पूरा सिस्टम आग की लपटों में घिर गया। 9वां टेस्ट: स्पेसक्राफ्ट ने कंट्रोल खो दिया 28 मई 2025 को हुए नौवें लॉन्च के लगभग 30 मिनट बाद Starship ने कंट्रोल खो दिया था। पृथ्वी के वातावरण में दोबारा प्रवेश करते समय स्पेसक्राफ्ट नष्ट हो गया, हालांकि बूस्टर ने अमेरिका की खाड़ी में हार्ड लैंडिंग की। 8वां टेस्ट: हवा में ही ब्लास्ट हुई Starship 7 मार्च 2025 को हुए इस मिशन में Super Heavy Booster सफलतापूर्वक लॉन्च पैड पर लौट आया था। लेकिन Starship के छह इंजनों में से चार बंद हो गए, जिससे स्पेसक्राफ्ट असंतुलित हो गया। बाद में ऑटोमेटेड अबॉर्ट सिस्टम ने इसे हवा में ही नष्ट कर दिया। 7वां टेस्ट: ऑक्सीजन लीक से हुआ विस्फोट 17 जनवरी 2025 को Starship का सातवां टेस्ट हुआ। बूस्टर सफलतापूर्वक लॉन्च पैड पर वापस आ गया, लेकिन ऊपरी हिस्से में ऑक्सीजन लीक के कारण स्पेसक्राफ्ट हवा में ही फट गया। 6वां टेस्ट: लॉन्च पैड पर कैचिंग रद्द करनी पड़ी 20 नवंबर 2024 को हुए इस टेस्ट को देखने के लिए Donald Trump भी स्टारबेस पहुंचे थे। मिशन के दौरान सभी पैरामीटर सही न मिलने पर बूस्टर को लॉन्च पैड पर कैच करने की बजाय समुद्र में उतारा गया। वहीं Starship ने अंतरिक्ष में इंजन रीस्टार्ट टेस्ट पूरा किया। 5वां टेस्ट: पहली बार लॉन्च पैड पर बूस्टर कैच 13 अक्टूबर 2024 को SpaceX ने इतिहास रच दिया। पहली बार Super Heavy Booster को “Mechazilla” नाम की विशाल मैकेनिकल आर्म्स ने लॉन्च पैड पर पकड़ लिया। Starship ने पृथ्वी के वातावरण में री-एंट्री कर हिंद महासागर में कंट्रोल्ड लैंडिंग की। 4वां टेस्ट: री-एंट्री टेस्ट सफल रहा 6 जून 2024 को हुए चौथे टेस्ट का मुख्य उद्देश्य यह देखना था कि Starship पृथ्वी के वातावरण में दोबारा प्रवेश के दौरान सुरक्षित रह सकता है या नहीं। कई हीट टाइल्स के नुकसान के बावजूद स्पेसक्राफ्ट ने समुद्र में सफल सॉफ्ट लैंडिंग की। 3वां टेस्ट: री-एंट्री के दौरान संपर्क टूटा 14 मार्च 2024 को हुए तीसरे टेस्ट में Starship ने पहली बार payload door खोलने और बंद करने का परीक्षण किया। इसके अलावा तरल ऑक्सीजन ट्रांसफर सिस्टम भी टेस्ट किया गया। हालांकि री-एंट्री के दौरान पृथ्वी से संपर्क टूट गया। 2वां टेस्ट: स्टेज सेपरेशन सफल, लेकिन दोनों हिस्से नष्ट 18 नवंबर 2023 को हुए दूसरे टेस्ट में पहली बार “hot staging” तकनीक का इस्तेमाल किया गया। Super Heavy Booster और Starship सफलतापूर्वक अलग हुए, लेकिन कुछ ही मिनट बाद दोनों में तकनीकी खराबी आ गई और उन्हें नष्ट करना पड़ा। पहला टेस्ट: लॉन्च के 4 मिनट बाद विस्फोट 20 अप्रैल 2023 को Starship का पहला ऑर्बिटल टेस्ट लॉन्च किया गया था। उड़ान के करीब चार मिनट बाद रॉकेट में विस्फोट हो गया था। हालांकि Elon Musk ने इसे भी बड़ी सीख बताया था, क्योंकि पहली बार इतना विशाल रॉकेट सफलतापूर्वक लॉन्च पैड से उड़ान भरने में कामयाब रहा था। मंगल मिशन के लिए अहम है Starship Elon Musk लंबे समय से Starship को मंगल ग्रह पर इंसानों को भेजने वाले मिशन का आधार बताते रहे हैं। NASA भी अपने Artemis Moon Mission के लिए Starship के एक modified version का इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही Starship V3 का यह टेस्ट पूरी तरह सफल नहीं रहा, लेकिन इंजन फेल होने के बावजूद सुरक्षित लैंडिंग SpaceX के लिए बड़ी तकनीकी उपलब्धि मानी जाएगी।
