United Nations में परमाणु अप्रसार संधि (NPT) की समीक्षा बैठक के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विवाद ईरान को सम्मेलन का उपाध्यक्ष बनाए जाने को लेकर हुआ।
न्यूयॉर्क में आयोजित परमाणु अप्रसार संधि समीक्षा सम्मेलन में ईरान को 34 उपाध्यक्षों में शामिल किया गया। यह नियुक्ति गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) की ओर से की गई थी।
अमेरिका ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई।
अमेरिकी अधिकारी क्रिस्टोफर यीव ने कहा कि ईरान का इस पद पर होना NPT की भावना के खिलाफ है। उनका आरोप है कि ईरान लंबे समय से अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन नहीं कर रहा है और International Atomic Energy Agency के साथ भी पूरा सहयोग नहीं कर रहा।
उन्होंने इसे सम्मेलन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करने वाला फैसला बताया।
ईरान के प्रतिनिधि रज़ा नजाफी ने अमेरिकी आरोपों को "बेबुनियाद और राजनीतिक" करार दिया। उन्होंने अमेरिका पर ही परमाणु हथियारों के विस्तार और दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल ही में दोहराया कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे।
ईरान का कहना है कि उसे शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम संवर्धन का अधिकार है। हालांकि पश्चिमी देशों को आशंका है कि इसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में किया जा सकता है।
फिलहाल, यह टकराव वैश्विक परमाणु सुरक्षा और कूटनीतिक प्रयासों के लिए नई चुनौती बनता दिख रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मॉस्को: रूस का रणनीतिक बॉम्बर विमान Tu-22M3 सोमवार को साइबेरिया के इरकुत्स्क क्षेत्र में प्रशिक्षण उड़ान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, विमान अचानक नियंत्रण खोकर जमीन की ओर तेजी से गिरा, जिससे घटनास्थल पर धुएं का बड़ा गुबार उठ गया। विमान में सवार चारों क्रू मेंबर समय रहते इजेक्ट करने में सफल रहे और उनकी जान बच गई। चारों क्रू मेंबर सुरक्षित, अस्पताल में भर्ती रूसी रक्षा मंत्रालय ने बताया कि विमान में मौजूद चारों पायलट पैराशूट के जरिए सुरक्षित बाहर निकल गए। उन्हें प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि दुर्घटना में जमीन पर किसी प्रकार का नुकसान या हताहत नहीं हुआ है। कामेंका गांव के पास हुआ हादसा इरकुत्स्क क्षेत्र के गवर्नर इगोर कोबजेव के मुताबिक, यह हादसा कामेंका गांव के नजदीक हुआ। प्रारंभिक जांच में विमान के इंजन में खराबी को दुर्घटना की संभावित वजह माना जा रहा है। अधिकारियों ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। क्या है Tu-22M3 बॉम्बर की खासियत? Tu-22M3 रूस के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक बॉम्बर विमानों में से एक है। सोवियत काल में विकसित इस विमान को NATO ने 'Backfire' कोडनेम दिया है। यह सुपरसोनिक बॉम्बर लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता रखता है और रूस ने इसका इस्तेमाल सीरिया और यूक्रेन में सैन्य अभियानों के दौरान भी किया है। Tu-22M3 आधुनिक हथियार प्रणालियों से लैस है और यह Kh-22 क्रूज मिसाइलों के अलावा हवा से लॉन्च होने वाली हाइपरसोनिक किंझाल (Kinzhal) मिसाइलों को भी ले जाने में सक्षम है। इसकी वजह से इसे रूस की रणनीतिक हवाई शक्ति का अहम हिस्सा माना जाता है। जांच के बाद सामने आएगी दुर्घटना की असली वजह शुरुआती जांच में इंजन फेल होने की आशंका जताई गई है, लेकिन रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना के वास्तविक कारणों की पुष्टि की जा सकेगी।
