झारखंड

JPSC-JSSC परीक्षा विवाद पर बाबूलाल ने CBI जांच की मांग की

JPSC-JSSC परीक्षा रद्द करने पर बाबूलाल मरांडी का हमला, बोले- CBI जांच से ही मिलेगा छात्रों को न्याय

ranjan kumar tiwari अगस्त 19, 2026 0
JPSC-JSSC परीक्षा विवाद पर बाबूलाल मरांडी की CBI जांच की मांग
बाबूलाल मरांडी ने JPSC-JSSC परीक्षा मामले में CBI जांच की मांग की

रांची। जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर झारखंड की सियासत गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि परीक्षाएं रद्द करना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच CBI से कराई जाए, ताकि कथित गड़बड़ी, नौकरी खरीद-फरोख्त और इसके पीछे शामिल लोगों का पता चल सके।

 

परीक्षाएं रद्द करना समाधान नहीं- बाबूलाल

 

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि बीजेपी शुरू से ही परीक्षाएं रद्द करने के बजाय पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रही है। उनका आरोप है कि सरकार परीक्षा रद्द करने का फैसला लेकर अपनी पीठ थपथपा रही है, जबकि छात्रों की मुख्य मांग कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच है।

उन्होंने कहा कि मीडिया में सामने आई रिपोर्टों में जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

 

CID जांच पर भी उठाए सवाल

 

बीजेपी नेता ने CID की जांच पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि CID पहले इन मामलों की जांच कर चुकी है और अदालत के समक्ष ऐसी रिपोर्ट पेश की गई थी, जिसमें परीक्षा में गड़बड़ी या नौकरी की बिक्री से इनकार किया गया था।

बाबूलाल ने कहा कि अगर पहले की जांच पर ही सवाल उठ रहे हैं तो उसी एजेंसी से दोबारा जांच कराने से छात्रों को न्याय मिलने की उम्मीद कम है। उन्होंने जांच को कथित तौर पर गलत दिशा में ले जाने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग की।

 

JSSC चेयरमैन को हटाने पर सवाल

 

बाबूलाल मरांडी ने JSSC की कई परीक्षाओं को लेकर सामने आए विवादों का हवाला देते हुए आयोग के चेयरमैन पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि जब आयोग लगातार विवादों में है तो उसके चेयरमैन के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कथित तौर पर परीक्षा में शामिल भ्रष्ट अधिकारियों और बिचौलियों को बचाने की कोशिश कर रही है।

 

सरकार पर छात्रों को गुमराह करने का आरोप

 

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन सरकार छात्रों के आंदोलन को खत्म करने के लिए परीक्षा रद्द करने का फैसला लाई है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य छात्रों की मांग का स्थायी समाधान करना नहीं, बल्कि आंदोलन को शांत करना है।

बाबूलाल ने यह भी दावा किया कि परीक्षा रद्द करने के फैसले को लेकर सरकार को अदालत में चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में सरकार को परीक्षा रद्द करने के पर्याप्त आधार और सबूत अदालत के सामने रखने होंगे।

 

अन्नपूर्णा देवी ने भी साधा निशाना

 

वहीं, केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने भी JPSC-CGL परीक्षा को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा। बोकारो में उन्होंने कहा कि सरकार ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लेने में काफी देर की। उनके मुताबिक, छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे थे और कथित धांधली की CBI जांच की मांग कर रहे थे।

अन्नपूर्णा देवी ने सवाल उठाया कि जब छात्र CBI जांच की मांग कर रहे हैं तो राज्य सरकार इससे क्यों बच रही है। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।

 

'CBI जांच से ही सामने आएगा पूरा सच'

 

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि CBI जांच होने से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित तौर पर पैसे देकर नौकरी किसने खरीदी, नौकरी बेचने वाले कौन थे और पूरी प्रक्रिया के पीछे कौन लोग शामिल थे। उन्होंने कहा कि छात्रों को न्याय दिलाने के लिए बीजेपी CBI जांच की मांग पर कायम रहेगी।

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

झारखंड

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BIT Mesra में झारखंड के छात्रों के लिए 50 प्रतिशत सीट आरक्षण की खबर
BIT Mesra में झारखंड के छात्रों के लिए फिर 50% सीटें होंगी आरक्षित, अगले सत्र से लागू होगी व्यवस्था

