द प्रिंट के एक कार्यक्रम में बोलते हुए जनरल चौहान ने कहा कि 9 मई तक पाकिस्तान की ओर से भारत को 48 घंटे में सबक सिखाने जैसे दावे किए जा रहे थे। लेकिन 10 मई की सुबह हालात पूरी तरह बदल गए और पाकिस्तान ने भारत से संपर्क कर बातचीत की इच्छा जताई।
जनरल अनिल चौहान ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से सीजफायर का प्रस्ताव उनके लिए भी अप्रत्याशित था।
उन्होंने कहा,
"10 मई की सबसे बड़ी हैरानी यह थी कि पाकिस्तान ने खुद फोन कर बातचीत की इच्छा जताई। उस समय तक हमने अपने सैन्य अभियान का आधा हिस्सा भी पूरा नहीं किया था।"
उनके मुताबिक, पाकिस्तान ने लगभग आठ घंटे के भीतर ही बातचीत का रास्ता चुन लिया, जबकि भारतीय सेना अपने अगले चरण की कार्रवाई की तैयारी कर चुकी थी।
पूर्व CDS के अनुसार, भारत चाहता था कि सीजफायर से पहले उसके सभी रणनीतिक सैन्य उद्देश्य पूरे हो जाएं।
भारतीय सशस्त्र बलों की योजना थी कि पाकिस्तान के ऐसे सभी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जाए, जहां से भविष्य में भारत के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की संभावना हो। इसलिए भारत ने पाकिस्तान के प्रस्ताव के बावजूद कुछ समय तक सैन्य अभियान जारी रखा।
जनरल चौहान ने बताया कि 10 मई की सुबह भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के सरगोधा और नूर खान एयरबेस समेत कई महत्वपूर्ण एयरबेस पर सटीक हमले किए।
इन हमलों के कारण:
जनरल चौहान के अनुसार, पाकिस्तान की सेना को यह भ्रम था कि उसने रातभर भारत को भारी नुकसान पहुंचाया है, लेकिन भारतीय वायुसेना की कार्रवाई ने पूरे समीकरण बदल दिए।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को लगा कि अब बातचीत ही सबसे बेहतर विकल्प है, क्योंकि सैन्य स्थिति उसके नियंत्रण से बाहर जाती दिख रही थी।
पूर्व CDS ने बताया कि पाकिस्तान ने डीजीएमओ (Director General of Military Operations) हॉटलाइन के माध्यम से भारत से संपर्क किया।
उनके अनुसार, जब यह बातचीत शुरू हुई, तब भी भारतीय सैन्य कार्रवाई पूरी तरह समाप्त नहीं हुई थी और भारतीय सेना अपने अभियान पर आगे बढ़ रही थी।
भारत ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले के जवाब में 6-7 मई 2025 की रात ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था।
इस आतंकी हमले में:
इसके बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए।
जब पाकिस्तान ने भारतीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की, तब भारत ने जवाबी कार्रवाई का दायरा बढ़ाया। पूर्व CDS के अनुसार, इसी दौरान पाकिस्तान की वायुसेना को भारी दबाव का सामना करना पड़ा और अंततः उसने सीजफायर की पहल की।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रुद्रप्रयाग, एजेंसियां। उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। रुद्रप्रयाग में दोनों नदियों के उफान को देखते हुए प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। भारी बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा भी बढ़ गया है। नदियों का बढ़ा जलस्तर रुद्रप्रयाग क्षेत्र में लगातार बारिश के बाद अलकनंदा और मंदाकिनी के जलस्तर में तेज वृद्धि दर्ज की गई। नदी के आसपास रहने वाले लोगों और संवेदनशील इलाकों में प्रशासन की ओर से विशेष निगरानी रखी जा रही है। नदियों का जलस्तर बढ़ने के साथ निचले इलाकों में बाढ़ की आशंका भी बढ़ गई है। प्रशासन ने लोगों से नदी किनारे जाने से