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JPSC-JSSC Protest: Students Say “CM Hemant Soren Is Like an Elder Brother”

'हेमंत सोरेन बड़े भाई... निकालेंगे आभार यात्रा', जानें CM आवास घेराव पर छात्रों ने क्या कहा?

kalpana अगस्त 17, 2026 0
JPSC-JSSC aspirants protesting in Ranchi and seeking solutions to recruitment exam issues
JPSC-JSSC Student Protest: Aspirants Say They Want Solutions, Not Confrontation

रांची: जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं में सुधार, कथित अनियमितताओं की जांच और लंबित मांगों को लेकर छात्रों का आंदोलन 23वें दिन भी जारी है. रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में जुटे अभ्यर्थियों के बीच मुख्यमंत्री आवास के प्रस्तावित घेराव और मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर चर्चा तेज है. हालांकि, आंदोलन से जुड़े कई छात्रों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य सरकार गिराना या टकराव पैदा करना नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और अपने भविष्य को लेकर ठोस समाधान हासिल करना है.

छात्रों का कहना है कि सरकार यदि उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक फैसला लेती है, तो वे आंदोलन खत्म कर दोबारा अपनी पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लौटना चाहते हैं.

सीएम पर भरोसा, बातचीत से समाधान की उम्मीद

जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच से जुड़े अभ्यर्थी राजेश ने कहा कि छात्रों को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर भरोसा है. उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि सरकार आंदोलनरत छात्रों के साथ दोबारा संवाद करे और उनकी मांगों पर ठोस निर्णय ले.

राजेश के मुताबिक, पिछले 23 दिनों से छात्र आंदोलन कर रहे हैं और लगातार समय बीतने के कारण अभ्यर्थियों में निराशा बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि छात्र टकराव नहीं चाहते, बल्कि बातचीत के माध्यम से समाधान चाहते हैं.

तिरंगा यात्रा से दिया एकजुटता का संदेश

राजेश ने बताया कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर छात्रों ने तिरंगा यात्रा निकालकर अपनी एकजुटता का संदेश दिया. उनका कहना है कि छात्र किसी तरह की हिंसा या गलत कदम उठाने के पक्ष में नहीं हैं.

उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री खुद छात्रों से बातचीत कर उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेते हैं, तो यही छात्र उनके सम्मान में विशाल आभार मार्च निकाल सकते हैं. यहां तक कि आने वाले चुनाव में भी मुख्यमंत्री के समर्थन की बात छात्र कर सकते हैं.

सीजीएल परीक्षा रद्द करने की मांग क्यों?

जेएसएससी सीजीएल परीक्षा को रद्द करने की मांग पर राजेश ने कहा कि छात्रों का आंदोलन केवल आरोपों पर आधारित नहीं है. उनका दावा है कि परीक्षा से जुड़े कुछ तथ्य जांच एजेंसियों की कार्रवाई के दौरान सामने आये हैं.

उन्होंने नेपाल एंगल, अभय तिवारी प्रकरण समेत अन्य मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब जांच के दौरान कुछ तथ्य सामने आये हैं, तो छात्रों की ओर से परीक्षा रद्द करने की मांग को पूरी तरह गलत नहीं कहा जा सकता.

'मुख्यमंत्री का इस्तीफा समाधान नहीं'

11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षा से जुड़े याचिकाकर्ता और जेपीएससी-जेएसएससी न्याय मंच के सदस्य प्रेम कुमार ने कहा कि छात्र मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का इस्तीफा नहीं चाहते.

उन्होंने मुख्यमंत्री के स्वतंत्रता दिवस संबोधन का जिक्र करते हुए कहा कि छात्रों और परीक्षा सुधार के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता दिखाई है. प्रेम कुमार के अनुसार, यदि व्यवस्था में अधिकारियों के स्तर पर गड़बड़ी है, तो केवल सरकार बदलने से समस्या खत्म नहीं होगी. इसलिए छात्रों की मांग किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार के लिए है.