रांची। झारखंड के विद्यार्थियों के लिए बड़ी खबर है। राज्य सरकार ने BIT Mesra में झारखंड के छात्रों के लिए फिर से 50% सीटें आरक्षित करने का फैसला लिया है। यह व्यवस्था अगले शैक्षणिक सत्र से लागू किए जाने की तैयारी है। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की ओर से जारी पत्र में इसकी जानकारी दी गई है।   अगले सत्र से 50% सीटों पर झारखंड के छात्रों का हक   उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की अवर सचिव मंजू कुमारी की ओर से जारी पत्र के मुताबिक, सरकार अगले शैक्षणिक सत्र से BIT Mesra की कुल सीटों में से 50% सीटें झारखंड के विद्यार्थियों के लिए आरक्षित करना सुनिश्चित करेगी। सरकार का कहना है कि यह फैसला ऑल इंडिया मेरिट में झारखंड के विद्यार्थियों के प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए लिया जाएगा। इस संबंध में सभी पहलुओं पर विचार-विमर्श के बाद आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।   2026-27 में खत्म हो गया था होम-स्टेट कोटा   दरअसल, शैक्षणिक सत्र 2026-27 से BIT Mesra में झारखंड के विद्यार्थियों के लिए लागू 50% होम-स्टेट कोटा समाप्त कर दिया गया था। इसके बाद संस्थान में दाखिले ऑल इंडिया मेरिट के आधार पर किए जा रहे हैं। इससे झारखंड के विद्यार्थियों को मिलने वाला राज्य कोटा प्रभावित हुआ था।   समझौता खत्म होने के बाद बदली व्यवस्था   जानकारी के मुताबिक, BIT Mesra और झारखंड सरकार के बीच हुआ समझौता करीब दो साल पहले समाप्त हो गया था। इसके बाद सरकार की ओर से संस्थान को मिलने वाला आर्थिक सहयोग भी बकाया हो गया। संस्थान ने समझौते के नवीकरण के लिए उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग को कई बार पत्र भेजे, लेकिन समझौते का नवीकरण नहीं हो सका। इसके बाद 2026-27 सत्र में सभी सीटों पर ऑल इंडिया कोटे के तहत नामांकन लेने का फैसला किया गया।   पहले करीब 650 BTech सीटों पर मिलता था लाभ   पहले व्यवस्था के तहत BIT Mesra में BTech की करीब 650 सीटों पर झारखंड के विद्यार्थियों को होम-स्टेट कोटे का लाभ मिलता था। इसके अलावा BC-I और BC-II वर्ग के विद्यार्थियों के लिए भी अलग से सीटें आरक्षित थीं। अब राज्य सरकार के नए फैसले से अगले शैक्षणिक सत्र से झारखंड के विद्यार्थियों को फिर से 50% सीटों का लाभ मिलने की उम्मीद है।   विधायक ने भी मांगी थी जानकारी   BIT Mesra में झारखंड के विद्यार्थियों का कोटा खत्म किए जाने के मामले में विधायक सुरेश कुमार बैठा ने भी उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग से जानकारी मांगी थी। विभाग की ओर से उन्हें कोटा खत्म होने के कारण और भविष्य की योजना से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई गई है। राज्य सरकार के इस फैसले से झारखंड के विद्यार्थियों के लिए BIT Mesra में दाखिले के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 19, 2026 0
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देवघर AIIMS में ऑर्बिटल एथेरेक्टॉमी और IVUS से हृदय रोग का इलाज
Deoghar AIIMS: हृदय चिकित्सा में बड़ी उपलब्धि, 65 वर्षीय मरीज का पहली बार ऑर्बिटल एथेरेक्टॉमी से सफल इलाज

देवघर। झारखंड के देवघर स्थित एम्स ने हृदय चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान में पहली बार ऑर्बिटल एथेरेक्टॉमी और IVUS (Intravascular Ultrasound) गाइडेड कोरोनरी इंटरवेंशन के जरिए एक 65 वर्षीय मरीज का सफल इलाज किया गया। इस उपलब्धि के साथ एम्स देवघर में जटिल हृदय रोगों के इलाज की सुविधाओं का विस्तार हुआ है।   65 वर्षीय मरीज की जटिल थी बीमारी     जिस मरीज का इलाज किया गया, उसे पहले गंभीर हार्ट अटैक आया था, जिसके बाद उसकी आपातकालीन एंजियोप्लास्टी की गई थी। बाद में नियोजित उपचार के दौरान हृदय की एक अन्य रक्त वाहिका में अत्यधिक कैल्शियम जमा होने के कारण गंभीर रुकावट पाई गई।   रुकावट इतनी कठोर थी कि सामान्य बैलून कैथेटर भी उस हिस्से तक नहीं पहुंच पा रहा था। ऐसी जटिल स्थिति में सामान्य एंजियोप्लास्टी करना चुनौतीपूर्ण था।   IVUS और ऑर्बिटल एथेरेक्टॉमी ने आसान किया इलाज     डॉक्टरों ने इस जटिल रुकावट के उपचार के लिए अत्याधुनिक IVUS और ऑर्बिटल एथेरेक्टॉमी तकनीक का इस्तेमाल किया।   IVUS की मदद से डॉक्टर रक्त वाहिका के अंदर मौजूद रुकावट और कैल्शियम की स्थिति को विस्तार से देख सके। वहीं ऑर्बिटल एथेरेक्टॉमी तकनीक के जरिए रक्त वाहिका में जमा कठोर कैल्शियम को संशोधित किया गया, जिससे रुकावट को एंजियोप्लास्टी के लिए तैयार किया जा सका। दोनों तकनीकों की मदद से मरीज की जटिल कोरोनरी रुकावट का सफलतापूर्वक उपचार किया गया।   कैथ लैब शुरू होने के बाद 200 हृदय प्रक्रियाएं पूरी     एम्स देवघर के हृदय रोग विभाग ने अक्टूबर 2025 में कैथ लैब शुरू होने के बाद 200 हृदय संबंधी प्रक्रियाएं पूरी करने का महत्वपूर्ण पड़ाव भी हासिल किया है।   यह प्रक्रिया हृदय रोग विभाग के डॉक्टर सीबी पांडे और डॉक्टर स्मारक के नेतृत्व में विशेषज्ञ टीम ने की।   झारखंड में चुनिंदा केंद्रों में शामिल हुआ एम्स देवघर     इन अत्याधुनिक तकनीकों की उपलब्धता के बाद एम्स देवघर झारखंड के उन चुनिंदा केंद्रों में शामिल हो गया है, जहां जटिल हृदय रोगों के इलाज की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।   अब यहां मरीजों को Complex PCI, Calcium Modification, Intravascular Imaging, Conduction System Pacing (CSP) और Structural Heart Intervention (SHI) जैसी उन्नत प्रक्रियाओं की सुविधा मिल सकेगी। एम्स देवघर की इस उपलब्धि से झारखंड और आसपास के राज्यों के मरीजों को गंभीर हृदय रोगों का आधुनिक उपचार अपने क्षेत्र के नजदीक मिल सकेगा।