बचने और स्थानीय चेतावनियों का पालन करने की अपील की है। भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित उत्तराखंड में भारी बारिश का असर सड़क और यातायात व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण भूस्खलन और मलबा आने की घटनाओं का खतरा बना हुआ है। मौसम विभाग ने भी उत्तराखंड में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। ऐसी स्थिति में पहाड़ी सड़कों पर यात्रा करने वालों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। प्रशासन अलर्ट, संवेदनशील इलाकों पर नजर नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों को सतर्क रखा गया है। संवेदनशील इलाकों में स्थिति पर नजर रखी जा रही है ताकि जलस्तर और बढ़ने पर समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके। अलकनंदा और मंदाकिनी के जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए रुद्रप्रयाग और आसपास के नदी किनारे वाले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। चारधाम यात्रा और आवाजाही पर भी असर भारी बारिश के कारण उत्तराखंड के कई हिस्सों में सड़क संपर्क प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। भूस्खलन और मलबे के कारण मार्ग बाधित होने पर यातायात को अस्थायी रूप से रोका जा सकता है। प्रशासन ने लोगों से मौसम और सड़क की स्थिति की ताजा जानकारी लेकर ही यात्रा करने की अपील की है। मानसून के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक मौसम बदलने और नदी का जलस्तर बढ़ने को देखते हुए अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र में लगातार जारी गतिरोध के बीच सरकार और विपक्ष के बीच संवाद की नई पहल ने समाधान की उम्मीद जगाई है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात कर संसद की बाधित कार्यवाही को सामान्य करने पर चर्चा की। राजनीतिक मतभेदों के बीच यह पहल लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। कई मुद्दों पर टकराव, ठप रही संसद मानसून सत्र की शुरुआत NEET पेपर लीक और छात्र आंदोलन के माहौल में हुई थी। हालांकि आंदोलन समाप्त हो चुका है, लेकिन उससे जुड़े राजनीतिक मुद्दे अब भी संसद में गतिरोध का कारण बने हुए हैं। CJP के 'संसद चलो मार्च' के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई, राम मंदिर चंदा चोरी के आरोप और अन्य विवादों को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है। इसके चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही है। बिना चर्चा पारित हुए कई विधेयक सत्र के दौरान अब तक लोकसभा में एक भी प्रश्नकाल पूरी तरह संचालित नहीं हो सका है। सरकार ने पांच विधेयक पारित कराए हैं, लेकिन अधिकांश पर विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी। लोक परीक्षा संशोधन विधेयक जैसे महत्वपूर्ण बिल पर भी पर्याप्त बहस नहीं हुई। संसदीय विशेषज्ञों का मानना है कि कानून बनाने की प्रक्रिया में व्यापक चर्चा लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। प्रश्नकाल क्यों है लोकतंत्र की ताकत? प्रश्नकाल संसद की जवाबदेही व्यवस्था का सबसे अहम हिस्सा माना जाता है। इसी दौरान विपक्ष सरकार से सीधे सवाल पूछता है और जनता से जुड़े मुद्दों को सदन में उठाता है। इससे सरकार की नीतियों की समीक्षा होती है और आवश्यक सुधार का अवसर मिलता है। लगातार बाधित हो रहा प्रश्नकाल लोकतांत्रिक जवाबदेही को भी प्रभावित कर रहा है। बजट सत्र जैसा प्रदर्शन