CBI जांच या परीक्षा रद्द करने पर ठोस फैसला मांगा

प्रेम कुमार ने सरकार से जेएसएससी सीजीएल समेत विवादित परीक्षाओं के मामले में सीबीआई जांच या परीक्षा रद्द करने को लेकर स्पष्ट फैसला लेने की मांग की.

उन्होंने कहा कि यदि सरकार इन मुद्दों पर ठोस पहल करती है, तो मुख्यमंत्री आवास के घेराव जैसे कार्यक्रमों को भी टाला जा सकता है.

छात्रों ने कुछ तत्काल मांगों को पूरा करने की भी अपील की है. इनमें—

  • जेपीएससी की कॉपियां दिखाना
  • जेएसएससी का स्कोरकार्ड उपलब्ध कराना
  • कटऑफ जारी करना
  • छात्रों की मांगों पर सरकार की स्थिति स्पष्ट करना
  • श्वेत पत्र जारी करना

शामिल हैं.

2000 पदों पर नई CGL भर्ती की मांग

प्रेम कुमार ने कहा कि कथित पेपर लीक के कारण कई छात्रों का एक अवसर प्रभावित हुआ है. ऐसे में सरकार को कम से कम 2000 पदों पर जेएसएससी सीजीएल की नई भर्ती शुरू करनी चाहिए.

इसके साथ ही उन्होंने जेपीएससी में कम से कम 300 पदों पर अधियाचना निकालने और प्रभावित अभ्यर्थियों को उम्र सीमा में राहत देने की मांग की. उनका कहना है कि सरकार इन मांगों पर पहल करती है, तो छात्र आंदोलन खत्म कर अपनी पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी पर लौट सकते हैं.

'मुख्यमंत्री बड़े भाई, गलत नहीं होने देंगे'

अभ्यर्थी रामवतार ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन छात्रों के लिए बड़े भाई की तरह हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें भरोसा है कि मुख्यमंत्री छात्रों के साथ गलत नहीं होने देंगे.

रामवतार के मुताबिक, सरकार और छात्रों के बीच पहले तीन दौर की बातचीत हो चुकी है और कई मांगों पर सहमति भी बनी थी. कुछ मांगों पर सरकार ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर होने की बात कही थी और विचार-विमर्श के लिए समय मांगा था.

हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ कोचिंग माफिया की वजह से बातचीत की प्रक्रिया प्रभावित हुई.

आंदोलन में बाहरी लोगों के शामिल होने का आरोप

रामवतार ने कहा कि आंदोलन छात्रों का है और इसे छात्रों को ही चलाने देना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ बाहरी लोग आंदोलन में शामिल होकर छात्रों को भड़काने या आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि आंदोलन समाप्त होने के बाद ऐसे लोगों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए. छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से चल रहा है और उनका उद्देश्य न तो हिंसा करना है और न ही सरकार गिराना.

'छात्र तलवार नहीं, कलम उठाने वाले हैं'

अभ्यर्थी रवि ने कहा कि छात्रों को भड़काने की कोशिश की जा रही है, लेकिन आंदोलनकारी छात्र किसी हिंसक गतिविधि का हिस्सा नहीं बनना चाहते.

उन्होंने कहा, छात्र पढ़ाई करने वाले हैं और कलम के जरिए अपना भविष्य बनाने में विश्वास रखते हैं. रवि ने मुख्यमंत्री से जेएसएससी सीजीएल और 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षा के मामले में परीक्षा रद्द करने या सीबीआई जांच कराने की मांग दोहरायी.

उन्होंने सरकार से छात्रों के प्रतिनिधिमंडल को दोबारा बुलाकर बातचीत शुरू करने की अपील की. साथ ही टीजीटी, पीजीटी, आशुलिपिक और एलडीसी समेत अन्य लंबित मांगों पर भी स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की.