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JSSC-JPSC Student Protest
छात्रों की CBI जांच की मांग पर अब भी अड़चन, आंदोलनकारी बोले- मांग पूरी होने तक संघर्ष जारी

रांची। झारखंड में JSSC-CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले के बाद भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। आंदोलनकारी छात्र अब कथित अनियमितताओं की CBI जांच की मांग पर अड़े हुए हैं और उनका कहना है कि केवल परीक्षा रद्द करना पर्याप्त नहीं है। छात्रों ने स्पष्ट किया है कि जांच की मांग पूरी होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।    JSSC-CGL समेत TDPL की परीक्षाएं रद्द   मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने के साथ TDPL द्वारा 2014 से आयोजित परीक्षाओं, उनके परिणामों और चयन प्रक्रियाओं को भी रद्द करने का फैसला लिया है। सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में संभावित गड़बड़ियों की व्यापक जांच कराने की बात कही है।   सरकार के इस फैसले को आंदोलनकारी छात्रों की प्रमुख मांगों में से एक की पूर्ति माना जा रहा है। हालांकि, छात्रों का कहना है कि मामले में जिम्मेदार लोगों की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए स्वतंत्र जांच जरूरी है।   CBI जांच के बिना आंदोलन खत्म करने को तैयार नहीं छात्र   छात्र नेताओं का कहना है कि परीक्षा रद्द होने के बावजूद CBI जांच की उनकी मुख्य मांग अभी पूरी नहीं हुई है। इसी वजह से आंदोलन को पूरी तरह समाप्त करने को लेकर सहमति नहीं बनी है। छात्रों की ओर से यह भी कहा जा रहा है कि परीक्षा व्यवस्था में भविष्य में ऐसी गड़बड़ियां दोबारा न हों, इसके लिए जवाबदेही तय करना जरूरी है। कुछ प्रदर्शनकारियों ने 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास के घेराव की चेतावनी भी दी है, हालांकि आंदोलन की आगे की रणनीति सरकार के अगले कदम पर निर्भर करेगी।   देवेंद्र नाथ महतो ने खत्म किया अनशन   इस बीच छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने 16 दिन की भूख हड़ताल समाप्त कर दी है। सरकार द्वारा JSSC-CGL समेत TDPL से जुड़ी परीक्षाएं रद्द किए जाने के बाद उन्होंने फैसले का स्वागत किया और इसे छात्रों के संघर्ष की बड़ी उपलब्धि बताया।   हालांकि, अनशन खत्म होने के बावजूद आंदोलन से जुड़े अन्य छात्र CBI जांच और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था की मांग को लेकर अपना रुख बनाए हुए हैं।   आगे की रणनीति पर छात्रों की नजर   अब छात्र सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं कि कथित परीक्षा अनियमितताओं की जांच किस एजेंसी से और किस समयसीमा में कराई जाएगी। दूसरी ओर, सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए समिति बनाने का फैसला भी किया है।   ऐसे में JSSC-CGL विवाद का अगला चरण CBI जांच की मांग और रद्द हुई परीक्षाओं से प्रभावित अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर केंद्रित हो सकता है। खासकर चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियों पर पड़े असर को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

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