दोहराने की चुनौती पिछले बजट सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद होने के बावजूद लोकसभा की उत्पादकता 93 प्रतिशत और राज्यसभा की 110 प्रतिशत रही थी। इस बार भी उम्मीद जताई जा रही है कि संवाद के जरिए गतिरोध खत्म होगा और लंबित महत्वपूर्ण विधेयकों, जिनमें प्रस्तावित FCRA विधेयक और अन्य अहम बिल शामिल हैं, पर सार्थक चर्चा हो सकेगी। संवाद ही लोकतंत्र का सबसे मजबूत रास्ता लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष दोनों की भूमिका समान रूप से महत्वपूर्ण होती है। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह विपक्ष से लगातार संवाद बनाए रखे, जबकि विपक्ष की भी जिम्मेदारी है कि विरोध के साथ-साथ बहस और चर्चा में सक्रिय भागीदारी करे। यदि दोनों पक्ष टकराव की बजाय संवाद को प्राथमिकता दें, तो संसद की कार्यवाही अधिक प्रभावी होगी और जनता से जुड़े मुद्दों पर बेहतर फैसले लिए जा सकेंगे।
1726 - सम्राट कैरेल छठे और टसरीना कैथरीन महान ने सैन्य संधि पर हस्ताक्षर किये। 1774 - शेखर आंदोलन के संस्थापक, माँ एन ली, न्यूयॉर्क में आये। 1806 - फ्रांसिस द्वितीय, अंतिम पवित्र रोमन सम्राट, का त्याग कर दिया, इस प्रकार एक सहस्राब्दी के बाद पवित्र रोमन साम्राज्य समाप्त हो गया। 1819 - वर्मोंट में कप्तान एल्डन पार्ट्रिज द्वारा संयुक्त राज्य में पहली निजी सैन्य विद्यालय के रूप में नॉर्विच यूनिवर्सिटी की स्थापना की गई। 1821 – ब्रुसेल्स में 'कौरियर ऑफ पेज बास' अखबार का प्रथम संस्करण प्रकाशित हुआ। 1825 – बोलीविया ने पेरू से स्वतंत्रता हासिल की। 1862 – मद्रास उच्च न्यायालय की स्थापना की गई। 1906 – प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी चितरंजन दास और अन्य कांग्रेसी नेताओं ने मिलकर ‘वंदेमातरम्’ समाचार पत्र का प्रकाशन प्रारंभ किया। 1914 – ऑस्ट्रिया ने रूस के खिलाफ युद्ध की घोषणा की। 1937 - राष्ट्रीय कैंसर संस्थान की स्थापना संयुक्त राज्य अमेरिका में हुई। 1945- अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा पर पहला परमाणु बम गिराया, इस बम का नाम लिटल ब्वॉय था। 1955 - फ़्रांस के दक्षिणी और अंटार्कटिक क्षेत्र को एक विदेशी क्षेत्र के रूप में बनाया गया। 1960 – क्यूबा ने देश के सभी संपत्तियों का राष्ट्रीयकरण किया। 1961 – रूस ने अपने दूसरे यात्री को अंतरिक्ष में उतारा। 1962 – जमैका में यूनाइटेड किंगडम का साम्राज्य समाप्त हुआ और उसे स्वतंत्रता मिली। 1964 – अमेरिका के नेवादा इलाके में विश्व के सबसे प्राचीन वृक्ष प्रोमीथियस (चीड़ का पेड़) को रिसर्च के लिए काटा गया। 1965 – भारतीय सेना पाकिस्तान की सीमा में दाखिल हुई। 1976 – जुल्फिकार अली भुट्टो ने कराची की पोर्ट कासिम की आधारशिला रखी। 1986- भारत के प्रथम टेस्ट ट्यूब बेबी का जन्म। 1996 – नासा ने मंगल पर जीवन होने की संभावना जताई। 2001 - भारत व आस्ट्रेलिया में आर्थिक समझौता। 2002 - भारत और पाकिस्तान में तनाव के कारण आस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान से अपने नागरिकों को वापस बुलाया। 2004 - वर्ष 2000 में फिजी के प्रधानमंत्री महेन्द्र चौधरी के ख़िलाफ़ तख्तापलट के मामले में उपराष्ट्रपति जोपे सेनीलोली को 4 वर्ष की जेल। 2005 - दोनों देश सीमा पर साझा गस्त तेज करने पर सहमत। 2007 - मध्य त्रिनिदाद में एक पुराने हिन्दू मन्दिर को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। 