Donald Trump ने एक AI-जनरेटेड वीडियो शेयर कर नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस वीडियो में अमेरिकी टीवी होस्ट Stephen Colbert को कूड़ेदान में फेंकते हुए दिखाया गया है। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। क्या है वीडियो में? वीडियो में दिखाया गया है कि जैसे ही The Late Show with Stephen Colbert के अंतिम एपिसोड में स्टीफन कोल्बर्ट दर्शकों का स्वागत करते हैं, तभी पीछे से ट्रंप आते हैं। इसके बाद ट्रंप उन्हें कॉलर से पकड़कर डस्टबिन में फेंक देते हैं और फिर डांस करने लगते हैं। बैकग्राउंड में उनके चुनावी कैंपेन की धुन जैसी म्यूजिक भी सुनाई देती है। यह वीडियो AI तकनीक से तैयार किया गया बताया जा रहा है। शो के आखिरी एपिसोड के बाद बढ़ा विवाद यह वीडियो ऐसे समय सामने आया, जब ‘The Late Show with Stephen Colbert’ का आखिरी एपिसोड हाल ही में प्रसारित हुआ। 2015 में शुरू हुआ यह शो अमेरिका के सबसे लोकप्रिय लेट-नाइट टॉक शोज में शामिल रहा। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक शो का फिनाले एपिसोड रिकॉर्ड व्यूअरशिप के साथ खत्म हुआ। ओवरनाइट नीलसन रेटिंग्स के अनुसार इसे करीब 6.74 मिलियन लोगों ने देखा, जो 2015 के पहले एपिसोड से भी ज्यादा था। फिनाले एपिसोड में कई स्टार्स पहुंचे 21 मई को प्रसारित अंतिम एपिसोड में कई सेलिब्रिटी मेहमान शामिल हुए। कोल्बर्ट ने अपने खास अंदाज में दर्शकों को अलविदा कहा। शो के दौरान अभिनेता Bryan Cranston ने सरप्राइज एंट्री भी दी। क्यों बंद हुआ शो? CBS ने जुलाई 2025 में घोषणा की थी कि 30 साल पुराने इस शो को बंद किया जा रहा है। नेटवर्क ने इसके पीछे आर्थिक कारण बताए थे और कहा था कि पारंपरिक टीवी ब्रॉडकास्टिंग पर बढ़ते दबाव के चलते यह फैसला लिया गया। हालांकि आलोचकों और खुद कोल्बर्ट ने संकेत दिए थे कि इसके पीछे राजनीतिक वजहें भी हो सकती हैं। सोशल मीडिया और यूट्यूब का असर रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में लेट-नाइट टीवी शोज की लोकप्रियता में गिरावट आई है। अब बड़ी संख्या में दर्शक टीवी पर लाइव देखने के बजाय यूट्यूब और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शो के क्लिप्स देखना पसंद करते हैं। अब फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखेंगे कोल्बर्ट ‘The Late Show’ खत्म होने के बाद Stephen Colbert अब फिल्मों की स्क्रीनराइटिंग पर काम कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक वह Peter Jackson और अन्य राइटर्स के साथ मिलकर The Lord of the Rings: Shadow of the Past की कहानी लिख रहे हैं।