23 दिन बाद भी आंदोलन जारी, छात्रों को अब समाधान का इंतजार

लगातार 23 दिनों से आंदोलन कर रहे छात्रों का कहना है कि बारिश, धूप और गर्मी के बीच धरना जारी रखना मुश्किल होता जा रहा है. आंदोलन स्थल पर भोजन-पानी की समस्या और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी सामने आ रही हैं.

छात्रों का कहना है कि वे अपना समय आंदोलन में नहीं, बल्कि पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगाना चाहते हैं. इसलिए सरकार को अब बातचीत का रास्ता खोलकर उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय लेना चाहिए.

सरकार फैसला ले तो 'घेराव' की जगह 'आभार यात्रा'

छात्रों ने साफ संकेत दिया है कि वे टकराव नहीं चाहते. उनका कहना है कि यदि सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक फैसला लेती है, तो 20 अगस्त के मुख्यमंत्री आवास घेराव जैसे कार्यक्रम को टाला जा सकता है.

छात्रों का कहना है कि अगर सरकार उनके भविष्य को लेकर ठोस कदम उठाती है, तो वे आंदोलन समाप्त कर पढ़ाई पर लौटेंगे और मुख्यमंत्री के सम्मान में 'आभार यात्रा' भी निकालेंगे.

 

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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MMDR Bill को लेकर बाबूलाल मरांडी का हेमंत सोरेन और JMM पर हमला
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रांची। खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 को लेकर झारखंड में सियासत तेज हो गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की ओर से विधेयक के विरोध में आंदोलन की घोषणा के बाद नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि खनिज विधेयक को लेकर सरकार की ओर से किया जा रहा विरोध छात्रों के आंदोलन को भटकाने की कोशिश है।   संशोधन विधेयक में बड़ा बदलाव नहीं: बाबूलाल     बीजेपी प्रदेश कार्यालय में मीडिया से बातचीत में बाबूलाल मरांडी ने कहा कि संशोधन विधेयक में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। उनके मुताबिक, इसमें राज्यों की ओर से प्रमुख खनिजों पर अलग-अलग तरीके से लगाए जाने वाले कर पर नियंत्रण की व्यवस्था की गई है।   उन्होंने कहा कि विधेयक के कानून बनने के बाद राज्य सरकारों के लिए इस तरह से सेस लगाने की व्यवस्था प्रभावित होगी। बाबूलाल ने झारखंड सरकार पर कोयला और लौह अयस्क पर सेस लगाने को लेकर भी सवाल उठाए।   'सांसदों ने संसद में विरोध क्यों नहीं किया?'     बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जब विधेयक लोकसभा और राज्यसभा में पारित हो रहा था, तब विपक्षी सांसदों को सदन में बहस और विरोध करना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय इस मुद्दे पर प्रभावी तरीके से चर्चा नहीं की गई और अब झारखंड में आंदोलन की बात कही जा रही है।   उन्होंने कहा कि MMDR एक्ट में एकरूपता लाने का प्रावधान किया गया है। उनका दावा है कि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग शुल्क की वजह से छोटे कारोबारियों को परेशानी होती थी।   'बिना केंद्र की अनुमति के राज्य नहीं लगा सकेंगे टैक्स'     बाबूलाल मरांडी ने कहा कि नए प्रावधान के तहत केंद्र की अनुमति के बिना राज्य सरकारों द्वारा कुछ प्रकार के अतिरिक्त कर लगाने पर रोक लगेगी। उन्होंने कहा कि यह कानून सिर्फ झारखंड के लिए नहीं है, क्योंकि देश के कई राज्यों में खनिज संसाधन मौजूद हैं।   उन्होंने रॉयल्टी में राज्य और केंद्र के हिस्से का भी जिक्र किया। बाबूलाल के अनुसार, पहले रॉयल्टी में राज्यों को 60.24 फीसदी हिस्सा मिलता था, जबकि अब यह हिस्सा बढ़कर 88.53 फीसदी और केंद्र का हिस्सा 11.47 फीसदी हो गया है।   सेस को लेकर राज्य सरकार पर हमला     नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि झारखंड सरकार ने 2024 में सेस से जुड़े नियम बनाए और इसके बाद तीन बार सेस की राशि बढ़ाई गई। उन्होंने दावा किया कि फिलहाल कोयले पर राज्य सरकार 450 रुपये प्रति टन और लौह अयस्क पर 600 रुपये प्रति टन सेस ले रही है।   उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्यों ओडिशा और छत्तीसगढ़ में सेस की दरें इससे कम हैं। उनके मुताबिक, इस तरह के अतिरिक्त सेस से झारखंड को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है।   'छात्र आंदोलन को भटकाने की कोशिश'     बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार MMDR एक्ट को लेकर आंदोलन की बात करके JPSC-JSSC छात्र आंदोलन के मुद्दे को भटकाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगों पर सरकार को स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।   उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि छात्रों को बार-बार वार्ता के नाम पर लटकाया और भटकाया जा रहा है। बाबूलाल ने कहा कि सरकार की ओर से दोबारा वार्ता के लिए बुलाए जाने को लेकर भी छात्रों को सतर्क रहना चाहिए।