2007 - हंगरी के वैज्ञानिकों ने लगभग 80 लाख साल पुराने देवदार के वृक्ष का जीवाश्म प्राप्त करने का दावा किया। 2008 - सरकारी कंपनी भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) को आन्ध्र प्रदेश के कृष्णा पट्टनम में 880 मेगावाट का सुपर क्रिटिकल बॉयलर लगाने का आर्डर मिला जो इस श्रेणी का पहला आर्डर है। 2008 - बंगाल सरकार ने टाटा समूह को सिंगापुर से संयन्त्र नहीं हटाने पर राजी किया। 2008 - सर्वोच्च न्यायालय ने सिमी पर प्रतिबंध हटाने के विरुद्ध फैसले पर रोक लगाई। 2010 – जम्मू और कश्मीर में अचानक आई बाढ़ से 255 के करीब लोग मारे गए। 2011- थाईलैंड में प्यूइआ थाई दल की यिंगलुक शिनवात्रा शु्रिवार देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। 2011- स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने अमेरिका की क्रेडिट रेटिंग को 70 साल के इतिहास में पहली बार AAA+ से घटाकर AA+ कर दिया। 2011- फगानिस्तान के पूर्वी हिस्से में उत्तर अटलांटिक संधि संगठन के हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने से 31 अमेरिकी और सात अफगानी सैनिकों की मौत हो गई| 2012 – नासा का क्यूरिओसिटी रोवर मंगल ग्रह पर पहुंचा। 2019 - हरियाणा ने महाराष्ट्र के मकोका (महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम) की तर्ज पर हरकोका (हरियाणा संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम) कानून बनाया। 2019 - इजरायल की तेल अवीव यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने त्वचा कैंसर के सर्वाधिक गंभीर प्रकार मेलानोमा का एक प्रभावी नैनो टीका ईजाद किया। 2019 - भारतीय संसद ने ऐतिहासिक उपभोक्ता संरक्षण विधेयक, 2019 को अनुमति प्रदान की। 2020 - राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गिरीश चंद्र मुर्मु (Girish Murmu) का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। मनोज सिन्हा (Manoj Sinha) अब केंद्रशासित जम्मू और कश्मीर के नए उपराज्यपाल बनेंगे। 2020 - चीन में फैल रहा नया वायरस, 60 लोग बीमार, 7 लोगों की मौत हो चुकी। 2021 - प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि ‘खेल रत्न पुरस्कार’ को अब से ‘मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार’ कहा जाएगा। 2022 - श्री जगदीप धनखड़ ने पिछले छह उपराष्ट्रपति चुनाव में सबसे बड़ी जीत दर्ज की। 2022 - प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आजादी का अमृत महोत्सव पर राष्ट्रीय समिति की तीसरी बैठक को संबोधित किया। 2022 - वायुसेना प्रमुख ने बेंगलौर में स्वदेशी विमान उड़ाया। 2023 - "बार्बी" फिल्म ने वैश्विक बॉक्स ऑफिस पर 1 बिलियन डॉलर का आंकड़ा पार किया , इसकी निर्देशक ग्रेटा गर्विग ऐसा करने वाली पहली एकल महिला फिल्म निर्माता बनी। 2023 - पाकिस्तान के सिंध प्रांत के नवाबशाह में ट्रेन पटरी से उतरने से लगभग 30 लोगों की मौत व 60 से अधिक घायल हुए। 2023 - प्रधानमंत्री ने देश भर में 508 रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास की आधारशिला रखी। 2023 - मोरक्को में मिनी बस खाई में गिरी जिसमें 24 लोगों की मौत हुई। 2024 - ब्रिटेन में आप्रवासन दंगों के चलते 370 से अधिक लोग गिरफ्तार किए गए। 2024 - नोबेल विजेता मोहम्मद यूनुस बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया बने। 2025 - पीएम मोदी ने गृह-विदेश समेत 7 मंत्रालयों के ऑफिस , 24 कॉन्फ्रेंस रूम के साथ 600 कारों की पार्किंग सुविधा वाले कर्तव्य भवन का उद्घाटन किया। 