ब्रातिस्लावा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्लोवाकिया के सर्वोच्च राजकीय सम्मान 'द ऑर्डर ऑफ द व्हाइट डबल क्रॉस (फर्स्ट क्लास)' से सम्मानित किया गया है। स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी ने यह सम्मान प्रधानमंत्री मोदी को भारत और स्लोवाकिया के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को मजबूत करने तथा वैश्विक स्तर पर सहयोग बढ़ाने में उनके योगदान के लिए प्रदान किया। यह किसी विदेशी देश द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को दिया गया 33वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है। क्या है 'द ऑर्डर ऑफ द व्हाइट डबल क्रॉस'? 'द ऑर्डर ऑफ द व्हाइट डबल क्रॉस (फर्स्ट क्लास)' स्लोवाक गणराज्य का सर्वोच्च नागरिक एवं राजकीय सम्मान है। यह सम्मान स्लोवाकिया के राष्ट्रपति द्वारा उन विदेशी नेताओं और गणमान्य व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है, जिन्होंने स्लोवाकिया के साथ मित्रता, कूटनीतिक संबंधों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की प्रतिष्ठा को मजबूत करने में असाधारण योगदान दिया हो। सम्मान मिलने के बाद क्या बोले पीएम मोदी? सम्मान प्राप्त करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "ब्रातिस्लावा में 'द ऑर्डर ऑफ द व्हाइट डबल क्रॉस (फर्स्ट क्लास)' से सम्मानित होकर गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। मैं इस सम्मान के लिए स्लोवाकिया की जनता और सरकार का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। यह सम्मान भारत के 140 करोड़ नागरिकों का है और मैं इसे भारत-स्लोवाकिया की स्थायी मित्रता को समर्पित करता हूं।" किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली स्लोवाकिया यात्रा प्रधानमंत्री मोदी अपनी एक सप्ताह की यूरोप यात्रा के तहत स्लोवाकिया पहुंचे हैं। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की स्लोवाकिया की पहली आधिकारिक यात्रा है। इस दौरे को दोनों देशों के संबंधों में एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। भारत-स्लोवाकिया संबंधों को मिली नई मजबूती प्रधानमंत्री मोदी और स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के बीच हुई वार्ता में व्यापार, रक्षा, डिजिटल प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, शिक्षा और नवाचार समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। दोनों देशों ने अपने संबंधों को व्यापक साझेदारी के स्तर तक ले जाने का निर्णय लिया है। पीएम मोदी को मिले 33 अंतरराष्ट्रीय सम्मान स्लोवाकिया का यह सम्मान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विभिन्न देशों द्वारा दिए गए अंतरराष्ट्रीय सम्मानों की सूची में 33वां पुरस्कार है। पिछले कुछ वर्षों में कई देशों ने उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया है, जिसे भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा और प्रधानमंत्री मोदी की सक्रिय कूटनीति का प्रतीक माना जा रहा है।
नीस (फ्रांस): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच फ्रांस के नीस शहर में हुई उच्चस्तरीय वार्ता कई महत्वपूर्ण समझौतों और घोषणाओं के साथ संपन्न हुई। दोनों नेताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रक्षा, अंतरिक्ष, व्यापार, शिक्षा, डिजिटल भुगतान, रेलवे और परमाणु ऊर्जा सहित 13 प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा देने पर सहमति जताई। बैठक के दौरान भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के उद्देश्य से कई नई पहलों की घोषणा की गई। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने विशेष ब्रीफिंग में बताया कि दोनों देशों ने उभरती तकनीकों, आर्थिक सुरक्षा और नवाचार के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। भारत-फ्रांस के बीच हुईं 13 बड़ी डील्स 1. इंडिया-फ्रांस इनोवेशन रोडमैप 2030 को मंजूरी दोनों देशों ने अनुसंधान, नवाचार और उभरती प्रौद्योगिकियों में दीर्घकालिक सहयोग के लिए ‘इंडिया-फ्रांस इनोवेशन रोडमैप 2030’ अपनाया। 2. AI पर संयुक्त वर्किंग ग्रुप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उसके वैश्विक नियमन पर सहयोग बढ़ाने के लिए भारत-फ्रांस संयुक्त AI वर्किंग ग्रुप बनाया जाएगा। 3. पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने के लिए एक उच्चस्तरीय तंत्र स्थापित करने का फैसला किया। 