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छाताबाद भू-धंसान प्रभावितों के समर्थन में उतरी कांग्रेस, बीसीसीएल सीएमडी से वार्ता का ऐलान

धनबाद। कतरास थाना क्षेत्र के छाताबाद में 7 अगस्त को हुए भू-धंसान के बाद प्रभावित परिवारों का आंदोलन लगातार जारी है। पिछले नौ दिनों से प्रभावित लोग STG आउटसोर्सिंग कंपनी के स्थल के सामने धरने पर बैठे हैं। अब मामले को लेकर कांग्रेस नेताओं ने प्रभावितों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनीं और बीसीसीएल प्रबंधन से बातचीत का आश्वासन दिया।   कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने किया घटनास्थल का दौरा     कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू, सह प्रभारी भूपेंद्र मरावी, स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी, बेरमो विधायक अनूप सिंह, पूर्व विधायक जलेश्वर महतो, अंबा प्रसाद और कांग्रेस जिलाध्यक्ष समेत कई नेता आंदोलन स्थल पर पहुंचे।   इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने भू-धंसान प्रभावित क्षेत्र का भी जायजा लिया। नेताओं ने प्रभावित परिवारों से बातचीत कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली।   बीसीसीएल सीएमडी से होगी वार्ता     कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने घोषणा की कि प्रभावित परिवारों की मांगों को लेकर बीसीसीएल सीएमडी से बातचीत की जाएगी। इस दौरान बेरमो विधायक अनूप सिंह ने धरने पर बैठे लोगों की फोन पर बीसीसीएल सीएमडी मनोज अग्रवाल से बात भी कराई।   बताया गया कि गैर-रैयत प्रभावितों के लिए ढाई लाख रुपये और रैयतों को जमीन के मूल्य की चार गुना राशि देने के साथ दो फ्लैट उपलब्ध कराने की मांग पर चर्चा हुई। प्रभावितों के प्रतिनिधिमंडल की बीसीसीएल कार्यालय में वार्ता कराने की बात भी कही गई।   स्वास्थ्य मंत्री ने दिया मदद का भरोसा     स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि भू-धंसान में करीब 15 घर जमींदोज हुए हैं और प्रभावित परिवार आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बीसीसीएल सीएमडी से वार्ता कर समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।   मंत्री ने प्रशासनिक अधिकारियों को भी प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता देने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अगर बातचीत से समाधान नहीं निकलता है तो वह बीसीसीएल मुख्यालय कोयला भवन के गेट पर धरना देंगे।   कांग्रेस नेताओं ने सांसद पर लगाए आरोप     मौके पर कांग्रेस नेताओं ने धनबाद सांसद ढुल्लू महतो पर भी निशाना साधा। बेरमो विधायक अनूप सिंह ने सांसद पर कई गंभीर आरोप लगाए और कहा कि छाताबाद के प्रभावित परिवारों के लिए उचित मुआवजा और सुरक्षित पुनर्वास सुनिश्चित किया जाना चाहिए।   वहीं, धनबाद सांसद ढुल्लू महतो और बाघमारा विधायक शत्रुध्न महतो की ओर से कांग्रेस पर घटना के बाद प्रभावितों की मदद नहीं करने का आरोप लगाया गया है।   कांग्रेस प्रभारी बोले- दोबारा नहीं हो ऐसी घटना     प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने कहा कि पार्टी छाताबाद के प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी भू-धंसान की घटना दोबारा न हो, यह सुनिश्चित करना बीसीसीएल प्रबंधन की जिम्मेदारी है।   फिलहाल प्रभावित परिवारों की नजर बीसीसीएल प्रबंधन के साथ होने वाली बातचीत पर है। मुआवजा और सुरक्षित पुनर्वास को लेकर समाधान निकलता है या आंदोलन आगे भी जारी रहता है, यह वार्ता के नतीजे पर निर्भर करेगा।

