नई दिल्ली/विक्टोरिया: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन दिवसीय सेशेल्स यात्रा के दौरान भारत और सेशेल्स ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल भुगतान, स्वास्थ्य, अंतरिक्ष, कृषि और शिक्षा समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 19 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। दोनों देशों के बीच हुई प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद इन समझौतों की घोषणा की गई। इनका उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना और द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देना है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि, बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग, यूपीआई आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली, एक्जिम बैंक के माध्यम से व्यापक ऋण सुविधा, और सेशेल्स के नए राष्ट्रीय अस्पताल की प्रारंभिक तैयारियों से जुड़े समझौतों पर सहमति बनी है।
भारत ने सेशेल्स की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। भारत सेशेल्स को एक तेज गश्ती पोत (Fast Patrol Vessel) उपहार में देगा। इसके अलावा सेशेल्स रक्षा बल को 10 यूटिलिटी वाहन और पांच लेजर रेडियल श्रेणी की नौकाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
भारत ने यह भी घोषणा की कि सेशेल्स कोस्ट गार्ड के पोत पीएस जोरोस्टर के पुनर्निर्माण का कार्य पूरा हो चुका है। साथ ही सेशेल्स के लिए उपलब्ध कराए गए डोर्नियर विमान को आधुनिक ग्लास कॉकपिट प्रणाली से अपग्रेड किया जाएगा।
भारत ने विकास सहयोग के तहत सेशेल्स को छह एंबुलेंस, 500 मीट्रिक टन चावल और 8,500 मीट्रिक टन सीमेंट भी सौंपा। इसके साथ ही भारत-सेशेल्स राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक स्मारक लोगो जारी किया गया।
दोनों देशों ने व्यावसायिक एवं तकनीकी शिक्षा केंद्र की आधारशिला का डिजिटल माध्यम से उद्घाटन भी किया।
डिजिटल सहयोग को बढ़ावा देने के लिए नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड और सेशेल्स के केंद्रीय बैंक के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत सेशेल्स में भारत की यूपीआई (UPI) आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली को लागू किया जाएगा, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग को नई मजबूती मिलेगी।
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं। एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड और सेशेल्स के स्वास्थ्य मंत्रालय के बीच हुए समझौते के तहत जन औषधि योजना के माध्यम से सेशेल्स के लोगों को उच्च गुणवत्ता वाली और किफायती भारतीय दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
इसके अलावा नए राष्ट्रीय अस्पताल की प्रारंभिक तैयारियों को लेकर भी समझौता हुआ है।
भारत और सेशेल्स ने विदेश सेवा प्रशिक्षण, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा, नाविकों के प्रशिक्षण और प्रमाणन की पारस्परिक मान्यता तथा बाह्य अंतरिक्ष की खोज और उसके शांतिपूर्ण उपयोग से जुड़े कई समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, इन समझौतों से दोनों देशों के बीच संस्थागत सहयोग और क्षमता निर्माण को नई गति मिलेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं। राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के निमंत्रण पर सेशेल्स पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भी शामिल होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन 19 समझौतों के बाद भारत और सेशेल्स के संबंध केवल विकास सहयोग तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा, समुद्री सहयोग और डिजिटल कनेक्टिविटी के नए दौर की शुरुआत भी करेंगे।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली/विक्टोरिया: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन दिवसीय सेशेल्स यात्रा के दौरान भारत और सेशेल्स ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल भुगतान, स्वास्थ्य, अंतरिक्ष, कृषि और शिक्षा समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 19 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। दोनों देशों के बीच हुई प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद इन समझौतों की घोषणा की गई। इनका उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना और द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देना है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि, बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग, यूपीआई आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली, एक्जिम बैंक के माध्यम से व्यापक ऋण सुविधा, और सेशेल्स के नए राष्ट्रीय अस्पताल की प्रारंभिक तैयारियों से जुड़े समझौतों पर सहमति बनी है। सेशेल्स की समुद्री सुरक्षा को मिलेगा भारत का सहयोग भारत ने सेशेल्स की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। भारत सेशेल्स को एक तेज गश्ती पोत (Fast Patrol Vessel) उपहार में देगा। इसके अलावा सेशेल्स रक्षा बल को 10 यूटिलिटी वाहन और पांच लेजर रेडियल श्रेणी की नौकाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। भारत