4. आर्थिक सुरक्षा संवाद की शुरुआत महत्वपूर्ण खनिजों, सप्लाई चेन सुरक्षा और रणनीतिक संसाधनों पर सहयोग बढ़ाने के लिए ‘इकोनॉमिक सिक्योरिटी डायलॉग’ शुरू किया जाएगा। 5. फ्रांस में UPI का विस्तार भारत के डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म UPI के उपयोग को फ्रांस में और व्यापक बनाने पर सहमति बनी। 6. 19 संस्थागत समझौतों पर हस्ताक्षर दोनों देशों के स्टार्टअप, अनुसंधान और नवाचार से जुड़े संस्थानों के बीच 19 अलग-अलग समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। 7. कानपुर में एयरोनॉटिक्स सेंटर ऑफ एक्सीलेंस राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (NSTI), कानपुर में एयरोनॉटिक्स और संबद्ध क्षेत्रों के लिए राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया जाएगा। 8. पेरिस के स्टेशन-एफ में 10 नए भारतीय स्टार्टअप दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप परिसरों में शामिल पेरिस के स्टेशन-एफ में 10 अतिरिक्त भारतीय स्टार्टअप्स को जगह दी जाएगी। 9. डिजिटल साइंस सेंटर की स्थापना भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) और फ्रांस की INRIA संस्था मिलकर डिजिटल साइंस सेंटर स्थापित करेंगे। 10. पेरिस-सैकले विश्वविद्यालय में इंडिया चेयर ‘AI, Innovation and Culture’ विषय पर आईसीसीआर इंडिया चेयर की स्थापना की जाएगी। 11. स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और फ्रांस के हेल्थ डेटा हब के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर हुए। 12. रेलवे और हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं में साझेदारी भारत में रेलवे आधुनिकीकरण और हाई-स्पीड रेल विकास के लिए सहयोग बढ़ाने संबंधी घोषणा-पत्र जारी किया गया। 13. अंतरिक्ष और सुरक्षा सहयोग को नई मजबूती इसरो और फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसी CNES ने माइक्रोग्रैविटी अनुसंधान और मानव अंतरिक्ष मिशनों में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया। साथ ही गोपनीय सूचनाओं के आदान-प्रदान और सुरक्षा से जुड़ा जनरल सिक्योरिटी एग्रीमेंट भी हुआ। रक्षा और परमाणु ऊर्जा पर विशेष जोर बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई। दोनों नेताओं ने रक्षा उपकरणों के सह-डिजाइन, सह-विकास और सह-उत्पादन पर विशेष जोर दिया। इसके अलावा नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भी व्यापक चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने माना कि भारत में लागू ‘शांति अधिनियम’ (SHANTI Act) के बाद छोटे और उन्नत मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMRs) के क्षेत्र में सहयोग की नई संभावनाएं खुली हैं। छात्रों और पेशेवरों के लिए खुलेंगे नए अवसर प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांसीसी विश्वविद्यालयों को नई शिक्षा नीति के तहत भारत में अपने परिसर खोलने का निमंत्रण दिया। वहीं राष्ट्रपति मैक्रों ने फ्रांस में अध्ययन कर रहे भारतीय छात्रों को अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। दोनों नेताओं ने छात्रों और पेशेवरों की आवाजाही आसान बनाने तथा शैक्षणिक योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता बढ़ाने पर भी चर्चा की। भारत-फ्रांस संबंधों को मिलेगी नई गति नीस स्थित विला केरीलोस में हुई यह बैठक उस समय हुई है जब भारत और फ्रांस ने इस वर्ष की शुरुआत में अपने संबंधों को ‘स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ के स्तर तक पहुंचाया है। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारत-फ्रांस साझेदारी केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक शांति, स्थिरता और आर्थिक समृद्धि में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। फ्रांस दौरे के पहले चरण के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्लोवाकिया की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर रवाना हो गए हैं। इसके बाद वह दोबारा फ्रांस लौटकर जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।