ranjan kumar tiwari अगस्त 17, 2026 0
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JSSC सचिव के आवास और कार्यालय पर CID की छापेमारी
JPSC-JSSC Protest: JSSC सचिव के ठिकानों पर CID की छापेमारी

रांची। JSSC CGL परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच तेज करते हुए CID ने सोमवार को JSSC सचिव सुधीर गुप्ता के आवास और JSSC कार्यालय पर छापेमारी की। जांच टीम ने कई घंटे तक तलाशी ली और परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों की पड़ताल की। कार्रवाई के बाद मामले में नए खुलासे की संभावना बढ़ गई है।   सुबह पांच बजे सचिव के आवास पर पहुंची CID टीम     जानकारी के अनुसार CID की टीम सोमवार सुबह करीब पांच बजे मोरहाबादी स्थित हरिहर सिंह रोड पर सुधीर गुप्ता के आवास पहुंची। टीम ने वहां घंटों तलाशी ली और परीक्षा से जुड़े कई दस्तावेजों की जांच की।   इसके बाद टीम JSSC कार्यालय पहुंची, जहां भी दस्तावेजों और रिकॉर्ड को खंगाला गया।   सचिव से पूछताछ, रिकॉर्ड की जांच जारी     बताया जा रहा है कि CID ने JSSC सचिव सुधीर गुप्ता को नामकुम थाने बुलाकर पूछताछ की। इस दौरान आयोग के कामकाज और परीक्षा से संबंधित रिकॉर्ड की भी जांच की गई।   जांच एजेंसी को उम्मीद है कि दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड से परीक्षा में कथित गड़बड़ी से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं।   JSSC CGL के सफल अभ्यर्थियों के दस्तावेज भी जांचे जाएंगे     CID अब JSSC CGL परीक्षा में सफल हुए अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की भी जांच करने की तैयारी में है। जांच के दायरे में सभी सफल अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड की पड़ताल किए जाने की बात सामने आई है।   जांच में यदि किसी अभ्यर्थी या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता के प्रमाण मिलते हैं तो उसके आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।   पेपर लीक और अनियमितता के आरोपों की जांच     JSSC CGL यानी JGGLCCE-2023 परीक्षा को लेकर पहले से ही कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों की जांच चल रही है। अब सचिव के आवास और कार्यालय पर हुई कार्रवाई से जांच का दायरा और महत्वपूर्ण हो गया है।   CID दस्तावेजों के साथ-साथ डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। इन्हीं रिकॉर्ड से परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की जा रही है।   छात्र आंदोलन के बीच बढ़ी CID की कार्रवाई     JPSC-JSSC परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग को लेकर अभ्यर्थी लगातार आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों की प्रमुख मांगों में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई शामिल है।   ऐसे में CID की ताजा कार्रवाई को आंदोलन के बीच महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, परीक्षा में वास्तव में किस स्तर पर गड़बड़ी हुई और कौन जिम्मेदार है, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

ranjan kumar tiwari अगस्त 17, 2026 0
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