2025 - घाना में हेलिकॉप्टर क्रैश होने से रक्षा-पर्यावरण मंत्री समेत सभी 8 लोगों की मौत हुई। 6 अगस्त को जन्मे व्यक्ति 1180 – जापान के सम्राट गो टोबा का जन्म हुआ। 1881 – स्कॉटलैंड के आविष्कारक और चिकित्सक एलेग्ज़न्डर फ़्लेमिंग का जन्म हुआ। 1915 - गुरदयाल सिंह ढिल्लों - भारत के पाँचवें लोकसभा अध्यक्ष। 1921 - के. एम. चांडी - स्वतंत्रता सेनानी तथा गुजरात और मध्य प्रदेश के भूतपूर्व राज्यपाल। 1933 - ए. जी. कृपाल सिंह, भारतीय पूर्व क्रिकेटर। 1944 - अविनाश कमलाकर दीक्षित - एक भारतीय-अमेरिकी अर्थशास्त्री। 1959 - राजेन्द्र सिंह - भारत के प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता हैं। 1965 - नितीन चंद्रकांत देसाई ,भारतीय कला निर्देशक। 1970 - एम. नाइट श्यामलन, भारतीय / अमेरिकी फ़िल्म निर्देशक। 6 अगस्त को हुए निधन 1925 - सर सुरेन्द्रनाथ बेनर्जी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस नेता। 1978- एडवर्ड ड्यूरल स्टोन, अमेरिकी वास्तुकार जिन्होंने रेडियो सिटी म्यूज़िक हॉल और केनेडी सेंटर डिजाइन किया। 1981 - भूपेश गुप्ता - भारतीय नेता। 1982 - एस. के. पोट्टेक्काट्ट, प्रसिद्ध मलयालम साहित्यकार । 1982 - गोदे गंगाराजू मुरहारी भारतीय राजनीतिज्ञ जो तीन सत्रों तक राज्य सभा के सदस्य रहे। 1997 - वीरेन्द्र कुमार भट्टाचार्य असमिया साहित्यकार थे। 2003 - रोबिन बनर्जी - प्रसिद्ध वन्यजीव विशेषज्ञ, पर्यावरणविद्, चित्रकार, फोटोग्राफर और दस्तावेजी फिल्म निर्माता थे। 2006 - सूरज भान - भारतीय राजनीतिज्ञ एवं दलित नेता। 2018 - राजिन्दर कुमार धवन भारतीय नेता , राज्य सभा सांसद , श्रीमती इंदिरा गांधी के निजी सचिव व उनकी हत्या के प्रत्यक्षदर्शी। 2019 - सुषमा स्वराज एक भारतीय महिला राजनीतिज्ञा और भारत की पूर्व विदेश मंत्री थीं। 2019 - द्रमुक के पूर्व मंत्री एस जेनिफर चंद्रन (62) का निधन। 2019 - पूर्व विधायक 'थाउजेंड लाइट्स' सैम सैम हुसैन का बीमारी के बाद निधन। 2019 - पूर्व पद्म श्री पुरस्कार विजेता राजलक्ष्मी पार्थसारथी का निधन। 2021 - कार्टूनिस्ट, मूर्तिकार और लोक गायक पीएस बनारजी (41)का तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज अस्पताल में निधन हुआ। 2022 - अमेरिकी बास्केटबॉल प्रशिक्षक जीन विस्चर (81) का निधन हुआ। 2023 - तेलंगाना के प्रसिद्ध लोक गायक, कवि, नक्सलवाद के पूर्व समर्थक गुम्मदी विट्ठल राव 'गदर' का 77 साल की उम्र निधन हुआ। 2023 - यूक्रेनी पत्रकार और संस्कृतिविद् येवगेनी गोलुबोव्स्की (86) का निधन हुआ। 2023 - अमेरिकी संगीतकार डेविड मुस (73) का निधन हुआ। 2023 - अमेरिकी गायक डेविड लैफ्लेम (82) का निधन हुआ। 2024 - "ब्लैक पैंथर" के लिए प्रसिद्ध दक्षिण अफ़्रीकी फ़िल्म निर्माता और अभिनेत्री कोनी चिउमे का 72 वर्ष की आयु में निधन हुआ। 2025 - भारतीय सिनेमा के जाने-माने सिनेमैटोग्राफर और कैमरामैन अशोक बहल का निधन हुआ। 2025 - भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्य कार्यकारिणी सदस्य बोलोजू अयोध्या चारी का निधन हुआ। 6 अगस्त के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव श्री किझाक्कयिल मथाई चांडी जयन्ती। ट्राईफेड स्थापना दिवस (39वां , भारत)। मद्रास उच्च न्यायालय स्थापना दिवस (1862)। हिरोशिमा दिवस (विश्व शान्ति दिवस)। परमाणु विरोधी दिवस। कृपया ध्यान दें यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इंद्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।