ने यह भी घोषणा की कि सेशेल्स कोस्ट गार्ड के पोत पीएस जोरोस्टर के पुनर्निर्माण का कार्य पूरा हो चुका है। साथ ही सेशेल्स के लिए उपलब्ध कराए गए डोर्नियर विमान को आधुनिक ग्लास कॉकपिट प्रणाली से अपग्रेड किया जाएगा। विकास परियोजनाओं को भी मिला बढ़ावा भारत ने विकास सहयोग के तहत सेशेल्स को छह एंबुलेंस, 500 मीट्रिक टन चावल और 8,500 मीट्रिक टन सीमेंट भी सौंपा। इसके साथ ही भारत-सेशेल्स राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक स्मारक लोगो जारी किया गया। दोनों देशों ने व्यावसायिक एवं तकनीकी शिक्षा केंद्र की आधारशिला का डिजिटल माध्यम से उद्घाटन भी किया। सेशेल्स में लागू होगी UPI आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली डिजिटल सहयोग को बढ़ावा देने के लिए नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड और सेशेल्स के केंद्रीय बैंक के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत सेशेल्स में भारत की यूपीआई (UPI) आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली को लागू किया जाएगा, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग को नई मजबूती मिलेगी। जन औषधि योजना के तहत मिलेंगी सस्ती भारतीय दवाएं स्वास्थ्य क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं। एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड और सेशेल्स के स्वास्थ्य मंत्रालय के बीच हुए समझौते के तहत जन औषधि योजना के माध्यम से सेशेल्स के लोगों को उच्च गुणवत्ता वाली और किफायती भारतीय दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा नए राष्ट्रीय अस्पताल की प्रारंभिक तैयारियों को लेकर भी समझौता हुआ है। शिक्षा, कृषि और अंतरिक्ष सहयोग का होगा विस्तार भारत और सेशेल्स ने विदेश सेवा प्रशिक्षण, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा, नाविकों के प्रशिक्षण और प्रमाणन की पारस्परिक मान्यता तथा बाह्य अंतरिक्ष की खोज और उसके शांतिपूर्ण उपयोग से जुड़े कई समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इन समझौतों से दोनों देशों के बीच संस्थागत सहयोग और क्षमता निर्माण को नई गति मिलेगी। 50 वर्षों की दोस्ती को मिली नई दिशा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं। राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के निमंत्रण पर सेशेल्स पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भी शामिल होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इन 19 समझौतों के बाद भारत और सेशेल्स के संबंध केवल विकास सहयोग तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा, समुद्री सहयोग और डिजिटल कनेक्टिविटी के नए दौर की शुरुआत भी करेंगे।
तेहरान/वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के जवाब में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बहरीन और कुवैत की ओर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई जारी रखी, तो दोनों देशों के बीच चल रही वार्ता पूरी तरह रोक दी जाएगी। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ा विवाद ईरान का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के संचालन और सुरक्षा पर उसका नियंत्रण है तथा उसकी सीधी भागीदारी के बिना इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को दोबारा खोलने की किसी भी कोशिश का विरोध किया जाएगा। इसी मुद्दे को लेकर क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान का आरोप है कि अंतरिम समझौते के बावजूद कुछ देशों ने उसकी भूमिका को नजरअंदाज करते हुए जलडमरूमध्य में नई व्यवस्था लागू करने की कोशिश की, जिसके बाद हालात और बिगड़ गए। ओमान मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर भी हमले ईरान ने संयुक्त राष्ट्र समर्थित ओमान समुद्री मार्ग से गुजर रहे जहाजों पर भी दो बार हमले किए हैं। लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस जलमार्ग को वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मार्ग मानता रहा है। एक समय दुनिया के तेल और प्राकृतिक गैस की लगभग पांचवें हिस्से की आपूर्ति इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरती थी, इसलिए क्षेत्र में बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। विदेश मंत्री अराघची का सख्त संदेश इराक यात्रा के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप से हालात और खराब होंगे। उन्होंने कहा कि यदि ईरान की मौजूदा व्यवस्था से अलग कोई नया तंत्र लागू करने की कोशिश की गई, तो इससे जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने में देरी होगी और क्षेत्रीय टकराव और बढ़ सकता है। कुवैत ने ड्रोन और मिसाइलें मार गिराने का दावा किया कुवैत की सेना के अनुसार, रविवार सुबह अमेरिकी हमलों के तुरंत बाद ईरान की ओर से दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों और कई ड्रोन को उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने सफलतापूर्वक रोक दिया। अधिकारियों ने बताया कि इस हमले में किसी के हताहत होने या बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। कुवैत में अमेरिकी सेना का एक महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा मौजूद है, जिसके कारण यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है। बहरीन में रिहायशी इमारत को नुकसान बहरीन के गृह मंत्रालय ने बताया कि ईरानी हमलों के दौरान अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निकट स्थित एक बहुमंजिला रिहायशी इमारत क्षतिग्रस्त हुई। इस घटना में किसी की मौत नहीं हुई। सरकार की ओर से जारी तस्वीरों में इमारत की ऊपरी मंजिल को भारी नुकसान पहुंचा हुआ दिखाई दिया। बहरीन ने हमले की निंदा करते हुए इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया। अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर की कार्रवाई अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, समुद्र में एक व्यापारी पोत पर हुए हमले के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य निगरानी तंत्र, संचार नेटवर्क, हवाई रक्षा प्रणालियों, ड्रोन भंडारण केंद्रों और बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमताओं को निशाना बनाया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि युद्धविराम समझौते के उल्लंघन के जवाब में ईरान के मिसाइल और ड्रोन ठिकानों सहित कई रणनीतिक सैन्य प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की गई है। वार्ता पर मंडराया संकट ईरान ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि अमेरिकी सैन्य अभियान जारी रहता है, तो दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक वार्ता पूरी तरह ठप हो सकती है। ऐसे में पश्चिम एशिया में पहले से जारी तनाव और अधिक बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सेशेल्स ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन' (Guardian of the Blue Horizon) से सम्मानित किया है। यह सम्मान उन्हें पर्यावरण संरक्षण, जलवायु कार्रवाई और टिकाऊ विकास (Sustainable Development) के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए प्रदान किया गया। इसके साथ ही किसी भी विदेशी देश द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को दिया गया यह 34वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान बन गया है। सम्मान ग्रहण करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने इसे केवल अपनी उपलब्धि नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती से जूझ रहे छोटे द्वीपीय और विकासशील देशों को समर्पित बताया। जलवायु परिवर्तन से जूझ रहे देशों को समर्पित किया सम्मान सम्मान प्राप्त करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 'गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन' सम्मान उन सभी देशों के नाम है, जो जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास वैश्विक प्राथमिकता होनी चाहिए तथा इस दिशा में सभी देशों को मिलकर काम करना होगा। पर्यावरण और ग्रीन डेवलपमेंट के लिए मिला सम्मान सेशेल्स सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान पर्यावरण-अनुकूल विकास, समुद्री संरक्षण, जलवायु न्याय और ग्रीन ग्रोथ को बढ़ावा देने में उनके नेतृत्व को देखते हुए प्रदान किया है। भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance), अक्षय ऊर्जा, हरित विकास और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कई वैश्विक पहल शुरू की हैं। इन्हीं प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार सराहना मिलती रही है। 34वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान सेशेल्स का यह सर्वोच्च सम्मान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को किसी भी विदेशी देश द्वारा दिया गया 34वां अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार है। इससे पहले भी उन्हें विभिन्न देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की ओर से कई प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं। मई 2026 में संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने उन्हें कृषि सुधार, खाद्य सुरक्षा और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रतिष्ठित 'एग्रीकोला मेडल' (Agricola Medal) से सम्मानित किया था। पहले भी मिल चुके हैं कई वैश्विक सम्मान प्रधानमंत्री मोदी को वर्ष 2018 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में योगदान के लिए प्रतिष्ठित 'चैंपियंस ऑफ द अर्थ' (Champions of the Earth) पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसी वर्ष उन्हें 'सियोल शांति पुरस्कार' (Seoul Peace Prize) भी प्रदान किया गया था। यह सम्मान वैश्विक आर्थिक विकास, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और समावेशी विकास को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका के लिए दिया गया था। भारत-सेशेल्स संबंधों को मिली नई मजबूती प्रधानमंत्री मोदी इन दिनों सेशेल्स की आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस दौरान दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, ब्लू इकोनॉमी, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल सहयोग और हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर सहमति बनी है। विशेषज्ञों का मानना है कि सेशेल्स का सर्वोच्च सम्मान दोनों देशों के मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका का भी प्रतीक है।